ऐ दिल उड़ा के ले चल-सेहरा १९४८
है और इससे पहले भी इस नाम से एक फिल्म बनी थी. १९४८
में बनी थी जिसमें एस मोहिंदर का संगीत है. इसमें अरुण कुमार
और निर्मला देवी की प्रमुख भूमिकाएं हैं.
बरसों संगीत सुनने के बाद मैंने ऐसा महसूस किया कि जो गीत
संगीतकार अपने गाने के लिए चुनता है वो ९५ प्रतिशत मामलों
में उस फिल्म के साउँडट्रेक की सबसे बेहतर धुन होती है. बहुत
से संगीतकारों ने गाने गाये हैं मगर कुछ ऐसे भी हैं जिनकी
आवाजें सुनने का सौभाग्य हमें प्राप्त नहीं हुआ. ३० और ४० के
दशक में काफी सारे संगीतकारों ने गाने गाये हैं. ये ट्रेंड फिर से
बढ़ा है २००० के बाद.
प्रस्तुत गीत सुरजीत सेठी ने लिखा है जिन्होंने एस मोहिंदर के
लिए काफ़ी गीत लिखे हैं. मख्मूर का अर्थ है-मदमस्त और
परवाज़ का अर्थ है-उड़ान.
गीत के बोल:
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
हे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
छाया है किस तरह दुनिया पे आकाश से आ पूछें
आकाश से आ पूछें
आ सो के देखें पल भर तारों की छाँव में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
बदली में छिपे चाँद के मुखड़े को चूम लें
बदली में छिपे चाँद के मुखड़े को चूम लें
मुखड़े को चूम लें
आ देखें अब वो तैरते पंछी हवाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
हे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ
बादल का शोर लो सुनो ऐसे है आ रहा
बादल का शोर लो सुनो ऐसे है आ रहा
जैसे पाजेब दुल्हन की छनके है पांव में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
ऐ दिल उड़ा के ले चल मख्मूर फिजाओं में
परवाज़ कर के देख लें इन काली घटाओं में
इन काली घटाओं में
इन काली घटाओं में
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Ae dil udaa ke le chal-Sehra 1948
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