ऐ दिल तुझी को नींद ना आई-शहनाज़ १९४८
दशक में. उन्होंने गायकी के अलावा फिल्मों में संगीत भी दिया.
अमीरबाई के संगीत वाला एक गीत सुनते हैं जिसे रफ़ी ने गाया
है. आपको हमने अंजुम पीलीभीती का लिखा एक गीत सुनवाया
था. आज सुनते हैं अख्तर पीलीभीती का लिखा गीत. नाम से
आप समझ ही गए होंगे ये दोनों पीलीभीत के रहने वाले थे.
गीत का पैटर्न उसी समय के हिसाब का है. एक पंक्ति को दो
बार गाया गया है मगर गीत का मुखडा केवल एक बार आता है
गीत में.
गीत के बोल:
ऐ दिल तुझी को नींद ना आई तमाम रात
ऐ दिल तुझी को नींद ना आई तमाम रात
सोती रही खुदा की खुदाई तमाम रात
सोती रही खुदा की खुदाई तमाम रात
अपनी तो एक भी ना चली दिल के सामने
अपनी तो एक भी ना चली दिल के सामने
रह रह के तेरी याद भुलाई तमाम रात
रह रह के तेरी याद भुलाई तमाम रात
किस माह-ऐ-आसमां के तसव्वुर में रात भर
किस माह-ऐ-आसमां के तसव्वुर में रात भर
ज़ालिम तुम्हें भी नींद ना आई तमाम रात
ज़ालिम तुम्हें भी नींद ना आई तमाम रात
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Ae dil tujhi ko neend-Shahnaz 1948
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