एक दिन और गया-दूर का राही १९७१
फिर सुबह होती है. आना है तो जाना है. जीवन चक्र भी इसी
प्रकार चलता रहता है. काउंट डाउन चालू है. इस सुनिश्चित
मगर अनिश्चित से प्रतीत होते घटनाक्रम में बस एक उम्मीद
है जिसके सहारे मनुष्य जीवन गुजार लेता है.
जीवन दर्शन वाला एक गीत सुनते हैं फिल्म दूर का राही से
मन्ना डे का गाया हुआ. शैलेन्द्र इसके गीतकार हैं और संगीत
तैयार किया है किशोर कुमार ने.
गीत के बोल:
एक दिन और गया हाय रोके न रुका
छाया अँधियारा
आज भी नाव न आयी आया न खेवनहारा
एक दिन और गया हाय रोके न रुका
छाया अँधियारा
आज भी नाव न आयी आया न खेवनहारा
एक दिन और गया
काली नागिन-सी घिरी रैना कजरारी
सहमी-सहमी-सी है ये नगरी हमारी
काली नागिन-सी घिरी रैना कजरारी
सहमी-सहमी-सी है ये नगरी हमारी
दे के आवाज़ थका हो ओ ओ ओ
दे के आवाज़ थका मन दुखियारा
आज भी नाव न आई आया न खेवनहारा
एक दिन और गया
फिर वही रात कठिन छुप गय तारे
अभी से बुझने लगे दीप हमारे
फिर वही रात कठिन छुप गय तारे
अभी से बुझने लगे दीप हमारे
दूर बड़ी दूर सवेरा दूर बड़ी दूर उजाला
दूर बड़ी दूर सवेरा दूर बड़ी दूर उजाला
दूर है आशाओं का फूल किनारा
आज भी नाव न आई आया न खेवनहारा
एक दिन और गया
एक दिन और गया हाय रोके न रुका
छाया अँधियारा
आज भी नाव न आयी आया न खेवनहारा
एक दिन और गया हाय रोके न रुका
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Ek din aur gaya-Door ka rahi 1971
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