मेरे साजन हैं उस पार-बंदिनी १९६३
वे अपनी बेहतर धुनें अपने स्वयं के गायन के लिए रख लिया
करते थे. ये बात किसी फिल्म विशेष के साउंड ट्रैक पर लागू
होती दिखाई देती है. फिल्म बंदिनी में भी सचिन देव बर्मन
ने एक गीत गाया है जो बैक ग्राउंड में बजता है. गीत का
उद्देश्य इधर नायिका की भावनाओं को उभारना है जो इस दृश्य में
नूतन लगभग अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के साथ व्यक्त कर रही हैं..
गीत फिल्म के अंत समय में प्रकट होता है जिस समय नायिका
अंतर्मन में चल रहे द्वन्द से उबरने ही वाली है और निर्णय करेगी
उसे किसका साथ देना है-अपने बेवफा अतीत का या सौम्य स्वभाव
वाले वर्तमान का. फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त
हुआ सन १९६३ के लिए.
गीत के बोल:
ओ रे माँझी, ओ रे माँझी
ओ ओ ओ ओ मेरे माँझी
मेरे साजन हैं उस पार, मैं मन मार हूँ इस पार
ओ मेरे माँझी अब की बार ले चल पार, ले चल पार
मेरे साजन हैं उस पार
मन की किताब से तुम मेरा नाम ही मिटा देना
गुण तो ना था कोई भी, अवगुण मेरे भुला देना
मुझे आज की विदा का, मर के भी रहता इंतज़ार
मत खेल जल जायेगी कहती है आग़ मेरे मन की
मैं बंदिनी पिया की, मैं संगिनी हूँ साजन की
मेरा खींचती है आँचल, मनमीत तेरी हर पुकार
मेरे साजन हैं उस पार, मैं मन मार हूँ इस पार
ओ मेरे माँझी अब की बार ले चल पार, ले चल पार
मेरे साजन हैं उस पार
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Mere saajan hain us paar-Bandini 1963

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