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Jun 23, 2020

भोर आई गया अँधियारा-बावर्ची १९७२

हिंदी सिनेमा ने बेहद प्रतिभाशाली कलाकार भी देखे हैं. हम
ऐसे कलाकारों से प्रेरणा ले सकते हैं. ऐसे अधिकाँश कलाकार
अपने सभी कामों को पूरी लगन और समर्पण से करते दिखे.
नायक नायिका कुछ भी उछल-कूद करते रहें ये अपनी छाप
छोड़ते चले.

आज बहुमुखी प्रतिभा के स्वामी हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय की
पुण्यतिथि है. साहित्य, शिक्षा और सिनेमा में इनके अमूल्य
योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा. पहली लोकसभा में ये
विजयवाड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे. साहित्य और शिक्षा में
योगदान के लिए इन्हें भारत सरकार द्वारा १९७३ में पद्मभूषण
सम्मान दिया गया.

१९६२ की फिल्म साहब बीबी और गुलाम इनकी पहली हिंदी
फिल्म थी. इसके बाद वे तेरे घर के सामने फिल्म में दिखाई
दिए जिसमें उन्होंने नायिका के पिता की भूमिका निभाई. ८८
की नसीरुद्दीन शाह अभिनीत फिल्म मालामाल उनकी आखिरी
हिंदी फिल्म रही.

फिल्म जूली के लिए उनका लिखा गीत-माय हार्ट इस बीटिंग
अपने समय में बेहद लोकप्रिय हुआ था. हरिन्द्रनाथ संगीत के
भी जानकार थे और कम्पोज़िंग में भी सक्षम थे.

आज सुनते हैं फिल्म बावर्ची का एक गीत जिसमें फिल्म की
लगभग पूरी स्टारकास्ट मौजूद है. कैफी आज़मी का गीत है
और मदन मोहन का संगीत.

बॉलीवुड में आज जिन लोगों का जन्मदिन है वे हैं-राज बब्बर,
गुज़रे ज़माने के अभिनेता रहमान, और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक
जब्बार पटेल. इसके अलावा क्रिकेट के क्षेत्र में वेट इंडीज़ के
प्रसिद्ध खिलाडी रामनरेश सरवन.



गीत के बोल:

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा

भोर आई गया अँधियारा
भोर आई गया अँधियारा
सारे जग में हुआ उजियारा
नाचे झूमे ये मन मतवाला मतवाला
भोर आई गया अँधियारा
गया अँधियारा गया अँधियारा
…………………………………………….
Bhor aayi gaya andhiyara-Bawarchi 1972

Artists: Rajesh Khanna, Master Raju, Jaya Bhaduri, Asrani, Various

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Apr 20, 2020

कहो आ के बहार-फोर्टी डेज़ १९५९

आप खुश होते हैं तब गीतों के संगीत का आनंद लेते है
और जब आप दुःख के बादलों में घिरे होते हैं तब बोलों
का अर्थ समझते हैं. ये बात जिसने भी कहीं है सटीक है.

एक गीत है मुकेश आशा का गाया युगल गीत १९५९ का
जिसमें पहली पंक्ति को कुछ यूँ समझते थे हम-कहो आ
के बाहर, करे मेरा सिंगार. वो शब्द बहार है जिसके कारण
गफ़लत कई गानों में हो चुकी है.

सरसरी तौर पर गान सुनने में अर्थ का अनर्थ होने की
सम्भावना प्रबल होती है. मगर, जिन गानों के बोल ही
समझ ना आयें उनका क्या? साय सुकू साय सुकू साय
साय !

कैफी आज़मी की रचना है और बाबुल का संगीत. गीत
में एक शोख नज़र से सौ भेद समझने की बात कही
गयी है. सदियों से कवि, गीतकार और प्रेमी रिसर्च कर
के थक-मर गए मगर स्त्री मन का भेद कोई ना जान
पाया. अंगड़ाई मच्छर भगाने के लिए है या अलसाने की
अदा.

गाने की हो ओ ओ ओ से आपको नैयर के संगीत वाला
‘रोका कई बार मैंने’ गीत याद आना चाहिए.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

आँखों में खुशी नाचे होंठों पे हंसी गाये
कह दो गम-ए-दुनिया से छुपे से गुज़र जाये
सुनो दिल की पुकार कहे दिल बार बार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
एक शोख नज़र तेरी सौ भेद बताती है
तुम्हीं मेरा क़रार तुम्हीं मेरा निखार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हाय

बेदर्द ज़माने को हम प्यार सिखा देंगे
दिल खो ही चुके पहले अब जां भी गंवा देंगे
ये है ऐसा खुमार नहीं जिसका उतार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
…………………………………………………
Kaho aa ke bahaar-40 Days 1959

Artists: Premnath, Nishi

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Nov 13, 2019

खेलो ना मेरे दिल से-हकीक़त १९६४

श्रोता के दिमाग के तार झनझना दे ऐसी धुनें केवल
सलिल चौधरी ने नहीं बल्कि अन्य संगीतकारों ने भी
बनायीं हैं. मदन मोहन के खज़ाने में भी ऐसी कुछ
धुनें हैं.

प्रस्तुत गीत फिल्म हकीक़त से है जिसे कैफी आज़मी
ने लिखा है. गीत में वाद्य यंत्र कम से कम प्रयोग में
लाये गए हैं और बस हावी होने की रेखा को छू कर
अपनी जगह पर वापस आ जाते हैं.

कुछ कुछ ऐसा ही है जैसे हमारे ब्लॉग की पोस्ट होती
हैं. गीत का बखान करने के लिए दस पेज का निबंध
लिखना ज़रूरी नहीं है. इधर उधर की आयं बायं सायं
घुसेडो और जगह जगह का कूड़ा इकठ्ठा कर के ब्लॉग
को खंती बना डालो. उसके बाद स्वच्छ भारत अभियान
का गाना गाओ. इन सब से बेहतर है संक्षेप में बात
कह लो.



गीत के बोल:

खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से

मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किसलिये निगाह में
मुस्कुरा के देखते तो हो मुझे
ग़म है किसलिये निगाह में
मंज़िल अपनी तुम अलग बसाओगे
मुझको छोड़ दोगे राह में
प्यार क्या दिल्लगी प्यार क्या खेल है

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना मेरे दिल से

क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ
क्यूँ नज़र मिलाई थी लगाव से
हँस के दिल मेरा लिया था क्यूँ

क्यूँ मिले थे ज़िन्दगी के मोड़ पर
मुझको आसरा दिया था क्यूँ
प्यार क्या दिल्लगी प्यार क्या खेल है

खेलो ना मेरे दिल से
ओ मेरे साजना ओ साजना ओ साजना
खेलो ना खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
खेलो ना मेरे दिल से
..........................................................
Khelo na mere dil se-Haqeeqat 1964

Artist: Priya Rajvansh

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Nov 8, 2019

मैं ये सोच कर उसके दर से-हकीक़त १९६४

फिल्म हकीक़त का संगीत फिल्म के कथानक जैसा
ही गंभीर है. हालांकि फिल्म में एक खुशनुमा गीत
भी है रफ़ी का गाया हुआ और साथ में एक दीवाली
गीत है वो भी दुःख के भाव वाला है.

सुनते हैं फिल्म से रफ़ी का गाया एक दर्द भरा गीत
जो क्लासिक गीतों में शुमार है.



गीत के बोल:

मैं ये सोच कर उसके दर से उठा था
के वो रोक लेगी मना लेगी मुझको

हवाओं में लहराता आता था दामन
के दामन पकड़ कर बिठा लेगी मुझको

कदम ऐसे अंदाज़ से उठ रहे थे
के आवाज़ देकर बुला लेगी मुझको

मगर उसने रोका न उसने मनाया
न दामन ही पकड़ा न मुझको बिठाया
न आवाज़ ही दी न वापस बुलाया
मैं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता ही आया
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
यहाँ तक के उससे जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं जुदा हो गया मैं
जुदा हो गया मैं जुदा हो गया मैं
............................................................
Main ye soch kar uske dar se-Haqeeqat 1964

Artist:

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Oct 23, 2019

ज़रा सी आहट होती है-हकीक़त १९६४

फिल्म हकीक़त के गीतों में से एक यही है जिसे
मदन मोहन के संगीत वाली किसी दूसरी फिल्म के
कथानक में फिट किया जा सकता है. मेरा आशय
उन भूतिया फिल्मों से है जिनमें मदन मोहन का
संगीत है-वो कौन थी और मेरा साया टाइप की.

गीत में आहट, सोच, वो तो नहीं जैसे शब्द हैं तो
आगे अंतरे में छू गई जिस्म मेरा किसके दामन की
हवा जैसे शब्द हॉरर फिल्म के गीत के लिए बढ़िया
सामान हैं.



गीत के बोल:

ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं
ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

छुप के सीने में आ आ आ आ आ आ
छुप के सीने में कोई जैसे सदा देता है
शाम से पहले दिया दिल का जला देता है
है उसी की ये सदा है उसी की ये अदा
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

शक्ल फिरती है हाँ हाँ हाँ
शक्ल फिरती है निगाहों में वो ही प्यारी सी
मेरी नस-नस में मचलने लगी चिंगारी सी
छू गई जिस्म मेरा किसके दामन की हवा
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं

ज़रा सी आहट होती है तो दिल सोचता है
कहीं ये वो तो नहीं कहीं ये वो तो नहीं
कहीं ये वो तो नहीं
........................................................
Zara si aahat hoti hai-Haqeeqat 1964

Artist: Priya Rajvansh

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Aug 26, 2019

आज की काली घटा-उसकी कहानी १९६६

गीता दत्त एक गायिका ही नहीं बल्कि एक फेनोमेना थीं.
अद्भुत और आश्चर्यचकित करने वाली गायिका थीं वे. किसी
भी प्रकार के गीत का मूड उभारने में उनका कोई जवाब
नहीं था. समय के थपेडों ने उनके अवसर कम कर दिए
अन्यथा आज उनके नाम ढेरों गीत दर्ज होते.

उनकी आवाज़ में एक गीत सुनते हैं फिल्म उसकी कहानी
से कैफी आज़मी का लिखा हुआ. फिल्म लोकप्रिय तो नहीं
हुई अलबत्ता ये गीत ज़रूर खूब सुनने में आया. संगीत
कनु रॉय का है.



गीत के बोल:

आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
मुझसे कहती है के प्यासा है कोई
कौन प्यासा है मुझे क्या मालूम

प्यास के नाम से जी डरता है
इस इल्ज़ाम से जी डरता है
शौक-ए-बदनाम से जी डरता है
मीठी नज़रों में समाया है कोई
क्यूँ समाया है मुझे क्या मालूम

आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
मुझसे कहती है के प्यासा है कोई
कौन प्यासा है मुझे क्या मालूम

प्यासी आँखों में मुहब्बत ले के
लड़खड़ा जाने की दावत ले के
मुझसे बेवजह शिकायत ले के
दिल की दहलीज़ तक आया है कोई
कौन आया है मुझे क्या मालूम

आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
मुझसे कहती है के प्यासा है कोई
कौन प्यासा है मुझे क्या मालूम

कुछ मज़ा आने लगा जीने में
जाग उठा दर्द कोई सीने में
मेरे एहसास के आइने में
इक साया नज़र आता है कोई
किसका साया है मुझे क्या मालूम

आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
मुझसे कहती है के प्यासा है कोई
कौन प्यासा है मुझे क्या मालूम

ज़िन्दगी पहले ना थी इतनी हसीन
और अगर थी तो मुझे याद नहीं
यही अफ़साना न बन जाये कहीं
कुछ निगाहों से सुनाता है कोई
क्या सुनाता है मुझे क्या मालूम

आज की काली घटा मस्त मतवाली घटा
मुझसे कहती है के प्यासा है कोई
कौन प्यासा है मुझे क्या मालूम
.............................................................
Aaj ki kali ghata-Uski kahani 1966

Artist: Pata nahin

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Jun 9, 2018

आने वाला कल-फिर तेरी कहानी याद आई १९९३

महेश भट्ट निर्देशित सन १९९३ की फिल्म से
अगला गीत सुनते हैं जो कैफी आज़मी की रचना
है. इसका संगीत भी अन्नू मलिक ने तैयार किया
है. कुमार सानू ने इसे गाया है.

महेश भट्ट ने सभी प्रकार के कथानकों पर काम
किया है. इनमें से अधिकाँश विलायती नॉवेल या
फिल्मों पर आधारित हैं. इंटरनेशनल सिनेमा का
स्वाद देसी तडके के साथ सफलतापूर्वक अपने देश
में चखाने वाला कोई है तो वो महेश भट्ट ही हैं.
पटकथा और निर्देशन के मामले में वे दूसरे कई
निर्देशकों द्वारा बनाई गई ऐसी फिल्मों से बहुत आगे
हैं.

महेश भट्ट ने कहानी सीरीज़ की एक और फिल्म
बनाई २०१५ में-हमारी अधूरी कहानी.



गीत के बोल:

आने वाला कल एक सपना है
गुज़रा हुआ कल बस अपना है
आने वाला कल एक सपना है
गुज़रा हुआ बस एक अपना है
हम गुज़रे कल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं

आने वाला कल एक सपना है
गुज़रा हुआ बस एक अपना है
हम गुज़रे कल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं

दामन सी सकते हैं जो ज़ख्मों को सीना जानते हों
जीना उनका जीना जो यारों में जीना जानते हों
जिन तारों को रातों में उठ उठ के गगन में ढूंढते हो
जिन कलियों को जिन फूलों को जा जा के चमन में ढूंढते हो
वो फूल वो कलियाँ वो तारे आँचल में रहते हैं
हम प्यार की बिजली ले कर बादल में रहते हैं

आने वाला कल एक सपना है
गुज़रा हुआ बस एक अपना है
हम गुज़रे कल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं

मेरे तन मन के अरमां अपने तन मन से पूछो
इनकी छुन छुन का मतलब दिल की धड़कन से पूछो
दुनिया सारे ज़माने ले ले दौलत ले ले ख़ज़ाने ले ले
लूट सके ना जिसको ज़माना हमको एक पल ऐसा दे दे
प्यार के रंगीं मौसम सब जिस पल में रहते हैं
वक़्त के सच्चे नगमें जिस पल में रहते हैं

आने वाला कल एक सपना है
गुज़रा हुआ बस एक अपना है
हम गुज़रे कल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
यादों के सब जुगनू जंगल में रहते हैं
……………………………………..
Aane wala kale ek sapna hai-Phir teri kahani yaad aayi 1993

Artists: Rahul Roy

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Jun 8, 2018

दिल में सनम की सूरत-फिर तेरी कहानी याद आई १९९३

९० के दशक में वो जिसे हम ‘मेलोडी इस क्वीन’ कहते हैं
जिन भी फिल्मों में मौजूद रही उनमें से एक है जिसका
अगला गीत आपको सुनवा रहे हैं. हम इधर एक्टिंग की
कतई बात नहीं कर रहे हैं, सिर्फ और सिर्फ इस फिल्म के
म्यूझिक की बात कर रहे हैं.

फिल्म के गीतों के लिए क़ातिल शिफ़ाई और कैफी आज़मी
की सेवाएं ली गईं. अब ये महेश भट्ट की फरमाइश पर
था या स्वयं अन्नू मलिक की चॉईस ये बात वही बतला
सकता है जिसने इन दोनों से कभी इस बारे में पूछा हो.

हो सकता है किसी दिन दूसरे अन्नू उर्फ अन्नू कपूर अपने
कार्यक्रम में इस बात पर खुलासा कर दें.

कैफी आज़मी का लिखा गीत सुनते हैं अलका याग्निक और
कुमार सानू की आवाजों में.





गीत के बोल:

दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे
दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे
एक और ज़िन्दगी दे

कैसे करूँ मुहब्बत दो दिन की ज़िन्दगी में
ये दिन तो बीत जायेंगे यूँ ही हँसी हँसी में
कैसे करूँ मुहब्बत दो दिन की ज़िन्दगी में
ये दिन तो बीत जायेंगे यूँ ही हँसी हँसी में
जी भर के प्यार कर लूँ ऐसी मुझे ख़ुशी दे
जी भर के प्यार कर लूँ ऐसी मुझे ख़ुशी दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे

दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे
एक और ज़िन्दगी दे

सौ साल तक सनम की आँखों में डूब जाऊँ
सौ साल और हों तो उसको गले लगाऊँ
सौ साल तक सनम की आँखों में डूब जाऊँ
सौ साल और हों तो उसको गले लगाऊँ
सौ साल फिर मिलन की दुनिया नई नई दे
सौ साल फिर मिलन की दुनिया नई नई दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे

दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
दिल में सनम की सूरत आँखों में आशिक़ी दे
मेरे ख़ुदा मुझे तू एक और ज़िन्दगी दे
एक और ज़िन्दगी दे
…………………………………………………..
Dil mein sanam ki soorat-Phir teri kahani yaad aayi 1993

Artists: Rahul Roy, Pooja Bhatt

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Oct 31, 2017

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ-फोर्टी डेज़ १९५९

नायिका सार्वजनिक नल पर पानी पीते पीते पानी पीना
भूल के गाना गाने लगती है और नल खुला रह जाता है.
नायक को ढूंढ रही है अपनी सुध बुध खो के.

पेटी और तबला वाले गीत दुर्लभ है फिल्मों में. एक तो
मुझे याद है सत्तर के दशक वाला-दीवाने हैं दीवानों को
न घर चाहिए.

कैफी आज़मी की रचना है और मधुर संगीत टायर किया
है बाबुल ने. गीत में मन्ना डे के साथ एक जनाना आवाज़
है वो किसकी है क्या ज्ञानी संगीत प्रेमी प्रकाश डालेंगे.
या तो आशा भोंसले की ही आवाज़ है या कोई और, स्पष्ट
नहीं हो पाता.



गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

रहा जो छुप के जवाँ दिल में आरज़ू की तरह
रहा जो छुप के जवाँ दिल में आरज़ू की तरह
चला गया जो ग़रीबों की आबरू की तरह
हो चला गया जो ग़रीबों की आबरू की तरह
नज़र तो आयेगा वो मेहमाँ कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

हर इक सितम का वफ़ायें जवाब माँगेंगी
हर इक सितम का वफ़ायें जवाब माँगेंगी
हर एक बूँद का आँखें हिसाब माँगेंगी
हो हर एक बूँद का आँखें हिसाब माँगेंगी
लहू पुकारेगा बन के ज़बां कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी

हा आ आ आ हा आ आ आ हा आ आ आ
लुटी लुटी सी तमन्ना जो हाथ उठायेगी
लुटी लुटी सी तमन्ना जो हाथ उठायेगी
चमकते चाँद सितारों को तोड़ लायेगी
हो चमकते चाँद सितारों को तोड़ लायेगी
गले मिलेंगे ज़मीं आसमान कभी न कभी

नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
मिलेगा उसके क़दम का निशाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
नसीब होगा मेरा मेहरबाँ कभी न कभी
हाय कभी न कभी
…………………………………………….
Naseeb hoga mere meherban-40 Days 1959

Artists: Premnath, Shakila, Nishi

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Sep 14, 2017

बेताब दिल की तमन्ना-हंसते जख्म १९७३

इस फिल्म का नाम अलग सा है. सिसकते ज़ज्बात से एक
कदम आगे. दुनिया में जबरन हंसना भी पढता है लोगों को.
कुछ ऐसी ही कहानी है फिल्म की नायिका की. फिल्म जगत
की कई नायिकाओं को अभिनय के मामले में पीछे छोड़ने
वाली प्रिया राजवंश शाही अंदाज़ में संवाद बोला करती थीं.
इस लिहाज से हीर राँझा फिल्म की कास्टिंग परफेक्ट थी
जिसमें उनके साथ राजकुमार नायक थे.

गीत सुनते हैं फिल्म से जो कैफी आज़मी का लिखा हुआ है.
लता के गाये इस गीत की तर्ज़ मदन मोहन की है. उम्दा
गीत है और रोमांटिक गहराई वाला गीत कहा जा सकता
है इसे.



गीत के बोल:

बेताब दिल की तमन्ना यही है
बेताब दिल की तमन्ना यही है
तुम्हें चाहेंगे तुम्हें पूजेंगे
तुम्हें अपना ख़ुदा बनाएँगे
बेताब दिल की तमन्ना यही है

सूने सूने ख़्वाबों में जब तक तुम न आये थे
ख़ुशियाँ थीं सब औरों की ग़म भी सारे पराये थे
अपने से भी छुपाई थी धड़कन अपने सीने की
हम को जीना पड़ता था ख़्वाहिश कब थी जीने की
अब जो आ के तुमने हमें जीना सिखा दिया है
चलो दुनिया नई बसाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है

भीगी भीगी पलकों पर सपने इतने सजाए हैं
दिल में जितना अँधेरा था उतने उजाले आए हैं
तुम भी हमको जगाना ना बाहों में जो सो जाएँ
जैसे ख़ुश्बू फूलों में तुममे यूँ ही खो जाये
पल भर किसी जनम में कभी छूटे ना साथ अपना
तुम्हें ऐसे गले लगाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है

वादे भी हैं क़समें भी बीता वक़्त इशारों का
कैसे कैसे अरमाँ हैं मेला जैसे बहारों का
सारा गुलशन दे डाला कलियाँ और खिलाओ ना
हँसते हँसते रो दें हम इतना भी तो हँसाओ ना
दिल में तुम्हीं बसे हो रहा आँचल वो भर चुका है
कहाँ इतनी ख़ुशी छुपाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है
तुम्हें चाहेंगे तुम्हें पूजेंगे
तुम्हें अपना ख़ुदा बनाएँगे
बेताब दिल की तमन्ना यही है
.................................................................................
Betaab dil ki tamanna-hanste zakhm 1973

Artist: Priya Rajvansh, Navin Nishchal

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Jul 2, 2017

मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन-चंद्रग्रहण १९७७

लता का ही गाया एक और मधुर गीत सुनते हैं सन १९७७
की दुर्लभ फिल्म चंद्रग्रहण से.

कैफी आज़मी के बोल हैं और जयदेव की अलौकिक धुन.






गीत के बोल:

मैं जानूं नाहीं
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
आये मोरे सजना फिर गए अंगना
आये मोरे सजना फिर गए अंगना 
मैं अभागन
मैं अभागन रही सोई री 

मैं जानूं नाहीं प्रभु को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं

निस बासर मोहे बिरहा सतावे
निस बासर मोहे बिरहा सतावे
कल ना परत पल मोए री
कल ना परत पल मोए री
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मिल बिछडो मत
मिल बिछडो मत कोई री

मैं जानूं नाहीं
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं

आये मोरे सजना फिर गए अंगना 
मैं अभागन
मैं अभागन रही सोई री 
मैं जानूं नाहीं प्रभु को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं
..............................................................................
Main janoon naahin-Chandra graham 1977

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May 23, 2017

वक़्त ने किया क्या हंसीं सितम-कागज़ के फूल १९५९

फिल्म कागज़ के फूल के इस गीत के बारे में जहाँ कहीं भी
जिक्र होता है इन शब्दों का जिक्र अवश्य होता है-सेल्यूलोइड,
लाईट इफेक्ट, वहीदा रहमान और गुरु दत्त की केमिस्ट्री, बढ़िया
बोल और उम्दा संगीत. ये हमने सार में आपको इस गीत के
बारे में बतलाया. नेट पर सर्च करके विस्तार से पढ़ लीजिए.

कैफी आज़मी इसके गीतकार हैं और एस डी बर्मन संगीतकार.
गीता दत्त ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

वक़्त ने किया क्या हंसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
वक़्त ने किया

बेक़रार दिल इस तरह मिले
जिस तरह कभी हम जुदा न थे
तुम भी खो गए हम भी खो गए
एक राह पर चल के दो क़दम
वक़्त ने किया

जायेंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं
क्या तलाश है कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल ख़्वाब दम-ब-दम
वक़्त ने किया क्या हंसीं सितम
तुम रहे न तुम हम रहे न हम
वक़्त ने किया
……………………………………………………
Waqt ne kiya kya haseen sitam-kagaz ke phool 1959

Artists: Guru Dutt, Waheeda Rehman

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May 18, 2017

एक जुर्म करके हमने-शमा १९६१

सुमन कल्याणपुर का गाया एक गीत सुनते हैं.

फिल्म: शमा
वर्ष: १९६१
गीतकार: कैफी आज़मी
गायिका: सुमन कल्याणपुर
संगीत: गुलाम मोहम्मद



गीत के बोल:

एक जुर्म करके हमने
एक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना
चाहा था मुस्कुराना चाहा था मुस्कुराना
मरने न दे मोहब्बत 
मरने न दे मोहब्बत  जीने न दे ज़माना
जीने न दे ज़माना

हम बेताल्लुक़ी की रस्में निबाह देंगे
रस्में निबाह देंगे
हम बेताल्लुक़ी की रस्में निबाह देंगे
पर तुम न याद करना 
पर तुम न याद करना  पर तुम न याद आना
पर तुम न याद आना

ये सोचकर बुझा दी ख़ुद शमा आरज़ू की
ये सोचकर बुझा दी ख़ुद शमा आरज़ू की
शायद हो रोशनी में
शायद हो रोशनी में  मुश्किल नज़र मिलाना
मुश्किल नज़र मिलाना

जब अश्क पी लिये हैं  जब होंठ सी लिये हैं
जब होंठ सी लिये हैं
जब अश्क पी लिये हैं  जब होंठ सी लिये हैं
तब पूछती है दुनिया
तब पूछती है दुनिया  मुझसे मेरा फ़साना
मुझसे मेरा फ़साना

एक जुर्म करके हमने
एक जुर्म करके हमने चाहा था मुस्कुराना
चाहा था मुस्कुराना चाहा था मुस्कुराना
मरने न दे मोहब्बत 
मरने न दे मोहब्बत  जीने न दे ज़माना
जीने न दे ज़माना
……………………………………………………
Ek jurm kar ke hamne-Shama 1961

Artist: Nimmi

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आई अब के साल दिवाली-हकीकत १९६४

सन १९६४ की एक और फिल्म हकीकत से एक गीत सुनते हैं.
इस गीत को अमूमन दिवाली के अवसर पर ज्यादा सुना जाता
है मगर हम इसे आज सुन लेते हैं.

दिवाला शब्द का अविष्कार ज़रूर दिवाली शब्द के बाद ही हुआ
होगा. दिवाली जहाँ खुशियों की बरसात की सूचक है वहीँ दिवाला
शब्द बर्बादी और कंगाली का सूचक है. ये शब्द एक दूसरे के
विलोम हैं.

दर्द भरा गीत है ये जिसे कैफी आज़मी ने लिखा है. मदन मोहन
की धुन पर लता मंगेशकर ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

आई अब के साल दिवाली
मुंह पर अपने खून मले
चारों तरफ है घोर अंधेरा
घर में कैसे दीप जले
आई अब के साल दिवाली

बालक तरसे फुलझड़ियों को  दीपों को दीवारें
माँ की गोदी सूनी सूनी  आँगन कैसे संवारे
राह में उनकी जाओ उजालों
बन में जिनकी शाम ढले
आई अब के साल दिवाली

जिनके दम से जगमग जगमग करती थी ये रातें
चोरी चोरी हो जाती थी मन से मन की बातें
छोड़ चले वो घर में अमावस
ज्योति लेकर साथ चले
आई अब के साल दिवाली

टप टप टप टप टपके आंसू  छलकी खाली थाली
जाने क्या क्या समझाती है आँखों की ये लाली
शोर मचा है आग लगी है
कटते हैं पर्वत पे गले
आई अब के साल दिवाली
…………………………………………………………
Aayi ab ke saal diwali-Haqeeqat 1964

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Mar 20, 2017

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में-नौनिहाल १९६७

संजीव कुमार पर फिल्माया गया और रफ़ी का गाया एक बेहतरीन
रोमांटिक गीत सुनते हैं. संजीव कुमार पर फिल्माए गए अधिकाँश
गीत चाहे वो रोमांटिक हों या अन-रोमांटिक सब सोबर ही लगते हैं.
सोबर शब्द ज्यादा सुनते पढते मुझे गैरी सोबर्स याद आने लगते
हैं.

सोबर्स अपने फील्ड के आलराउंडर थे तो मदन मोहन अपने फील्ड के.
मदन मोहन ने गज़लों के अलावा दुसरे किस्म के गीत भी सुन्दर
बनाये हैं. इसका जिक्र हम काफी जगह कर चुके हैं उदाहरणों के
साथ. 

गीत में एक पहाड़ है, पहाड़ पर फूल पत्ती घास फूस लगे हैं.  पूर्णतः
रोमांटिक जगह है. फिल्मांकन किसी बढ़िया जगह हुआ है इस गीत
का. सन १९६७ तक काफी फ़िल्में रंगीन भी आ चुकी थीं. सत्तर के
दशक के बाद श्वेत श्याम नहीं के बराबर रह गया.





गीत के बोल:

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूँगा

नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क का अंजाम
नज़र मिलाई तो पूछूँगा इश्क का अंजाम
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा
नज़र झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा

जहान-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हे मुबारक हो
जहान-ए-दिल पे हुकूमत तुम्हे मुबारक हो
रही शिकस्त तो वो अपने नाम कर लूँगा
रही शिकस्त तो वो अपने नाम कर लूँगा

तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में शाम कर लूँगा
सफ़र इक उम्र का पल में तमाम कर लूँगा
......................................................................
Tumhari zulf ke saaye mein shaam-Naunihal 1967

Artist: Sanjeev Kumar, Indrani Mukherji

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Mar 19, 2017

बैठे हैं रहगुज़र पर-४० डेज़ १९५९

आशा भोंसले ने हिंदी फिल्म सिनेमा में सर्वाधिक गीत गाये
हैं. उनके अनेकों फ़िल्मी, गैर फ़िल्मी गीत लोकप्रिय हैं. आज
सुनेंगे एक कम लोकप्रिय संगीतकार की बेहद लोकप्रिय रचना.
फिल्म ४० डेज़ सन १९५९ की एक फिल्म है जिसका निर्देशन
द्वारका खोसला ने किया था.

आशा भोंसले के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है ये. इसके
संगीतकार हैं बाबुल. बाबुल ने बिपिन के साथ मिल के जोड़ी
भी बनाई थी जो बिपिन-बाबुल के नाम से जानी जाती है. आम
संगीत प्रेमी उनके नाम से वाकिफ नहीं हैं.

प्रेमनाथ और शकीला की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म
में के एन सिंह, निशी और शम्मी भी मौजूद हैं.

किसी गीत के बोल कितने महत्त्वपूर्ण होते हैं उसकी गुणवत्ता
निर्धारण में उसका एक उदाहरण है ये गीत जिसके बोल लिखे
हैं कैफ़ी आज़मी ने. इस गीत में अरमान की नर्म बाहें लचका
मारी हैं.





गीत के बोल:

बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
शायद वो दर्द जानें शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
बैठे हैं रहगुज़र पर

आकाश पर सितारे चल चल के थम गए हैं
आकाश पर सितारे चल चल के थम गए हैं
हो ओ ओ ओ ओ
शबनम के सर्द आँसू फूलों पे जम गए हैं
हम पर नहीं किसी पर ऐ काश रहम खाये
शायद वो दर्द जानें शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर

राहों में खो गई हैं हसरत भरी निगाहें
राहों में खो गई हैं हसरत भरी निगाहें
हो ओ ओ ओ ओ
कब से लचक रही हैं अरमान की नर्म बाहें
हर मोड़ पर तमन्ना आहट उसी की पाये
शायद वो दर्द जाने शायद वो लौट आये
बैठे हैं रहगुज़र पर दिल का दिया जलाये
बैठे हैं रहगुज़र पर
…………………………………………………
Baithe hain rehguzar par-40 Days

Artist: Shakila

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Mar 2, 2017

धीरे धीरे मचल-अनुपमा १९६६

फिल्म अनुपमा में लाता के गाये दो अनमोल गीत हैं जिनमें
से एक हम आज सुनेंगे. एक गीत देखने में आपको बाँध के
रखता है तो दूसरा सुनने में. पत्नी अपने पति के इंतज़ार में
प्यानो पर एक गीत गा रही है. फिल्म के सारे गीत अगर आप
ध्यान से सुनें तो आपको लगेगा कुछ स्पेशल से हैं.

टिपिकल घरेलू भारतीय महिला आपको प्यानो बजाते हुए दिखे
तो आश्चर्य होगा आपको. ऐसे वाकये हिंदी फिल्मों में कई बार
दिखलाये जा चुके हैं. इस फिल्म में अरुणा का किरदार निभाया
है सुरेखा पंडित ने. तरुण बोस तो खैर मंजे हुए कलाकार थे ही
इस गीत में सुरेखा ने भी बढ़िया अभिनय किया है.

कैफी आज़मी ने अपने अनोखे अंदाज़ में एक आने वाले पल के
लिए कुछ पंक्तियाँ खूबसूरत अंदाज़ में लिखी हैं-मुझको छूने लगी
उसकी परछाईयाँ. ये आने वाला पल है नायिका माँ बनने वाली है.



गीत के बोल:

धीरे धीरे मचल ए दिल-ए-बेक़रार
कोई आता है
यूँ तड़प के न तड़पा मुझे बालमा
कोई आता है
धीरे धीरे मचल ए दिल-ए-बेक़रार

उसके दामन की ख़ुशबू हवाओं में है
उसके कदमों की आहट फिज़ाओं में है
मुझको करने दे  सोलह श्रिंगार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल ए दिल-ए-बेक़रार

रूठ कर पहले जी भर सताऊँगी मैं
जब मनाएंगे वो  मान जाऊँगी हैं
मुझको करने दे  सोलह श्रृंगार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल ए दिल-ए-बेक़रार

मुझको छूने लगीं उसकी परछाईयाँ
दिलके नज़्दीक बजती हैं शहनाइयाँ
मेरे सपनों के आँगन में गाता है प्यार
कोई आता है

धीरे धीरे मचल ए दिल-ए-बेक़रार
…………………………………………………………………………
Dheere dheere machal-Anupama 1966

Artists: Surekha Pandit, Tarun Bose

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धड़कते दिल की तमन्ना-शमा १९६१

अगर आप फ़िल्मी गीतों के शौक़ीन हैं और आपने सुरैया का एक
भी गीत नहीं सुना है तो कम से कम ५ गीत सुरैया के चुन लीजिए
और उन्हें पूरा ध्यान से सुन डालिए. मेरा दावा है आप सुरैया की
कशिश भरी आवाज़ के मुरीद हो जायेंगे.

आज आपको सुनवाते हैं सुरैया का गाया हुआ १९६१ की फिल्म शमा
से एक गीत. गीत में आपको सुरैया और निम्मी दिखाई देंगे. कुर्सी
पर जो हीरो पसरा हुआ है उसे पहचानिये.

गौरतलब है सन १९४६ की शाम में गुलाम हैदर का संगीत है और
सन १९६१ की शाम में गुलाम मोहम्मद का.



गीत के बोल:

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
मुझे क़रार नहीं मुझे क़रार नहीं
जब से बेक़रार हो तुम
जब से बेक़रार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

खिलाओ फूल किसी के किसी चमन में रहो
खिलाओ फूल किसी के किसी चमन में रहो
जो दिल की राह से गुज़री है वो बहार हो तुम
गुज़री है वो बहार हो तुम

ज़ह-ए-नसीब अता की जो दर्द की सौग़ात
ज़ह-ए-नसीब अता की जो दर्द की सौग़ात
वो ग़म हसीन है जिस ग़म के ज़िम्मेदार हो तुम
ग़म के ज़िम्मेदार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

चड़ाऊँ फूल या आँसू तुम्हारे क़दमों में
चड़ाऊँ फूल या आँसू तुम्हारे क़दमों में
मेरी वफ़ाओं की उल्फ़त की यादगार हो तुम
उल्फ़त की यादगार हो तुम

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
मुझे क़रार नहीं मुझे क़रार नहीं
जब से बेक़रार हो तुम
जब से बेक़रार हो तुम
धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम
…………………………………………………………….
Dhadakte dil ki tamanna-Shama 1961

Artists: Suraiya, Nimmi

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Feb 15, 2017

रुत जवाँ जवाँ-आखिरी खत १९६६

आपको श्वेत श्याम युग से एक और गीत सुनवाते हैं. ये है
सन १९६६ की फिल्म आखिरी खत से जिसे भूपेंद्र ने गाया
है. ये भूपेंद्र का डेब्यू सोलो गीत है हिंदी फिल्मों में और परदे
पर भी इसे वे ही गा रहे हैं. क्लब सोंग की तरह इसे फिल्म में
प्रस्तुत किया गया है. भूपेंद्र का पहला गीत है फिल्म मजबूर
में जिसे उन्होंने ३ और गायकों के साथ गाया था-हो के मजबूर
जो ख़ासा प्रसिद्ध है आज भी. भूपेंद्र एक कुशल गिटार प्लेयर
भी हैं.

बोल कैफी आज़मी के हैं और संगीत खय्याम का. फिल्म के
२-३ गीत बेहद लोकप्रिय हैं.




गीत के बोल:

रुत जवाँ जवाँ रात मेहरबाँ
छेड़ो कोई दास्ताँ
रुत जवाँ जवाँ रात मेहरबाँ
छेड़ो कोई दास्ताँ
रुत जवाँ जवाँ

कुछ झुकी-झुकी नज़र कहे
कुछ छुपा-छुपा सा डर कहे
जो कहे वो रात भर कहे
फिर भी न हो कुछ बयाँ

रुत जवाँ जवाँ रात मेहरबाँ
छेड़ो कोई दास्ताँ
रुत जवाँ जवाँ

हुस्न की शिकायतें बजा
है इधर तड़प उधर गिला
ख़ामोशी है दर्द की सदा
आँखें बनी हैं ज़ुबाँ
रुत जवाँ जवाँ रात मेहरबाँ
छेड़ो कोई दास्ताँ
रुत जवाँ जवाँ

ग़म ख़ुशी-ख़ुशी छुपा लिया
दर्द को भी दिल बना लिया
ज़िंदगी ने आज़मा लिया
तुम तो न लो इम्तिहाँ

रुत जवाँ जवाँ रात मेहरबाँ
छेड़ो कोई दास्ताँ
रुत जवाँ जवाँ
......................................................................
Rut jawan jawan-Akhiri khat 1966

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Feb 9, 2017

भीगी भीगी फ़ज़ा-अनुपमा १९६६

फ़िल्मी कथानकों में नायक और नायिकाओं के साथ साइड किक
और साइड किक्नी पाए जाते हैं. उन्हें हम सहायक कलाकार भी
कहा करते हैं. शशिकला ने कई फिल्मों में सहायक भूमिकाएं की
हैं और अधिकांश में वे खलनायिका सरीखे किरदारों में दिखी हैं.

फिल्म अनुपमा में वे नायिका की सहेली बनी हैं. इनकी भूमिका
पॉज़िटिव है फिल्म में और परदे पर प्रस्तुत गीत वही गा रही
हैं. 

गीत कैफी आज़मी ने लिखा है और इसका संगीत हेमंत कुमार ने
तैयार किया. गीत गया है आशा भोंसले ने.



गीत के बोल:

भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सनके जिया
ज़ुल्फ़ें उड़ाती है ख़ुशबू चुराती है
पागल चंचल मस्त हवा
भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सनके जिया

कोयल बन में बोले
नस नस में रस घोले
कोई नटखट जैसे घूँघट चोरी चोरी खोले
कोई आया नहीं भाया नहीं
किसका साया साथ चला

भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सनके जिया
ज़ुल्फ़ें उड़ाती है ख़ुशबू चुराती है
पागल चंचल मस्त हवा
भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सनके जिया

पल पल झोंका आये
आँचल सरका जाये
पल पल झोंका आये
आँचल सरका जाये
तन मन मेरा जीवन मेरा धीरे धीरे गाये
देखो देखो हँसी दिल की कली
दिल में ऐसा दर्द उठा

भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सनके जिया
.....................................................
Bheegi bheegi faza-Anupama 1966

Artist: Shashikala

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