दिल भी क्या चीज़ है, उसे कहीं भी किसी भी चीज़ पर निसार कर दो. कहाँ तो हिंदी फिल्म का नायक कहता है-अपने पांव ज़मीन पर ना रखियेगा मैले हो जायेंगे और कहाँ दिल क़दमों में रखने की बात.
सुनते हैं आशा भोंसले का गाया हुआ एक गीत एस एच बिहारी का लिखा हुआ जिसकी तर्ज़ ओ पी नैयर ने बनाई है.
गीत के बोल:
बा बा बा बा बा बा बा बा बा बा बा बा बा बा
दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे पहले तो दिलरुबा कहियो तो ये ज़रा आपको कितना प्यार है
हो दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे पहले तो दिलरुबा कहिये तो ये ज़रा आपको कितना प्यार है हो दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे
ढूंढती हैं कब से ये मेरी निगाहें मंज़िले वफ़ा की ज़िन्दगी की राहें प्यार न हो तो मेरी आँखों में दिलबर चुभता है प्यारी रातों का मंज़र ये जीना बेकार है
हो दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे पहले तो दिलरुबा कहिये तो ये ज़रा आपको कितना प्यार है दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे
ताजमहल से ये ले लो तुम गवाही प्यार ने जहाँ में की है बादशाही आज भी उल्फ़त का है दिल ये दीवाना फिर भी न जाने क्यों ये ज़ालिम ज़माना क्यूँ बेजार है
दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे पहले तो दिलरुबा कहिये तो ये ज़रा आपको कितना प्यार है दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे दिल जनाब के कदमों में हम निसार तो कर देंगे ………………………………………………… Dil janaab ke kadmon mein-The Killers 1969
ओ पी नैयर यूँ ही नहीं शम्सुल हुदा बिहारी की तारीफ
किया करते थे. एस एच बिहारी की लेखनी में आपको
वो सब मिलेगा जो किसी भी दूसरे नामचीन शायर या
गीतकार के लेखन में है. सरलता एस एच बिहारी का
मजबूत पक्ष है.
सन १९६९ की फिल्म द किलर्स से अगला गीत सुनते हैं
आशा भोंसले का गाया हुआ. इसका संगीत नैयर ने तैयार
किया है. गीत का शब्द सामन ना जाने क्यूँ साबुन सुनाई
देता है. दारा सिंह के हिस्से की एक्टिंग भी हेलन ने कर
ली है इस गाने में.
गीत के बोल:
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
फिर से हमारे जीने का सामान कर दिया
मिल के हमें हुज़ूर से महसूस ये हुआ
मिल के हमें हुज़ूर से महसूस ये हुआ
दुनिया में और कुछ भी नहीं प्यार के सिवा
सब कुछ वफ़ा के नाम पे कुर्बान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
बेचैन थी हमारी नज़र आपके बगैर
बेचैन थी हमारी नज़र आपके बगैर
मुश्किल था ज़िन्दगी का सफ़र आपके बगैर
बाहों में ले के आपने आसान कर दिया
नज़रे मिला के आपने एहसान कर दिया
फिर से हमारे जीने का सामान कर दिया
……………………………………………..
Nazren mila ke aapne- The Killers 1969
इंतक़ाम नायिका प्रधान फिल्म है जिसे ख़ास तौर
पर साधना के लिए बनाया गया था. ये फिल्म का
सबसे खूबसूरत गीत है कई मायनों में.
इसके बोल, दृश्यावली, फिल्मांकन और संगीत सभी
मनमोहक हैं. ऐसी लार्जर देन लाइफ वाली तस्वीरों
को बड़े परदे पर देखने में ही आनंद आता है. छोटे
टिकट साइज़ के स्क्रीन पर भैंस भी छोटी दिखती
है और ध्यान से ना देखो तो बकरी नज़र आती है.
सुनते हैं मधुर गीत लता मंगेशकर की आवाज़ में
जिसकी रचना की है राजेंद्र कृष्ण ने.
गीत के बोल:
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
आ जा मिल के बाँट लें हो ओ ओ
क्या खुशियां क्या ग़म
हो ओ ओ आ जा मिल के बाँट लें हो ओ ओ
क्या खुशियां क्या ग़म
तन्हा तन्हा तन्हाई का ज़हर पियें क्यूँ हम
तू मेरे जीवन का पंछी मैं तेरी परवाज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
दो दिन का साथ नहीं हो ओ ओ
सारी उम्र का है साथ हो ओ ओ
दो दिन का साथ नहीं हो ओ ओ
सारी उम्र का हैं साथ
जीते जी न होंगे जुदा ये आज मिले जो हाथ
तू मेरे साँसों का मालिक मैं तेरी दम साज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
तू भी मेरा साथी बन जा मैं तेरी हमराज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
गीत तेरे साज़ का तेरी ही आवाज़ हूँ
……………………………………….
Geet tere saaz ka-Inteqam 1969
आम आदमी की भाषा में कहें तो ये गीत उस श्रेणी में आता है-नायिका का भाव खाना. अजब गज़ब सी श्रेणियाँ बन जाती हैं गीतों की जिन्हें देख के अलज़ेबरा की श्रेणियाँ भी शर्मा जाएँ.
सुनते हैं फिल्म प्यार का मौसम से एक गीत जिसे लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने राहुल देव बर्मन की धुन के लिए और इसे गाया है लता मंगेशकर ने.
गीत में विलायती हेलन को धता बताने के लिए नायिका और उसकी टोली यकायक प्रकट हो जाती है और माहौल का देसीकरण हो जाता है.
गीत के बोल:
आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहों में आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहो में
हाय रे गरूर आपका सूझे मुझे भी दिल्लगी हो ओ ओ मैं जो एक दिन तुम्हारी बेतुकी अदा पे हंस पड़ी तुम समझे मैं मरती हूँ तुमपे तुम समझे मैं मरती हूँ तुमपे आपकी समझ को क्या कहूँगी
आ आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहों में
हो तुम किस ख्याल में अरे पूजते है सब यहाँ मुझे हो ओ ओ देखूं सूरत तुम्हारी फुरसत ही कहा मुझे ये भी जानो एहसान मेरा ये भी जानो एहसान मेरा एक बार भी जो देख लूं जी
आ आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहों में आप चाहें मुझको आरज़ू है किसको ऐसे तो जवां ऐसे तो हंसी भी नहीं आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहों में आपसे पड़े है कई राहों में …………………………………………… Aap chahen mujhko-Pyar ka mausam 1969
महुआ एक बहु-उपयोगी पेड़ है जिसके उत्पाद ग्रामीण
अंचल में काफी प्रयोग में लाये जाते हैं. भूख मिटाने के
सामान से ले कर झूमने में मदद करने वाला सामान
भी इसके फलों से तैयार होता है. फूलों के और फलों
के नाम पर अक्सर बच्चों के नाम रखे जाते हैं. इनमें
गुलाब और गुलाबो काफी कॉमन हैं.
सुनते हैं सन १९६९ की फिल्म महुआ से एक गीत जिसे
रफ़ी और आशा ने गाया है. कमर जलालाबादी के बोल हैं
और सोनिक ओमी का संगीत. फिल्म में नायिका का
नाम महुआ है. गीत में भूसे के ढेर ने भी उम्दा अभिनय
किया है.
गीत के बोल:
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी तान है
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी तान है
तू ही मेरी जान है पर थोड़ी सी नादान है
पहला है
हाय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
हाय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
बार बार बार देखूं तोहे पियूं मैं तेरी आँखों के जाम से
प्यार प्यार प्यार हुआ मोहे गई रे मैं तो दुनिया के काम से
हो तेरी भोली भली बतियों ने लूटा
हाय रे तेरी सोयी सोयी अंखियों ने लूटा
ये सोयी सोयी अँखियाँ पुकारें पिया इनको जगाये दे
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी जान है
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी जान है
तू ही मेरी जान है पर थोड़ी सी नादान है
पहला है
हाय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
होय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
नाच नाच नाच नागिन मेरी सुना दे कोई सपनों का राग रे
तान तान तान सुन के तेरी सीने में लगी मीठी सी आग रे
हो रे तेरे दिल में चिंगारी सी जली है
हाय रे गोरी यही यही दिल की लगी है
बुझा ले लगी दिल की बलम कल आये ना आये
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी जान है
मैं हूँ तेरा गीत गोरी तू ही मेरी जान है
तू ही मेरी जान है पर थोड़ी सी नादान है
पहला है
हाय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
हाय पहला है प्यार दैया दैया हाय रे मोहे डर लागे
काहे री तोहे डर लागे
हाय रे मोहे डर लागे
काहे तोहे डर लागे
............................................................
Main hoon tera geet gori-Mahua 1969
इंतकाम फिल्म का निर्देशन आर के नैयर ने किया
था. अपने समय की चर्चित फिल्म बन गई थी जिसमें
एक गीत आ जाने जान का भी बड़ा योगदान है.
फ़िल्म में हेलन पर फिल्माया गया ऐसा एक और गीत
है जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. श्वेत श्याम युग में
हेलन के ऊपर फिल्माए गये और लता द्वारा गाये गीत
गीत काफी हैं मगर वे सब ५० के दशक में ही हैं.
इस बात के अलावा फ़िल्म का कथानक भी और फिल्मों
के रूटीन कथानकों से थोडा अलग है. इसमें भी हालांकि
फ़िल्मी लटके झटके और मसाले मौजूद हैं मगर प्रस्तुति
में काफी मामलों में नयापन है. अभिनेता अशोक कुमार
और रहमान को कहानी में काफी कवरेज है. फ़िल्म का
अंत सुखान्त है और बिछड़े हुए मिल जाते हैं. पुराने
गीले शिकवे भुला कर सब एक हो जाते हैं. अंत भला
तो सब भला.
गीत के बोल:
महफ़िल सोई ऐसा कोई
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई
रात गाती हुई गुनगुनाती हुई
बीत जायेगी यूँ मुस्कुराती हुई
रात गाती हुई गुनगुनाती हुई
बीत जायेगी यूँ मुस्कुराती हुई
सुबह का समां पूछेगा कहाँ
गये मेहमान जो कल थे यहाँ
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई
आज थम के गज़र दे रहा है खबर हा
कौन जाने इधर आये ना सहर
आज थम के गज़र दे रहा है खबर हा
कौन जाने इधर आये ना सहर
किसको पता ज़िन्दगी है क्या
टूट ही गया साज़ ही तो था
महफ़िल सोई ऐसा कोई होगा कहाँ
जो समझे जुबां मेरी आँखों की
महफ़िल सोई
……………………………………………
Mehfil soyi-Inteqam 1969
संगीतकार रवि के बहुत से गाने शादी-ब्याह के अवसर
पर बजाये जाते हैं: उदाहरण के लिए-
बाबुल की दुआएं लेती जा-नीलकमल
मेरा यार बना है दूल्हा-चौदहवीं का चाँद
आज मेरे यार की शादी है-आदमी सड़क का
आपको १९६९ की फिल्म डोली से एक गीत सुनवाते
हैं जिसे महेंद्र कपूर ने गाया है. ये गाना फिल्म का
टाईटल सॉंग भी है. राजेंद्र कृष्ण के बोल है और
इसे अभिनेत्री बबीता पर फिल्माया गया है. गीत
की एक पंक्ति सुहाग रात को भी समर्पित है और
बड़े सोबर तरीके से इस बात को कहा गया है.
गीत के बोल:
डोली चढ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
सामने एक नई जिंदगी है मगर
सामने एक नई जिंदगी है मगर
पीछे गुज़रा हुआ इक ज़माना भी है
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
चूडियाँ दुल्हनों की खनकती रहे
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
ले के पलकों में खुशियों की बारात को
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसे हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
…………………………………………….
Doli chadh ke dulhan sasural chali-Doli 1969
सावन के अंधे को हरा हरा ही सूझता है. प्यार अंधा होता है. अन्धों का हाथी बहुत बड़ा होता है. एक शब्द है एबरेशन.
प्यार में मूली के पत्ता भी पालक नज़र आते हैं इसलिए इस बात में कहानी की नायिका का कोई दोष नहीं कि उसे दो दो चंद क्यूँ नज़र आने लगे.
प्यार के बुखार का का कन्फर्मेशन करने के लिए गाने के बोल भी ऐसे होना चाहिए जो इस बात की पुष्टि करें.
गीत राजेंद्र कृष्ण का है और संगीत रवि का. इसे गा रही हैं आशा भोंसले.
गीत के बोल:
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू मत छेड़ पवन मेरे गेसू अब और किसी की है ये खुशबू देखा है कभी तूने भी उसे जो कर गया मुझपे जादू
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना बदला बदला है ज़माना हर साथ है एक तराना क्यूँ मुझको यकीं आता ही नहीं ये सच है या ख्वाब सुहाना
आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब
आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें आँखों में कटेंगी न रातें अब होंगी किसी से बातें आयेगा कोई लायेगा कोई अब रंग भरी बरसातें आज मैं देखूं जिधर जिधर ना जाने क्यूँ उधर उधर मुझे दो दो चाँद नज़र आयें मेहताब दर मेहताब ………………………………………………………. Aaj main dekhoon jidhar-Doli 1969
प्योर रैप गाने साठ के दशक में शायद किसी को हजम
नहीं होते इसलिए सेमी-रैप सरीखे कुछ ही गीत बने.
लीक से हट कर, मीटर से बाहर और अटपटी लाइनों
वाले गीत बनाना काफी रिस्की होता था. आज के युग
में नहीं है. गीत जिन्हें गुनगुनाने में आसानी हो वही
जनता को ज्यादा लुभाते हैं.
आज सुनते हैं ऐसा ही एक गीत जिसे रफ़ी ने गाया है.
हालांकि गीत तुकबंदी में बंधा है मगर रूटीन गीतों से
अलग है. बोल एक बार फिर से राजेंद्र कृष्ण के हैं और
संगीत रवि का.
गीत के बोल:
दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
फूलों का रस पी पी कर हुस्न पे रंगत आई है
आँख में फितने चाल क़यामत शोख तबीयत पाई है
नागिन जैसी बलखाती बिजली जैसी लहराती
नागिन जैसी बलखाती बिजली जैसी लहराती
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
हंस हंस के ठुकराती जा तड़पेंगे तड़पाती जा
लेकिन ऐ ईमान की दुश्मन इतना तो समझाती जा
हंस हंस के ठुकराती जा तड़पेंगे तड़पाती जा
लेकिन ऐ ईमान की दुश्मन इतना तो समझाती जा
प्यार खड़ा है राहों में कब आयेगी बाहों में
प्यार खड़ा है राहों में कब आयेगी बाहों में
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
दांतों तले दबा कर होंठ आँखें कर के बड़ी बड़ी
खा जायेगी मुझको ऐसे देख रही है खड़ी खड़ी
एक हसीना लगा है जिसको उन्नीस ऊपर एक महीना
उन्नीस ऊपर एक महीना उन्नीस ऊपर एक महीना
…………………………………………………….
Daanton tale daba kar-Doli 1969
फिल्मों के शराबी गीतों में भी अलग अलग फ्लेवर होता है. कोई देसी ठर्रे वाली किक देता है तो कोई बीयर वाला हल्का सुरूर. अब हर गाना तो वाईन और शेम्पेन वाला मज़ा नहीं दे पायेगा. वैसे अधिकांश में आपको व्हिस्की या राम वाला आनंद मिलेगा.
अब ब्रांड मत पूछने लग जाईयेगा मुझसे. और भी किस्में पायी जाती है असव की मगर वो सब जानकारी अंग्रेजी वाले महंगे ब्लॉग पर ढूँढें.
सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत जिसे महेंद्र कपूर और आशा भोंसले ने गाया है संगीतकार रवि की धुन पर.
प्रेम चोपड़ा पर फिल्माए गए कुछ रेयर गानों में से एक है ये.
गीत के बोल:
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से
आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से
सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से होंठों के पैमाने से
गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से या अपने परवाने से टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से या अपने परवाने से …………………………………………… Aaj pila de saaki-Doli 1969
अंदर की रौशनी तो सबसे बढ़िया होती है मगर वो जिंदगी
भर बुझी ही रह जाती है. आदमी नकली रोशनियों के सहारे
अपनी खुशियाँ तलाशता रह जाता है.
फिल्म चिराग का दर्द भरा गीत सुनते हैं रफ़ी की आवाज़
में. बोलों से ये प्रेरणादायी गीत सरीखा लगता है मगर धुन
से दर्दीला गीत समझ आता है. यही कंफ्यूज़न इसकी ब्यूटी
है.
आप लोग कहते हैं हम गानों की तारीफ़ नहीं करते, लो कर
दी जी. शीर्षक गीत खुशनुमा होता तो और भी आनंद आता.
मजरूह सुल्तानपुरी के बोल हैं और मदन मोहन का संगीत.
गीत के बोल:
चराग दिल का जलाओ बहुत अँधेरा है
.
.
.
..
..........................................................
Chirag dil ka jalao-Chirag 1969
हिंदी सिनेमा काफी समय तक पुरुष प्रधान सोच को
ही परदे पर दर्शाता रहा. त्याग, समर्पण, स्नेह, प्रेम
जैसे भाव नारियों के ही लिए हैं ये बतलाता रहा. कुछ
गिनी चुनी ही फ़िल्में आईं जिनमें वो प्रगतिशील दिखलाई
दी.
अनेक फिल्मों में सामाजिक कुरीतियों जैसे दहेज प्रथा
को दिखलाया जाता रहा मगर समस्या पूर्ती के अभाव
के साथ. विधवा विवाह पर भी कुछ सार्थक फ़िल्में बनी
मगर उनमें भी अभिव्यक्ति की हिचक कायम रही. फिल्म
का कमर्शियल पहलू कई बार विद्रोह और समाज सुधार
को दबे शब्दों में और प्रतीकात्मक तरीके से समझाता
है. इस डर से कि फिल्म की लागत निकालना मुश्किल
ना हो जाये.
इस फिल्म की नायिका समय के हिसाब से थोडा आगे
है और वो नौकरी भी करती है. घुट घुट के जीने और
रो कर जिंदगी गुज़ारने में उसका विश्वास नहीं है.
सुनते हैं आशा भोंसले की आवाज़ में ये मनोरंजक गीत
गीत के बोल:
हा हा हा हा
ना ना ना
पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम
शाम सवेरे मेरी गली के सौ सौ फेरे क्या मतलब
अच्छी सूरत जहाँ भी देखी डाले डेरे क्या मतलब
शाम सवेरे मेरी गली के सौ सौ फेरे क्या मतलब
अच्छी सूरत जहाँ भी देखी डाले डेरे क्या मतलब
दिल भी देख लिया होता और फिर प्यार किया होता
तुम जैसे ही नाम वफ़ा का करते हैं बदनाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम
दिल के दरिया कितने गहरे नया खिलाड़ी क्या जाने
क्या होता है प्यार का जज़्बा कोई अनाड़ी क्या जाने
दिल के दरिया कितने गहरे नया खिलाड़ी क्या जाने
क्या होता है प्यार का जज़्बा कोई अनाड़ी क्या जाने
दिल घायल जब होता है प्यार जवां तब होता है
बहा बहा के फूल के आंसू भरता है ये जाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम फिर बतलाओ अपना नाम
अदब से बोलो क्या है नाम ओ मिस्टर गुलफ़ाम
याल्ला लू
पहले झुक कर करो सलाम
……………………………………………………..
Pehle jhuk kar karo salam-Doli 1969
ये गीत ऐसा है जिसमें बहारों का जिक्र है मगर थोडा सा ही सही दुःख का भाव भी है. इसे आप चाहें तठस्थ भाव वाला गीत भी कह सकते हैं. ऐसे गीत फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से रचे जाते हैं मगर लोकप्रिय भी हो जाया करते हैं.
प्रस्तुत गीत उतना लोकप्रिय नहीं मगर लक्ष्मी प्यारे ने रफ़ी के लिए जितने भी क्वालिटी गाने रचे हैं उनमें से एक है. मजरूह सुल्तानपुरी इसके रचनाकार हैं और संगीतकार का नाम हम आपको बतला ही चुके हैं.
गीत के बोल:
आई बहारों की शाम आई बहारों की शाम क्या जाने फिर किसके नाम ठंडी हवा भीगी फिज़ा लायी है फिर किसका सलाम आई बहारों की शाम क्या जाने फिर किसके नाम आई बहारों की शाम
सितारों ने बाँधा गगन पर समां जैसे खिलते गुलों का सितारों ने बाँधा गगन पर समां जैसे खिलते गुलों का
सूनसान सपनों भरी वादियों में चांदनी से सजे रास्तों का घटा ने किया इंतज़ाम क्या जाने फिर किसके नाम आई बहारों की शाम
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
मैं गाता हूँ किस दिलरुबा की मोहब्बत के रंगीन तराने मैं गाता हूँ किस दिलरुबा की मोहब्बत के रंगीन तराने कौन आनेवाला है तन्हाइयों में चुपके चुपके ये दिल में ना जाने धडकता है किसका पयाम क्या जाने फिर किसके नाम
आई बहारों की शाम क्या जाने फिर किसके नाम ठंडी हवा भीगी फिज़ा लायी है फिर किसका सलाम आई बहारों की शाम क्या जाने फिर किसके नाम आई बहारों की शाम ………………………………………………………. Aayi baharon ki shaam-Wapas 1969
बहुत दिन हो गए किसी रागा और सागा की बात किये. आज ‘आर फॉर रागा’ की बात कर लेते हैं. तो सुनिए सन १९६९ की फिल्म वापस से एक गीत जिसे नायक स्टेज पर गा रहा है.
गीत मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ है जिसकी धुन तैयार की है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने. इसे रफ़ी ने गाया है. फिल्म मधुर गीतों के बावजूद ज्यादा नहीं चली.
गीत के बोल:
पैंजनिया छनके राम पैंजनिया छनके राम पैंजनिया पैंजनिया ओ छनके राम बिजुरिया चमक चमक रह जाए पैंजनिया छनके राम
होंठ ना खोले पलकों से बोले होंठ ना खोले पलकों से बोले एक पग रोके एक पग डोले के जियरा धडका धड़क रह जाए पैंजनिया छनके राम पैंजनिया छनके राम
झुमका उलझा आँचल सरका झुमका उलझा आँचल सरका बोझ पड़ा जो हमरी नज़र का बोझ पड़ा जो हमरी नज़र का कमरिया लचक लचक रह जाए पैंजनिया छनके राम पैंजनिया छनके राम पैंजनिया छनके राम ए ए ए छनके राम छनके राम छनके राम छनके राम पैंजनिया छनके राम छनके राम …………………………………………………………… Painjaniya chhanke Ram-Wapas 1969
आशा भोंसले से संगीतकारों ने कई नायाब गीत गवाए हैं. ये बात
और है कि उनके कई मधुर गीत प्रसिद्धि के मामले में पीछे रह
गए. हर गाना ठाकुर जरनैल सिंह फिल्म के गाने-हम तेरे बिन
जी ना सकेंगे सनम जैसा नहीं होता जो कि फिल्म का अता पता
मालूम ना होने के बावजूद आम जनता को बेहद पसंद आया और
आज भी इस गाने के मुरीद मौजूद हैं.
यू ट्यूब के आविष्कार को पूरे १४ वर्ष हो चुके हैं. इसके पहले तक
फिल्मों को देख पाना आसान नहीं था. आज तो कम्पनियाँ खुद
अपनी फ़िल्में यू ट्यूब पर डाल रही हैं और जनता को आसानी से
फ़िल्में देखने को मिल जाती हैं. हमारे यहाँ इन्टरनेट बैलगाडी की
गति से थोडा ऊपर उठ कर साइकिल और मोपेड पर आ चुका है.
बफेलो और बफरिंग अभी कुछ समय और साथ साथ चलेंगे.
एक फिल्म जिसे देख पाना दुर्लभ अनुभव था-संजीव कुमार और
तनूजा अभिनीत गुस्ताखी माफ. इसमें एक दो कर्णप्रिय गीत हैं.
आपको मैं पहले वो सुनवाऊंगा जिसे मैंने पहले पहल सुना था काफी
साल पहले. नक्श लायलपुरी के बोल हैं. लायलपुर के मिटटी पकड़
पहलवान हैं वे. साहित्य के एलेमेंट्स को जिंदा रखने वाले कुछ
चुनिन्दा फ़िल्मी गीतकारों में गिने जाते हैं.
इस गीत में तनूजा अपनी नपी तुली अभिनय क्षमता में जो भी कुछ
संभव है कर रही हैं. उनके चेहरे की बनावट ही ऐसी है/थी कि उनके
लिए ज्यादा उतार चढ़ाव ला पाना या भाव भंगिमाएं बना पाना आसान
ना था. हालांकि इस मामले में उन्होंने काफी सुधार किया और मेरे
हिसाब से सन १९७२ की फिल्म दो चोर में उनका अभिनय बेहतर
दिखाई दिया. कैरियर के उत्तरार्ध में उनका अभिनय बेहतर नज़र
आता है और उसकी वजह चेहरे पर उम्र का असर होना रहा जिससे
उन्हें भाव उभारने में काफी सहूलियत मिली. बूढा कोई नहीं होना
चाहता. आयु की ये अवस्था जीवनचक्र का हिस्सा है जिससे कोई भी
अछूता नहीं रहा. सच यही है. उम्र के इस पड़ाव में जैसा कि सबके
साथ होता आया है और आगे होता रहेगा-उन्हें चरित्र भूमिकाएं ही मिलीं.
अभिनय में निरंतरता बनाये रखना काफी दुष्कर कार्य होता है फिल्मों
में काम करते वक्त. फिल्म के शॉट्स एक सीक्वेंस में नहीं लिए जाते.
कभी फिल्म का आखिरी शॉट पहले फिल्म लिया जाता है. कभी कोई
गीत को फिल्माने में १० दिन लग जाते हैं. मान लीजिए कोई रेगिस्तान
का दृश्य है और गीत के पहले अंतरे में नायक का चेहरा स्वस्थ सा
लग रहा है और गीत के तीसरे अंतरे तक जुकामी सा दिखाई देने लगे,
इसकी वजह गीत के २ दिन के फिल्मांकन के बाद नायक को जुकाम
हो जाना भी होता था. ये भावान्तर आपको कुशल निर्देशकों के कार्य में
कम मिलेगा.
इस गीत की शुरुआत नायिका के चहरे के क्लोज़ अप शॉट के साथ
शुरू होती है. जैसे जैसे कैमरा दूर होता जाता है भाव धुधले से होने
लग पढते हैं. जब नायिका अंतरा गाना शुरू करती है तो झाडियों में
से प्रकट होने के साथ उसके चेहरे पर आते हुए दुखद तटस्थता के
भाव धीमे धीमे नायक के कंधे से चिपटते ही खामोश राहत में
तब्दील होने लगते है. हालांकि किंचित सा संदेह अभी भी नायिका के
चेहरे पर है. नींदें चुरा लेंगे, ख्वाबों में घुल जायेंगे जैसे सिहराने वाले
बोल सुन कर नायक एक बारगी चौंक जाता है और नायिका की ओर
कुतूहल से देखता है. नायक बेचैन सा हो कर चल देता है और नायिका
प्रश्नवाचक दृष्टि घुमाते हुए पीछे चलते हुए संदेह में भय घोल कर दूसरा
अंतरा शुरू करती है. फिर होता है भावनात्मक आक्रमण और पलकों पर अश्क बन कर लहराने और दामन में सो जाने की बात. इससे नायक का
ह्रदय थोडा द्रवित होता है और वो नायिका को गले से लगा लेता है.
एक निश्चित अलगाव वाले विचार से क्षण भर ही सही मुक्त हो कर नायक
नायिका के आलिंगन को स्वीकारता है फिर दूर छिटक जाता है.
वैचारिक द्वन्द में आदमी तथ्य भूल जाता है तब उसे कुछ बातें याद
दिलाना पढ़ती हैं. तीसरे अंतरे में ऐसा ही कुछ हो रहा है जिसमें नायिका
नायक की नम हुई आँखों और कातरता को भांपते हुए उसे जिंदगी की
कसम देती है और उससे पहल करने का निवेदन करती है. सरल शब्दों में
इससे खूबसूरत तरीका नहीं मिल सकता जब कहा जाए-हम दूर तक आ गये तुम भी चलो दो कदम. प्रेम में प्रतिबद्धता का चरम है यह.
परामर्शपूर्वक निवेदन के प्रत्युत्तर में अपेक्षा है सार्थक पहल की.
गीत प्रश्न में ही खत्म हो जाता है. दो कदम चलने की प्रक्रिया की
पूर्णता है. यह एक इकाई है जिसमें दोनों पांव बराबर दूरी तय करते हैं.
संजीव कुमार को नैसर्गिक कलाकार कहा जाता है. उन्हें रीटेक की ज़रूरत ना के बराबर पड़ती थी. गीत का प्रभाव उनके चहरे पर कशमकश खत्म होने के बाद आने वाली तड़प के फॉर्म में आ ही जाता है. इस गीत का फिल्मांकन बेहतरीन है. किसी भी चीज़ का ओवरडोज नहीं है. इसी गीत की धुन को संगीतकार ने सन १९८५ की फिल्म अम्बर में पुनः प्रयोग किया है और किशोर कुमार से वो गीत गवाया है जिसे हम बाद में सुनेंगे.
गुस्ताखी माफ फिल्म के फोटोग्राफी डायरेक्टर हैं राजकुमार भाखरी,
कैमरामेन एस एल शर्मा और उनके सहायक द्वारका और फिल्म के
एडिटर श्याम. इस गीत को नक्श लायलपुरी ने लिखा है और इस
गीत के संगीतकार हैं सपन-जगमोहन.
भूल चूक लेनी देनी
गीत के बोल:
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे
जितना भुलाओगे तुम उतना ही याद आयंगे
नींदें चुरा लेंगे हम ख्वाबों में घुल जायेंगे
ख्वाबों में घुल जायेंगे तड़पेंगे तड़पायेंगे
हो ओ ओ ओ
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे
दिल की लगी बन के हम दिल में सुलग जायेंगे
पलकों पे आ कर कभी अश्कों में लहरायेंगे
अश्कों में लहरायेंगे दामन में सो जायेंगे
हो ओ ओ ओ
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे
खुद पे ना ढाओ सितम तुम्हें जिंदगी की कसम
हम दूर तक आ गये तुम भी चलो दो कदम
तुम भी चलो दो कदम मेरे सनम कम से कम
हो ओ ओ ओ
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे दामन बचाओगे कैसे
हमें तुम भुला ना सकोगे
तुम दूर जाओगे कैसे
......................................................................
Tum door jaoge kaise-Gustakhi Maaf 1969
बैयाँ शब्द किसी गीत के मुखड़े में प्रकट हो इसकी
सम्भावना कम होती है. गीतकार मुखड़े में ऐसे शब्दों के
प्रयोग से बचता है. पांव शब्द से कितने गीत शुरू होते
हैं? बस एक पुरानी फिल्म ताजमहल में है.
बैयाँ शब्द दस्तक फिल्म के एक गाने में आता है जो
इसके अगले साल रिलीज़ हुई थी. वो गाना ही इस शब्द
से शुरू होता है.
दोनों गीतकार ही दिग्गज गीतकार हैं फिल्म जगत के.
प्रस्तुत गीत के लेखक है राजेंद्र कृष्ण.
गीत के बोल:
मोरे सैयां पकडे बैयाँ
मोसे झगड़ा करे आधी रात
फिर सारी रात पैयां दबाये मोरी
मोसे झगड़ा करे आधी रात
फिर सारी रात पैयां दबाये मोरी
……………………………………………
More saiyan pakde baiyan-Sachchai 1969
जब जब मानव पर संकट आता है, कोई राह नहीं
सूझती तब तब वो भगवान को याद करता है. फिल्म
के कथानक में भी नायिका के सम्मुख ऐसी कठिन
घडी आई कि उसे भगवन की शरण में जाना पड़ा.
इस गीत के अंत में भी दर्द भरी शहनाई की चीत्कार
है. चीत्कार पुकार से आगे की बात है. एक लंबा संगीत
का ऐसा ही टुकड़ा फिल्म के शीर्षक गीत के अंत में भी
है.
गीत के बोल:
भगवान भगवान भगवान भगवान
प्यार मेरा जो तूने लूटा समझूंगी भगवान है झूठा
सबको नाच नचाने वाले सोच ले
आज तेरा इम्तहान है सोच ले
आज तेरा इम्तहान है
भगवान
एक थी बहुला नारी
तूने उसका लछिंदर दे ही दिया
सच्चा सावित्री का प्यार था
उसने यम से पिया को तो ले ही लिया
प्यार सच्चा मेरा दे रहा है सदा
इसे छीनेगा कैसे तू सोच ले
ये तो मेरा सत्यवान है सोच ले
आज तेरा इम्तहान है
प्यार मेरा जो तूने लूटा समझूंगी भगवान है झूठा
सबको नाच नचाने वाले सोच ले
आज तेरा इम्तहान है सोच ले
आज तेरा इम्तहान है
भगवान
अनुसूईया थी प्रेम प्यासी
रोगी प्रीतम को उसने बचा ही लिया
सीता थी रघुवर की प्यारी
उसने रावण से आँचल छुडा ही लिया
देख ले भर गया अब घड़ा पाप का
पापी रावण की शक्ति को नोच ले
तू तो सर्वशक्तिमान है
पापी रावण की शक्ति को नोच ले
तू तो सर्वशक्तिमान है
भगवान भगवान भगवान
………………………………………..
Pyar mera jo tone loota-Mahua 1969
ख्याल अच्छा है कि बिकता सजन मिल जाये. ऐसा
शब्द या विचार आपको शायद किसी और गीत में मिले
या ना मिले दावे से नहीं कहा जा सकता. हमारी सीमित
जानकारी के अनुसार तो ऐसे बोल हमने और किसी गाने
में नहीं सुने.
सुनते हैं आशा भोंसले और उषा टिमोथी का गाया हुआ
ये बेहतरीन गीत फिल्म महुआ से. सोनिक ओमी के
संगीत से सजी इस फिल्म में कुछ शानदार गीत हैं जिनमे
‘मेरी महुआ’ भी शामिल है.
सावन भादो फिल्म के गानों के प्रेमियों को एक बार इस
फिल्म के गाने ज़रूर सुनना चाहिए. गाने के बीच में एक
संवाद है-जी चाहता है एक सौ पचास टुकड़े काट डालूँ.
गीत के बोल:
मोहे बिकता सजन मिल जाये
हाय रे मोहे बिकता सजन मिल जाये
तो ले लूं इसे जान बेच के हाय
मैं ले लूं इसे जान बेच के
ऐसे सौदे में पहले दिल जाये
हो ऐसे सौदे में पहले दिल जाये
मिले न पिया जान बेच के हो
मिले न पिया जान बेच के
प्रीत नगरी की ऐसी ही रीत है
प्रीत नगरी की ऐसी ही रीत है
जो भी हारा यहाँ उसकी ही जीत है
हो ओ जो भी हारा यहाँ उसकी ही जीत है
जाऊं तुझपे मैं वारी रब्बा हाय हाय
ऐसा तीर लगा कारी रब्बा हाय हाय
जाऊं तुझपे मैं वारी ऐसा तीर लगा कारी
तुझे देखूं तो दिल हिल जाये
मैं ले लूं इसे जान बेच के
मिले न पिया जान बेच के
मोहे बिकता सजन मिल जाये
हाय रे मोहे बिकता सजन मिल जाये
तो ले लूं इसे जान बेच के हाय
मैं ले लूं इसे जान बेच के
मीठी मीठी मुरलिया बजाये जा
मीठी मीठी मुरलिया बजाये जा
मेरी पायल को नगमे सिखाये जा
हो ओ मेरी पायल को नगमे सिखाये जा
यही मेरा है इरादा रब्बा हाय हाय
बनूँ श्याम की मैं राधा रब्बा हाय हाय
यही मेरा है इरादा बनूँ श्याम की मैं राधा
सैयां नैनों में घुल-मिल जाये
मैं ले लूं इसे जान बेच के
मिले न पिया जान बेच के
मोहे बिकता सजन मिल जाये
हाय रे मोहे बिकता सजन मिल जाये
तो ले लूं इसे जान बेच के हाय
मैं ले लूं इसे जान बेच के
ऐसे सौदे में पहले दिल जाये
हो ओ ऐसे सौदे में पहले दिल जाये
मिले न पिया जान बेच के हो
मिले न पिया जान बेच के
……………………………………………………..
Mohe bikta sajan mil jaaye-Mahua 1969
सन १९६९ की फिल्म धरती कहे पुकार के एक गांव की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म है जिसमें सार यही है अपनी जड़ों से जुड़े रहो चाहे प्लूटो के सैर ही क्यूँ ना कर आओ.
फिल्म की कहानी बी आर इशारा ने लिखी है. ये कुछ चौंकाने वाला सा है क्यूंकि बी आर इशारा अलग-हट-के फ़िल्में बनाते रहे हैं. फिल्म का निर्देशन दुलाल गुहा ने किये है और इसमें आपको तरुण बोस भी दिखलाई देंगे. इस अच्छे कलाकारों के जमावड़े वाली फिल्म को जनता का खूब प्यार मिला. इसके गाने भी लाजवाब हैं.
फिल्म का शीर्षक गीत रफ़ी का गाया हुआ है. गीत में सन्देश छुपा हुआ है. हम गीत ध्यान से सुनें तो पायेंगे कि ये हमें अपनी मिटटी से प्यार करने के लिए प्रेरित करता है.
गीत के बोल:
हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो हो धरती कहे पुकार के धरती कहे पुकार के ओ मुझको चाहने वाले किसलिए बैठा हार के मेरा सब कुछ उसी का है जो छू ले मुझको प्यार से धरती कहे पुकार के धरती कहे पुकार के
है अजब सी बात जिस पर मुझको हंसना आये है अजब सी बात जिस पर मुझको हंसना आये जो मुझी से है वो मेरी माटी से शरमाये आ पास मेरे मतवाले भरम ये क्यूँ बेकार के मेरा सब कुछ उसी का है जो छू ले मुझको प्यार से धरती कहे पुकार के धरती कहे पुकार के
आबरू जग में उसकी जो बस इतना जाने आबरू जग में उसकी जो बस इतना जाने हल चले इक हाथ से इक हाथ कलम को थामे फिर शीश झुकेंगे सारे ही संसार के मेरा सब कुछ उसी का है जो छू ले मुझको प्यार से
धरती कहे पुकार के धरती कहे पुकार के ओ मुझको चाहने वाले किसलिए बैठा हार के मेरा सब कुछ उसी का है जो छू ले मुझको प्यार से धरती कहे पुकार के धरती कहे पुकार के ……………………………………………… Dharti kahe pukar ke-Titlesong 1969
हमने एक पिछली पोस्ट में बात की थी जिमें गीतकार
राजेंद्र कृष्ण के साथ शंकर जयकिशन की गीतों की
संख्या पर बात की थी. शैलेन्द्र के जाने के बाद जो
रिक्तता आई उससे सबसे ज्यादा असर शंकर जयकिशन
की जोड़ी पर पड़ा. उनके संगीत को शैलेन्द्र और हसरत
की जोड़ी सम्पूर्णता तक पहुंचाती थी.
गीत के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिनसे गीत बढ़िया
बनता है. आपसी ट्यूनिंग, मूड, वातावरण, अच्छे साजिन्दे,
अच्छे सहायक और उम्दा गायक. फिल्मकार संगीत का
जानकार हुआ तो बेहतर धुनें बनवा लेता है. राज कपूर
और देव आनंद इसके बढ़िया उदाहरण हैं.
फिल्म के निर्देशक के शंकर हैं जिन्होंने सन १९६२ की
झूला का निर्देशन भी किया था. इसके अलावा १९६४ की
राजकुमार में भी शंकर जयकिशन ने संगीत दिया है.
झूला के संगीतकार हैं सलिल चौधरी आर आपको मन्ना डे
का अविस्मरणीय गीत-एक समय पर दो बरसातें तो
याद होगा ही.
ये गीत साधना को ही समर्पित है. इसमें उनकी नृत्य कला
और भाव अदायगी और सौंदर्य का भरपूर ध्यान रखा गया
है. अलग अलग गेट अप के अलावा तरह तरह के सेट गीत
का आकर्षण हैं. साधना के इतने ज्यादा क्लोज़ अप शॉट
आपको राज खोसला की फिल्मों में मिलेंगे.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.
गीत के बोल:
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
धीरे धीरे टूट रही आस मेरे प्यार की
आये न अब तक बलमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
तेरी यादो को दिल से लगाये हुए
कब से बैठी हूँ अंखिया बिछाये हुए
तेरी यादो को दिल से लगाये हुए
कब से बैठी हूँ अंखिया बिछाये हुए
जाने वाले जुदाई में तेरी मुझे
जाने वाले जुदाई में तेरी मुझे
एक जमाना हुआ मुस्कुराये हुये
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
भीगे सावन में दिल मेरा जलता रहा
तेरा गम मेरे सीने में पलता रहा
भीगे सावन में दिल मेरा जलता रहा
तेरा गम मेरे सीने में पलता रहा
मैं खड़ी ही रही दिल को थामे हुए
मैं खड़ी ही रही दिल को थामे हुए
दर्द बिरहा का करवट बदलता रहा
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
एक दिन आ के वादा निभाओगे तुम
मन के उजड़े नगर को बसाओगे तुम
एक दिन आ के वादा निभाओगे तुम
मन के उजड़े नगर को बसाओगे तुम
जी रही हूँ अभी तक इसी आस पर
जी रही हूँ अभी तक इसी आस पर
आ के सीने से मुझको लगाओगे तुम
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
धीरे धीरे टूट रही आस मेरे प्यार की
आये न अब तक बलमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
……………………………………………..
Beet chali haaye Ram-Sachchai 1969