इशक दा रोग लगा-आई मिलन की रात १९९१
थोड़े सुने गए हों वे हिट्स. श्रेणियों पर बहुत दिन से हमने
गौर नहीं किया. लगभग सभी फ़िल्मी गीतों का वर्गीकरण
किया जा सकता है. ये ओए होए कल्चर ९० के दशक में
शुरू हुआ हिंदी फिल्मों में, साथ साथ ही इंडी-पॉप के क्षेत्र
में भी ये शब्द धूम मचने लगे. ओए होए के साथ होए होए
भी सुनाई देना शुरू हुआ. त्रिदेव का गीत ही केवल ऐसा गीत
था जिसमें शुद्ध ओए-ओए था. ये दशक की शुरुआत थी और
त्रिदेव का गीत बिगुल जैसा था.
गीत के बोल:
इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा इशक दा रोग लगा
कभी हो दर्द यहाँ कभी हो दर्द वहाँ ओए होए
कभी हो दर्द यहाँ कभी हो दर्द वहाँ ओए होए
जगा दी पीर बेदर्दी कैसी दर्द हो यहाँ वहाँ
कभी ऐसा भी हो जायेगा
कोई इतना मुझे तडपायेगा
नहीं था मुझको पता
करून क्या तू ही बता ओए होए
नहीं था मुझको पता
करूं क्या तू ही बता ओए होए
मैं बन गयी प्रेम दीवानी
करूं क्या तू ही बता ओए होए
इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा
इशक दा रोग लगा
मुझे कुछ न किसी से कहना है
सच कहती हूँ चुप रहना है
ये कंगना बोल गया
भेद सब खोल गया
ये कंगना बोल गया
भेद सब खोल गया
छुपाया लाख मगर हरजाई
कंगना भेद वो खोल गया
इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा इशक दा रोग लगा
सखी पूछ ज़रा क्या बात हुई
कब कैसे कहूँ क्या बात हुई
मैं अंगना बीच खड़ी उसी से आँख लड़ी
शर्म से हो गयी पानी पानी
मैं अंगना बीच खड़ी ओए होए
मैं अंगना बीच खड़ी
इशक दा रोग लगा
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Ishaq da rog laga-Aayi Milan ki raat 1991
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