May 13, 2017

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ-निकाह १९८२

८० के दशक में हमें नए कलाकार देखने को मिले
रुपहले परदे पर, इनमें प्रमुख हैं दीपक पाराशर और
राज बब्बर.  राज बब्बर की फ़िल्मी पारी काफी लंबी
चली लेकिन दीपक पाराशर कुछ फिल्मों के बाद
दृश्य से ओझल से हो गए.

सन १९८२ की फिल्म निकाह में दोनों मौजूद हैं और
साथ में उस समय की एक नयी तारिका सलमा आगा
भी हैं.

इस फिल्म से एक गीत सुनते हैं हसन कमाल का
लिखा हुआ जिसकी तर्ज़ बनाई है रवि ने.



गीत के बोल:

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ हवा भी है रवाँ रवाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

पुकारते हैं दूर से वो क़ाफ़िले बहार के
बिखर गए हैं रंग से किसी के इन्तज़ार में
लहर लहर के होंठ पर वफ़ा की हैं कहानियाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

बुझी मगर बुझी नहीं न जाने कैसी प्यास है
क़रार दिल से आज भी न दूर है न पास है
ये खेल धूप छांव का ये पुर्बतें ये दूरियाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

हर एक पल को ढूँढता हर एक पल चला गया
हर एक पल फ़िराक़ का हर एक पल विसाल का
हर एक पल गुज़र गया बना के दिल पे इक निशाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ हवा भी है रवाँ रवाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ
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Fiza bhi hai jawan jawan-Nikaah 1982

Artist: Salma Agha

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