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Jan 20, 2017

छुप गये सारे नज़ारे-दो रास्ते १९६९

गीत अपने ज़माने का प्रसिद्ध युगल गीत है अतः इसका विश्लेषण
हमारे दिमाग के बाहर की बात है. फिर भी कोशिश कर के देखते
हैं. गीत शुरू होते ही नायिका पूछती है नज़ारे कहाँ छुप गए. अब
काजल या सुरमा डालने के बाद थोड़ी देर तक तो अँधेरा ही अँधेरा
दिखाई देता है. उसके बाद तो हरियाली और भी हरी नज़र आने
लगती है.

गीत का फिल्मांकन और नायक नायिका के एक्सप्रेशन इस गीत
में बढ़िया हैं. राजेश खन्ना की भांति मुमताज़ पर फिल्माए गए
गीत भी अलग किस्म के होते हैं. जिस गीत में दोनों मौजूद हों
वो शानदार गीत हो जाता है. गीत में फ़िल्मी बरसात भी आप
देख सकते हैं. आनंद बक्षी के लिखे इस गीत को रफ़ी और लता
ने गाया है. फ़िल्मी बारिश एक वरदान सरीखा है गीतों के लिए.



गीत के बोल:

छुप गये सारे नज़ारे ओये क्या बात हो गई
छुप गये सारे नज़ारे ओये क्या बात हो गई
तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई
तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई
मिल गये नैना से नैना ओये क्या बात हो गई
मिल गये नैना से नैना ओये क्या बात हो गई
दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई
दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई

कल नहीं आना मुझे ना बुलाना
के मारेगा ताना ज़माना
कल नहीं आना मुझे ना बुलाना
के मारेगा ताना ज़माना
तेरे होठों पे रात ये बहाना था
गोरी तुझको तो आज नहीं आना था
तू चली आई दुहाई ओये क्या बात हो गई
तू चली आई दुहाई ओये क्या बात हो गई

मैंने छोड़ा ज़माना तेरे साथ हो गई
ओ मैंने छोड़ा ज़माना तेरे साथ हो गई
ओ तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई

अम्बुवा की डाली पे गाये मतवाली
कोयलिया काली निराली
अम्बुवा की डाली पे गाये मतवाली
कोयलिया काली निराली
सावन आने का कुछ मतलब होगा
बादल छाने का कोई सबब होगा
रिमझिम छाए घटाएँ ओये क्या बात हो गई
रिमझिम छाए घटाएँ ओये क्या बात हो गई
तेरी चुनरी लहराई बरसात हो गई
तेरी चुनरी लहराई बरसात हो गई
दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई

छोड़ ना बैयाँ पडूँ तेरे पईयां
तारों की छैयां में सईयाँ
छोड़ ना बैयाँ पडूँ तेरे पईयां
तारों की छैयां में सईयाँ
इक वो दिन था मिलाती ना थी तू अँखियाँ
इक ये दिन तू जागे सारी-सारी रतियाँ
बन गयी गोरी चकोरी ओये क्या बात हो गयी
जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गयी
ओ जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गयी

छुप गये सारे नज़ारे ओये क्या बात हो गई
दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई
दिल ने दिल को पुकारा मुलाक़ात हो गई
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Chhup gaye saare nazare-Do raaste 1969

Artists: Rajesh Khanna, Mumtaz

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Jan 17, 2017

बिंदिया चमकेगी-दो रास्ते १९६९

आज के दिन आपको ऐसे गीत सुनवायेंगे जिनमें नायिका का
एक्टिविटी लेवल ज्यादा है और नायक विशेष कुछ कर नहीं
रहा है गीतों में.

सन १९६९ की फिल्म दो रास्ते में समय के हिसाब से सारे
मसाले मौजूद हैं. कॉलेज की जिंदगी और संयुक्त परिवार की
जद्दोजहद तक कहानी में काफी मोड दिए गए हैं. फिल्म में
आवश्यक तत्व अर्थात गाने भी काफी मौजूद हैं. फिल्म के
गीत ज़बरदस्त हिट रहे हैं. आज आपको फिल्म का एक
लोकप्रिय गीत सुनवाते हैं जिसे परदे पर मुमताज़ गा रही
हैं और पार्श्व गायन किया है लता मंगेशकर ने.

आनंद बक्षी के लिखे गीत की धुन तैयार की है संगीतकार
जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.



गीत के बोल:

बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी
बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी
तेरी नींद उड़े ते उड़ जाए
कजरा बहकेगा  गजरा महकेगा
कजरा बहकेगा  गजरा महकेगा
माही रूस जाए ते रूस जाए

बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी

मैंने माना  हुआ तू दीवाना  जुलम तेरे साथ हुआ
हो मैंने माना
मैंने माना  हुआ तू दीवाना  जुलम तेरे साथ हुआ
मैं कहाँ ले जाऊं अपनी लौंग का लश्कारा
इस लश्कारे से  आ के द्वारे से
इस लश्कारे से  आ के द्वारे से
चल मुड़ जाए ते मुड़ जाए
बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी

बोले कंगना  किसी का ओ सजना  जवानी पे ज़ोर नहीं
बोले कंगना
रे बोले कंगना  किसी का ओ सजना  जवानी पे ज़ोर नहीं
लाख मना कर ले दुनिया  कहते हैं मेरे घुँघरू
पायल बाजेगी  गोरी नाचेगी
पायल बाजेगी  गोरी नाचेगी
छत टूट दी ये ते टूट जाए
बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी

मैंने तुझसे  मुहब्बत की है  गुलामी नहीं की बलमा
मैंने तुझसे
रे मैंने तुझसे  मुहब्बत की है  गुलामी नहीं की बलमा
दिल किसी का टूटे  चाहे कोई मुझसे रूठे
मैं तो खेलूँगी  मैं तो छेड़ूँगी
मैं तो खेलूँगी  मैं तो छेड़ूँगी
यारी टूटदी ये ते टूट जाए

बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी

मेरे आँगन  बारात ले के साजन  तू जिस रात आएगा
मेरे आँगन 
ओ मेरे आँगन  बारात ले के साजन  तू जिस रात आएगा
मैं ना बैठूँगी डोली में  मैं कह दूँगी बाबुल से
मैं ना जाऊंगी  मैं ना जाऊंगी
मैं ना जाऊंगी  मैं ना जाऊंगी
गड्डी टुर-दी ये ते टुर जाए

बिंदिया चमकेगी  चूड़ी खनकेगी
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Bindiya chamkegi-Do raaste 1969

Artists: Rajesh Khanna, Mumtaz

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Oct 28, 2009

ये रेशमी जुल्फें-दो रास्ते १९६९

ओवर साइज़ चश्मे का फैशन उन दिनों पर जोरों पर था।
एक दाढ़ी वाला लड़का भी रोमांटिक गीत गा सकता है ।
राजेश खन्ना को दाढ़ी में बहुत की कम गानों में देखा है
इसलिए थोड़ा अचम्भा सा होता है उनके फेंस को। ये
एक फेंसी ड्रेस जैसी कुछ प्रतियोगिता हो रही है गाने में
जिसमे हीरो को बड़े बड़े चश्मे के पीछे छिपे हिरोइन के चेहरे
को ढूंढ़ना है और फ़िर गीत गाना है। शरबती शब्द सुनकर
ऑंखें कम और शरबती गेहूं ज्यादा याद आता है जो आजकल
महंगा है और कई जगह के बाज़ारों से गायब है। आप भी इस पोस्ट
की चुटकियों के साथ साथ एक अपने ज़माने के हिट गीत का आनंद
उठायें। गीत पहचानिये किसका लिखा हुआ है ! नाम याद ना आए
तभी इसके टैग पर नज़र डालियेगा। संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का।



गीत के बोल:

ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आँखे
इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी

जो ये आँखे शर्म से जुक जायेगी
सारी, बातें यही बस रुक जायेगी
चुप रहना, ये अफसाना,
कोई इनको ना बतलाना
के इन्हे देखकर पी रहे हैं सभी

ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आँखे
इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी

जुल्फे मगरूर इतनी हो जायेगी
दिल को तड़पायेगी, जी को तरसाएगी
ये कर देंगी दीवाना, कोई इन को ना बतलाना
के इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी

ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आँखे
इन्हे देखकर जी रहे हैं सभी
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Ye resmi zulfen-Do raaste 1969

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