मेरा दिल तड़पा कर कहाँ-शबनम १९४९
रही हैं. उनकी उपस्थिति फिल्मों में काफी लंबे समय
तक रही और अपने कैरियर के उत्तरार्ध में उन्होंने काफी
सारी चरित्र भूमिकाएं कीं.
बी मित्रा निर्देशित इस फिल्म के नायक दिलीप कुमार
हैं. इस जोड़ी ने चार फिल्मों में अभिनय किया है-
नदिया के पार, शहीद, शबनम और आरजू.
गीत शुरू होता है और सस्पेंस वाले अंदाज़ में नायिका
के हाथ में रस्सी दिखती है, ऐसा लगता है मानो वो
भैंसा चारा रही हो. मगर ये क्या रस्सी का दूसरा सिरा
तो नायक के पैर में दिखलाई दे रहा है. इस बात से
हमें ये शिक्षा मिलती है-एक फोटो देख कर कन्क्लूज़न
पर जंप ना करें.
गीत के बोल:
हो ओ ओ
मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
इतना तो बता के जा
इसे खेल कहूँ या प्यार कहूँ मुझे ये समझा के जा
ओ ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
हम लाये प्यार के डोर तू तोड़ सके तो तोड़
लगा ले जोर
हम लाये प्यार के डोर तू तोड़ सके तो तोड़
लगा ले जोर
इसे जीत कहूँ या हार कहूँ इतना तो बताते जा
ओ ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
हो ओ ओ जब देखा पहली बार तुझे मेरे कानों ने शहनाई सुनी
शहनाई सुनी
मेरे कानों ने शहनाई सुनी मेरे कानों ने शहनाई
क्यों तूने सुनी थी शेहनाई इतना तो बताते जा
हो ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
होंठों पे ना आँखों में हाँ कुछ रूठे कुछ माने हुए
इकरार है यह इंकार है ये इतना तो बता के जा
हो ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
जी भर के सताया तूने हमें अब चोरी चोरी जाने लगा
ओ दूर देश के सौदागर कर्ज़ा तो चुका के जा
ओ दूर देश के सौदागर कर्ज़ा तो चुका के जा
हो ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
इतना तो बता के जा
इसे खेल कहूँ या प्यार कहूँ मुझे ये समझा के जा
हो ओ ओ मेरा दिल तड़पा कर कहाँ चला
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Mera dil tadpa kar kahan chala-Shabnam 1949
Artist: Kamini Kaushal, Dilip Kumar

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