Showing posts with label Light House. Show all posts
Showing posts with label Light House. Show all posts

May 7, 2017

आ आ आ छोरी-लाईट हाउस १९५८

लाईट हाउस फिल्म के पिछले गीत के वक्त हमने जिक्र किया था
एन दत्ता के बारे में. सभी प्रकार के गीत रच सकने में सक्षम इस
संगीतकार ने कई हलके फुल्के गीत भी बनाये हैं. गीत किस प्रकार
के हों इस बात का निश्चय गीतकार और संगीतकार के बजाये
फिल्म बनाने वाले किया करते हैं. कहानी की मांग और निर्माता
निर्देशक की मांग के अनुसार गीतों की रचना होती है.

एक हल्का फुल्का गीत सुनते हैं इसी फिल्म से गीता दत्त और रफ़ी
का गाया उया. बोल एक बार फिर से साहिर लुधियानवी के हैं और
गाने के मूड के हिसाब से इसे जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया है.





गीत के बोल:


आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
हे आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

रुक छोरी रुक सर पे ना झुक
अच्छे नहीं ये बहाने
रुक छोरी रुक सर पे ना झुक
अच्छे नहीं ये बहाने
अरे तक ज़रा तक जल्दी से बक
कहता है क्या ओ दीवाने

आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

होश करो तुम होश हुए गम
देखा जो मुखडा तुम्हारा
होश करो तुम होश हुए गम
देखा जो मुखडा तुम्हारा
आशिकों की सुन छोड़ मेरी धुन
ऐसे ही कर ले गुज़ारा

आ आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा

मैंने कहा आ मैंने कहा जा
मिल कर बना आ जा
मैंने कहा आ मैंने कहा जा
मिल कर बना आ जा
मैंने कहा आ मैंने कहा ना
मैंने सुना आ आ

आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
आ आ आ छोरी आ आ आ
छोरी आ आ आ छोरी आ
जा जा जा छोरा जा जा जा
छोरा जा जा जा छोरा जा
…………………………………………………………..
Aa aa aa chhori-Light House 1958

Read more...

Mar 3, 2017

किस जगह जाएँ-लाईट हाउस १९५८

आज आशा भोंसले का एक शानदार गीत सुनते हैं. इस गीत
के संगीतकार हैं एन दत्ता जिन्होंने आशा से कई उल्लेखनीय
गीत गवाए हैं. गीत के लेखक हैं साहिर लुधियानवी.

एन दत्ता जीवन के उतार चढावों में ही गोते खाते रहे. रोज़ी
रोटी के चक्कर में एक गुणी संगीतकार कहीं खोता चला गया.
राज खोसला ने उन्हें सबसे पहले ब्रेक दिया था मिलाप में.
उसके बाद उन्हें बी आर चोपड़ा की फिल्म धूल का फूल का
संगीत तैयार करने का मौका मिला. बड़े बैनर आगे चल के
उनसे दूर होते गए. जी पी सिप्पी और बी आर चोपड़ा के
अलावा उनके संगीत में रूचि दिखाने वालों में कोई बड़ा नाम
नहीं बचा था सन १९७० तक.

सन १९६१ की फिल्म धर्मपुत्र जिसका निर्देशन यश चोपड़ा ने
किया था, एन दत्ता की आखरी उल्लखनीय फिल्म कही जा
सकती है जिसके गीत आज भी सुनने को मिल जाया करते
हैं. बी आर खेमे में रवि उर्फ रविशंकर शर्मा की एंट्री हो गयी
सन १९६२ की फिल्म गर्ल्स हॉस्टल से.



गीत के बोल:

हो किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ

सारे जग में अपना कोई नहीं
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
सारे जग में अपना कोई नहीं
सुख क्या दुःख का सपना कोई नहीं
हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ

दिल के अरमान पूरे हो ना सके
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
दिल के अरमान पूरे हो ना सके
हँसाना कैसा खुल कर रो ना सके

हो ओ ओ
किस जगह जाएँ
किसको दिखलायें
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
ज़ख्म-ऐ-दिल अपना
हो ओ ओ
....................................................................
Kis jagah jaayen-Light House 1958

Artists: Nutan

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP