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Sep 5, 2019

आँख मिलने का बहाना हो गया-लेडी डॉक्टर १९४४

हिंदी सिनेमा का डॉक्टर सन १९४१ में आया. लेडी डॉक्टर
आई सन १९४४ में. नर्स पहले आ गयी सन १९४३ में.
हॉस्पिटल भी पहले आ गया सन १९४३ में. कम्पाउन्डर
को किसी ने नहीं पूछा कब आएगा.

सुनते हैं हमीदा बानो और स्नेहल भाटकर का गाया एक
युगल गीत जिसे लिखा है वली साहब ने और इसकी धुन
तैयार की अनिल बिश्वास ने.




गीत के बोल:

आँख मिलने का बहाना हो गया
हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया
हो गया
दिल बेगाना था बेगाना था
बेगाना हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया

तीर टेढ़ा उसने फेंका था मगर
तीर टेढ़ा उसने फेंका था मगर
आगे बढ़ के दिल निशाना हो गया
हो गया
आगे बढ़ के दिल निशाना हो गया

इंतज़ारी में क़यामत आ गई
इक क़यामत उनका आना हो गया
हो गया
इक क़यामत उनका आना हो गया

जब से तुम मेरे हुए हो ए हुज़ूर
ए हुज़ूर
जब से तुम मेरे हुए हो ए हुज़ूर
ए हुज़ूर
तब से दुश्मन कुल ज़माना हो गया
हो गया
तब से दुश्मन कुल ज़माना हो गया

उनको देखा और फिर देखा 'वली'
बात इतनी थी फ़साना हो गया
हो गया
बात इतनी थी फ़साना हो गया
हो गया
आँख मिलने का बहाना हो गया
..........................................................
Aankh mmilne ka bahana-Lady doctor 1944

Artist:

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Nov 26, 2017

हाल-ए-दिल उनको सुनाना था-फ़रियाद १९६४

हाल-ए-दिल हिट्स के अंतर्गत एक गीत और सुनते हैं फिल्म
फ़रियाद से. सन १९६४ की केदार शर्मा द्वारा निर्मित इस फिल्म
का ये सबसे मधुर गीत है शायद, मेरे ख्याल से. इस फिल्म में
बहुत ज्यादा चीज़ें याद करने लायक नहीं हैं, इसलिए शायद
जनता ने इस फिल्म को जल्दी भुला दिया. केदार शर्मा काफी
बड़े फिल्मकार थे अतः उनकी फिल्मों को आप आसानी से ख़ारिज
नहीं कर सकते. फिल्म के कलाकारों को एक्टिंग भले ही ना के
बराबर आती हो, बाकी के फ़िल्मी पहलू लगभग बढ़िया हैं.

इस गीत को केदार शर्मा ने लिखा है और स्नेहल भाटकर ने धुन
तैयार की. सुमन कल्याणपुर गायिका हैं और ये उनके कुछ चर्चित
गीतों में से एक है.





गीत के बोल:

हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
सुनाया ना गया सुनाया ना गया
जो ज़ुबाँ पर मुझे लाना था
जो ज़ुबाँ पर मुझे लाना था
वो लाया ना गया वो लाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

प्यार में सीने पे सर रख के तो दिल क़दमों पर
प्यार में सीने पे सर रख के तो दिल क़दमों पर
आप को अपना बनाना था
आप को अपना बनाना था
बनाया ना गया बनाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

खेलती आँख मिचोली रही नज़रें अपनी
खेलती आँख मिचोली रही नज़रें अपनी
जिनको पलकों में छुपाना था
जिनको पलकों में छुपाना था
छुपाया ना गया छुपाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको

एक ही वार में हाथों से जिगर छीन लिया
एक ही वार में हाथों से जिगर छीन लिया
हाय जिस दिल को बचाना था
हाय जिस दिल को बचाना था
बचाया ना गया बचाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको सुनाना था
सुनाया ना गया सुनाया ना गया
हाल-ए-दिल उनको
……………………………………………………………..
Haal-e-dil unko sunana tha-Fariyaad 1964

Artists: Zeb Rehman

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Nov 6, 2017

कभी तनहाइयों में-हमारी याद आएगी १९६१

मुबारक बेगम के गाये कुछ गीत काफी लोकप्रिय हैं. उनमें से एक
और सुनते हैं आज. इसे केदार शर्मा ने फिल्म हमारी याद आएगी
के लिए लिखा. संगीत है स्नेहल भाटकर का.

तनूजा बतौर नायिका तो फिल्म छबीली में नूतन के साथ दिखाई
दीं थीं मगर वो सहायक अभिनेत्री से पूर्ण अभिनेत्री इसी फिल्म में
बनीं-हमारी याद आएगी. नायक को आप पहचान ही गए होंगे. ये
हैं अशोक शर्मा सुपुत्र केदार शर्मा.

ये वही फिल्म है जिसकी शूटिंग के दौरान केदार शर्मा ने तनूजा
को थप्पड़ रसीद किया था. इसकी कहानी फिर कभी.




गीत के बोल:

कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
अंधेरे छा रहे होंगे के बिजली कौंध जाएगी
अंधेरे छा रहे होंगे

ये बिजली राख कर जायेगी तेरे प्यार की दुनिया
ये बिजली राख कर जायेगी तेरे प्यार की दुनिया
ना फिर तू जी सकेगा और ना तुझको मौत आएगी

कभी तनहाइयों में यूँ हमारी याद आएगी
अंधेरे छा रहे होंगे के बिजली कौंध जाएगी
कभी तनहाइयों में यूँ
................................................................
Kabhi tanhaiyon mein yun-Hamari yaad aayegi 1961

Artists: Tanuja, Ashok Sharma

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May 29, 2017

ऐ मेरे हमसफ़र-छबीली १९६०

अभिनेत्री नूतन की आवाज़ आपको २-३ फ़िल्मी गीतों में
मिल जायेगी. फिल्म छबीली में उनका गाया एकल गीत
भी है जो हम आज सुनेंगे.

एस रतन ने इसके बोल लिखे हैं और स्नेहल भाटकर ने
इसकी धुन बनाई है.



गीत के बोल:

ऐ मेरे हमसफ़र
ले रोक अपनी नज़र
न देख इस क़दर
ये दिल है बड़ा बेसबर
ऐ मेरे हमसफ़र

चाँद तारों से पूछ ले
या किनारों से पूछ ले
दिल के मारों से पूछ ले
क्या हो रहा है असर
ले रोक अपनी नज़र

मुस्कुराती है चाँदनी
छाई जाती है ख़ामोशी
गुनगुनाती है ज़िंदगी
ऐसे में हो कैसे गुज़र
ले रोक अपनी नज़र
…………………………………………………….
Ae mere hamsafar-Chhabili 1960

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Oct 21, 2016

देखो देख रहा था पपीहा-फ़रियाद १९६४

कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें हम कभी-कभार सुनते हैं मगर उन्हें
एक बार और सुनना चाहते हैं. कुछ अलग सा होता है ऐसे गीतों
में. आज सुनिए फिल्म फ़रियाद से पपीहा हिट. गीत में पपीहे को
तबियत से याद किया गया है.

केदार शर्मा रचित इस गीत की धुन बनाई है स्नेहल भाटकर ने
और सुमन कल्याणपुर के संग महेंद्र कपूर ने इस रोचक गीत को
गाया है.

गीत में अशोक शर्मा और जेब रहमान नामक कलाकार हैं. अशोक
केदार शर्मा के पुत्र हैं.



गीत के बोल:

वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था


रिम झिम झिम गगरिया बरसे
रिम झिम झिम गगरिया बरसे
ऐसे में जइयो नहीं घर से
ऐसे में जइयो नहीं घर से
हमरा जिया घबराए
अब तुम बिन रहा न जाए
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था

सर सर सर चलें सर्द हवाएं
सर सर सर चलें सर्द हवाएं
फूल हंसें कलियाँ मुस्कुराएँ
फूल हंसें कलियाँ मुस्कुराएँ
हमको ये समझाएं
हम मिल कर नाचे गायें
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था

रिम झिम झिम करते हैं सितारे
रिम झिम झिम करते हैं सितारे
आप हुए हैं जबसे हमारे
हम फूले नहीं समाये
घडी घडी मुस्कुराए
वो देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा देखो देख रहा था पपीहा
पपीहा जा के सबसे कहेगा पपीहा
पपीहा भला चुप क्यूँ रहेगा
पपीहा देखो देख रहा था
…………………………………………….
Dekho dekh raha tha papiha-Fariyaad 1964

Artists: Ashok Sharma, Zeb Rehman

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Jul 15, 2016

लहरों पे लहर-छबीली १९६०

संगीत का अटूट रिश्ता है इस प्रकृति से. गीतों का भी आपस
में अटूट रिश्ता होता है जो सुरों के ज़रिये बन जाता है. कुछ
रिश्ते कुम्भ के मेले में बिछड जाते हैं और बाद में मिल जाते
हैं तो कुछ आजीवन अनजाने से रह जाते हैं.

आपको आज एक मधुर गीत सुनवाते हैं जिसकी मूल धुन भी
मधुर है. गीत है हेमंत कुमार का गाया हुआ फिल्म छबीली
का गीत.

सन १९५७ में डीन मार्टिन का गीत आया था-द मैन हूँ प्लेज़
द मेंडोलिनो. स्नेहल भाटकर के संगीत वाला गीत अवतरित
हुआ सन १९६० में. ये सब जानकारी इन्टरनेट के पदार्पण
के बाद ही मिलना शुरू हुयी. पहले ऐसा ज्ञान केवल ज्ञानी
संगीत प्रेमियों तक ही सीमित था जो विलायती संगीत भी
सुना करते थे. जानकारी सीमित हुआ करती थी और आपसी
आदान प्रदान से ये बढ़ी. इस दिशा में कार्तिक की साईट ने
सबसे ज्यादा जानकारी दी है.




गीत के बोल:

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ
सितारे टिमटिमाते हैं तू आ जा आ जा
मचलती जा रही है ये हवाएं आ जा आ जा
लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ

सुलगती चाँदनी में थम रही है तुझपे ये नजर
कदम ये किस तरफ़ बढ़ते चले जाते हैं बेखबर
ज़माने को है भूले हम आ चल दें साथ ये सफ़र

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ

ना जाने कौन सी राहें हमारा कौन सा है जहान
सहारे किसके हम ढूँढे हमारी मंजिल है कहाँ
सदा दिल की मगर कहती है मेरी दुनिया है यहाँ

लहरों पे लहर उल्फ़त है जवां
रातों की सहर चली आओ यहाँ
........................................................................
Lehron pe lehar-Chhabili 1960

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