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Oct 31, 2020

जाने वाले ओ जाने वाले-हिना १९९२

जाने वाले चले जाते हैं. आखिर को किसी के रोके से कौन रुका है.
अकेले ही आना है और अकेले ही जाना है. चाहे जीवन के किसी
हिस्से में आगे ना मिलने के लिए बिछडना हो या संसार से
विदा लेना हो, विदा करने वाले अपनी भावनाएं क्विंटलों में 
उडेलते हैं.

वो समय था जब चीज़ें धीरे धीरे अपना आकार लेती थीं. आज की
तरह नहीं-हटा सावन की घटा स्टाईल-एक क्षण फुर्र दूसरे क्षण 
छू. करेले के हलवे और लहसुन की चाय वाले इस युग में 
मुझे मुकेश का एक पुराना गीत याद आता है-सुर की गति मैं
क्या जानूं. इसे यूँ समझें-फिल्मों की गति मैं क्या जानूं. 

तकनीकि का विकास हुआ मगर क्या घोड़े ने चारा खा के अगले
ही क्षण लीद निकालना शुरू कर दिया ? इंसानों की क्रिएटिविटी
इतनी रफ़्तार वाली हो गई कि एक हफ्ते में मास्टरपीस फ़िल्में 
बनने लग गयीं ?

सुनते हैं फिल्म हिना से एक कर्णप्रिय गीत जिसे ऋषि कपूर
और ज़ेबा बख्तियार पर फिल्माया गया है. Zee Music का
धन्यवाद जिसकी वजह से ये गीत हम देख
सुन पा रहे हैं.                                                                                                                                              




गीत के बोल:

गीत का आनंद लें, बोलों की
आवश्यकता हो तो कमेन्ट करें
...........................................................
Jaane waale o jaane waale-Henna 1991

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Mar 26, 2020

रहने को घर नहीं-सड़क १९९१

किसी भी व्यक्ति, मनुष्य या मानव और उसके परिवार का
रहन सहन का स्तर संसाधनों और सोच पर निर्भर करता
है. एक पीढ़ी के पास पैसा आ जाए तो ये ज़रूरी नहीं कि
उसकी अगली पीढ़ी का स्तर सुधर जाए. सुधार के लिए
पहली पीढ़ी को पहल करना पड़ेगी. स्तर में सुधार से ये
मतलब नहीं कि घर में हेलिकॉप्टर ला के रख दिया जाये.
समय के साथ साथ सोच में समृद्धि भी आना आवश्यक है.
इसके लिए ज़री वाला डायपर पहनने की भी ज़रूरत नहीं
है, कॉटन या नायलोन से भी काम चल जाता है.

एक सामान्य म्रूत्ति(mrootti as many of the people call it in
Delhi ) कार को बल्ले बल्ले करते हुए किसी उड़न कार के
माफिक सड़कों पर चलाने से भी स्तर में सुधार नहीं आता.
सभ्यता और संस्कारों के संगम के साथ साधनों के उचित
और optimum इस्तेमाल से ही ये संभव है. शौच(आलय)
को तो सुधार लिया सोच कब सुधरेगी हमारी?

हिपोक्रिटिक सोच से भी किसी का भला नहीं हो पाता. ये
भी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आने वाली बीमारी है. जो पिछली
कई पीढ़ियों से संसाधन संपन्न हैं वे समाज के बाकी के
हिस्सों के बारे में अलग सोच रखते हैं. पहाड़ियों पर बसे
कुछ खास किस्म के अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ लेने से संस्कार
या संस्कृति भूत की तरह अंदर नहीं घुस जाती. उसके लिए
समाज के बीच रहना पड़ता है, मूल्यों को समझना पड़ता
है. अपने से नीचे वाली जनता को हेय दृष्टि से देखने से
क्या आपके सामाजिक दायित्व पूरे हो जाते हैं ?

कई ऐसे उदाहरण हैं जिनमें बढ़िया संस्थानों से पढ़े हुए
विद्यार्थी मल्टीनेशनल की नौकरियां ठुकरा कर आम जनता
के बीच काम कर रहे हैं. आम जनता के बीच काम करने
का मतलब NGO चलाने से नहीं है. हमारे देश में ढेर सारे
NGO फर्जीवाड़े के लिए चलाये जा रहे हैं. विदेश से मिलने
वाला पैसा हजम करने के लिए और काले धन को सफ़ेद
करने के लिए. सभी ऐसे नहीं हैं. कुछ NGO समर्पण भाव
से जनता के लिए सार्थक काम भी कर रहे हैं.

सड़क पर घूमने वाला ही सड़क छाप नहीं हो जाता. वो
पैदल घूम रहा है इसलिए सड़क छाप और आप चतुर्चक्रीय
वाहन में घूम रहे हैं इसलिए आप श्रेष्ठी वर्ग के, ऐसा नहीं
होता. प्रकृति के सिद्धांत सबके लिए एक समान होते हैं.
सिद्धांत के हिसाब से मानें तो सड़क पर हर घूमने वाला
सड़क छाप ही है. 

सुनते हैं फिल्म सड़क से एक गीत जिसमें सड़क पर रहने
वालों का दर्द १००-२०० ग्राम बांटा गया है. पूरे दर्द के लिए
३-४ मिनट के गाने में स्कोप कम होता है.

समीर का गीत है और इसे कुमार सानू, देवाशीष दासगुप्ता
संग जुनैद अख्तर ने गाया है. नदीम श्रवण ने धुन बनाई
है.



गीत के बोल:

रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
अपना खुदा है रखवाला अब तक उसी ने है पाला
रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
अपना खुदा है रखवाला अब तक उसी ने है पाला

अपनी तो जिंदगी कटती है फुटपाथ पे
ऊंचे ऊंचे ये महल अपने हैं किस काम के
हमको तो माँ बाप के जैसी लगती है सड़क
कोई भी अपना नहीं रिश्ते हैं बस नाम के
अपने जो साथ है ये अँधेरी रात है
अपने जो साथ है ये अँधेरी रात है
अपना नहीं है उजाला अब तक उसी ने है पाला

ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू
ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू ज़ू

ये कैसा मुल्क है ये कैसी रीत है
याद करते हैं हमें लोग क्यूँ मरने के बाद
अंधे बहरों की बस्ती चारों तरफ अंधेर है
सबके सब लाचार हैं कौन सुन किसकी फ़रियाद
ऐसे में जीना है हमको तो पीना है
ऐसे में जीना है हमको तो पीना है
जीवन ज़हर का है प्याला अब तक उसी ने है पाला

रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
रहने को घर नहीं सोने को बिस्तर नहीं
अपना खुदा है रखवाला अब तक उसी ने है पाला
अपना खुदा है रखवाला अब तक उसी ने है पाला
………………………………………………………..
Rehne ko ghar nahin-Sadak 1991

Artists: Sanjay Dutt, Deepak Tijori, Neelima Azeem, Javed Khan

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Mar 20, 2020

पर्वत की ऊँचाई पर-नागमणि १९९१

जिन गानों में संगीतकार को नोट परफेक्ट सिंगर
चाहिए होता तो श्वेत श्याम युग में मन्ना डे की
आवाज़ का उपयोग किया जाता और रंगीन युग
में ७० के दशक के उत्तरार्ध के बाद सुरेश वाडकर
की आवाज़ का उपयोग किया जाने लगा. बाद में
सोनू निगम को भी ऐसे गाने मिलने लग गए.

सुरेश वाडकर का उच्चारण बहुत सारे गायकों से
बेहतर है. इसी गीत की बानगी ले लीजिए इसमें
गायक का उच्चारण गायिका से बेहतर है.

संतोष आनंद का गीत है और अन्नू मलिक का
संगीत. इस युगल गीत में अनुराधा पौडवाल की
आवाज़ भी है. अन्नू मलिक को धन्यवाद एक गीत
याद दिलवाने के लिए-ठीक दस साल पहले की
फिल्म बरसात की एक रात का गाना-नदिया किनारे
पे हमरा बागान.




गीत के बोल:

पर्वत की ऊँचाई पर
पर्वत की ऊँचाई पर ठहर गई है शाम
पर्वत की ऊँचाई पर ठहर गई है शाम
ले के तेरा नाम ले के तेरा नाम
तेरे पथ में दीप जलाये
तेरे पथ में दीप जलाये बैठी हूँ दिल थाम
हो ओ ओ ओ ले के तेरा नाम
हो ओ ओ ओ ले के तेरा नाम

सांवरी बदरी के साये में
चाँद खड़ा इंतज़ार में
हो अब तो आ जा
बेसब्री सी दे दी मुझे बहार ने
सांवरी बदरी के साये में
चाँद खड़ा इंतज़ार में
अब तो आ जा
बेसब्री सी दे दी मुझे बहार ने
अब तो आ जा
बेसब्री सी दे दी मुझे बहार ने
आ आ आ आ आ आ आ आ
तेरी सोच में छोड़ दिए हैं
तेरी सोच में छोड़ दिए हैं दुनिये के सब काम
ले के तेरा नाम हो ओ ओ ओ
ले के तेरा नाम

तेरी याद में इतनी डूबी
सब अनजाना हो गया
हो मुझको बिन बतलाये मेरा
दिल दीवाना हो गया
तेरी याद में इतना डूबा
जग अनजाना हो गया
मुझको बिन बतलाये मेरा
दिल दीवाना हो गया
मुझको बिन बतलाये मेरा
दिल दीवाना हो गया
दर्द की मारी मीरा जैसे
दर्द की मारी मीरा जैसे खोज रही हो श्याम
ले के तेरा नाम ले के तेरा नाम
…………………………………………………….
Parvat ki oonchai par-Naagmani 1991

Artists: Shikha Swaroop, Sumeet Saigal

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Jan 12, 2020

तू प्यार है किसी और का-दिल है कि मानता नहीं १९९१

टूटा दिल कैसी कैसी आवाजें निकालता है. कभी कोयल
बन जाता है तो कभी फटा भोंपू. आजकल के गीतों में
प्रेशर होर्न बन के भी बजता है.

सुनते हैं आमिर खान पर फिल्माया गया एक गीत जो
९० के दशक से है. समीर के बोल हैं, नदीम श्रवण का
संगीत और अनुराधा पौडवाल संग कुमार सानू ने इसे
गाया है. फिल्म का संगीत रिलीज़ किया था टी सीरीज़
नी.



गीत के बोल:

ला ला ला ला ला ला ला ला ला
हो ला ला ला ला ला ला ला ला ला
तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है
तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है
तू पसंद है किसी और की
तू पसंद है किसी और की तुझे मांगता कोई और है
तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है

कौन अपना है क्या बेगाना है
क्या हकीकत है क्या फ़साना है
कौन अपना है क्या बेगाना है
क्या हकीकत है क्या फ़साना है
ये ज़माने में किसने जाना है
ये ज़माने में किसने जाना है
तू नज़र में है किसी और की तुझे देखता कोई और है
तू नज़र में है किसी और की तुझे देखता कोई और है
तू पसंद है किसी और की तुझे मांगता कोई और है

तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है

प्यार में अक्सर ऐसा होता है
कोई हँसता है कोई रोता है
प्यार में अक्सर ऐसा होता है
कोई हँसता है कोई धोता है
कोई पाता है कोई खोता है
कोई पाता है कोई खोता है
तू जान है किसी और की तुझे जानता कोई और है
तू जान है किसी और की तुझे जानता कोई और है
तू पसंद है किसी और की तुझे मांगता कोई और है

तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है

सोचती हूँ मैं चुप रहूँ कैसे
दर्द दिल का ये मैं सहूँ कैसे
सोचती हूँ मैं चुप रहूँ कैसे
दर्द दिल का ये मैं सहूँ कैसे
कशमकश में हूँ ये कहूँ कैसे
कशमकश में हूँ ये कहूँ कैसे
मेरा हमसफ़र बस एक तू नहीं दूसरा कोई और है
मेरा हमसफ़र बस एक तू नहीं दूसरा कोई और है
तू पसंद है किसी और की तुझे मांगता कोई और है

तू प्यार है किसी और का तुझे चाहता कोई और है
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
...........................................................................
Too pyar hai kisi aur ka-Dil hai ki manta nahin 1991

Artists: Aamir Khan, Pooja Bhatt

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Jan 8, 2020

दुल्हन तू दूल्हा मैं-दिल है कि मानता नहीं १९९१

दूल्हा दुल्हन हिट्स से एक और गीत सुनते हैं जो है
९० के दशक से. सोचो तो ऊंचा सोचो इसी सोच के
तहत गाने में घोड़े के साथ हाथी का जिक्र भी है.
अब जिराफ़ हमारे यहाँ नहीं पाया जाता नहीं तो वो
भी शामिल होता काल्पनिक बारात में.

गीत लिखा है साँग फैक्ट्री के सामान आउटपुट देने
वाले गीतकार समीर ने और संगीत दिया है ९० के
दशक की प्रसिद्ध जोड़ी नदीम श्रवन ने. इसे गाया है
अनुराधा पौडवाल और देवाशीष दासगुप्ता ने.



गीत के बोल:

दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
मेरा इंतज़ार करना बारात ले के आऊंगा
दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा

ढोल बाराती घोड़े हाथी बाजा बजेगा राहों में
ढोल बाराती घोड़े हाथी बाजा बजेगा राहों में
चांदी जैसा बदन मैं तेरा भर लूँगा अपनी बाहों में
आएगी जब वो मिलन की रात
छेड़ के कोई प्यार की बात
तुझे सारी रात जगाऊँगा
दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा

दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी
दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी
देखना सजना प्यार में तेरे मर जाऊंगी
दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी

मेरे जीवन साथी जब से दिल में मेरे आये हो
हो मेरे जीवन साथी जब से दिल में मेरे आये हो
जनम जनम के प्यार को अपने साथ में जैसे लाये हो
देखा मैने तुझको जब से
मांग लिया तुझे अपने रब से
तुझ बिन जी न पाऊंगी
दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी
दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी
देखना सजना प्यार में तेरे मर जाऊंगी
दूल्हा तू दुल्हन मैं बन जाऊंगी

दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
दुल्हन तू दूल्हा मैं बन जाऊंगा
मेरा इंतज़ार करना बारात ले के आऊंगा
………………………………………………
Dulhan too dulha main-Dil hai ki manta nahin 1991

Artists: Aamir Khan, Pooja Bhatt

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Dec 31, 2019

दिल तुझपे आ गया-दिल है कि मानता नहीं १९९१

कुछ दिन पहले हमने इट हैप्पंड वन नाईट के बारे
में चर्चा की थी. इस फिल्म का थोडा जवान संस्करण
है-दिल है कि मानता नहीं. एक्टिंग का लेवल १९५६
की चोरी चोरी जैसा तो नहीं है मगर फिल्म में एक
खास बात है-इस फिल्म के संवाद प्रसिद्ध व्यंग्यकार
शरद जोशी ने लिखे हैं.

सुनते हैं फिल्म से एक गीत जिसमें हीरो और हीरोईन
छुपते छुपाते एक जगह पहुँच जाते हैं जहाँ उछल-कूद
और गायन हो रहा है. उन्हें ढूंढते हुए देसी मैन इन
ब्लैक पहुँच जाते हैं. लगता है उनके सारे उपकरण
और ज्ञानचक्षु की बैटरी डाउन है तभी तो वे पहचान
नहीं पा रहे हैं नायक और नायिका को जिन्हें मूढ़
से मूढ़ देखने वाला भी एक झलक में पहचान जाता
है. प्राइवेट डिटेक्टिव के रोल में हैं वीरेंद्र सक्सेना और
राकेश बेदी.

समीर का गीत है, अनुराधा पौडवाल और अभिजीत की
आवाजें और बाजे-गाजे की व्यवस्था नदीम श्रवण की.





गीत के बोल:

दिल तुझपे आ गया
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हे हे हे
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हे हे हे
मेरा दिल मेरी जां मेरा चैन मेरी आरज़ू सिर्फ़ तू
सिर्फ़ तू
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हो हो हो
मेरा दिल मेरी जां मेरा चैन मेरी आरज़ू सिर्फ़ तू
सिर्फ़ तू
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हे हे हे

रू रू रू रू रू रू

जब से तुझको देखा है दिल है बेक़रार
जब से तुझको देखा है दिल है बेक़रार
तू क्या जाने तुझसे कितना करता हूँ मैं प्यार
तू क्या जाने तुझसे कितना करता हूँ मैं प्यार
फ़साने उल्फ़त के तुझे सुना दूंगा
जो मेरे दिल में है तुझे बता दूंगा
जो मेरे दिल में है तुझे बता दूंगा

दिल तुझपे आ गया
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हो हो हो
दिल तुझपे आ गया
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हो हो हो

हो मेरे दिल की हालत तुझे क्या है पता
मेरे दिल की हालत तुझे क्या है पता
मैने तुझको चाहा इसमें मेरी क्या है खता
मैने तुझको चाहा इसमें मेरी क्या है खता
तू एक मुसाफ़िर है मैं तेरी मंज़िल हूँ
तू एक तराना है मैं तेरी महफ़िल हूँ
तू एक तराना है मैं तेरी महफ़िल हूँ

दिल तुझपे आ गया
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हो हो हो
दिल तुझपे आ गया
दिल तुझपे आ गया क्या नशा छा गया हे हे हे
मेरा दिल मेरी जां मेरा चैन मेरी आरज़ू सिर्फ़ तू
सिर्फ़ तू
सिर्फ़ तू सिर्फ़ तू
…………………………………………….
Dil tujhpe aa gaya-Dil hai ki manta nahin 1991

Artists: Aamir Khan, Pooja Bhatt, Veerendra Saxena, Rakesh Bedi

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Dec 30, 2019

दिल है कि मानता नहीं-शीर्षक गीत १९९१

सन १९९१ की फिल्म दिल है कि मानता नहीं से शीर्षक गीत सुनते हैं.
इसे अनुराधा पौडवाल और कुमार सानू ने गाया है. फिल्म का सबसे
ज्यादा सुना जाने वाला गीत शायद यही है. मैं शायद इसलिए कह रहा
हूँ, क्यूंकि कुछ श्रोताओं की राय में बाकी के गीत भी हो सकते हैं इस
बात के दावेदार.

मेरी राय इस बात पे बनी है कि इसे मैंने सबसे ज्यादा बजते हुए पाया
सभी जगह. गीत फैज़ अनवर का है और इसका संगीत नदीम श्रवण ने
तैयार किया है. फिल्म के बारे में पिछली २-३ पोस्ट में हमने काफी चर्चा
की थी.

नायक नायिका कितने ही घोंचू जैसे दिखें मगर किसी भी गाने में वे सब
हैंडसम दिखलाई देने लगते हैं. आप अगर वास्तव में उनकी आवाजों में
गाने सुन लें तो शायद गानों के प्रति आपका मोह कम हो जायेगा. किसी
की आँखें चेहरे के भावों का साथ नहीं देती तो किसी की आवाज़ उसके
अभिनय से मेल नहीं खाती, मगर हम उन सभी को स्वीकार करते हैं और
अपनी कमाई में से खर्च कर के टिकट ले के फ़िल्में देखते ही है ना.

गीत के ऑडियो में पहला और दूसरा अन्तरा है जबकि वीडियो में
पहला और तीसरा.




गीत के बोल:

दिल है के मानता नहीं
दिल है के मानता नहीं
मुश्किल बड़ी है रस्म-ए-मोहब्बत
ये जानता ही नहीं
ओ ओ ओ ओ ओ
दिल है कि मानता नहीं
दिल है कि मानता नहीं
ये बेकरारी क्यूं हो रही है
ये जानता ही नहीं
हो ओ ओ ओ ओ
दिल है के मानता नहीं
दिल है कि मानता नहीं

दिल तो ये चाहे हर पल तुम्हें हम
बस यूं ही देखा करें
मर के भी हम ना तुमसे जुदा हों
आओ कुछ ऐसा करें
मुझ में समा जा आ पास आ जा
हमदम मेरे हमनशीं
दिल है के मानता नहीं
दिल है के मानता नहीं

तेरी वफ़ायें तेरी मुहब्बत
सब कुछ है मेरे लिए
तूने दिया है नज़राना दिल का
हम तो हैं तेरे लिये
ये बात सच है सब जानते हैं
तुमको भी है ये यक़ीं
दिल है के मानता नहीं
दिल है के मानता नहीं

हम तो मोहब्बत करते हैं तुमसे
हमको है बस इतनी खबर
तन्हा हमारा मुश्क़िल था जीना
तुम जो न मिलते अगर
बेताब साँसें बेचैन आँखें
कहने लगीं बस यही
दिल है के मानता नहीं
दिल है के मानता नहीं
मुश्किल बड़ी है रस्म-ए-मोहब्बत
ये जानता ही नहीं
ओ ओ ओ ओ ओ
दिल है कि मानता नहीं
दिल है कि मानता नहीं
………………………………………
Dil hai ki manta nahin-Titlesong 1991

Artists: Aamir Khan, Pooja Bhatt

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मुहब्बत की है तुम्हारे लिये-सड़क १९९१

१० साल में कितना कुछ बदल जाता है, ये जुमला हम
इस्तेमाल करते थे ९० के दशक में. मिलेनियम वर्ष
अर्थात २००० के आने के बाद चीज़ों के बदलने की गति
तेज होती चली और अब हर दूसरे साल ये कहना पड़ता
है कि ज़माना कितना बदल गया है.

२०१२ तक आम आदमी को ये नहीं पता था कि जी डी पी
के पहले शब्द जी का अर्थ ग्रॉस है, ग्रास है या गाजर घास
है. अब वो इस पर खुले आम चर्चा करता मिलता है भले
ही इसका मतलब आज भी मालूम ना हो.

बदलाव शायद इसी को कहते हैं. एक अभियांत्रिकी का
छात्र चावल के पेड़ देखने का दावा कर सकता है तो
कुछ भी संभव है. हो सकता है भविष्य में चावल पेड़ पर
उगने शुरू हो जाएँ.

सुनते हैं सड़क फिल्म का युगल गीत कुमार सानू और
अनुराधा पौडवाल का गाया हुआ. समीर के बोलों को
सुरों में ढाला है नदीम श्रवण ने.




गीत के बोल:

मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये
बग़ावत की है तुम्हारे लिये
बग़ावत की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये

ख़ुशियों की डफ़ली बजाते रहेंगे
ख़ुशियों की डफ़ली बजाते रहेंगे
सारी उमर यूँ ही गाते रहेंगे
सारी उमर यूँ ही गाते रहेंगे
हो साँसों की सरगम यही गुनगुनाये
साँसों की सरगम यही गुनगुनाये
तुझको कभी ना कोई ग़म सताये
इबादत की है तुम्हारे लिये
इबादत की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये

मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये

कश्ती हूँ मैं तू है मेरा किनारा
कश्ती हूँ मैं तू है मेरा किनारा
मुझको तो है सिर्फ़ तेरा सहारा
मुझको तो है सिर्फ़ तेरा सहारा
मैं चन्द्रमा तू मेरी रोशनी है
मैं चन्द्रमा तू मेरी रोशनी है
मेरे लिये जानेमन तू बनी है
हिफाज़त की है तुम्हारे लिये
हिफाज़त की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये

मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये

मुझको पता है ना तुझको ख़बर है
मुझको पता है ना तुझको ख़बर है
हमको तो हर पल ज़माने का डर है
हमको तो हर पल ज़माने का डर है
हम वो करेंगे हमें जो है करना
हम वो करेंगे हमें जो है करना
हमको ज़माने की कोई फ़िक़र ना
अदावत की है तुम्हारे लिये
अदावत की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये
जान भी दूँगा तुम्हारे लिये

बग़ावत की है तुम्हारे लिये
बग़ावत की है तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये
जान भी दूँगी तुम्हारे लिये
मुहब्बत की है तुम्हारे लिये
बग़ावत की है तुम्हारे लिये
हिफाज़त की है तुम्हारे लिये
इबादत की है तुम्हारे लिये
…………………………………………………….
Muhabbat ki hai-Sadak 1991

Artists: Sanjay Dutt, Pooja Bhatt

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Dec 29, 2019

मैनूं इश्क़ दा लगया रोग-दिल है कि मानता नहीं १९९१

फिल्म दिल है कि मानता नहीं से एक बेहतर धुन पेश
है. जिन गानों में दर्द की लकीर छुपी होती है वे कुछ
अलग तो होते ही हैं आखिर. ये लोकप्रिय हो या ना हों
कोई फर्क नहीं पड़ता.

कहा जाता है जब व्यक्ति खुश होता है तब गाने की धुन
सुनता है और जब दुखी होता है तब बोलों को सुनता है.
दर्द में ही जिंदगी की बारीकियां ज्यादा प्रकट हुआ करती
हैं.

समीर के बोल, नदीम श्रवण का संगीत है और इसे गाया
है अनुराधा पौडवाल ने. दर्द वाले गीत में आखिर में एक
हाय सुनाई दे ही गई.



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मुझसे कहने लगे हैं लोग
मुझसे कहने लगे हैं लोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद

इश्क़ ने जला दिया सब कुछ भुला दिया
इश्क़ ने देखो कैसा अपना हाल बना दिया
कैसी है बेखुदी कैसी अगन लगी
जब से इश्क़ हुआ है तब से दुनिया लगे नई
ये दिल है के माने ना पागल कुछ भी जाने ना

मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद

इश्क़ ने बना दिया इश्क़ ने मिटा दिया
इश्क़ ने तुझको मुझको क्या दुनिया को झुका दिया
इश्क़ में मर जायें आ कुछ कर जायें
इश्क़ की ख़ुश्बू से सारे आलम को महकायें
प्यार में तेरे जाने जां मैने छोड़ा है सारा जहां

मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मुझसे कहने लगे हैं लोग
मुझसे कहने लगे हैं लोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
मैनूं इश्क़ दा लगिया रोग
मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
हाय मेरे बचने दी नइयो उम्मीद
………………………………………………
Mainu ishq da lagiya-Dil hai ki manta nahin 1991

Artists: Pooja Bhatt, Aamir Khan

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Dec 15, 2019

दिल जो हमारा आहें न भरता-नागमणि १९९१

सन १९९१ की फिल्म नागमणि में शिखा स्वरुप और
सुमीत सहगल प्रमुख कलाकार हैं. शिखा स्वरुप अपने
ज़माने की ख्यात सुंदरी हैं. बहुमुखी प्रतिभा की धनी
शिखा कुछ ही फिल्मों में नज़र आयीं.

फिल्म के गीत अपने समय में खूब बजे हुए हैं. समीर
के गीत की धुन तैयार की है अन्नू मलिक ने. इसे गाया
है अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडकर ने.

अन्नू मलिक ने फिल्म बाजीगर में झंडे गाड़ने के पहले
इस फिल्म के ज़रिये झंडे का डंडा ज़रूर तैयार कर लिया
था.




गीत के बोल:

दिल जो हमारा आहें न भरता
हो ओ ओ दिल जो हमारा आहें न भरता
तो दुनिया में कोई मुहब्बत न करता
दिल जो हमारा आहें न भरता
दिल जो हमारा आहें न भरता
तो दुनिया में कोई मुहब्बत न करता
दिल जो हमारा आहें न भरता

ना खुशी कोई होती न आँखों में पानी
सज़ा बन गई होती ये ज़िंदगानी
ना खुशी कोई होती न आँखों में पानी
सज़ा बन गई होती ये ज़िंदगानी
सज़ा बन गई होती ये ज़िंदगानी
बिना इसके जो यूं ही जो जीवन गुज़रता
दिल जो हमारा आहें न भरता

मोहब्बत की कीमत लगाई न जाये
ये सौदागरों से खरीदी ना जाये
मोहब्बत की कीमत लगाई न जाये
ये सौदागरों से खरीदी ना जाये
ये सौदागरों से खरीदी ना जाये
न मौसम अगर यूं मचल कर उभरता

दिल जो हमारा आहें न भरता
हो ओ ओ दिल जो हमारा आहें न भरता
तो दुनिया में कोई मुहब्बत न करता
दिल जो हमारा आहें न भरता
………………………………………………
Dil jo hamara aahen na bharta-Naagmani 1991

Artists: Shikha Swaroop, Sumeet Saigal

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Dec 14, 2019

तक धिन धिन तक-सड़क १९९१

सन १९९१ की फिल्म सड़क से एक गीत सुनते हैं जो चार
कलाकारों पर फिल्माया गया है मगर इसे गाया केवल तीन
लोगों ने है. इसे संजय दत्त, पूजा भट्ट, दीपक तिजोरी और
नीलिमा अज़ीम पर फिल्माया गया है. हीरो हीरोईन, साइड
किक और साइड किकनी सब मौजूद हैं इस गाने में.

जीवन की आपाधापी और समस्याओं के अम्बार के बीच
थोड़ी सी तक धिन धिन तक अवश्य करते रहना चाहिए. ये
आपको रिफ्रेश कर देती है.

सुनते हैं समीर की रचना जिसका संगीत नदीम श्रवण ने
तैयार किया है. इसे गाया है कुमार सानू, अनुराधा पौडवाल
और बाबला मेहता ने.



गीत के बोल:

तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
मिलते ही तुझे दिल नाच उठा
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
जीने की तमन्ना जाग उठी हो हो हो
जीने की तमन्ना जाग उठी
इस दिल में क़यामत के दिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
मिलते ही तुझे दिल नाच उठा
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
जीने की तमन्ना जाग उठी हो हो हो
जीने की तमन्ना जाग उठी
इस दिल में क़यामत के दिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक

ऐसा मौसम तो आया न था
ऐसा जादू तो छाया न था
ऐसी चाहत तो पहले न थी
ऐसी हालत तो पहले न थी
ख़ुशियां जाग उठीं मन में
अब न ग़म है जीवन में
जी चाहे के उड़ जाऊं
अम्बर छू के मैं आऊं

हो जीने की तमन्ना जाग उठी हो हो हो
जीने की तमन्ना जाग उठी
इस दिल में क़यामत के दिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
मिलते ही तुझे दिल नाच उठा
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक

दुनिया बदली सी लगने लगी
सोई धड़कन क्यों जगने लगी
रंग मौसम बदलने लगा
मेरा दिल भी मचलने लगा
सच्चा हो गया सपना
मुझको मिल गया अपना
अरमानों की बस्ती में
अब रहना है मस्ती में

हो जीने की तमन्ना जाग उठी हो ओ ओ
जीने की तमन्ना जाग उठी
इस दिल में क़यामत के दिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
मिलते ही तुझे दिल नाच उठा
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
जीने की तमन्ना जाग उठी हो ओ ओ
जीने की तमन्ना जाग उठी
इस दिल में क़यामत के दिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
तक धिन धिन तक
……………………………………………
Tak dhin dhin tak-Sadak 1991

Artists: Sanjay Dutt, Pooja Bhatt, Deepak Tijori, Neelima Azeem

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Dec 12, 2019

हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते-सड़क १९९१

मेंडोलिन नाम के वाद्य का प्रयोग हिंदी गीतों में खूब
हुआ है. कई ऐसे गीत हैं जिनके अंत में गीत की पंक्ति
की जगह मेंडोलिन पर बजायी धुन प्रयोग में लायी
गयी है. ये गीत की खूबसूरती को बढ़ा देती है.

सुनते हैं सन १९९१ की फिल्म सड़क से एक हिट गीत
जिसे मनहर और अनुराधा पौडवाल ने गाया है. समीर
के बोल हैं और नदीम श्रवण का संगीत.



गीत के बोल:

हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
उड़े खुशबू कली महके ये रुत बदले बहार आये
मुहब्बत करने की जानम उम्र तो एक बार आये
तुम्हें प्यार करने को जी करता है
इकरार करने को जी करता है
इकरार करने को जी करता है
तुम नहीं होते तो दिल न लगाते
तुम नहीं होते तो दिल न लगाते
दिल की तड़प हम किसको बताते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते

भुलाये से नहीं भूले मेरे दिलबर तेरी बातें
तेरी यादों में गुज़रीं हैं कई सुबह कई रातें
तुझसे दूर जो कहीं हम जायेंगे
हर घड़ी हम तुझे याद आयेंगे
हर घड़ी हम तुझे याद आयेंगे
तेरी इन बातों से हम घबराते
तेरी इन बातों से हम घबराते
तौबा तुम हमें कितना तड़पाते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते

कभी देखूं जो मैं दर्पण चेहरा तेरा नज़र आये
जब जब लेती हूँ मैं साँसें तेरी खुशबू बिखर जाये
तेरे बिन जीना अब मुश्किल है
मैं दिल हूँ तेरा तू मेरा दिल है
मैं दिल हूँ तेरा तू मेरा दिल है
सारी उमर हम तो पछताते
सारी उमर हम तो पछताते
राज़ कोई जो तुझसे छुपाते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते

हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते
हाय प्यार क्या चीज़ है ये जान नहीं पाते
हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते
तुम नहीं आते तो हम मर जाते
...................................................................
Ham tere bin kahin-Sadak 1991

Artists: Sanjay Dutt, Pooja Bhatt

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Dec 11, 2019

क्या सोचता है ए दिल-सड़क १९९१

सड़क के लोकप्रिय गीतों की गूँज में एक दो गीत कहीं
खो से गए हैं. ज़रूरी नहीं हर एल्बम के सारे गीत उतने
ही लोकप्रिय हों. हाँ, कुछ गीत लंबे समय तक सुनने
लायक होते हैं, ये एक ऐसा ही गाना है.

सुनते हैं रानी मालिक का लिखा हुआ एक गीत जिसे
गाया है अनुराधा पौडवाल ने. तबियत से लिखा गया ये
गीत है जिसमें जवाब है उस बेचैनी का जो प्यार के
कारण उत्पन्न होती है. सभी का वही हाल होता है अतः
अचरज की आवश्यकता नहीं. सभी के लट्टू गुल हो जाते
हैं.

इस गीत की धुन नदीम श्रवण ने तैयार की है.



गीत के बोल:

क्या सोचता है ए दिल क्या सवाल करता है
ये प्यार तो सभी का बुरा हाल करता है
क्या सोचता है ए दिल क्या सवाल करता है
ये प्यार तो सभी का बुरा हाल करता है
क्या सोचता है ए दिल

जिसने भी प्यार किया दिल का ऐतबार किया
हाँ जिसने भी प्यार किया दिल का ऐतबार किया
उसने तो खुद ही अपना बस जीना दुश्वार किया
पहते तो दिल लगा के
फिर दर्द मीठा पा के क्या ख्याल करता है
ये प्यार तो सभी का बुरा हाल करता है
क्या सोचता है ए दिल

जाता है इक नज़र में दिल का सुकून सारा
जाता है इक नज़र में दिल का सुकून सारा
देता जो बेकरारी लगता है वो ही प्यारा
क्या हम बतायें कैसे
मत पूछो कैसे कैसे ये कमाल करता है
ये प्यार तो सभी का बुरा हाल करता है
क्या सोचता है ए दिल क्या सवाल करता है
ये प्यार तो सभी का बुरा हाल करता है
क्या सोचता है ए दिल
क्या सोचता है ए दिल
…………………………………………….
Kya sochta hai ae dil-Sadak 1991

Artist:

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Nov 9, 2019

गुड़िया रानी बिटिया रानी-लम्हे १९९१

बाल गीत श्रेणी में अगला गीत पेश है फिल्म लम्हे
से. लता मंगेशकर ने तकरीबन २५ बाल गीत गाये
हैं. आनंद बक्षी के लिखे गीत इनमें सबसे ज्यादा हैं
मेरे ख्याल से.

प्रस्तुत गीत वहीदा रहमान और श्रीदेवी पर फिल्माया
गया है. लम्हे फिल्म काफी लोकप्रिय और सफल फिल्म
है सन १९९१ की. प्रस्तुत गीत फिल्म का थोडा कम
सुना गया गीत है.




गीत के बोल:

गुड़िया रानी बिटिया रानी
परियों की नगरी से एक दिन
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे
गुड़िया रानी बिटिया रानी
परियों की नगरी से एक दिन
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे

आगे पीछे घोड़े हाथी
बीच में होंगे सौ बाराती
इतनी आज अकेली है तू
तेरे कितने होंगे साथी
मैं खुश मेरी आँख में पानी

गुड़िया रानी बिटिया रानी
परियों की नगरी से एक दिन
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे

तू मेरी छोटी सी गुड़िया
बन जाएगी जादू की पुड़िया
तुझपे आ जाएगी जवानी
मैं तो हो जाऊंगी बुढ़िया
भूल ना जाना प्रीत पुरानी

गुड़िया रानी बिटिया रानी
परियों की नगरी से एक दिन
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे
गुड़िया रानी बिटिया रानी
परियों की नगरी से एक दिन
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे
राजकुंवर जी आएंगे
महलों में ले जाएंगे
ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला
………………………………………………
Gudiya rani bitiya rani-Lamhe 1991

Artists: Waheeda Rehman, Sridevi

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Oct 22, 2019

वो जो कहा था मैंने-यारा दिलदारा १९९१

संगीतकार जतिन ललित की डेब्यू फिल्म है यारा दिलदारा.
निर्माता निर्देशक सईद मिर्ज़ा ने नए कलाकारों को ले कर
फिल्म बनाई जिसमें नायक नायिका को छोड़ कर बाकी के
प्रमुख कलाकार पुराने ही हैं.

नायिका रुचिका पाण्डे का तो पता नहीं मगर इस फिल्म के
नायक आसिफ शेख को आपने काफी सारी फिल्मों में चरित्र
भूमिकाओं और कुछ टेली सीरियल में अवश्य देखा होगा.
यस बॉस उनका सबसे ज्यादा जाना पहचाना सीरियल है.

गीत मजरूह सुल्तानपुरी का है और इसे उदित नारायण संग
कविता कृष्णमूर्ति ने गाया है जतिन ललित के संगीत पर.
काम्प्लेक्स इमोशंस हैं और गीत की पंक्तियाँ भी आइरनिकल
हैं. फिल्म देखे बिना आपको इसका मतलब समझ नहीं आना.

Sbm-7Mpj9EE


गीत के बोल:

वो जो कहाँ था मैंने वो कर के दिखाया ना
बाज़ी वो जान दिल की मैं जीत लाया ना
हो ओ आ तू भी देख ओ जाने जां
नश्तर तेरी मोहब्बत का रंग लाया ना
ओ साजना ये क्या किया तड़पे जिया

ज़ख्मों के फूल दागों का हार कितना हसीं है ये तेरा प्यार
आई ना होगी ऐसी बहार
तेरी गली को दिल का चमन बनाया ना
हो ओ आ तू भी देख ओ जाने जां
हो नश्तर तेरी मोहब्बत का रंग लाया ना
हो ओ आ तू भी देख ओ जाने जां
क्या ना है तू मेरे लिए पर मैं नहीं हूँ तेरे लिए
तेरे लिए ही है मेरा प्यार
अपने को अपनी ही आग में जलाया ना
ओ साजना ये क्या किया तड़पे जिया

महलों से दूर बैठा हूँ मैं अब तो तेरे ही जैसा हूँ मैं
काहे का है अब ये इंतज़ार
भूले से दिल ने तुझको कभी भुलाया ना
बाज़ी वो जान दिल की मैं जीत लाया ना
हो ओ आ तू भी देख ओ जाने जां
नश्तर तेरी मोहब्बत का रंग लाया ना
ओ साजना ये क्या किया तड़पे जिया
…………………………………………………
Wo jo kahan tha maine-Yaara dildara 1991

Artists: Aasif Sheikh, Ruchika Pandey

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Jul 15, 2019

आ ये हसीन रात मोहब्बत में-शिव राम १९९१

किसी खजाने को देखो तो सामने कुछ चीज़ें ज्यादा चमकती हुई
दिखाई देती हैं. सामने पड़ी हुई चीज़ों के अलावा भी बहुत कुछ
होता है जो छुपा होता है. वैसा ही कुछ हिंदी फिल्म संगीत
के खजाने का भी हाल है.

आज सुनते हैं सन १९९१ की फिल्म शिव राम से एक गीत जिसे
कुमार सानू और अनुराधा पौडवाल ने गाया है. गीत अनवर सागर
का है और संगीत राजेश रोशन का. गीत के दूसरे अंतरे में फ़िल्मी
बरसात भी है. संगीत से ज्यादा इस गीत के बोल बढ़िया हैं.
   


गीत के बोल:

आ ये हसीन रात
आ ये हसीन रात मोहब्बत में गुज़ार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
आ ये हसीन रात मोहब्बत में गुज़ार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें

क्या पता कल क्या हो कल का नहीं भरोसा
क्या पता कल क्या हो कल का नहीं भरोसा
मालूम नहीं किस पल दे ये ज़िन्दगानी धोखा
ऐसा होने से पहले कहीं खोने से पहले
एक दूसरे को हम
एक दूसरे को हम जी भर के प्यार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें

एक आग सी लगी है सीने में हसरतों की
एक आग सी लगी है सीने में हसरतों की
बरसा दो घटाएं तुम मुझपे चाहतों की
होंठों की नरमी से साँसों की गर्मी से
बेचैन उमंगों को
बेचैन उमंगों को हम मिल के निखार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
दिल की कश्ती प्यार के सागर में उतार दें
……………………………………………………………
Aa ye haseen raat mohabbat mein-Shiv Ram 1991

Artists: Jeetendra, Sangeeta Bijlani

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Dec 31, 2018

दिल तो दिल है १-जिंदगी एक जुआ १९९१

हिंदी फिल्म संगीत का खज़ाना काफी समृद्ध तो था ही अब इसके
गोदाम तरह तरह की ध्वनियों से लबालब हो चले हैं. जैसे खाने
के सामान के रेडी-मिक्स पैकेट मार्केट में दीखते हैं वैसे ही कई
प्रकार के मिक्स संगीत में भी पैदा हो गए हैं. कई मिक्स का अर्थ
तो बनाने वाले को भी मालूम नहीं होता.

ज़माना दर्द-ए-जिगर और दर्द-ए-दिल से बहुत आगे बढ़ चुका है.
दर्द-ए-डिस्को और दर्द-ए-खिसको के युग में फिर से कुछ मधुरता
के कीटाणु घूमना शुरू हो गए हैं और कुछ कर्णप्रिय धुनें सुनाई
देना शुरू हो चुकी हैं. शरीर की लगभग सभी इन्द्रियों के उपयोग
हेतु गीत बनाये जा चुके हैं.

सुनते हैं ९० के दशक से एक गीत जसे परदे पर अनिल कपूर और
पार्श्व में कुमार सानू ने गाया है. प्रकाश मेहरा गीत के रचयिता हैं.





गीत के बोल:

दिल जो टूटा तो बहुत दूर तक आवाज़ गई
तोड़ने वाले सितमगर को खबर तक ना हुई

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए
दर्द-ए-दिल की मुझे बस दवा चाहिए
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए

कोई न जाने किससे मिलते कब लग जाए कैसी अगन
रस्में तोड़े दुनिया छोड़े दिल न माने कोई चलन
कोई न जाने किससे मिलते कब लग जाए कैसी अगन
रस्में तोड़े दुनिया छोड़े दिल न माने कोई चलन
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
पूछिए तो ज़रा मुझको क्या चाहिए

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए

दिल का सौदा कर ले दिल से जो भी होगा देखेंगे
प्यार किया तो प्यार की खातिर जान भी एक दिन दे देंगे
दिल का सौदा कर ले दिल से जो भी होगा देखेंगे
प्यार किया तो प्यार की खातिर जान भी एक दिन दे देंगे
प्यार में हमसफ़र आपसा चाहिए
पूछिए तो ज़रा मुझको क्या चाहिए

दिल तो दिल है दिल का क्या है
जिसपे आया उसपे आया
दिल की बातें दिल ही जाने
दिल ही समझे दिल की माया
दिल की माया पूछिए तो ज़रा
मुझको क्या चाहिए
दर्द-ए-दिल की मुझे बस दवा चाहिए
इब्तदा हो चुकी इन्तहा चाहिए
......................................................................................
Dil to dil hai 1-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor

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Oct 23, 2018

बम बम बंबई-स्वर्ग १९९०

राजेश खन्ना और गोविंदा अभिनीत फिल्म स्वर्ग से अगला
गीत सुनते हैं जो अमित कुमार की आवाज़ में है.

समीर के बोल हैं और आनंद मिलिंद का संगीत.

फिल्म की स्टारकास्ट इस तरह से है-राजेश खन्ना, माधवी,
गोविंदा, जूही चावला, परेश रावल, दिलीप धवन, नीना गुप्ता,
महेश आनंद, सतीश कौशिक, भरत कपूर, शम्मी और
राजा बुंदेला.

   


गीत के बोल:

बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
देख के बम्बई का नज़ारा दिल की धडकन थम  गई
बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
देख के बम्बई का नज़ारा दिल की धडकन थम  गई
बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
बम बम बम बंबई बंबई हमको जम गई
……………………………………………..
Bam bam bambai-Swarg 1991

Artist: Govinda

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Oct 21, 2018

मुझे आज कुछ न कहना-अकेला १९९१

फ़िल्मी नोकझोंक वाला एक गीत सुनते हैं जो ९० के दशक
में खूब बजा करता था. अमिरभ पर फिल्माए गए इस गीत
को सुदेश भोंसले और अलका याग्निक ने गाया है.

गीत में अमृता सिंह और अमिताभ के बीच नोक झोंक चल
रही है. गीत आनंद बक्षी का है और संगीत लक्ष्मी प्यारे का.



गीत के बोल:

चोरी से छुप छुपा के आया था मैं लगा के
फिर पान भी चबाया फिर इतर भी लगाया
थोड़ा सम्भल सम्भल के आया मैं सीधा चल के
पर लड़खड़ा गया मैं

मेरी चोरी पकड़ी गई ना
मुझे आज कुछ न कहना मेरा दिल ठिकाने हई ना

मुर्गे से बोली मुर्गी तोते से बोली मईना
उनका मज़ाक ठहरा मेरी जान गईना
मुझे आज कुछ न कहईना मेरा दिल ठिकाने हईना

मस्तियां और बढ़ें और नशा छाये
झूम उठे मेरा दिल पास जो तू आए
अब तुझको देखता हूँ मैं दिल में सोचता हूँ
कितनी हसीन है तू लड़की है या है जादू
है गोरा गोरा मुखड़ा ये काले काले नैना
मुझे आज कुछ न कहईना

अब तक हूँ मैं कुंवारा मुश्किल है अब गुज़ारा
मंडप सजा हुआ है बाजा भी बज रहा है
चाहे तो साथ मेरे ले ले तू सात फेरे
ना ना अच्छा हूँ मैं अकेला शादी तो है झमेला
दिन रात की सलामी बीवी की है गुलामी
रोते अच्छे अच्छे मुझको तो तोता बन के
पिंजरे में नईयो रहना
मुझे आज कुछ न कहईना

प्यार पर क़ैद है न दिल पे कोई पहरे
दूल्हा दुल्हन के हैं फूलों की तरह चेहरे
ये रानी और वो राजा गूंजा खुशी का बाजा
जारी है जश्न-ए-शादी बाकी है रात आधी
नाचूंगा गाऊंगा रे मैं आज सारी रईना
मुझे आज कुछ न कहईना ...
…………………………………………………
Mujhe aaj kuchh na kehna-Akela 1991

Artists: Amitabh Bachchan, Amrita Singh

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Oct 2, 2018

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया-जिंदगी एक जुआ १९९१

बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से सभी पाठकों का स्वागत है.
आशा है पिछले पोस्ट पढ़ कर आप सभी ने आनंद उठाया होगा.

अंतरात्मा मनुष्य की सबसे बड़ी पथप्रदर्शक है. जब तक मनुष्य
इस बात को समझ पाता है उम्र ढल जाती है. हम उन सयानों की
बात नहीं कर रहे जो पैदाइशी सर्व-ज्ञानी होते हैं. ये तो बात है एक
आम मनुष्य की.

अंतरात्मा शब्द का किसी ज़माने में हमें अर्थ पता नहीं होता था.
जिन जिन शब्दों में शुरू में अंतर लगा होता उनसे हम अनुमान
लगाया करते कि इसका अर्थ क्या होगा. अंतर्राज्यीय, अंतर्राष्ट्रीय
जैसे शब्द समाचारों और अख़बारों में खूब सुनाई और दिखलाई देते
थे. फिर एक दिन हमने संधि विच्छेद करके समझने की कोशिश
की- अंतर+आत्मा. इससे कुछ कुछ समझ आया कि ये विशेष किस्म
की आत्मा है. उस समय तक कोई बाबाजी, ज्ञानीजी से हमारा
संपर्क नहीं हुआ था और ज्ञान की स्रोत सीमित थे और बाबागिरी
की इंडस्ट्री भी उतना फली फूली नहीं थी.

समय बड़ा बलवान है और ये धीमे धीमे सब उजागर करता चलता
है चाहे वो शब्द का अर्थ हो या किसी का चरित्र.

सुनते हैं एक जीवन दर्शन वाला गीत. गीत ९० के दशक की फिल्म
जिंदगी एक जुआ से है जिसमें नायक अपनी कहानी गीत के ज़रिये
कह रहा है.




गीत के बोल:

आज हमने सबक वो पढ़ डाला
जिसको दुनिया किताब कहती है
और एक ऐसा काम कर डाला
जिसको दुनिया हिसाब कहती है

कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
कभी कुछ खोया कभी कुछ पाया
जब पा लिए खुश हो गए
जब खो दिया दिल रो दिया
इसी खोने पाने का नाम जिंदगी है
बिना खोये पाए नाकाम जिंदगी है
.........................................................
Kabhi kuchh khoya-Zindagi ek jua 1991

Artists: Anil Kapoor, Shakti Kapoor, Madhuri Dixit

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