May 23, 2017

हमसफ़र मेरे हमसफ़र-पूर्णिमा १९६५

हमसफ़र थीम वाला एक गीत सुनते हैं फिल्म पूर्णिमा से. ये
एक युगल गीत है मुकेश और लता का गाया हुआ. गुलज़ार
का लिखा ये गीत काफी लोकप्रिय है. कल्याणजी आनंदजी और
अनजान की जुगलबंदी वाले गीत कम हैं. गीत फिल्माया गया
है धर्मेन्द्र और मीना कुमारी पर.

सर्फिंग का ज़माना है और हमसफ़र अब हमसर्फर भी बन चुका
है. पहले सर्फिंग समुद्र की लहरों पर होती थी अब कम्प्यूटर के
ज़रिये अंतरजाल पर.



गीत के बोल:

हमसफ़र मेरे हमसफ़र  पंख तुम परवाज़ हम
ज़िन्दगी का साज़ हो तुम  साज़ की आवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र  पंख तुम परवाज़ हम
ज़िन्दगी का गीत हो तुम  गीत का अंदाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र

आँख ने शरमा के कह दी दिल के शरमाने की बात
एक दीवाने ने सुन ली दूजे दीवाने की बात
प्यार की तुम इन्तेहा हो प्यार का आग़ाज़ हम
प्यार का आग़ाज़ हम

हमसफ़र मेरे हमसफ़र  पंख तुम परवाज़ हम
ज़िन्दगी का गीत हो तुम  गीत का अंदाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र

ज़िक्र हो जब आसमाँ का या ज़मीं की बात हो
ख़त्म होती है तुम्हीं पर अब कहीं की बात हो
हो हसीं तुम  महजबीं तुम नाज़नीं तुम  नाज़ हम
नाज़नीं तुम  नाज़ हम

हमसफ़र मेरे हमसफ़र  पंख तुम परवाज़ हम
ज़िन्दगी का साज़ हो तुम  साज़ की आवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र  पंख तुम परवाज़ हम
ज़िन्दगी का साज़ हो तुम  साज़ की आवाज़ हम
हमसफ़र मेरे हमसफ़र
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Hamsafar mere hamsafar-Poornima 1965

Artists: Dharmendra, Meena Kumari

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