ज़ुल्मी संग आँख लड़ी-मधुमति १९५८
मधुमती से. फिल्म से हमने आपको कुछ गीत सुनवाए
है पहले जिन्हें आपने पसंद भी किया.
सुनिए वैजयंतीमाला और अन्य कलाकारों पर फिल्माया
गया गीत. ग्रामीण परिवेश में ये गीत गाया जा रहा है.
गीत लिखा है शैलेन्द्र ने और धुन है सलिल चौधरी की.
फिल्म का निर्देशन बिमल रॉय ने किया था.
गीत के बोल:
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
वो छुप छुप के बन्सरी बजाये
वो छुप छुप के बन्सरी बजाये रे
वो छुप छुप के बन्सरी बजाये
सुनाये मुझे मस्ती में डूबा हुआ राग रे
मोहे तारों की छाँव में बुलाये
चुराये मेरी निंदिया मैं रह जाऊँ जाग रे
लगे दिन छोटा रात बड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
बातों बातों में रोग बढ़ा जाये
बातों बातों में रोग बढ़ा जाये रे
बातों बातों में रोग बढ़ा जाये
हमरा जिया तड़पे किसी के लिये शाम से
मेरा पागलपना तो कोई देखो
पुकारूँ मैं चंदा को साजन के नाम से
फिरी मन पे जादू की छड़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
सखी मैं का से कहूँ री सखी का से कहूँ
जाने कैसे ये बात बढ़ी
ज़ुल्मी संग आँख लड़ी रे
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Zulmi sang aankh ladi-Madhumati 1958
Artist: Vaijayantimala

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