किस जगह जाएँ-लाईट हाउस १९५८
के संगीतकार हैं एन दत्ता जिन्होंने आशा से कई उल्लेखनीय
गीत गवाए हैं. गीत के लेखक हैं साहिर लुधियानवी.
एन दत्ता जीवन के उतार चढावों में ही गोते खाते रहे. रोज़ी
रोटी के चक्कर में एक गुणी संगीतकार कहीं खोता चला गया.
राज खोसला ने उन्हें सबसे पहले ब्रेक दिया था मिलाप में.
उसके बाद उन्हें बी आर चोपड़ा की फिल्म धूल का फूल का
संगीत तैयार करने का मौका मिला. बड़े बैनर आगे चल के
उनसे दूर होते गए. जी पी सिप्पी और बी आर चोपड़ा के
अलावा उनके संगीत में रूचि दिखाने वालों में कोई बड़ा नाम
नहीं बचा था सन १९७० तक.
सन १९६१ की फिल्म धर्मपुत्र जिसका निर्देशन यश चोपड़ा ने
किया था, एन दत्ता की आखरी उल्लखनीय फिल्म कही जा
सकती है जिसके गीत आज भी सुनने को मिल जाया करते
हैं. बी आर खेमे में रवि उर्फ रविशंकर शर्मा की एंट्री हो गयी
सन १९६२ की फिल्म गर्ल्स हॉस्टल से.
गीत के बोल:
हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ
सारे जग में अपना कोई नहीं
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुःख का सपना कोई नहीं
हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ
दिल के अरमान पूरे हो ना सके
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
दिल के अरमान पूरे हो ना सके
हँसाना कैसा खुल कर रो ना सके
हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ
....................................................................
Kis jagah jaayen-Light House 1958
Artists: Nutan
