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May 29, 2017

ऐ मेरे हमसफ़र-छबीली १९६०

अभिनेत्री नूतन की आवाज़ आपको २-३ फ़िल्मी गीतों में
मिल जायेगी. फिल्म छबीली में उनका गाया एकल गीत
भी है जो हम आज सुनेंगे.

एस रतन ने इसके बोल लिखे हैं और स्नेहल भाटकर ने
इसकी धुन बनाई है.



गीत के बोल:

ऐ मेरे हमसफ़र
ले रोक अपनी नज़र
न देख इस क़दर
ये दिल है बड़ा बेसबर
ऐ मेरे हमसफ़र

चाँद तारों से पूछ ले
या किनारों से पूछ ले
दिल के मारों से पूछ ले
क्या हो रहा है असर
ले रोक अपनी नज़र

मुस्कुराती है चाँदनी
छाई जाती है ख़ामोशी
गुनगुनाती है ज़िंदगी
ऐसे में हो कैसे गुज़र
ले रोक अपनी नज़र
…………………………………………………….
Ae mere hamsafar-Chhabili 1960

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Jul 15, 2016

लहरों पे लहर-छबीली १९६०

संगीत का अटूट रिश्ता है इस प्रकृति से. गीतों का भी आपस
में अटूट रिश्ता होता है जो सुरों के ज़रिये बन जाता है. कुछ
रिश्ते कुम्भ के मेले में बिछड जाते हैं और बाद में मिल जाते
हैं तो कुछ आजीवन अनजाने से रह जाते हैं.

आपको आज एक मधुर गीत सुनवाते हैं जिसकी मूल धुन भी
मधुर है. गीत है हेमंत कुमार का गाया हुआ फिल्म छबीली
का गीत.

सन १९५७ में डीन मार्टिन का गीत आया था-द मैन हूँ प्लेज़
द मेंडोलिनो. स्नेहल भाटकर के संगीत वाला गीत अवतरित
हुआ सन १९६० में. ये सब जानकारी इन्टरनेट के पदार्पण
के बाद ही मिलना शुरू हुयी. पहले ऐसा ज्ञान केवल ज्ञानी
संगीत प्रेमियों तक ही सीमित था जो विलायती संगीत भी
सुना करते थे. जानकारी सीमित हुआ करती थी और आपसी
आदान प्रदान से ये बढ़ी. इस दिशा में कार्तिक की साईट ने
सबसे ज्यादा जानकारी दी है.




गीत के बोल:

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ
सितारे टिमटिमाते हैं तू आ जा आ जा
मचलती जा रही है ये हवाएं आ जा आ जा
लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ

सुलगती चाँदनी में थम रही है तुझपे ये नजर
कदम ये किस तरफ़ बढ़ते चले जाते हैं बेखबर
ज़माने को है भूले हम आ चल दें साथ ये सफ़र

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ

ना जाने कौन सी राहें हमारा कौन सा है जहान
सहारे किसके हम ढूँढे हमारी मंजिल है कहाँ
सदा दिल की मगर कहती है मेरी दुनिया है यहाँ

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ
........................................................................
Lehron pe lehar-Chhabili 1960

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