परदेसी ने लट उलझाई रे-तीसरी गली १९५८
अधिकतर ५० के बाद ही. गीत ज्यादा जाना पहचाना नहीं है
मगर परदेसी गीत है एक मधुर सा जिसे सुन के लगता है
कई गीतों को घोट के इसे बनाया गया हो. गीत शुरू होते ही
आप पहचान नहीं पाएंगे चित्रगुप्त का संगीत जब तक वाइलिन
और बांसुरी के टुकड़े ना सुनाई देने लगें.
बोल आपको पके हुए लगेंगे क्यूंकि मजरूह ने गीत लिखा है
और उनके गीत फिल्म शहंशाह में सहगल के गाये गीतों से
ही हमें परिपक्व सुनाई देते रहे हैं. फिल्म शहंशाह में नौशाद
का संगीत है. फिल्म का नाम तीसरी गली है जिसका नाम
सुनने के पहले तक हमें केवल पतली गली मालूम थी.
गीत के बोल:
परदेसी ने लट उलझाई रे
परदेसी ने लट उलझाई रे
कहाँ जा के नज़र टकराई रे
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Pardesi ne lat uljhayi re-Teesri gali 1958
