कैसा ये राज़ है-राज़ २ २००९
हैं इमरान हाशमी. फिल्म के निर्देशक हैं मोहित सूरी. गीत लिखा
है सईद कादरी ने और संगीत है नए निर्देशक प्रणय एम् रिजिया
का. गायक ज़रूर पहचाने से हैं-के के. फिल्म में ढेर सारे लोगों ने
संगीत दिया है और इसके गाने समीक्षकों के अनुसार सुनने लायक
हैं. हम भी सुन लेते हैं जी.
गीत के बोल:
रातों की तन्हाई में,
सुबहों की परछाई में हे हे हे
चेहरा है क्या ये मेरी आँखों में
खुशबू है क्या ये मेरी साँसों में
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे
होता है जो सवालों में
मिलता नहीं जवाबों में
रहता है जो ख्यालों में
अब तक है वो हिजाबों में
है दिल का ये कैसा मौसम
न धुप है न है शबनम
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे
रातों की तन्हाई में
सुबहों की परछाई में हे हे हे
चेहरा है क्या ये मेरी आँखों में
खुशबू है क्या ये मेरी साँसों में
जाने है क्या सितारों में
गर्दिश सी है इशारों में
पतझड़ सी है बहारों में
तूफ़ान सा है किनारों में
दस्तका सी है क्या ये हर दम
आहात सी है क्या ये हर दम
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे
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Kaisa ye raaz hai-Raaz 2 2009

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