Showing posts with label Shama. Show all posts
Showing posts with label Shama. Show all posts

May 18, 2017

एक जुर्म करके हमने-शमा १९६१

सुमन कल्याणपुर का गाया एक गीत सुनते हैं.

फिल्म: शमा
वर्ष: १९६१
गीतकार: कैफी आज़मी
गायिका: सुमन कल्याणपुर
संगीत: गुलाम मोहम्मद



गीत के बोल:

एक जुर्म करके हमने
एक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना
चाहा था मुस्कुराना चाहा था मुस्कुराना
मरने न दे मोहब्बत 
मरने न दे मोहब्बत  जीने न दे ज़माना
जीने न दे ज़माना

हम बेताल्लुक़ी की रस्में निबाह देंगे
रस्में निबाह देंगे
हम बेताल्लुक़ी की रस्में निबाह देंगे
पर तुम न याद करना 
पर तुम न याद करना  पर तुम न याद आना
पर तुम न याद आना

ये सोचकर बुझा दी ख़ुद शमा आरज़ू की
ये सोचकर बुझा दी ख़ुद शमा आरज़ू की
शायद हो रोशनी में
शायद हो रोशनी में  मुश्किल नज़र मिलाना
मुश्किल नज़र मिलाना

जब अश्क पी लिये हैं  जब होंठ सी लिये हैं
जब होंठ सी लिये हैं
जब अश्क पी लिये हैं  जब होंठ सी लिये हैं
तब पूछती है दुनिया
तब पूछती है दुनिया  मुझसे मेरा फ़साना
मुझसे मेरा फ़साना

एक जुर्म करके हमने
एक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना
चाहा था मुस्कुराना चाहा था मुस्कुराना
मरने न दे मोहब्बत 
मरने न दे मोहब्बत  जीने न दे ज़माना
जीने न दे ज़माना
……………………………………………………
Ek jurm kar ke hamne-Shama 1961

Artist: Nimmi

Read more...

Mar 2, 2017

धड़कते दिल की तमन्ना-शमा १९६१

अगर आप फ़िल्मी गीतों के शौक़ीन हैं और आपने सुरैया का एक
भी गीत नहीं सुना है तो कम से कम ५ गीत सुरैया के चुन लीजिए
और उन्हें पूरा ध्यान से सुन डालिए. मेरा दावा है आप सुरैया की
कशिश भरी आवाज़ के मुरीद हो जायेंगे.

आज आपको सुनवाते हैं सुरैया का गाया हुआ १९६१ की फिल्म शमा
से एक गीत. गीत में आपको सुरैया और निम्मी दिखाई देंगे. कुर्सी
पर जो हीरो पसरा हुआ है उसे पहचानिये.

गौरतलब है सन १९४६ की शाम में गुलाम हैदर का संगीत है और
सन १९६१ की शाम में गुलाम मोहम्मद का.



गीत के बोल:

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
मुझे क़रार नहीं मुझे क़रार नहीं
जब से बेक़रार हो तुम
जब से बेक़रार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

खिलाओ फूल किसी के किसी चमन में रहो
खिलाओ फूल किसी के किसी चमन में रहो
जो दिल की राह से गुज़री है वो बहार हो तुम
गुज़री है वो बहार हो तुम

ज़ह-ए-नसीब अता की जो दर्द की सौग़ात
ज़ह-ए-नसीब अता की जो दर्द की सौग़ात
वो ग़म हसीन है जिस ग़म के ज़िम्मेदार हो तुम
ग़म के ज़िम्मेदार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

चड़ाऊँ फूल या आँसू तुम्हारे क़दमों में
चड़ाऊँ फूल या आँसू तुम्हारे क़दमों में
मेरी वफ़ाओं की उल्फ़त की यादगार हो तुम
उल्फ़त की यादगार हो तुम

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
मुझे क़रार नहीं मुझे क़रार नहीं
जब से बेक़रार हो तुम
जब से बेक़रार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
…………………………………………………………….
Dhadakte dil ki tamanna-Shama 1961

Artists: Suraiya, Nimmi

Read more...

Oct 30, 2016

एक तेरा सहारा-शमा १९४६

विंटेज युग से एक गीत सुनते हैं. ये है सन १९४६ की फिल्म
शाम से शमशाद बेगम का गाया हुआ. एहसान रिज़वी का लिखा
हुआ गीत है जिसकी तर्ज़ गुलाम हैदर ने बनाई है.

फिल्म शमा के सुरैया के गाये गीत ज्यादा प्रसिद्ध हैं मगर फिल्म
रिलीज़ के आसपास शमशाद के गीत भी जनता खूब सुना करती
थी. उपलब्धता के लिहाज़ से ये गीत दुर्लभ की श्रेणी में आता है.

गीत फिल्म में दो भाग में उपलब्ध है. वीडियो में केवल भाग १
मौजूद है.




गीत के बोल:

इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा
दिल तोड़ के दुनिया ने किया हमसे किनारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

शिक़वा है किसी का न शिकायत है किसी से
शिक़वा है किसी का न शिकायत है किसी से
फ़रियाद है इक टूटे हुए दिल की तुझी से
फ़रियाद है इक टूटे हुए दिल की तुझी से
होता नहीं बरबाद कोई अपनी खुशी से
बिगड़ी हुई तक़दीर पे क्या ज़ोर हमारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

दुनिया
दुनिया में नहीं कोई जिसे हाल सुनायें
दुनिया में नहीं कोई जिसे हाल सुनायें
आँसू किसे हम रोते हुए दिल के दिखायें
आँसू किसे हम रोते हुए दिल के दिखायें
बरबाद हैं बेक़स हैं बता अब कहाँ जायें
बेदर्द ज़माने में नहीं कोई हमारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा

क्यों ख़ून गरीबों का बहाती है ख़ुदाई
क्यों ख़ून गरीबों का बहाती है ख़ुदाई
अल्लाह दुहाई है दुहाई है दुहाई
अल्लाह दुहाई है दुहाई है दुहाई
कब तक ये सितम और ये दर दर की गधाई
मिलता नहीं दो दिन के लिये भी तो सहरा

इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा


किस्मत ही अब तो हाय हमारी बिगड़ गई
किस्मत ही अब तो हाय हमारी बिगड़ गई
दिल की बसी बसाई ये दुनिया उजड़ गई
दिल की बसी बसाई ये दुनिया उजड़ गई
दौलत जो थी हमारी वो हम से बिछड़ गई
काली घटा में छुप गया तक़दीर का तारा
इक तेरा सहारा
इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा


है तेरे सिवा कौन जो इस दिल को मनाये
है तेरे सिवा कौन जो इस दिल को मनाये
जो दाग़ जिगर के हैं उन्हें फूल बनाये
जो दाग़ जिगर के हैं उन्हें फूल बनाये
है कौन कि कांटों से जो दामन को छुड़ाये
उलझा है तेरे होते हुए जो आज दुबारा

इक तेरा सहारा इक तेरा सहारा
……………………………………………………………
Ek tera sahara-Shama 1946

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP