Showing posts with label Teen Deviyan. Show all posts
Showing posts with label Teen Deviyan. Show all posts

Oct 18, 2019

कहीं बेख़याल होकर यूँ ही-तीन देवियाँ १९६५

गंभीरता की बात चली है तो एस डी बर्मन के संगीत से
ही एक और रत्न को निहारते हैं मेरा मतलब सुनते हैं एक
बढ़िया सा गीत. हिंदी फिल्म का नायक फिल्म की परिभाषा
(पता नहीं किसने लिखी और कब) के अनुसार बहुआयामी
प्रतिभा वाला होता है. वो कथानक अनुसार उडती तीली से
सिगरेट सुलगा सकता है, १० मंजिल ऊंची इमारत से छलांग
लगा के बिल्ली की तरह अपने पंजों पर गिर के सीधा खड़ा
हो सकता है और जो भी आप नहीं सोच सकते वो सब कर
सकता है.

वही हीरो में शायर के कीड़े भी कुलबुलाने लग जाते हैं. वो
सुंदरियों को देख के बिना डिक्शनरी लिए तरह तरह के भाव
और बोल निकाल सकता है. ये तो हाइपोथेटिकल सिचुएशन
हो गयी, असल में बढ़िया गीतकार संगीतकार और गायक
ना हों तो इसका २० प्रतिशत प्रभाव ही स्वयं लाने में हवा
सरक जाए.

सुनते हैं देव आनंद पर फिल्माया गया गीत सुनते हैं फिल्म
तीन देवियाँ से एक गीत जिसे मजरूह ने लिखा है और रफ़ी
ने गाया है. गीत में तीनों ही देवियाँ नज़र आ रही हैं. ये
बोल ऑडियो के हिसाब से हैं. फिल्म में एक अंतरा गायब
है.

बेखुदी शब्द का अर्थ है-बेसुध. ये शायद सबसे ज्यादा सटीक
अर्थ है इस शब्द का. कई नायक इसे बोलते समय बेसुध से
ही नज़र आते हैं. बेहोश और मदहोश होने में फ़र्क है. कई
शराबी गीतों में बेखुदी शब्द का प्रयोग किया गया है. अब
टल्ली या टुन्न जैसे शब्द घुसेड़ें गाने में तो उसे पब्लिक
सुनेगी क्या भला?



गीत के बोल:

कहीं बेखयाल हो कर यूँ ही छू लिया किसी ने
कहीं बेखयाल हो कर यूँ ही छू लिया किसी ने
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर

मेरे दिल में कौन है तू के हुआ जहाँ अँधेरा
मेरे दिल में कौन है तू के हुआ जहाँ अँधेरा
वहीँ सौ दिए जलाये तेरे रुख की चांदनी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर

कभी उस परी का है कुछ कभी इस हसीं की महफ़िल
कभी उस परी का है कुछ कभी इस हसीं की महफ़िल
मुझे दरबदर फिराया मेरे दिल की सादगी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर

है भला सा नाम उसका मैं अभी से क्या बताऊँ
है भला सा नाम उसका मैं अभी से क्या बताऊँ
किया बेक़रार हंस कर मुझे एक आदमी ने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर

अरे मुझ पे नाज़ वालों ये नया ज़मन दिया क्यों
अरे मुझ पे नाज़ वालों ये नया ज़मन दिया क्यों
है यही करम तुम्हारा तो मुझे ना दोगे जीने
कई ख्वाब
कई ख्वाब देख डाले यहाँ मेरी बेखुदी ने
कहीं बेखयाल हो कर
……………………………………………………..
Kahin bekhayal ho kar-Teen deviyan 1965

Artists: Dev Anand, Nanda , Simi Grewal, Kalpana,

Read more...

Aug 1, 2017

उफ़ कितनी ठण्डी है ये रुत-तीन देवियाँ १९६५

आइसक्रीम खाते समय तो नहीं मगर स्लश(बर्फ के बारीक
टुकड़े युक्त ठंडा पेय) खाते/पीते समय ज़रूर मुंह से ये शब्द
निकलते हैं-उफ़ कितना ठंडा है. आजकल इसे बनाने की
मशीनें आ गयी हैं. देसी संस्करण में मोदीनगर की शिकंजी
इसका सबसे अच्छा उदाहरण है.

कोई गर्मी का मारा कश्मीर पहुँच जाए तो उसे राहत महसूस
होगी. फिल्म तीन देवियाँ के इस गीत में ठन्डे मौसम की
तारीफ की गयी है. रूमानियत से भरपूर इस गीत में सर्दी,
अंगारे और चिंगारी एक साथ बल खा रहे हैं. मजरूह का
लिखा गीत है ये जिसे लता और किशोर ने गाया है.





गीत के बोल:

उफ़ कितनी ठण्डी है ये रुत
सुलगे है तन्हाई मेरी
सन सन सन जलता है बदन
काँपे है अंगड़ाई मेरी

तुमपे भी सोना है भारी
वो है कौन ऐसी चिंगारी
है कोई इन आँखों में
एक तुम जैसी ख़्वाबों की परी
उफ़ कितनी ठण्डी है ये रुत
सुलगे है तन्हाई मेरी

ये तन्हाँ मौसम मेहताबी
ये जलती बुझती बेख़ाबी
महलों में थर्राती है एक
बेताबी अरमाँ में भरी
उफ़ कितनी ठण्डी है ये रुत
सुलगे है तन्हाई मेरी

ऐसे हैं दिल पे कुछ साये
धड़कन भी जल के जम जाये
काँपो तुम और सुलग़ें हम
ये चाहत की है जादूगरी
उफ़ कितनी ठण्डी है ये पुत
सुलगे है तन्हाई मेरी
…………………………………………………..
Uff kitni thandi hai ye rut-Teen deviyan 1965

Artists: Dev Anand, Simi Grewal

Read more...

Jun 28, 2017

ख़्वाब हो तुम या-तीन देवियाँ १९६५

देव आनंद और कल्पना पर फिल्माया गया और किशोर कुमार
का गाया हुआ गीत सुनिए. इसमें अजीब से बाल के साथ एक
और नायिका सिमी ग्रेवाल भी मौजूद हैं.

इन सबके अलावा स्प्रिंग पर माउथ ऑरगन भी उछल रहा है इस
गीत में. इन दोनों के बीच में, मगर एक आदमी भी मौजूद है.
गीत मजरूह का है और संगीत एस डी बर्मन का.



गीत के बोल:

ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ

सुबह पे जिस तरह  शाम का हो गुमां
सुबह पे जिस तरह  शाम का हो गुमां
ज़ुल्फ़ों में इक चेहरा  कुछ ज़ाहिर  कुछ निहाल

ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ
ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ

धड़कनों ने सुनी  इक सदा पाँव की
धड़कनों ने सुनी  इक सदा पाँव की
और दिल पे लहराई  आँचल की छाँव सी
और दिल पे लहराई  आँचल की छाँव सी

ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ
ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ

मिल ही जाती हो तुम  मुझको हर मोड़ पे
मिल ही जाती हो तुम  मुझको हर मोड़ पे
चल देती हो कितने  अफ़साने छोड़ के
चल देती हो कितने  अफ़साने छोड़ के

ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ

फिर पुकारो मुझे  फिर मेरा नाम लो
फिर पुकारो मुझे  फिर मेरा नाम लो
गिरता हूँ फिर अपनी बाहों में थाम लो
गिरता हूँ फिर अपनी बाहों में थाम लो

ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ
ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ
ख़्वाब हो तुम या कोई हक़ीक़त
कौन हो तुम बतलाओ
हो ओ ओ देर से कितनी दूर खड़ी हो
और करीब आ जाओ
…………………………………………….
Khwab ho tum ya-Teen deviyan 1965

Artist: Dev Anand, Kalpana, Simi Grewal

Read more...

Jun 23, 2017

ऐसे तो न देखो-तीन देवियाँ १९६५

आँखों से बहुत कुछ कहा जा सकता है. किसी किसी की
नशीली आँखें देख के नशा चढ़ने लगता है. आँखों से ही
तो सम्मोहन भी हो जाता है.

फिल्म तीन देवियाँ से एक नशीली धुन पर बना गीत सुनते
हैं रफ़ी का गाया हुआ. मजरूह सुल्तानपुरी का गीत है
और एस डी बर्मन के संगीत. देव आनंद इसे परदे पर गा
रहे हैं.



गीत के बोल:

ऐसे तो न देखो  के हमको नशा हो जाए
ऐसे तो न देखो 
ख़ूबसूरत सी कोई हमसे ख़ता हो जाए
ख़ूबसूरत सी कोई हमसे ख़ता हो जाए
ऐसे तो न देखो

तुम हमें रोको फिर भी हम ना रुकें
तुम कहो काफ़िर फिर भी ऐसे झुकें
क़दम-ए-नाज़ पे इक सजदा अदा हो जाये
ऐसे तो न देखो  के हमको नशा हो जाए
ख़ूबसूरत सी कोई हमसे ख़ता हो जाए
ऐसे तो न देखो

यूँ न हो आँखे रहें काजल घोलें
बढ़ के बेखुदी हंसीं गेसू खोलें
खुल के फिर ज़ुल्फ़ें सियाह काली बला हो जाये
ऐसे तो न देखो  के हमको नशा हो जाए
ख़ूबसूरत सी कोई हमसे ख़ता हो जाए
ऐसे तो न देखो

हम तो मस्ती में जाने क्या क्या कहें
लब-ए-नाज़ुक से ऐसा न हो तुम्हें
बेक़रारी का गिला हमसे सिवा हो जाये
ऐसे तो न देखो  के हमको नशा हो जए
ख़ूबसूरत सी कोई हमसे ख़ता हो जाए
ऐसे तो न देखो
....................................................................
Aise to na dekho-Teen deviyan 1965

Artist: Dev Anand, Nanda

Read more...

Apr 23, 2017

अरे यार मेरी तुम भी-तीन देवियाँ १९६५

घूंघट पर न जाने कैसे कैसे गीत बन गए. अधिकांश में घूंघट खोलने
का निवेदन है या घूंघट के भीतर से होने वाले नज़रों का जिक्र है.
आपने किसी गीत में कभी सुना है-घूंघट काढने का निवेदन.

ये गीत है तीन देवियाँ फिल्म से आशा और किशोर का गाया हुआ.
मजरूह सुल्तानपुरी ने इसे लिखा है और एस डी बर्मन ने इसकी
धुन बनाई है.





गीत के बोल:

अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो
जब मेरी चुनरिया मलमल की
फिर क्यों न फिरूँ झलकी-झलकी
अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो

कोई जो मुझको हाथ लगाएगा
हाथ न उसके आऊंगी
मैं तेरे मन की लाल परी हूँ रे
मन में तेरे उड़ जाऊंगी
कोई जो मुझको हाथ लगाएगा
हाथ न उसके आऊंगी
मैं तेरे मन की लाल परी हूँ रे
मन में तेरे उड़ जाऊंगी
तुम परी तो ज़रूर हो पर बड़ी मशहूर हो
जब मेरी चुनरिया मलमल की
फिर क्यों न फिरूँ झलकी झलकी

अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो

देख के तरसे लाख ये भंवरे और इन्हें तरसाऊंगी
तेरी गली की एक कली हूँ तेरे गल्ले लग जाऊंगी
देख के तरसे लाख ये भंवरे और इन्हें तरसाऊंगी
तेरी गली की एक कली हूँ तेरे गल्ले लग जाऊंगी
तुम कली तो ज़रूर हो पर बड़ी मशहूर हो
जब मेरी चुनरिया मलमल की
फिर क्यों न फिरूँ झलकी झलकी

अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो

डाल के घूंघटा रूप को अपने और नहीं मैं छुपाऊंगी
सुंदरी बन के तेरी बलमवा आज तो मैं लहराऊंगी
डाल के घूंघटा रूप को अपने और नहीं मैं छुपाऊंगी
सुंदरी बन के तेरी बलमवा आज तो मैं लहराऊंगी
सुंदरी तो ज़रूर हो पर बड़ी मशहूर हो
जब मेरी चुनरिया मलमल की
फिर क्यों न फिरूँ झलकी झलकी

अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो
जब मेरी चुनरिया मलमल की
फिर क्यों न फिरूँ झलकी झलकी
अरे यार मेरी तुम भी हो ग़ज़ब
घूँघट तो ज़रा ओढ़ो
आ हा मानो कहा अब तुम हो जवां
मेरी जान लड़कपन छोड़ो
…………………………………………………………….
Are yaar merit um bhi ho-Teen deviyan 1965

Artists: Dev Anand, Kalpana

Read more...

Nov 22, 2010

लिखा है तेरी आँखों में-तीन देवियाँ १९६५

अभिनेत्री नंदा और भारतीय नारी की छबि एक दूसरे के पर्याय लगते
थे रुपहले परदे पर। एक फिल्म आई थी सन में -तीन देवियाँ। इस फिल्म
में देव आनंद के साथ तीन देवियों ने काम किया था। ये हैं-नंदा, कल्पना और
सिमी ग्रेवाल। फिल्म में कुछ यूँ होता है की तीनों देवियाँ देव आनन्द पर फ़िदा
हो जाती हैं और शायद तीनों पर देव आनंद। अब समस्या तीन में से एक को चुनने
की है। फिल्म के अंत में फिल्म का नायक देव आनंद एक मनोवैज्ञानिक के पास
जाता है। वहां उसे समाधान मिल जाता है। भुट्टा खाने वाली अभिनेत्री ही उसकी
पसंद मालूम पढ़ती है। ज्ञात हो फिल्म के एक दृश्य में देव आनंद और नंदा भुट्टे
का आनंद लेते नज़र आते हैं। भुट्टे का आनंद लेने के साथ दोनों एक गीत गाते हैं।
आइये वही गीत सुनें। हिंदी फिल्म जगत का ये सबसे मधुर भुट्टा-गीत है। वैसे
कई गीत हैं जो बाजरे के खेत में भी फिल्माए गए हैं। निर्देशक अमरजीत का जवाब
नहीं जिन्होंने भुट्टे(मकई) के खेत को भी खूबसूरत बना डाला। मजरूह के बोल,
एस. डी. बर्मन का संगीत और आवाजें लता, किशोर की हैं।



गीत के बोल:

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जवाब सा किसी तमन्ना का,
लिखा तो है मगर अधूरा सा
हो ओ ओ कैसी न हो मेरी हर बात अधूरी,
अभी हूँ आधा दीवाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
जो कुछ नहीं तो ये इशारे क्यूँ,
ठहर गए मेरे सहारे क्यूँ

थोड़ा सा हसीनों का सहारा ले के चलना,
है मेरी आदत रोज़ाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा
अरे ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
यहाँ वहाँ फ़िज़ा में आवारा,
अभी तलक़ ये दिल है बेचारा

हो ओ ओ, दिल को तेरे तो हम ख़ाक ना समझे
तुझी को हमने पहचाना

लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना
अगर इसे समझ सको, मुझे भी समझाना
लिखा है तेरी आँखों में, किसका अफ़साना

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP