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Jun 15, 2017

सपना रे सपना-आगे की सोच १९८७

दादा कोंडके का नाम मराठी फिल्म जगत में बहुत बड़ा नाम
है. उन्होंने हिंदी में भी कई फ़िल्में बनाईं जिनमें से एक है
सन १९८७ की फिल्म आगे की सोच. इस फिल्म में उनके
साथ स्वप्ना नाम की अभिनेत्री हैं. फिल्म में नायिका का
नाम भी सपना है. अपने से एक फीट लंबी अभिनेत्री के
साथ उनकी जोड़ी खूब जंची.

दूसरे ठिगने कद के अभिनेताओं की तरह उन्हें कैमरे के ऐसे
शॉट्स की ज़रूरत नहीं पड़ी जिसमें कम कद वाला नायक भी
नायिका के बराबर दिखाई देता है. हिंदी फिल्मों में ऐसे करिश्मे
आपने खूब देखे होंगे जिसमें नायक को लंबा दिखाने की जबरन
कसरत की जाती है. दरअसल ये फंतासी की दुनिया है जिसमें
केवल पतलून के ऊपर चड्डी पहन लेने से आदमी अपने आप
को सुपरमैन समझने लगता है.

प्रस्तुत गीत बालकिशन पुरी ने लिखा है, संगीत तैयार किया
है राम लक्ष्मण ने. उषा मंगेशकर और किशोर ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

सपना अरी ओ सपना
सपना ओ सपना ओ सपना मुझे बना ले अपना
सपना ओ सपना ओ सपना मुझे बना ले अपना
शहर में क्या रखा है गोरी गाँव में दो दिन रुकना
ओ मेरी प्यारी सपना
सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
तुझे कसम है रोज मुझे एक प्यार भरा खत लिखना
हो मुझे भूल न जाना

मेरा ना कोई बंगला अरे मोटर ना कोई गाडी
कैसे तुझे कराऊँ दुनिया की सैर सारी
बंगले की क्या ज़रूरत मोटर किसे है प्यारी
मेरी सैर के लिए है वो तेरी बैलगाडी
तेरे शहर से अच्छा है मेरे गाँव का अंगना
ओ मेरी प्यारी सपना

सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
तुझे कसम है रोज मुझे एक प्यार भरा खत लिखना
हो मुझे भूल न जाना

मम्मी तो मैं बनूंगी पापा तुझे है बनना
क्या चाहिए बता दे मुन्नी हो या मुन्ना
मुन्ना तुझे मुबारक मुन्नी मुझे दिलाना
पीर इसके बाद कोई नंबर नहीं बढ़ाना
मुन्ना मुन्नी दूर की बातें पहले शादी रचाना
हो मुझे भूल न जाना

सपना ओ सपना ओ सपना मुझे बना ले अपना
सपना ओ सपना ओ सपना मुझे बना ले अपना
शहर में क्या रखा है गोरी गाँव में दो दिन रुकना
ओ मेरी प्यारी सपना

सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
सजना रे सजना रे सजना मुझे भूल न जाना
तुझे कसम है रोज मुझे एक प्यार भरा खत लिखना
हो मुझे भूल न जाना

मेरी प्यारी सपना मुझे बना ले अपना
मेरी प्यारी सपना हो मुझे बना ले अपना
मेरी प्यारी सपना हो मुझे बना ले अपना
......................................................................
Sapna o sapna-Aage ki soch 1987

Artists: Dada Kondke, Swapna

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Aug 29, 2016

हीरों से मोती से-आगे की सोच १९८७

दादा कोंडके समय से आगे की सोच वाले फिल्मकार थे.
उन्होंने काफी क्लासिक फिल्मों बनायीं. सामाजिक और
दूसरी व्यवस्थाओं पर उनकी फिल्मों में कटाक्ष है कुछ
अलग तरह से. उनकी फिल्मों के संवाद द्विअर्थी ज्यादा
होते थे, हालांकि ये सब सीमा के भीतर होता था. ये उनका
अपना तरीका था व्यवस्था के दोगलेपन पर चोट करने का.

आज के समय के हिसाब से उनकी फ़िल्में सोबर लगती
हैं. उन्होंने अपनी बात कहने के लिए दूसरे निर्देशकों की
तरह मुखौटा नहीं लगाया. सीधे सीधे बेबाक बात कह
दी फिल्मों में. व्यावसायिक दृष्टि से सोचें तो उनकी गिनती
सफल फिल्मकारों में होती थी.

आइये फिल्म आगे की सोच से तीसरा गीत सुनें जिसे
गाया है किशोर कुमार संग उषा मंगेशकर ने और जिसका
संगीत तैयार किया है राम लक्ष्मण ने. गीत लिखा है
बालकिशन पुरी ने. बॉलीवुड क्लासिक्स ने इसे यू-ट्यूब
पर अपलोड किया है.




गीत के बोल:

हीरों से मोती से फूलों से गहनों से तुझको सजा देता
हीरों से मोती से फूलों से गहनों से तुझको सजा देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
क्या बात है
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे मैं होती रानी जो राजा तू होता
हाय मैं होती रानी जो राजा तू होता

तुझे काजल बना लेती ओए अंखियों में बसा लेती
ला ला ला ला ला ला ला
तुझे काजल बना लेती ओए ओए ओए अंखियों में बसा लेती
अपने होंठों की लाली से तुझे तिलक लगा देती
अपने होंठों की लाली से तुझे तिलक लगा देती
तेरी अदा पे मैं दौलत तो क्या जान कुर्बान कर देता
अरे तेरी अदा पे मैं दौलत तो क्या जान कुर्बान कर देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता

तुझे दुनिया घुमा देता सारी रौनक दिखा देता
ला ला ला हो ला ला ला
तुझे दुनिया घुमा देता सारी रौनक दिखा देता
तुझे देवी बना लेता हो दिल के मंदिर में रख लेता
तुझे देवी बना लेता हो दिल के मंदिर में रख लेता
हो मैं तेरी देवी तू मेरा पुजारी ज़माना नहीं मानता
हो मैं तेरी देवी तू मेरा पुजारी ज़माना नहीं मानता
अरे मैं होती रानी जो राजा तू होता
मैं होती रानी जो राजा तू होता

किसी और की बाहों में तेरी बाहें अगर होतीं
कभी ना ना ना कभी ना ना ना
किसी और की बाहों में तेरी बाहें अगर होतीं
हाय रूठ के सैयां मैं मायके चली जाती
हाय रूठ के सैयां मैं मायके चली जाती
तू रूठ जाती तो तुझको मनाने को घंटा बजा देता
तू रूठ जाती तो तुझको मनाने को घंटा बजा देता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता
अरी तू होती रानी जो राजा मैं होता हाँ

गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे रे रे रे रे
गांवों में शहरों में दिल्ली में गली में हंगामा हो जाता
अरे मैं होती रानी
अरे अरे अरे अरे मैं होता राजा
मैं होती रानी
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता
तो राजा मैं होता ता ता ता
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Heeron se moti se-Aage ki soch 1987


Artists: Dada Kondke, Swapna

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Jan 10, 2011

ओ मेरे प्यारे बैल चला चल-आगे की सोच १९८७

आपको हमने कई ऐसे गीत सुनवाए जिसमे पशुओं ने भी अभिनय किया
है। हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में कई ऐसे गीत भी हैं जिनमें पशुओं ने
मनुष्यों से अच्छा अभिनय किया है। हालाँकि आज जो गीत आपको इस
जगह सुनवाया जा रहा है उसमें नायक ने अच्छा अभिनय किया है मगर
उनके साथ सहायक कलाकार के रूप में दो बैल भी हैं ।

बैलगाड़ी पर सवार दादा कोंडके को आप ज़रूर पहचान जायेंगे। ये गीत है
फिल्म आगे की सोच से जिसे गायक किशोर कुमार ने गाया है। गीतकार
बालकिशन पुरी के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है राम लक्ष्मण ने जिन्हें
हम विजय पाटिल के नाम से भी जानते हैं।

गौर करने लायक बात ये है कि बैल जी फिल्म के हीरो से ज्यादा सुन्दर
दिखलाई दे रहे हैं। 😀




गीत के बोल:

अरे हट हा
अरे हट हा
अरे बाजू हो जा

हुर्र, पहलवान

ओ मेरे बैल चला चल जोर से
अरे, ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा ज़ोर चला चल जोर से
हम दोनों का बंधा है बंधन, हाँ
हम दोनों का बंधा है बंधन
प्रीत प्यार की डोर से

ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से

इधर भी पर्वत, उधर भी पर्वत
बीच में नदिया नाले बैल जी
बीच में नदिया नाले

इन झरनों की ताल पे मितवा
कोई रागिनी गा ले बैल जी
कोई रागिनी गा ले

दूर खेत में देख मोरनी, हाय
दूर खेत में देख मोरनी
इशक करे है मोर से

ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से, हा

देख ले सूरज सर पे आया
बज गए पूरे बारह बैल जी
बज गए पूरे बारह

अरे मैं खाऊँगा चना भटूर
तुम खा लेना चारा बैल जी
तुम खा लेना चारा

खाने की खुसबू आई है, आय हाय
खाने की खुसबू आई है
उस ढाबे की ओर से

ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से

शहर में जा के तुम चुप रहना
देख के धंधे काले बैल जी
देख के धंधे काले
अरे तन के उजले लोग वहां पर
लेकिन मन के काले बैल जी
लेकिन मन के काले

नीली छतरी वाला देखो, हाय
नीली छतरी वाला देखो
देख रहा है गौर से

ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बेटा जोर चला चल जोर से
ओ मेरे बैल चला चल जोर से
मत कर बिटुआ जोर चला चल जोर से
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O mere pyare bail chala chal jor se-Aage ki soch 1987

Artist: Dada Kondke

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Jan 11, 2010

फुदक फुदक कर ना चल-आगे की सोच १९८७

फुदकना-ये शब्द अक्सर चिड़ियों के लिए प्रयुक्त होता है। कभी कभी
फ़िल्मी गीतों में शब्दों का अनूठा प्रयोग सोच विचार करने पर मजबूर
करता है। चिडियाएँ फुदकती हैं और हीरोईनें ठुमकती हैं बस इतना
सा फर्क है।

कोई हलकी फुलकी अभिनेत्री के लिए ये शब्द इस्तेमाल किया गया होता
तो समझ आता, मगर दादा कोंडके की फिल्म-आगे की सोच में वे एक
गीत गा रहे हैं जिसमे नायिका की लम्बाई उनसे बहुत ज्यादा है। लम्बी
हीरोइन का वज़न भी थोड़ा ज्यदा हो होगा स्वभाविक तौर पर।

हीरोइन का नाम स्वप्ना है और वे कुछ एक हिंदी फिल्मों में दिख कर
गायब हो गयीं। गीत लिखा है बालकिशन पुरी ने और धुन बनाई है
राम लक्ष्मण ने जिसे गा रहे हैं उषा मंगेशकर और किशोर कुमार।



गीत के बोल:

फुदक फुदक के
फुदक फुदक के ना चल गोरी
तेरे पैरों में आएगी मोच
ओ, तेरे पैरों में आएगी मोच
ज़रा आगे कि सोच
सोच मेरी बुलबुल , आगे की सोच
हो ओ हो ओ आगे की सोच
सोच मेरी बुलबुल, आगे की सोच

ओ गाड़ीवाले
ओये ओये
ओ गाड़ीवाले, छैल छबीले
बैयाँ में यूँ ना दबोच
हो मुझे बैयाँ में यूँ ना दबोच
ज़रा आगे की सोच
सोच मेरे छैला, आगे की सोच
अरे अरे अरे अरे, आगे की सोच
सोच मेरे छैला, आगे की सोच

तेरी जवानी उफ़ यूँ माँ
दे दे ना रानी एक चुम्मा
चू चू चुम्मा, चू चू
तेरी जवानी उफ़ यूँ माँ
दे दे ना रानी एक चुम्मा
पक्के अनार पे जंगल का तोता
मरेगा अपनी चोंच
चोंच ?
आगे की सोच, सोच मेरी बुलबुल,
हो ओ हो ओ, आगे की सोच,
सोच मेरी बुलबुल, आगे की सोच

दिल की बीमारी अच्छी नहीं
फ़ोकट में मर ना जाऊं कहीं
हाय, हाय, हाय, हाय
दिल की बीमारी अच्छी नहीं
फ़ोकट में मर ना जाऊं कहीं
बाली उमरिया, पतली कमरिया
बदन में मेरे है लोच
लोच ?
आगे की सोच, सोच मेरे छैला
आगे की सोच, ए ए ए
आगे की सोच, सोच मेरे छैला
आगे की सोच

अरी क्या खाएगी पटरानी
अंडा दूं या बिरयानी
क्या खाएगी पटरानी
अंडा दूं या बिरयानी
ये खाना कोई नया नहीं है
खाती हूँ मैं हर रोज़
रोज़ ?
आगे की सोच, सोच मेरे छैला
आगे की सोच, अरे अरे अरे अरे
आगे की सोच, सोच मेरे छैला
आगे की सोच

अर्र रा रा रा रा रा रा
फुदक फुदक के ना चल गोरी
तेरे पैरों में आएगी मोच
ओ, तेरे पैरों में आएगी मोच
ज़रा आगे की सोच
सोच मेरी बुलबुल , आगे की सोच
हो हो हो हो, आगे की सोच
सोच मेरी बुलबुल , आगे की सोच
आगे की सोच
आगे की सोच
आगे की सोच
आगे की सोच
.................................
Phudak phudak kar na chal-Aage ki soch 1987

Artists: Dada Kondke, Swapna

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