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Feb 21, 2018

हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई-लीडर १९६४

प्यार मोहब्बत में नोक झोंक तो होती ही है. फिल्म लीडर
से एक रफ़ी का गाया गीत सुनते हैं. शकील बदायूनीं के
गीत की तर्ज़ बनाई है नौशाद ने.

जैसे प्यार मोहब्बत में सब जायज है वैसे ही हिंदी फ़िल्मी
गीतों की पंक्तियों में भी सब कुछ जायज है. अब कोई दूसरी
पंक्ति के शब्द ‘कर’ को ‘पर’ लिख दे तो इसका अर्थ कोई
सुपर-ज्ञानी ही समझ सकता है. ये अंतर ढेर सारी आँख मूँद
के बनाई गयी वेबसाइटों पर नज़र नहीं आता है.

उधर तुमने तीर-ए-नज़र दिल पे मारा
इधर हमने भी जान कर चोट खाई



गीत के बोल:

हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई
अभी नासमझ हो उठाओ न खंजर
अभी नासमझ हो उठाओ न खंजर
कहीं मुड़ न जाये तुम्हारी कलाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई

सितम आज मुझ पर जो तुम ढा रही हो
बड़ी खूबसूरत नज़र आ रही हो
ये जी चाहता है के खुद जान दे दूँ
ये जी चाहता है के खुद जान दे दूँ
मुहब्बत में आये न तुम पर बुराई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई

हमें हुस्न की हर अदा है गवारा
हसीनों का ग़ुस्सा भी लगता है प्यारा
उधर तुमने तीर-ए-नज़र दिल पे मारा
उधर तुमने तीर-ए-नज़र दिल पे मारा
इधर हमने भी जान कर चोट खाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई

करो खून तुम यूँ न मेरे जिगर का
बस इक वार काफ़ी है तिरछी नज़र का
यही प्यार को आज़माने के दिन हैं
यही प्यार को आज़माने के दिन हैं
किये जाओ हमसे यूँ ही बेवफ़ाई
हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ
अभी नासमझ हो उठाओ न खंजर
अभी नासमझ हो उठाओ न खंजर
कहीं मुड़ न जाये तुम्हारी कलाई
अरे मार डाला दुहाई दुहाई
..................................................................
Hamin se mohabbat-Leader 1964

Artists: Dilip Kumar, Vaijayantimala

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Dec 4, 2016

मुझे दुनिया वालों शराबी-लीडर १९६४

पानी तेरे रंग अनेक. वैसे ही दारू तेरे रंग अनेक. अलग अलग
फ्लेवर और कलर में आती है. काम सबका एक ही है, झुमाना.
शराब पीने के कई बहाने होते हैं मदिरा प्रेमियों के पास. पीने
के बाद ये बहाने ज्यादा सुनने को मिलते हैं.

एक ऐसा गीत जिसमे सफाई पेश की जा रही है फिल्म लीडर
से आपको सुनवाते हैं. शकील बदायूनीं का लिखा और नौशाद
का संगीतबद्ध गीत रफ़ी ने गाया है. इसे रफ़ी ने बहुत से स्टेज
शो में गाया था और इस बात से शायद ये अनुमान लगाया जा
सकता है कि ये रफ़ी का एक पसंदीदा गीत था.




गीत के बोल:

मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो
मैं पीता नहीं हूँ पिलाई गई है
जहाँ बेखुदी में कदम लड़खड़ाये
वो ही राह मुझको दिखाई गई है

नशे में हूँ लेकीन मुझे ये खबर है
के इस ज़िन्दगी में सभी पी रहे हैं
किसी को मिले हैं छलकते प्याले
किसी को नजर से पिलाई गई है

मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो
मैं पीता नहीं हूँ पिलाई गई है

किसी को नशा है जहां में खुशी का
किसी को नशा है गम-ए-ज़िन्दगी का
कोई पी रहा है, लहू आदमी का
हर इक दिल में मस्ती रचाई गई है

मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो
मैं पीता नहीं हूँ पिलाई गई है

ज़माने के यारों चलन हैं निराले
यहा तन हैं उजले मगर दिल हैं काले
ये दुनिया है दुनिया यहाँ मालोज़र में
दिलों की खराबी छुपाई गई है

मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो
मैं पीता नहीं हूँ पिलाई गई है
जहाँ बेखुदी में कदम लड़खड़ाये
वो ही राह मुझको दिखाई गई है
...........................................................................
Mujhe duniya walon sharabi-Leader 1964

Artists: DIlip Kumar, Vaijayantimala

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