October 2, 2018

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया-जिंदगी एक जुआ १९९१

बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से सभी पाठकों का स्वागत है.
आशा है पिछले पोस्ट पढ़ कर आप सभी ने आनंद उठाया होगा.

अंतरात्मा मनुष्य की सबसे बड़ी पथप्रदर्शक है. जब तक मनुष्य
इस बात को समझ पाता है उम्र ढल जाती है. हम उन सयानों की
बात नहीं कर रहे जो पैदाइशी सर्व-ज्ञानी होते हैं. ये तो बात है एक
आम मनुष्य की.

अंतरात्मा शब्द का किसी ज़माने में हमें अर्थ पता नहीं होता था.
जिन जिन शब्दों में शुरू में अंतर लगा होता उनसे हम अनुमान
लगाया करते कि इसका अर्थ क्या होगा. अंतर्राज्यीय, अंतर्राष्ट्रीय
जैसे शब्द समाचारों और अख़बारों में खूब सुनाई और दिखलाई देते
थे. फिर एक दिन हमने संधि विच्छेद करके समझने की कोशिश
की- अंतर+आत्मा. इससे कुछ कुछ समझ आया कि ये विशेष किस्म
की आत्मा है. उस समय तक कोई बाबाजी, ज्ञानीजी से हमारा
संपर्क नहीं हुआ था और ज्ञान की स्रोत सीमित थे और बाबागिरी
की इंडस्ट्री भी उतना फली फूली नहीं थी.

समय बड़ा बलवान है और ये धीमे धीमे सब उजागर करता चलता
है चाहे वो शब्द का अर्थ हो या किसी का चरित्र.

सुनते हैं एक जीवन दर्शन वाला गीत. गीत ९० के दशक की फिल्म
जिंदगी एक जुआ से है जिसमें नायक अपनी कहानी गीत के ज़रिये
कह रहा है.




गीत के बोल:

आज हमने सबक वो पढ़ डाला
जिसको दुनिया किताब कहती है
और एक ऐसा काम कर डाला
जिसको दुनिया हिसाब कहती है

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
जब पा लिए खुश हो गए
जब खो दिया दिल रो दिया
इसी खोने पाने का नाम जिंदगी है
बिना खोये पाए नाकाम जिंदगी है
.........................................................
Kabhi kuchh khoya-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor, Shakti Kapoor, Madhuri Dixit

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