चल दिये दे के ग़म-सन ऑफ इंडिया १९६२
कर दर्द भरा गीत कैसे गाना चाहिए? जानने के लिए देखें
ये गीत फिल्म सन ऑफ इंडिया से.
परदे पर गीत गा रही हैं कुमकुम. गीत के आखिरी अंतरे
में दो चेहरे और उभरते हैं जिनमें से एक कमलजीत हैं
और दूसरी कम उम्र की सिम्मी ग्रेवाल.
गीत शकील बदायूनीं का है और संगीत नौशाद का.
गीत के बोल:
चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे
ऐसी मंज़िल पे छोड़ा है तुमने हमें
अब सहारा न दोगे तो मर जाएँगे
बिजलियों का न डर था न आँधी का ग़म
खो गये थे मुहब्बत की दुनिया में हम
क्या ख़बर थी के लुट जायेगा आशियाँ
क्या ख़बर थी के तिनके बिखर जायेंगे
चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे
याद कर के तुम्हें रोयेंगे उम्र भर
चैन आयेगा दिल को न शाम-ओ-सहर
ज़िन्दगी में रहेगी तुम्हारी कमी
दिन गुज़रने को यूँ भी गुज़र जायेंगे
चल दिये दे के ग़म ये न सोचा के हम
इस जहाँ में अकेले किधर जायेंगे
ऐसी मंज़िल पे छोड़ा है तुमने हमें
अब सहारा न दोगे तो मर जायेंगे
..............................................................................
Chal diye de ke gham-Son of India 1962
Artist: Kumkum, Simmi, Kamaljeet

0 comments:
Post a Comment