ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है-ज़मीर १९७५
अनुमान लगते हैं कि कोई फिलोसोफिकल गीत होगा. ऐसा
होता भी है अक्सर वो गीत प्रेम की पींगों से हट कर मिलता
है.
फिल्म ज़मीर से एक इंस्पिरेशनल गीत सुनते हैं किशोर की
आवाज़ में. साहिर लुधियानवी के बोल हैं और सपन चक्रवर्ती
का संगीत.
गीत के बोल:
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
इसे खोना नहीं खो के रोना नहीं
इसे खोना नहीं खो के रोना नहीं
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
तेरे गिरने में भी तेरी हार नहीं
के तू आदमी है अवतार नहीं
तेरे गिरने में भी तेरी हार नहीं
के तू आदमी है अवतार नहीं
जो हो देश वो भेस बना प्यारे
चले जैसे भी काम चला प्यारे
प्यारे तू ग़म न कर
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
जहाँ सच ना चले वहाँ झूठ सही
जहाँ हक़ न मिले वहाँ लूट सही
जहाँ सच ना चले वहाँ झूठ सही
जहाँ हक़ न मिले वहाँ लूट सही
यहाँ चोर हैं सब कोई साध नहीं
सुख ढूँढ ले सुख अपराध नहीं
प्यारे तू ग़म न कर
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
ज़िन्दगी हँसने गाने के लिए है पल दो पल
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Zindagi hansne gaane ke liye hai-Zameer 1975
Artist: Amitabh Bachchan

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