कहीं बेख़याल होकर यूँ ही-तीन देवियाँ १९६५
ही एक और रत्न को निहारते हैं मेरा मतलब सुनते हैं एक
बढ़िया सा गीत. हिंदी फिल्म का नायक फिल्म की परिभाषा
(पता नहीं किसने लिखी और कब) के अनुसार बहुआयामी
प्रतिभा वाला होता है. वो कथानक अनुसार उडती तीली से
सिगरेट सुलगा सकता है, १० मंजिल ऊंची इमारत से छलांग
लगा के बिल्ली की तरह अपने पंजों पर गिर के सीधा खड़ा
हो सकता है और जो भी आप नहीं सोच सकते वो सब कर
सकता है.
वही हीरो में शायर के कीड़े भी कुलबुलाने लग जाते हैं. वो
सुंदरियों को देख के बिना डिक्शनरी लिए तरह तरह के भाव
और बोल निकाल सकता है. ये तो हाइपोथेटिकल सिचुएशन
हो गयी, असल में बढ़िया गीतकार संगीतकार और गायक
ना हों तो इसका २० प्रतिशत प्रभाव ही स्वयं लाने में हवा
सरक जाए.
सुनते हैं देव आनंद पर फिल्माया गया गीत सुनते हैं फिल्म
तीन देवियाँ से एक गीत जिसे मजरूह ने लिखा है और रफ़ी
ने गाया है. गीत में तीनों ही देवियाँ नज़र आ रही हैं. ये
बोल ऑडियो के हिसाब से हैं. फिल्म में एक अंतरा गायब
है.
बेखुदी शब्द का अर्थ है-बेसुध. ये शायद सबसे ज्यादा सटीक
अर्थ है इस शब्द का. कई नायक इसे बोलते समय बेसुध से
ही नज़र आते हैं. बेहोश और मदहोश होने में फ़र्क है. कई
शराबी गीतों में बेखुदी शब्द का प्रयोग किया गया है. अब
टल्ली या टुन्न जैसे शब्द घुसेड़ें गाने में तो उसे पब्लिक
सुनेगी क्या भला?
गीत के बोल:
कहीं बेखयाल हो कर यूँ ही छू लिया किसी ने
कहीं बेखयाल हो कर यूँ ही छू लिया किसी ने
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
मेरे दिल में कौन है तू के हुआ जहाँ अँधेरा
मेरे दिल में कौन है तू के हुआ जहाँ अँधेरा
वहीँ सौ दिए जलाये तेरे रुख की चांदनी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
कभी उस परी का है कुछ कभी इस हसीं की महफ़िल
कभी उस परी का है कुछ कभी इस हसीं की महफ़िल
मुझे दरबदर फिराया मेरे दिल की सादगी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
है भला सा नाम उसका मैं अभी से क्या बताऊँ
है भला सा नाम उसका मैं अभी से क्या बताऊँ
किया बेक़रार हंस कर मुझे एक आदमी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
अरे मुझ पे नाज़ वालों ये नया ज़मन दिया क्यों
अरे मुझ पे नाज़ वालों ये नया ज़मन दिया क्यों
है यही करम तुम्हारा तो मुझे ना दोगे जीने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
……………………………………………………..
Kahin bekhayal ho kar-Teen deviyan 1965
Artists: Dev Anand, Nanda , Simi Grewal, Kalpana,

0 comments:
Post a Comment