बैयाँ शब्द किसी गीत के मुखड़े में प्रकट हो इसकी
सम्भावना कम होती है. गीतकार मुखड़े में ऐसे शब्दों के
प्रयोग से बचता है. पांव शब्द से कितने गीत शुरू होते
हैं? बस एक पुरानी फिल्म ताजमहल में है.
बैयाँ शब्द दस्तक फिल्म के एक गाने में आता है जो
इसके अगले साल रिलीज़ हुई थी. वो गाना ही इस शब्द
से शुरू होता है.
दोनों गीतकार ही दिग्गज गीतकार हैं फिल्म जगत के.
प्रस्तुत गीत के लेखक है राजेंद्र कृष्ण.
गीत के बोल:
मोरे सैयां पकडे बैयाँ
मोसे झगड़ा करे आधी रात
फिर सारी रात पैयां दबाये मोरी
मोसे झगड़ा करे आधी रात
फिर सारी रात पैयां दबाये मोरी
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More saiyan pakde baiyan-Sachchai 1969
हमने एक पिछली पोस्ट में बात की थी जिमें गीतकार
राजेंद्र कृष्ण के साथ शंकर जयकिशन की गीतों की
संख्या पर बात की थी. शैलेन्द्र के जाने के बाद जो
रिक्तता आई उससे सबसे ज्यादा असर शंकर जयकिशन
की जोड़ी पर पड़ा. उनके संगीत को शैलेन्द्र और हसरत
की जोड़ी सम्पूर्णता तक पहुंचाती थी.
गीत के अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिनसे गीत बढ़िया
बनता है. आपसी ट्यूनिंग, मूड, वातावरण, अच्छे साजिन्दे,
अच्छे सहायक और उम्दा गायक. फिल्मकार संगीत का
जानकार हुआ तो बेहतर धुनें बनवा लेता है. राज कपूर
और देव आनंद इसके बढ़िया उदाहरण हैं.
फिल्म के निर्देशक के शंकर हैं जिन्होंने सन १९६२ की
झूला का निर्देशन भी किया था. इसके अलावा १९६४ की
राजकुमार में भी शंकर जयकिशन ने संगीत दिया है.
झूला के संगीतकार हैं सलिल चौधरी आर आपको मन्ना डे
का अविस्मरणीय गीत-एक समय पर दो बरसातें तो
याद होगा ही.
ये गीत साधना को ही समर्पित है. इसमें उनकी नृत्य कला
और भाव अदायगी और सौंदर्य का भरपूर ध्यान रखा गया
है. अलग अलग गेट अप के अलावा तरह तरह के सेट गीत
का आकर्षण हैं. साधना के इतने ज्यादा क्लोज़ अप शॉट
आपको राज खोसला की फिल्मों में मिलेंगे.
गीत आशा भोंसले ने गाया है.
गीत के बोल:
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
धीरे धीरे टूट रही आस मेरे प्यार की
आये न अब तक बलमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
तेरी यादो को दिल से लगाये हुए
कब से बैठी हूँ अंखिया बिछाये हुए
तेरी यादो को दिल से लगाये हुए
कब से बैठी हूँ अंखिया बिछाये हुए
जाने वाले जुदाई में तेरी मुझे
जाने वाले जुदाई में तेरी मुझे
एक जमाना हुआ मुस्कुराये हुये
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
भीगे सावन में दिल मेरा जलता रहा
तेरा गम मेरे सीने में पलता रहा
भीगे सावन में दिल मेरा जलता रहा
तेरा गम मेरे सीने में पलता रहा
मैं खड़ी ही रही दिल को थामे हुए
मैं खड़ी ही रही दिल को थामे हुए
दर्द बिरहा का करवट बदलता रहा
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
एक दिन आ के वादा निभाओगे तुम
मन के उजड़े नगर को बसाओगे तुम
एक दिन आ के वादा निभाओगे तुम
मन के उजड़े नगर को बसाओगे तुम
जी रही हूँ अभी तक इसी आस पर
जी रही हूँ अभी तक इसी आस पर
आ के सीने से मुझको लगाओगे तुम
बीत चली हाय राम रुत ये बहार की
आये ना अब तक बालमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
धीरे धीरे टूट रही आस मेरे प्यार की
आये न अब तक बलमा
हो ओ ओ आये न अब तक बालमा
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Beet chali haaye Ram-Sachchai 1969
स्कूल के ज़माने में कुछ शब्द मास्टर मास्टरनियों से सुनते
थे-लर्न बाई हार्ट. दूरदर्शन के फ़िल्मी गीतों वाले कार्यक्रम
में फिल्म सच्चाई का गीत भी काफी दिखाया गया जिसे
देख देख के शायद कार्यक्रम बनाने वालों को भी याद हो
गया होगा एक एक फ्रेम गीत का.
गीत में ढेर सारे हाथी सजे धजे खड़े हैं और भव्य किस्म
की आतिशबाजी हो रही है. इसे फिल्माने में काफी खर्चा
किया गया होगा.
सच्चाई फिल्म के गीत में जीवन की सच्चाई है. सच्चाई अब
गीतों में और फेसबुक, व्हाट्स एप के पोस्ट पर पर ही तो रह
गयी है. गीत राजेंद्र कृष्ण का है और रफ़ी-आशा ने इसे गाया
है शंकर जयकिशन के संगीत निर्देशन में.
गीत के बोल:
सौ बरस की ज़िन्दगी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
सौ बरस की ज़िन्दगी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
प्यार ही से ये ज़मीं है प्यार ही से आसमां
प्यार ही से ये ज़मीं है प्यार ही से आसमां
प्यार का ले कर सहारा चल रहा है ये जहां
प्यार शबनम प्यार शोला प्यार ही बाद-ए-सबा
फूल कलियां चांद तारे सब मोहब्बत के निशां
सौ बरस की ज़िन्दगी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
ये मुहब्बत दो दिलों का खूबसूरत राज़ है
ये मुहब्बत दो दिलों का खूबसूरत राज़ है
दिल की धड़कन जिसकी सरगम है यही वो ताज़ है
चाहे भंवरे का हो नगमा या पपीहे की सदा
प्यार कहते हैं जिसे वो एक ही आवाज़ है
सौ बरस की ज़िन्दगी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी से अच्छे हैं अच्छे हैं
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
प्यार के दो चार दिन
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Sau baras ki zindagi se achchhe hain-Sachchai 1969