April 20, 2017

फूलों के साथ दिल भी-रोटी १९७४

बाबा, बेबी और बाबू में से सबसे ज्यादा शब्द जो प्रयोग होते
हैं फिल्मों में वे हैं-बाबा और बेबी. बाबू शब्द का चलन या तो
सरकारी दफ्तरों में है या कुछ लोक गीतों में. बाबू नाम से एक
फिल्म भी है राजेश खन्ना की. उसके अलावा आपने सन २०००
के आसपास एक गाना ज़रूर सुना होगा-बाबूजी ज़रा धीरे चलो.

सुनते हैं अर्ध लोकगीत अर्ध फ़िल्मी सा फिल्म रोटी का गीत जो
लता मंगेशकर ने गाया है. आनंद बक्षी के बोल हैं और संगीत
है लक्ष्मी प्यारे का. फ़िल्मी बाबू हैं राजेश खन्ना और गांव की
बाला हैं मुमताज़.




गीत के बोल:

फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू
तेरे मेरे नैना मिल जाते बाबू
हाय रे हाय किस वक्त तुझको गुस्सा आ गया
हा हा फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू
तेरे मेरे नैना मिल जाते बाबू
हाय रे हाय किस वक्त तुझको गुस्सा आ गया
फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू

हम तो राजी थे तीर खाने पे
हम तो राजी थे तीर खाने पे
आन बैठे थे खुद निशाने पे
फेर ली क्यों तूने आँखें बोल बोल बोल बोल
ज़ख्मे जिगर शायद सिल जाते बाबू
ज़ख्मे जिगर शायद सिल जाते बाबू
हाय रे हाय किस वक्त तुझको गुस्सा आ गया
हा हा हा फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू

राम जाने तुम कैसे दिलबर हो
राम जाने तुम कैसे दिलबर हो
कौन परबत के कोई पत्थर हो
आदमी होते तो जाते डोल डोल डोल डोल
अपनी जगह से तुम हिल जाते बाबू
अपनी जगह से तुम हिल जाते साबू
हाय रे हाय किस वक्त तुझको गुस्सा आ गया
हा हा हा फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू

क्या मजा आया रूठ कर राजा
क्या मजा आया रूठ कर राजा
प्यार आया था टूट कर राजा
रुक गये हम दो कदम पे दूर दूर दूर दूर
धरती अम्बर दोनों मिल जाते बाबू
धरती अम्बर दोनों मिल जाते बाबू
हाय रे हाय किस वक्त तुझको गुस्सा आ गया
हा हा हा फूलों के साथ दिल भी खिल जाते बाबू
तेरे मेरे नैना मिल जाते बाबू
हाय रे हाय गुस्सा आ गया
हा हा हा
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Phoolon ke saath-Roti 1974

Artist: Mumtaz

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