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Jan 15, 2019

चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा-पाताल भैरवी १९८५

आइटम सोंग की ईज़ाद तो काफी समय पहले हो गई
थी मगर उसे नाम से पुकारा गया ९० के दशक में.
उसके पहले तक कोई फ़िल्मी पत्रकार इस शब्द का
प्रयोग करता रहा तो मालूम नहीं. मैंने किसी फ़िल्मी
पत्रिका या रेडियो इंटरव्यू में ये शब्द ९० के पहले
नहीं सुना.

८० के दशक के आईटम सॉंग के बापों में से एक
आज हम सुनेंगे. इसमें दो शख्सियतों की सेवाएं
ली गयी हैं. डिम्पल कपाडिया और सलमा आगा.
उस समय के दो ही ऐसे चर्चित गाने हैं जिनमें
प्रमुख अभिनेत्री ने अतिथि की तरह आईटम सॉंग
किये हों. दूसरा है फिल्म जांबाज़ का प्यार दो
प्यार लो.

इसे रेडियो वाले भी बजाते थे मगर कम. इसकी
फरमाइशें तो काफ़ी पहुँचती थीं मगर आकाशवाणी
और दूरदर्शन एक दायरे में बंधे होते हैं इसलिए
कार्यक्रम की गुणवत्ता और सर्वजन के देखने और
सुनने लायक सामान को ही तवज्जो दी जाती है.

गीत इन्दीवर का है और संगीत बप्पी लहरी का.




गीत के बोल:

ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा
मुझको बना ले प्रियतम्मा
ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा
ओ मुझको बना ले प्रियतम्मा
तू जो मुझे नहीं मिला
दिल जो मेरा नहीं खिला
निकल जायेगा मेरा दम्मा
हाय ओ प्रियतम्मा

ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा
ओ मुझको बना ले प्रियतम्मा
तू जो मुझे नहीं मिला
दिल जो मेरा नहीं खिला
निकल जायेगा मेरा दम्मा
हाय ओ प्रियतम्मा
ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा

ऊ आ आह
हाय माँ हाय माँ हाय माँ
क्यों तू मुझसे भागे
हाय माँ हाय माँ हाय माँ
मेरी जवानी तुझसे मांगे
चुम्मा चुम्मा
हाय माँ हाय माँ हाय माँ
क्यों तू मुझसे भागे
हाय माँ हाय माँ हाय माँ
मेरी जवानी तुझसे मांगे
दिल बहलाऊंगी मैं
तेरे लिए गाउंगी मैं
नाचूंगी मैं छम छम्मा
हाय प्रियतम्मा

ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा
ओ मुझको बना ले प्रियतम्मा
तू जो मुझे नहीं मिला
दिल जो मेरा नहीं खिला
निकल जायेगा मेरा दम्मा
हाय प्रियतम्मा

आ ऊ आ
सजना सजना सजना
रूप का मैं हूँ समुदर
सजना सजना सजना
डूब जा मेरे अंदर
चुम्मा चुम्मा
सजना सजना सजना
रूप का मैं हूँ समुदर
सजना सजना सजना
डूब जा मेरे अंदर
दिल मेरा बाँच ले तू
साथ मेरे नाच ले तू
आज ज़रा बदकम्मा
हाय प्रियतम्मा

ऊ हो हो
चुम्मा चुम्मा चुम्मा चुम्मा
ओ मुझको बना ले प्रियतम्मा
तू जो मुझे नहीं मिला
दिल जो मेरा नहीं खिला
निकल जायेगा मेरा दम्मा
हाय प्रियतम्मा
हो ओ प्रियतम्मा
हो ओ प्रियतम्मा
………………………………………………………………
Chumma chumma chumma chumma-Pataal Bhairavi 1985

Artists: Jeetendra, Dimple Kapadiya

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Feb 22, 2018

चले आओ चले आओ-मीत मेरे मन के १९९१

संभावनाओं वाले संगीतकार बाबुल बोस के संगीत निर्देशन में
बना एक और गीत सुनते हैं सन १९९१ की अनजानी सी फिल्म
मीत मेरे मन के से.

मनहर उधास और सलमा आगा की आवाज़ है. गीत को लिखा है
रवींद्र रावल ने. सलमा आगा और फिरोज़ खान पर इसे फिल्माया
गया है.



गीत के बोल:

चले आओ चले आओ
चले आओ चले आओ
कोई वादा नहीं फिर भी निगाहें राह तकती हैं
तुम्हारा वो हसीं चेहरा ये कैसे भूल सकती हैं
चले आओ चले आओ
चले आओ चले आओ

तुम्हारी एक झलक देखी मगर बेताब हैं ऐसे
बड़ी प्यारी हमारी चीज कोई खो गयी जैसे
उसी दीदार की खातिर तम्मानाएं मचलती हैं
चले आओ चले आओ

कोई वादा नहीं फिर भी निगाहें राह तकती हैं
तुम्हारा वो हसीं चेहरा ये कैसे भूल सकती हैं
चले आओ चले आओ
चले आओ चले आओ

जिसे माँगा दुआओं में जिसे चाहा ख्यालों में
मिला वो ख्वाब तक बन के हमें दिन के उजालों में
नज़र की खुशनसीबी पर ये बाहें रश्क करती है
करीब आओ करीब आओ
करीब आओ करीब आओ
..........................................................................
Chale aao chale aao-Meet mere man ke 1991

Artists: Feroz Khan, Salma Agha

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May 13, 2017

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ-निकाह १९८२

८० के दशक में हमें नए कलाकार देखने को मिले
रुपहले परदे पर, इनमें प्रमुख हैं दीपक पाराशर और
राज बब्बर.  राज बब्बर की फ़िल्मी पारी काफी लंबी
चली लेकिन दीपक पाराशर कुछ फिल्मों के बाद
दृश्य से ओझल से हो गए.

सन १९८२ की फिल्म निकाह में दोनों मौजूद हैं और
साथ में उस समय की एक नयी तारिका सलमा आगा
भी हैं.

इस फिल्म से एक गीत सुनते हैं हसन कमाल का
लिखा हुआ जिसकी तर्ज़ बनाई है रवि ने.



गीत के बोल:

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ हवा भी है रवाँ रवाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

पुकारते हैं दूर से वो क़ाफ़िले बहार के
बिखर गए हैं रंग से किसी के इन्तज़ार में
लहर लहर के होंठ पर वफ़ा की हैं कहानियाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

बुझी मगर बुझी नहीं न जाने कैसी प्यास है
क़रार दिल से आज भी न दूर है न पास है
ये खेल धूप छांव का ये पुर्बतें ये दूरियाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ

हर एक पल को ढूँढता हर एक पल चला गया
हर एक पल फ़िराक़ का हर एक पल विसाल का
हर एक पल गुज़र गया बना के दिल पे इक निशाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ

फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ हवा भी है रवाँ रवाँ
सुना रहा है ये समा सुनी सुनी सी दास्ताँ
फ़िज़ा भी है जवाँ जवाँ
...........................................
Fiza bhi hai jawan jawan-Nikaah 1982

Artist: Salma Agha

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Oct 27, 2015

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

बीते हुए लम्हों की कसक-निकाह १९८२

एक कवि ने यह कहा है-बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो
होगी. उसके आगे वाली पंक्ति एकदम कंट्रास्ट है-ख्वाबों  में
ही हो चाहे मुलाकात तो होगी. कॉम्प्लेक्स किस्म के इमोशंस
के घोल में लिपटी हैं पंक्तियाँ. व्याख्या करने बैठो तो पन्ने
भर जाएँ. ऐसे ही गूढ़ अर्थ वाले गीत कभी कभी हमें सोचने
पर मजबूर कर देते हैं कि फिल्म संगीत वाकई एक बड़ा
खज़ाना है जिसमें तरह तरह के रत्न बिखरे पड़े हैं.

जीवन में बीते हुए लम्हों और दिनों की यादें जेहन में रह ही
जाती हैं. कितना भुलाने की कोशिशें की जाएँ, वे पीछा नहीं
छोड़तीं.

फिल्म निकाह अपने समय की बड़ी हिट फिल्म है. इसमें जिन
कलाकारों ने अभिनय किया-राज बब्बर, सलमा आगा, दीपक
पराशर वे अब फिल्मों में सक्रिय नहीं के बराबर हैं. राज बब्बर
का फ़िल्मी कैरियर तो लंबा चला मगर दीपक पराशर और
सलमा आगा समय के साथ नेपथ्य में चले गए. सलमा आगा
तो अभिनय के साथ साथ गायन में भी सक्रिय थीं. कुछ एक
गीत गाने के बाद उन्हें भी अवसर मिलना बंद हो गए.

फिल्म जगत में कुछ इस तरह के कलाकार होते हैं-एक फिल्म
की चमक वाले, ४-५ फिल्मों तक चलने वाले, शुरूआत से ही न
चलने वाले, ४-५ साल तक दिखने वाले, एक दशक तक चलने
वाले, अपनी पूरी उम्र तक सक्रिय रहने वाले. इनमें से कुछ ही
कलाकार ऐसे हैं जो अपनी पूरी जिंदगी भर सक्रिय रहे या हैं.
महानायक अमिताभ बच्चन उन सौभाग्यशालियों में से हैं. उन्हीं
के पदचिन्हों पर शाहरुख भी जाते दिखाई दे रहे हैं. ये तो समय
ही बतलायेगा कि किंग खान ६० की उम्र तक सक्रिय रहते हैं या
नहीं.

सदाबहार कलाकार वे होते हैं जो समय समय पर अपनी उपस्थिति
दर्ज करते आपको मिल जायेंगे. उनकी सेहत पर बाकी के माहौल
का असर नहीं दिखलाई देता है. अभिनेता संजीव कुमार सदाबाहर
कलाकार थे. स्मिता पाटिल एक और सदाबहार अदाकारा थीं. ये
वे कलाकार हैं जिनकी फिल्मों का जनता बेसब्री से इंतज़ार किया
करती थी.

आज आपको निकाह से यही गीत सुनवा रहे हैं जिसे गाया है एक
सदाबाहर गायक ने-महेंद्र कपूर. इसे लिखा है हसन कमाल ने और
इसकी धुन बनाई है संगीतकार रवि ने जिन्हें बहुत ही कम लोग
रविशंकर शर्मा के नाम से जानते हैं.



गीत के बोल:

अभी अलविदा मत कहो दोस्तों
न जाने फिर कहाँ मुलाक़ात हो
क्यों कि

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये प्यार ये डूबी हुई रँगीन फ़िज़ाएं
ये चहरे ये नज़ारे ये जवाँ रुत ये हवाएं
हम जाएं कहीं इनकी महक साथ तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

फूलों की तरह दिल में बसाए हुए रखना
यादों के चिराग़ों को जलाए हुए रखना
लम्बा है सफ़र इस में कहीं रात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी

ये साथ गुज़ारे हुए लम्हात की दौलत
जज़्बात की दौलत ये ख़यालात की दौलत
कुछ पास न हो पास ये सौगात तो होगी

बीते हुए लम्हों की कसक साथ तो होगी
ख़्वाबों में ही हो चाहे मुलाक़ात तो होगी
......................................................................
Beete hue lamhon ki kasak-Nikaah 1982

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May 18, 2011

तू मेरा क्या लागे-ऊंचे लोग १९८५

फिल्मकारों की पसंद का भी जवाब नहीं। कई ऐसी ऐसी जोड़ियाँ देखने
को मिलेंगी आपको फिल्मों में कि, दर्शक तक सोचने में विवश हो जाता
है; कम से कम मुझसे ही पूछ लिया होता फिल्म की कास्टिंग कैसे की
जाये। इस मामले में हम थोड़ा डिस्काउंट कर देते हैं क्यूंकि फिल्म का
निर्देशन किया है ब्रज सढाना ने, वही 'विक्टोरिया नंबर २०३' वाले। ब्रज
सढाना ने फिल्म के संगीत पक्ष पर हमेशा ध्यान दिया और उनकी
फ़िल्में चली हो या ना चली हों, गीत ज़रूर दर्शकों को और श्रोताओं को
याद हैं। आपको विश्वजीत और शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म-
'ये रात फिर ना आएगी' ज़रूर ही याद होगी जिसके सारे गीत लोकप्रिय हैं।

प्रस्तुत गीत में राजेश खन्ना कुछ कुछ वन अधिकारी/कर्मी के जैसे कपडे
पहने हुए हैं और ऐसा लगता है मानो पास के पेड़ों में से सबसे हरा पेड़
निकल कर उनके साथ नाचने लग पड़ा हो। गाना जब तक किशोर कुमार
की आवाज़ निकालता है तब तक उसे ध्यान से सुना जा सकता है। जैसे ही
महिला स्वर उभरता है, आप अपना ध्यान दूसरी ओर लगा सकते हैं।
गीत लिखा है अनजान ने और धुन बनाई है आर डी बर्मन ने।



गीत के बोल:

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा

तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये
मर जाते राहों में
हम तेरी बाहों में
आ के जी गये
जुल्फों के साये में
हम दिल के सारे गम
हंस के पी गये

तूने ही फिर जीना सिखला दिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया

दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ
दिन बीते बातों में
बातों की यादों में
झूमे दिल जहाँ
रातों की नींदों में
नीदों के ख्वाबों में
तू ही तू यहाँ


बिन पूछे बिन मांगे दिल ले लिया
तारा झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया


तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
तू मेरा क्या लागे ओ साथिया
लागे ना लागे रे तेरे बिन कहीं जिया
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
झिन झिन, झिन झिन झिन झिन तारा
..........................................
Too mera kya laage-Oonche log 1985

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