ना वो हमसे जुदा होंगे-दुलारी १९४९
जो अमीर बाप के घर जन्म लेती है और बचपन में खो
जाती है. हालांकि, अधिकांश फिल्मों के कथानकों की तरह
फिल्म के अंत तक उसका अपने बाप से मिलन हो जाता है.
इस पूरे फ़िल्मी सफर के दौरान तरह तरह की कसरतें और
१२ गाने प्रकट होते हैं.
गीत लिखा है शकील बदायूनीं से और इसे लता मंगेशकर ने
नौशाद की धुन पर गाया है.
गीत के बोल:
ना वो हमसे जुदा होंगे
ना वो हमसे जुदा होंगे
ना उल्फत दिल से
हाय दिल से निकलेगी
ना उल्फत दिल से निकलेगी
लगी है आस जो दिल में
बड़ी मुश्किल से निकलेगी
बड़ी मुश्किल से निकलेगी
उन्ही के थे उन्ही के हैं
उन्ही पर मर मिटेंगे हम
उन्ही पर मर मिटेंगे हम
बहुत पछतायेगा ज़ालिम ज़माना
हमको देकर गम
ज़माना हमको देकर गम
सितम जितने भी हैं सब खाक में
मिल जायेंगे उस दम
मोहब्बत आह बन कर
जब हमारे दिल से निकलेगी
हमारे दिल से निकलेगी
ना वो हमसे जुदा होंगे
ना उल्फत दिल से
हाय दिल से निकलेगी
ना उल्फत दिल से निकलेगी
जिगर है टुकड़े टुकड़े
गम ने ऐसा तीर मारा है
गम ने ऐसा तीर मारा है
अरे ओ दिल के मालिक
दिल को अब तेरा सहारा है
दिल को अब तेरा सहारा है
हमे बर्बादियों का गम नहीं
गर तू हमारा है
तेरा ही नाम लेगी जो सदा
इस दिल से निकलेगी
सदा इस दिल से निकलेगी
ना वो हमसे जुदा होंगे
ना वो हमसे जुदा होंगे
ना उल्फत दिल से
हाय दिल से निकलेगी
ना उल्फत दिल से निकलेगी
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Na wo hamse juda honge-Dulari 1949
Artist: Madhubala

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