Jul 17, 2019

आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें-लव ८६

सन १९८६ की एक फिल्म का गाना याद आ गया शहनाई
फिल्म के गीत से. क्या लाजवाब बोल हैं इसके भी. प्यार
की हद से आए निकल जाने की बात हो रही है गीत में.
मोहब्बत के सारे चैप्टर नहीं खुला करते किसी एक गीत
में. 

सुनते अं अपने ज़माने का सुपरहिट गीत जिसे लिखा है
एस एच बिहारी ने. मोहम्मद अज़ीज़ संग इसे गाया है
कविता कृष्णमूर्ति ने. लक्ष्मी प्यारे ने इसकी धुन तैयार
की है. ये इकोनोमी मोड वाला गीत है. दो जोड़ों के लिए
दो ही सिंगर. 





गीत के बोल:

प्यार की हद से आगे निकल आये हम
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें
प्यार के हद से आगे निकल आये हम
आ इबादत को कोई नया नाम दें
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें

ये निगाहें उठी वो फ़साने बने
आँख के बोल कब किसी ने सुने
दिल से दिल मिल गया अब ज़माने से क्या
आ इजाज़त को कोई नया नाम दें
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें


जब से तूने छुआ एक नशा सा छ गया हो
जब से तूने छुआ एक नशा सा छ गया हो
दर्द में जिंदगी का मज़ा आ गया
धडकनों को नहीं धडकनों से गिला आ
आ शिकायतों को कोई नया नाम दें
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें


तेरे दामन की खुशबू से महकी रहूँ
बिन पिए ही सदा लडखडाया करूं
कभी मैं तेरे दिल को सताया करूं
कभी मैं तेरे दिल को जलाया करूं
देख कर भी तुझे अनदेखा करूं
आ शरारत को कोई नया नाम दें
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें

प्यार की हद से आगे निकल आये हम
आ मोहब्बत को कोई नया नाम दें
आ इबादत को कोई नया नाम दें

…………………………………………………
Aa mohabbat ko koi naya naam-Love 86

Artists: Farha, Rohan Kapoor, Govinda, Neelam

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