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May 8, 2020

इन दिनों दिल मेरा-लाइफ़ इन ए मेट्रो २००७

लॉकडाउन ४७ दिन का हो गया है. इस दौरान अपने नियमित
क्रियाकलापों से दूर जनता कुछ ना कुछ ऐसा करना चाह रही है
जो उसने बरसों से नहीं किया. टी वी वाली और फ़िल्मी जनता
अपने ओरिजनल ठुमकों और संवादों को दिखाना चाहती है.

इस लॉकडाउन में पत्रकारों को मिले पास का एक सदुपयोग ये
भी है. दिखाने के लिए कोरोना से सम्बंधित ख़बरों के अलावा
कुछ नहीं है तो सेलिब्रिटीज़ क्या कर रहे हैं इन बातों से जनता
का परिचय करवाया जाये.

पत्रकार शायद ये भूल गए हैं कि मौसम का हाल बतलाना भी
न्यूज़ का एक हिस्सा है. ढेर सारे दडबों से आती चीख चिल्लाहट
वाले कार्यक्रमों के समय में से वे थोडा सा निकाल कर बतला
दिया करें कि हवा का रख कैसा है, प्रकृति कैसी है उसका मूड
कैसा है.

आम जनता बंद की आड़ में छुप छुप के खाली सड़कों पर जम
के उछल कूद लेना चाहती है. दारू की दुकानें क्या खुली जनता
को एक दूसरे से चिपकने का मौका मिल गया. उम्र की बात
छोडिये सभी उम्र के लोग सोशल डिसटेंसिंग नाम की चीज़ को
धता बता रहे हैं.

किस बात की जल्दी रहती है सबको. ऐसा क्या तूफ़ान आने वाला
होता है अगले क्षण कि दौड़ते भागते ही सारा सामान चाहिये.
क्या हमारी शिक्षा प्रणाली ने उजड्डपने और बेहूदगी की स्पेशल
ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है पिछले कुछ सालों से?

सुनते हैं एक गीत सईद क़ादरी का लिखा हुआ. सोहम चक्रवर्ती
ने इसे गाया है. संगीतकार हैं प्रीतम.



गीत के बोल:

इन दिनों दिल मेरा मुझसे है कह रहा
तू ख़्वाब सजा तू जी ले ज़रा
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत

बेरंग सी है बड़ी ज़िंदगी कुछ रंग तो भरुँ
मैं अपनी तन्हाई के वास्ते अब कुछ तो करुँ
बेरंग सी है बड़ी ज़िंदगी कुछ रंग तो भरुँ
मैं अपनी तन्हाई के वास्ते अब कुछ तो करुँ
जब मिले थोड़ी फ़ुरसत
जब मिले थोड़ी फ़ुरसत मुझसे कर ले मोहब्बत
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत

उसको छुपा कर मैं सबसे कभी ले चलूँ कहीं दूर
आँखों के प्यालों से पीता रहूँ उसके चेहरे का नूर
इस ज़माने से छुप कर पूरी कर लूँ मैं हसरत
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत

इन दिनों दिल मेरा मुझसे है कह रहा
तू ख़्वाब सजा तू जी ले ज़रा
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत
है तुझे भी इजाज़त कर ले तू भी मोहब्बत
……………………………………………
In dinon dil mera-Life in a metro 2007


Singer: Soham

Artist: Nafisa Ali, Dharmendra, Shilpa Shetty, Konkana Sen Sharma, Kangna Ranaut

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Dec 17, 2018

अगर तुम मिल जाओ(उदित)-ज़हर २००५

फिल्म ज़हर का गीत आपको सुनवाया था तब हमने बतलाया
था की जनता ने इसे कालर ट्यून बना रखा था. ये उदित वाले
वर्ज़न की बात कर रहे थे हम. इसे सबसे ज्यादा लोगों ने अपनी
मोबाईल की कालर ट्यून बनाया था.

टैण्डम गाने कहानी की ज़रूरत और फिल्माने वाले की पसंद
पर निर्भर करता है. काफी सारी नयी फिल्मों में ये सिलसिला
हमें फिर से देखने को मिल रहा है.

इसके बोल भी सईद क़ादरी के हैं और संगीत रूप कुमार राठौड
का है.





गीत के बोल:

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
तुम्हें पा कर ज़माने भर से रिश्ता तोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

बिना तेरे कोई दिलकश नज़ारा हम न देखेंगे
बिना तेरे कोई दिलकश नज़ारा हम न देखेंगे
तुम्हें न हो पसंद उसको दोबारा हम न देखेंगे
तेरी सूरत न हो जिस में
तेरी सूरत न हो जिस में वो शीशा तोड़ देंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

तेरे दिल में रहेंगे तुझको अपना घर बना लेंगे
तेरे दिल में रहेंगे तुझको अपना घर बना लेंगे
तेरे ख़्वाबों को गहनों की तरह ख़ुद पर सजा लेंगे
क़सम तेरी क़सम हा आ आ
क़सम तेरी क़सम तक़दीर का रुख़ मोड़ देंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

तुम्हें हम अपने जिस्मो-जान में कुछ ऐसे बसा लेंगे
तुम्हें हम अपने जिस्मो-जान में कुछ ऐसे बसा लेंगे
तेरी ख़ुशबू अपने जिस्म की ख़ुशबू बना लेंगे
ख़ुदा से भी न जो टूटे
ख़ुदा से भी न जो टूटे वो रिश्ता जोड़ लेंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
तुम्हें पा कर ज़माने भर से रिश्ता तोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
………………………………………………..
Agar tum mil jao-Zehar 2005

Artist: Emran Hashmi, Udita Goswami

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Nov 22, 2018

अगर तुम मिल जाओ(श्रेया)-ज़हर २००५

सईद क़ादरी की एक रचना सुनते हैं श्रेया घोषाल की आवाज़
में. नयी पीढ़ी के गीतकार सईद क़ादरी के गीत काफी चर्चित
हैं पिछले कुछ सालों से.

ज़हर फिल्म का ये गीत दो संस्करण में उपलब्ध है और इस
गीत को काफी सारी जनता ने एक समय अपनी कालर ट्यून
बना रखा था.

गीत इमरान हाशमी और उदिता गोस्वामी पर फिल्माया गया
है. गीत में काफी उन्मुक्तता से लिपलॉक दिखलाया गया है.

इसकी धुन अन्नू मलिक ने तैयार की है जैसा कि मेरा अनुमान
है..




गीत के बोल:

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
तुम्हें पा कर ज़माने भर से रिश्ता तोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

बिना तेरे कोई दिलकश नज़ारा हम न देखेंगे
बिना तेरे कोई दिलकश नज़ारा हम न देखेंगे
तुम्हें न हो पसंद उसको दोबारा हम न देखेंगे
तेरी सूरत न हो जिस में
तेरी सूरत न हो जिस में वो शीशा तोड़ देंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

तेरे दिल में रहेंगे तुझको अपना घर बना लेंगे
तेरे दिल में रहेंगे तुझको अपना घर बना लेंगे
तेरे ख़्वाबों को गहनों की तरह ख़ुद पर सजा लेंगे
क़सम तेरी क़सम हा आ आ
क़सम तेरी क़सम तक़दीर का रुख़ मोड़ देंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम

तुम्हें हम अपने जिस्मो-जान में कुछ ऐसे बसा लेंगे
तुम्हें हम अपने जिस्मो-जान में कुछ ऐसे बसा लेंगे
तेरी ख़ुशबू अपने जिस्म की ख़ुशबू बना लेंगे
ख़ुदा से भी न जो टूटे
ख़ुदा से भी न जो टूटे वो रिश्ता जोड़ लेंगे हम

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
तुम्हें पा कर ज़माने भर से रिश्ता तोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम
………………………………………………..
Agar tum mil jao-Zehar 2005

Artist: Emran Hashmi, Udita Goswami

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May 10, 2017

कहो न कहो-मर्डर २००३

प्रस्तुत गीत अपने समय का एक चर्चित गीत है. कुछ
तो गायकी और कुछ दूसरी भाषा के बोलों की वजह से
ये ज्यादा लोकप्रिय हुआ.

सईद कादरी ने इसे लिखा है और अन्नू मलिक ने इसकी
धुन बनाई है. आमिर जमाल नामक गायक ने इसे गाया
है.



गीत के बोल:

कहो न कहो ये आँखें बोलती हैं
ओ सनम ओ सनम
ओ मेरे सनम
मोहब्बत के सफ़र में ये सहारा है
वफ़ा के साहिलों का ये कनारा है
कहो न कहो ये आँखें बोलती हैं
ओ सनम ओ सनम
ओ मेरे सनम
मोहब्बत के सफ़र में ये सहारा है
वफ़ा के साहिलों का ये कनारा है

बादलों से ऊँची उड़ान उनकी
सबसे अलग पहचान उनकी
उनसे है प्यार की कहानी मंसूब
आती जाती साँसों की रवानी मंसूब
बादलों से ऊँची उड़ान उनकी
सबसे अलग पहचान उनकी
उनसे है प्यार की कहानी मन्सूब
आती-जाती साँसों की रवानी मन्सूब

कहो न कहो ये आँखें बोलती हैं
ओ सनम ओ सनम
ओ मेरे सनम
मोहब्बत के सफ़र में तू हमारा है
अंधेरे रास्तों का तू सितारा है

तू ही जीने का सहारा है
मेरी मौजों का किनारा है
मेरे लिये ये जहाँ है तू
तुझे मेरे दिल ने पुकारा है

कहो न कहो ये साँसें बोलती हैं
ओ सनम ओ सनम
ओ मेरे सनम
लबों पे नाम तेरे बस हमारा है
ये तेरा दिल भी जानाँ अब हमारा है

कहो न कहो, ये आँखें बोलती हैं
ओ सनम ओ सनम
ओ मेरे सनम
मोहब्बत के सफ़र में ये सहारा है
वफ़ा के साहिलों का ये कनारा है

ख्वाबों में तुझको सँवारा है
जज़्बों में अपने उतारा है
मेरी ये आँखें जिधर देखें
तेरा ही तेरा नज़ारा है
ख्वाबों में तुझको सँवारा है
जज़्बों में अपने उतारा है
मेरी ये आँखें जिधर देखें
तेरा ही तेरा नज़ारा है
……………………………………………….
Kaho na kaho-Murder 2003

Artists: Emran Hashmi, Mallika Sherawat

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Dec 11, 2016

पैसा-दे दना दन २००९

५०० रूपये और १००० रूपये के नोट बंद हुए पूरा एक महीना
बीत गया है. इस दौरान आम आदमी को काफी दिक्कतों का
सामना करना पड़ा है. लाइन में लग के पैसे निकालने की
आदत को छूटे काफी समय बीत गया है. एटीएम मशीन के
चलन के बाद आबादी का कुछ ही हिस्सा बैंक जा के कतार
में खड़ा हो के पैसे निकलने वाला बचा था. इस स्कीम ने कम
से कम एक बार अधिकतम आबादी के हिस्से को लाइन में
लगा दिया.

किसी भी व्यवस्था में बड़ी तब्दीली के लिए जनता को कष्ट
अवश्य ही उठाने पढते हैं. जब मामला देश हित का हो तब
अपने व्यक्तिगत कष्ट को दरकिनार किया जाता है. सुविधा और
साधन आज हर व्यक्ति की पहुँच में संभव है. इसके चलते हम
आलसी भी हो चले हैं. किसी भी बात में तकलीफ नहीं उठाना
चाहते. बैठे बैठे सब हो जाए ये सोच घर करती जा रही है
धीरे धीरे. टेक्नोलोजी ने और भी आसान बना दिया है पेमेंट
के तरीकों को. मोबाइल से ही आप अपना लेनदेन कर सकते
हैं, बैठे बैठे.

आज सुनते हैं फिल्म दे दना दन से एक पैसे वाला गीत जिसे
सईद कादरी ने लिखा है. संगीतकार हैं आर डी बी. ये एक पंजाबी
बैंड है जिसका पूरा नाम है रिदम ढोल बॉस. सुरजीत सिंह इसके
प्रमुख कलाकार हैं. इसे गाया है मानक ई ने.



गीत के बोल:

क्या बात है क्या चीज है पैसा
क्या बात है क्या चीज है पैसा
क्या बात है क्या चीज है पैसा
क्या बात है क्या चीज है पैसा
…………………………………………………….
Paisa paisa-De dana dan 2009

Artists: Akshay Kumar, Katrina Kaif

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Jun 30, 2016

तुझे देख देख सोना-कलयुग २००५

पिछली एक पोस्ट में हमने बात की थी भाई-बहन गीतों पर.
ऐसे गीत जो कुम्भ के मेले में बिछड़े से सुनाई देते हैं. ऐसे
कुछ गीतों के फ़ादर से आज आपको मिलवाते हैं. सन २००५
की फिल्म कलयुग में राहत फतह अली खान का गाया एक
गीत है जो बेहद चर्चित हुआ था-तुझे देख देख सोना. इस
गीत से मिलते जुलते गीत कई हैं. यहाँ मिलते जुलते का अर्थ
मिलती जुलती धुन से है. गौरतलब है नुसरत फतह अली खान
और राहत फतह अली खान की गायकी की स्टाइल बॉलीवुड को
बेहद पसंद आई. यूँ कहें ये दोनों गायक आज की गायक पीढ़ी
के आदर्श हो गए तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी.

प्रस्तुत गीत का मैं भी एक बड़ा फैन हूँ, अभी टेबल फैन ही हूँ,
सीलिंग फेन, पेडस्टल, कूलर, ए सी  बनने में समय लगेगा.
सधी हुई गायकी का फैन बनना कोई आसान काम नहीं है.

गीत सुनते हैं सईद कादरी का लिखा हुआ और फैज़ल रफ़ी संग
रोहिल हयात का संगीतबद्ध किया हुआ. गीत धड़क धड़क शब्दों
से ज्यादा पहचाना जाता है.



गीत के बोल:

तुझे देख देख सोना, तुझे देख कर है जगना
मैंने ये जिंदगानी, संग तेरे बितानी
तुझमें बसी है मेरी जान हाय
जिया धड़क धड़क, जिया धड़क धड़क,
जिया धड़क धड़क जाए

कबसे है दिल में मेरे, अरमां कई अनकहे
इनको तू सुन ले आजा, चाहत के रंग चढ़ा जा
कहना कभी तो मेरा मान हाय
जिया धड़क धड़क, जिया धड़क धड़क,
जिया धड़क धड़क जाए

लगता है ये क्यों मुझे, सदियों से चाहूँ तुझे
मेरे सपनो में आ के, अपना मुझको बना के
मुझपे तू कर एहसान हाय
जिया धड़क धड़क, जिया धड़क धड़क,
जिया धड़क धड़क जाए
………………………………………………………………………………
Tujhe dekh dekh sona-Kalyug 2005

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Jun 15, 2016

आदत...बाकी है-कलयुग २००५

कुछ आवाजें हमें सुनाई देती हैं निरंतर या अक्सर और हम सोचते
रहते हैं-कहाँ से आ रही हैं किसकी हैं? ऐसे कुछ गीत भी होते हैं
जो बजते सुनाई देते हैं, हम सुन लेते हैं, विवरण मालूम नहीं होते.
कुछ दिन बाद इनकी बजने की आवृत्ति कम हो जाती है और हम
ज्यादा दिमाग भी नहीं लगते इनके विवरणों पर. ऐसा ज़रूर है कि
इनके सुनाई पढ़ने पर हमारे दिमाग में क्षणिक कुतूहल अवश्य
जागता है और हम जाने के लिए उत्सुक हो जाते हैं फिर से, कौन
गा रहा है और क्यूँ किसलिए किसके लिए गा रहा है.

आज सुनते हैं ऐसा एक गीत जो सन २००५ की पैदाइश है मगर
कभी कभी इसे मिर्ची, अदरक, लहसुन रेडियो सुना दिया करते हैं.

सईद कादरी के बोल हैं, अन्नू मलिक का संगीत है और गायक को
आप पहचानते ही हैं-आतिफ असलम.



गीत के बोल:

जुदा हो के भी तू
जुदा हो के भी तू मुझे में कहीं बाकी है
पलकों में बन के आंसू तू चली आती है
जुदा हो के भी

वैसे जिंदा हूँ जिंदगी बिन तेरे मैं
दर्द ही दर्द बाकी रहा है सीने में
सांस लेना भर ही यहाँ जीना नहीं है
अब तो आदत सी है मुझको ऐसे जीने में
जुदा हो के भी तू मुझे में कहीं बाकी है
पलकों में बन के आंसू तू चली आती है

साथ मेरे है तू हर पल शब् के अंधेरे में
पास मेरे है तू हरदम उजले सवेरे में
दिल से धडकन भुला देना आसान नहीं है
अब तो आदत सी है मुझको ऐसे जीने में
जुदा हो के भी तू मुझे में कहीं बाकी है
पलकों में बन के आंसू तू चली आती है

अब तो आदत सी है मुझको ऐसे जीने में
ये जो यादें हैं ये जो यादें हैं
सभी काटे हैं सभी काटे हैं
कटा दो इन्हें कटा दो इन्हें
अब तो आदत सी है मुझको..................................................
Aadat….baaki hai-Kalyug 2005

Artists-Kunal Khemu, Deepal Shaw

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Feb 12, 2016

आँखें तेरी इतनी हंसी-अनवर २००७

गीत पसंद आने की तीन वजहें होती हैं-बोल, संगीत और
तीसरी वजह-कुछ नहीं, बस यूँ ही.इस गीत के पसंद आने
की क्या वजह है ये जानिये इस पोस्ट में.

प्रस्तुत गीत जिस नायिका पर फिल्माया गया है उसकी
आँखों की शान में कुछ ज्यादा कसीदे काडे गए हैं. नायिका
हैं नौहीद सायरसी. नायिका सुन्दर हैं, निस्संदेह, थोड़ी बहुत
एक्टिंग भी कर लेती हैं. नायक हैं सिद्धार्थ कोइराला, मनीषा
कोइराला के भाई.

गीत पसंद आने की सीढ़ी एक वजह है ढाक-चिक ढाक-चिक
स्टाइल का तबला है. शुरू में मुझे ये आतिफ असलम की
गायकी का एक्सटेंशन जैसा लगता था, मगर धीरे धीरे यह
समझ आया रूप कुमार राठौड की गायकी आतिफ की गायकी
से ज्यादा समृद्ध है. गीत में इको और कोरस का प्रभावी
इस्तेमाल किया गया है. अंग्रेजी भाषा में संगीत भक्त कुछ
यूँ कहते हैं-Tune grows on you after a while(गीत आपके ऊपर
कुछ समय बाद उगने लगता है). कुछ ऐसा ही है इस गीत
के साथ, धीरे धीरे आपको ये पसंद आना शुरू होता है.

गीत के बोल सईद कादरी के हैं और संगीत मिथुन का. एक
बढ़िया धुन बनाई है मिथुन ने जिसे लंबे समय तक सुना
जा सकेगा.




गीत के बोल:

मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

आँखें तेरी
आँखें तेरी इतनी हंसी
के इनका आशिक मैं बन गया हूँ
मुझको बसा ले इनमें तू

इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

के इनका आशिक मैं बन गया हूँ
मुझको बसा ले इनमें तू

मुझसे ये हर घडी मेरा दिल कहे
तुम्ही हो उसकी आरजू
मुझसे ये हर घडी मेरे लब कहें
तेरी ही हो सब गुफ्तगू
बातें तेरी इतनी हंसी
मैं याद इनको जब करता हूँ
फूलों सी आये खुशबू

रख लूं छुपा के मैं कहीं तुझको
साया भी तेरा न मैं दूं
रख लूं बना के कहीं घर मैं तुझे
साथ तेरे मैं ही रहूँ
जुल्फें तेरी इतनी घनी
देख के इनको ये सोचता हूँ 
साये में इनके मैं जियूं

इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
इश्क है
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे
मौला मेरे मौला मेरे

दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में 
उसको पसंद करता है मौला
दिल यही बोला मेरा दिल यही बोला
यारा राज़ ये उसने है मुझपे खोला
के है इश्क मोहब्बत है जिसके दिल में 
उसको पसंद करता है मौला
........................................................................
Aankhen teri-Anwar 2007

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Jun 17, 2015

आवारापन बंजारापन-जिस्म २००३

फिल्म जिस्म का यह गीत मुझे प्रथम बार फिल्म देखते वक्त
ही सुनाई दिया था. एक शब्द ने मुझे आकर्षित किया-खला.
इसका प्रयोग बहुत कम होता है और हुआ है इसलिए ये कुछ
नया सा लगा. इस शब्द का अर्थ है-जगह. यहाँ दूसरे अर्थ
शून्य या खालीपन शायद मतलब के नहीं हैं.

एक और वजह है इस गीत को ध्यान से सुनने की. गायक
कृष्ण कुमार कुन्नथ उर्फ के के से इस गीत को आरामदायक
स्केल पर गवाया गया है. अधिकांश गीतों में वे ऊंची पट्टी की
सीमायें तोड़ने को आतुर सुनाई देते हैं. ये सब संगीतकारों की
माया ही तो है, किस से क्या करवा लें, गवा लें.

संगीतकार एम् एम् क्रीम ने एक बढ़िया धुन बनाई है. गीत के
बोल सईद कादरी के हैं.




गीत के बोल:

आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में
आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में
हरदम हर पल बेचैनी है कौन बला है सीने में
इस धरती पर जिस पल सूरज रोज सवेरे उगता है
इस धरती पर जिस पल सूरज रोज सवेरे उगता है
अपने लिए तो ठीक उसी पल रोज़ ढला है सीने में
आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में

जाने यह कैसी आग लगी है इस में धुँआ ना चिंगारी
जाने यह कैसी आग लगी है इस में धुँआ ना चिंगारी
हो ना हो इस बार कहीँ कोई ख़्वाब जला है सीने में
आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में


जिस रस्ते पर तपता सूरज सारी रात नहीं ढलता
जिस रस्ते पर तपता सूरज सारी रात नहीं ढलता
इश्क कि ऎसी राहगुज़र को हमने चुना है सीने में
आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में

कहाँ किस के लिए है मुमकिन सब के लिए एक सा होना
कहाँ किस के लिए है मुमकिन सब के लिए एक सा होना
थोडा सा दिल मेरा बुरा है थोडा भला है सीने में
आवारापन बंजारापन एक खला है सीने में
......................................................
Awarapan Banjarapan-Jism 2003

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Jun 11, 2015

मैं वहाँ जहाँ पे तू है ओ जाना-राज़ २ २००९

आज आपको सुनवाते हैं राज़ २ फिल्म से एक गीत. ये गीत
ऊंचे सुर वाले गायक के के ने गाया है.

फिल्मस्टार इमरान हाशमी को सीरियल किसर कहा जाता है.
ये सुन कर उनको कैसा लगता है मालूम नहीं मगर कई
दर्शकों को ईर्ष्या अवश्य होती है उनकी किस्मत पर. शायद
फिल्म उद्योग के कुछ नायक भी ईर्ष्या के शिकार हों. कुछ
लोगों को ये शिकायत हो सकती है कि उन्हें इमरान जैसे रोल
क्यूँ नहीं मिले. ये ज़रूर है उनके परिवार वाले उनकी इस तरह
के प्रसिद्धि से खुश नहीं हैं. लेकिन, दर्शक उन्हें इसी रूप में
देखना चाहते हैं. वे नहीं होते तो कोई और होता. आज की पीढ़ी
के कई कलाकार उनके पद-चिन्हों पर चल पढ़े हैं.

ये तो समय की बात है. कुछ बॉलीवुड बोल्ड हो चला है और
कुछ हमारे देश का कल्चर. कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होता
है ये कल्चर मानो खच्चर का भाई हो. सिम्बलिक है. खच्चर
बीच की प्रजाति का होता है-ना गधा ना घोडा.

राजनीति के साथ साथ कल्चर भी संक्रमण काल के दौर से
गुजर रहा है. वाइरल इन्फेक्शन की तरह ये अपने चरम पर
पहुंचेगा उसके बाद ही कुछ सुधार के लक्षण दिखलाई देना
प्रारंभ होंगे.

गीत कंगना रानावत और इमरान हाशमी पर फिल्माया गया
है. इसे सईद कादरी ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है
राजू सिंह ने. फिल्म के संगीत विभाग में पांच संगीतकारों
ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है.





गीत के बोल:

मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना
हर वक्त तू ही तू है हर सितम तू ही तू है ओ जाना
तू साथ मेरे हमदम चाहे कहीं भी हो ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना

दिन रात सोचता हूँ तुझे इतना प्यार मैं दूं
जो कभी उतर ना पाए तुझे वो खुमार दूं
मुझे ऐसा तू मिला है जैसे कि कोई दुआ है
तुझपे कोई आंच आये तो मैं खुद को भी जला लूं

हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है
हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना

हर पल तुझे सम्भालूँ तेरे सारे गम उठा लूं
मेरा दिल तो यही चाहे तुझे रूह में सजा लूं
तेरा अक्स नूर सा है तू एक सुरूर सा है
दिलकश तेरी अदा का हर लम्हा मैं चुरा लूं
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
ओ जाना ओ जाना
ओ जाना ओ जाना
....................................................................
Main wahan jahan pe too hai-Raaz 2 2009

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Sep 1, 2013

कैसा ये राज़ है-राज़ २ २००९

सन २००० की फिल्म राज़ का सीक्वेल है राज़ २. इसमें नायक
हैं इमरान हाशमी. फिल्म के निर्देशक हैं मोहित सूरी.  गीत लिखा
है सईद कादरी ने और संगीत है नए निर्देशक प्रणय एम् रिजिया
का. गायक ज़रूर पहचाने से हैं-के के. फिल्म में ढेर सारे लोगों ने
संगीत दिया है और इसके गाने समीक्षकों के अनुसार सुनने लायक
हैं. हम भी सुन लेते हैं जी.

   
   


गीत के बोल:


रातों की तन्हाई में,
सुबहों की परछाई में हे हे हे
चेहरा है क्या ये मेरी आँखों में
खुशबू है क्या ये मेरी साँसों में
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे

होता है जो सवालों में
मिलता नहीं जवाबों में
रहता है जो ख्यालों में
अब तक है वो हिजाबों में
है दिल का ये कैसा मौसम
न धुप है न है शबनम
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे

रातों की तन्हाई में
सुबहों की परछाई में हे हे हे
चेहरा है क्या ये मेरी आँखों में
खुशबू है क्या ये मेरी साँसों में

जाने है क्या सितारों में
गर्दिश सी है इशारों में
पतझड़ सी है बहारों में
तूफ़ान सा है किनारों में
दस्तका सी है क्या ये हर दम
आहात सी है क्या ये हर दम
कैसा ये राज़ है जो के खुलता नहीं
क्यूँ मेरे जेहन में तू है ऐ अजनबी
हे हे हे हे हे हे हे हे हे
ओ हो हो ओ हो हो ओ हो हो हे हेई हे
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Kaisa ye raaz hai-Raaz 2 2009

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