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Dec 31, 2018

दिल तो दिल है १-जिंदगी एक जुआ १९९१

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना काफी समृद्ध तो था ही अब इसके
गोदाम तरह तरह की ध्वनियों से लबालब हो चले हैं. जैसे खाने
के सामान के रेडी-मिक्स पैकेट मार्केट में दीखते हैं वैसे ही कई
प्रकार के मिक्स संगीत में भी पैदा हो गए हैं. कई मिक्स का अर्थ
तो बनाने वाले को भी मालूम नहीं होता.

ज़माना दर्द-ए-जिगर और दर्द-ए-दिल से बहुत आगे बढ़ चुका है.
दर्द-ए-डिस्को और दर्द-ए-खिसको के युग में फिर से कुछ मधुरता
के कीटाणु घूमना शुरू हो गए हैं और कुछ कर्णप्रिय धुनें सुनाई
देना शुरू हो चुकी हैं. शरीर की लगभग सभी इन्द्रियों के उपयोग
हेतु गीत बनाये जा चुके हैं.

सुनते हैं ९० के दशक से एक गीत जसे परदे पर अनिल कपूर और
पार्श्व में कुमार सानू ने गाया है. प्रकाश मेहरा गीत के रचयिता हैं.





गीत के बोल:

दिल जो टूटा तो बहुत दूर तक आवाज़ गई
तोड़ने वाले सितमगर को खबर तक ना हुई

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए
दर्द-ए-दिल की मुझे बस दवा चाहिए
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए

कोई न जाने किससे मिलते कब लग जाए कैसी अगन
रस्में तोड़े दुनिया छोड़े दिल न माने कोई चलन
कोई न जाने किससे मिलते कब लग जाए कैसी अगन
रस्में तोड़े दुनिया छोड़े दिल न माने कोई चलन
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
पूछिए तो ज़रा मुझको क्या चाहिए

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए

दिल का सौदा कर ले दिल से जो भी होगा देखेंगे
प्यार किया तो प्यार की खातिर जान भी एक दिन दे देंगे
दिल का सौदा कर ले दिल से जो भी होगा देखेंगे
प्यार किया तो प्यार की खातिर जान भी एक दिन दे देंगे
प्यार में हमसफ़र आपसा चाहिए
पूछिए तो ज़रा मुझको क्या चाहिए

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए
दर्द-ए-दिल की मुझे बस दवा चाहिए
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
......................................................................................
Dil to dil hai 1-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor

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Oct 2, 2018

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया-जिंदगी एक जुआ १९९१

बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से सभी पाठकों का स्वागत है.
आशा है पिछले पोस्ट पढ़ कर आप सभी ने आनंद उठाया होगा.

अंतरात्मा मनुष्य की सबसे बड़ी पथप्रदर्शक है. जब तक मनुष्य
इस बात को समझ पाता है उम्र ढल जाती है. हम उन सयानों की
बात नहीं कर रहे जो पैदाइशी सर्व-ज्ञानी होते हैं. ये तो बात है एक
आम मनुष्य की.

अंतरात्मा शब्द का किसी ज़माने में हमें अर्थ पता नहीं होता था.
जिन जिन शब्दों में शुरू में अंतर लगा होता उनसे हम अनुमान
लगाया करते कि इसका अर्थ क्या होगा. अंतर्राज्यीय, अंतर्राष्ट्रीय
जैसे शब्द समाचारों और अख़बारों में खूब सुनाई और दिखलाई देते
थे. फिर एक दिन हमने संधि विच्छेद करके समझने की कोशिश
की- अंतर+आत्मा. इससे कुछ कुछ समझ आया कि ये विशेष किस्म
की आत्मा है. उस समय तक कोई बाबाजी, ज्ञानीजी से हमारा
संपर्क नहीं हुआ था और ज्ञान की स्रोत सीमित थे और बाबागिरी
की इंडस्ट्री भी उतना फली फूली नहीं थी.

समय बड़ा बलवान है और ये धीमे धीमे सब उजागर करता चलता
है चाहे वो शब्द का अर्थ हो या किसी का चरित्र.

सुनते हैं एक जीवन दर्शन वाला गीत. गीत ९० के दशक की फिल्म
जिंदगी एक जुआ से है जिसमें नायक अपनी कहानी गीत के ज़रिये
कह रहा है.




गीत के बोल:

आज हमने सबक वो पढ़ डाला
जिसको दुनिया किताब कहती है
और एक ऐसा काम कर डाला
जिसको दुनिया हिसाब कहती है

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
जब पा लिए खुश हो गए
जब खो दिया दिल रो दिया
इसी खोने पाने का नाम जिंदगी है
बिना खोये पाए नाकाम जिंदगी है
.........................................................
Kabhi kuchh khoya-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor, Shakti Kapoor, Madhuri Dixit

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