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Dec 11, 2016

कितने दिनों के बाद है आई-आई मिलन की रात १९९१

फिल्म आई मिलन की रात के सबसे ज्यादा पोपुलर गीतों में से
एक और प्रस्तुत है आज. फिल्म का शीर्षक गीत है यह मगर
शीर्षक के बोल गीत में थोडे उलट पुलट है हिंदी फिल्म का दर्शक
इतना तो आसानी से समझ लेता है. मैंने भी फिल्म पहली बार
देखी थी तब इस गाने को सुनते ही पहचान गया था ये शीर्षक
गीत है फिल्म का. आनंद मिलिंद की संगीत की फैक्ट्री ९० के
दशक में पूरी रफ़्तार से चालू रही और साथ में समीर का गीत
लिखने का कारखाना. दोनों ने मिल कर बहुत धनवान बनाया है
हिंदी फिल्म संगीत को.

इस फिल्म के संगीत से सबसे ज्यादा फायदा हुआ इसका संगीत
कैसेट वगैरह निकलने वाली कंपनी को. लक्ष्मी-प्यारे के बाद शायद
आनंद-मिलिंद ही ऐसे संगीतकार हुए जिनके गीत आम जनता से
ज्यादा करीब हो गए. औरों के गीत भी लोकप्रिय हुए और ९० के
दशक के बाद कुछ दूसरे संगीतकारों ने अपना परचम लहराया मगर
जो निरंतरता इन्होने बनाये रखी वो काम दूसरे संगीत निर्देशक
टुकड़ों टुकड़ों में कर पाए. इस वाक्य के दो अर्थ हैं आप जैसा चाहे
समझ लें.  एक शब्द “थोक-भाव” का प्रयोग मैंने नहीं किया है.

इश्क में सब प्यासी चीज़ें सुहानी लगने लगती हैं जैसे कि इस गीत
के पहले अंतरे में सुनाई देता है.

   


गीत के बोल:


कितने दिनों के बाद है आई सजना रात मिलन की
अब हमसे न सही जाए जुदाई आई रात मिलन की
कितने दिनों के बाद है आई सजना रात मिलन की

चंदा प्यासा तारे प्यासे प्यासी रात सुहानी
कहीं अधूरी रह न जाए अपनी प्रेम कहानी
सजी सेज सुहागन बजी शहनाई आई रात मिलन की
कितने दिनों के बाद है आई सजना रात मिलन की

तन्हाई की रुसवाई के हम कितने गम झेलें
कहने को तो साथ रहें हम फिर भी रहें अकेले
मेरी हो के भी रही मुझसे परायी आई रात मिलन की
कितने दिनों के बाद है आई सजना रात मिलन की

दो रूहों के मिलन का ये वक्त गुज़र न जाए
महकी महकी रात मिलन की जा के फिर न आये
मिल जायेंगे हम राम दुहाई आई रात मिलन की
कितने दिनों के बाद है आई सजना रात मिलन की
.....................................................................
Kitne dinon ke baad hai aayi-Aayi Milan ki raat 1991

Artists: Avinash Wadhvan, Shaheen

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Jun 20, 2016

मैंने किसी को दिल दे दिया-आई मिलन की रात १९९१

इस गीत की विशेषता है “दिल” और “पूछो” शब्द कई बार
आये हैं गीत में. पूछो पूछो कौन है वो-इन शब्दों से मुझे
फिल्म शहंशाह के गीत-जाने दो जाने दो मुझे जाना है की
याद आ जाती है जिसे लाता-अज़ीज़ ने गाया है.

गाना सुनते हैं जो अनुराधा पौडवाल के साथ उदित नारायण ने
गाया है, समीर ने इसे लिखा है और संगीत एक बार फिर से
चित्रगुप्त पुत्रों आनंद मिलिंद का है.

फिल्म के निर्देशक के पप्पू हैं और निर्माता गुलशन कुमार.
हीरो हीरोईन के नाम हमने पोस्ट के आखिर में दे रखे हैं
आपकी सहूलियत के लिए.   




गीत के बोल:


मैंने किसी को दिल दे दिया
दिल दे दिया है ये दिल दे दिया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो
दिल दे दिया है ये दिल दे दिया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो
बोलो बोलो बोलो कौन है वो

मैंने किसी का दिल ले दिया
दिल ले लिया हाँ दिल ले लिया
मैंने किसी का दिल ले दिया
दिल ले लिया हाँ दिल ले लिया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो
बोलो बोलो बोलो कौन है वो

छैल छबीला मेरा सपेरा
उसका सजीला रूप है
बातों में उसकी सरगम की खुशबू
चेहरे पे सूरज की धुप है
चैन गवाया नींद गवाई
जीना है मुश्किल राम दुहाई
किसने ये मुझपे जद्दू किया
जादू किया हाँ जादू किया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो

होंठों पे उसके शबनम के मोती
फूलों के जैसे गाल है
बीन के जैसी पतली कमर है
नागिन के जैसी चाल है
रंग गुलाबी आँख नशीली
थोड़ी सी है वो शर्मीली
जिसने चुराया मेरा जिया
मेरा जिया हाँ मेरा जिया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो

मैंने किसी का दिल ले दिया
दिल ले लिया हाँ दिल ले लिया
पूछो पूछो पूछो कौन है वो
बोलो बोलो बोलो कौन है वो
………………………………………………………….
Maine kisi ko dil de diya-Aayi Milan ki raat 1991

Artists-Avinash Wadhavan, Shaheen

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Mar 20, 2016

मत रो मेरे दिल-आई मिलन की रात १९९१

संगीतकार आनंद मिलिंद के कैरियर की सबसे सफल फिल्मों
में से एक है आई मिलन की रात. इस एल्बम की बिक्री से
संगीत कंपनी को भी काफी फायदा हुआ. फिल्म ज्यादा नहीं
चली अलबत्ता इसके नायक नायिका को कुछ विशेष लाभ नहीं
हुआ जहाँ तक कैरियर आगे सफलता की ओर बढ़ने का सवाल
है. इसको एक औसत सफल फिल्म कहा जाता है बॉक्स ऑफिस
पर.

फिल्म हालांकि अपनी लागत वसूलने में कामयाब हो गयी थी.
फिल्म में अनुपम खेर और अरुणा ईरानी जैसे कलाकार भी हैं
जो उस साल की सबसे चर्चित फिल्मों-बेटा में भी अभिनय कर
चुके हैं. संयोगवश बेटा में भी आनंद मिलिंद का संगीत है और
एक गीत-धक् धक् करने लगा से ही वो एल्बम सुपरहिट की
श्रेणी में आ गया था.

आइये सुनें फिल्म का सातवाँ गीत जो उदित नारायण और
अनुराधा पौडवाल ने गाया है. गीत समीर ने लिखा है.




गीत के बोल:


मत रो ऐ मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
वो जो प्यार में होता है ऐतबार में होता है
तेरे साथ भी ऐ यार मेरे वही तो हुआ

मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
वो जो प्यार में होता है ऐतबार में होता है
तेरे साथ भी ऐ यार मेरे वही तो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ

सुख में कटे या दुःख में बसर हो
जीना तो हर हाल में होगा
सुख में कटे या दुःख में बसर हो
जीना तो हर हाल में होगा
अमृत हो आंसू के ज़हर हो पीना तो हर हाल में होगा
ख्वाब एक टूटा तो क्या हुआ ऐ दिल
साथ एक छूटा तो छूटे क्या ऐ दिल

वो जो प्यार में होता है ऐतबार में होता है
तेरे साथ भी ऐ यार मेरे वही तो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ

पोंछ के आंसू झाड़ के दामन
चल तो सही मंजिल है हजारों
हंस के ज़रा दुनिया पे नज़र कर
चाहत के काबिल हैं हजारों
और भी जगह हैं जहां में और भी हैं गलियां
और भी गुल है चमन में और भी है कलियाँ
वो जो प्यार में होता है ऐतबार में होता है
तेरे साथ भी ऐ यार मेरे वही तो हुआ
मत रो ऐ मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
मत रो मेरे दिल चुप हो जा हुआ सो हुआ
....................................................................................
Mat ro mere dil-Aayi Milan ki raat 1991

Artists:  Avinash Wadhwan, Shaheen

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Aug 19, 2015

कसम से कसम से ओ रब्बा-आई मिलन की रात १९९१

कुछ विशेष शब्दों की हम समय समय पर चर्चा करते रहे हैं.
वो शब्द जो गीतों को लोकप्रियता प्रदान करते हैं. ऐसा एक
शब्द है-कसम. बहुत से ऐसे गीत हैं जो कसम शब्द से शुरू
हुए हैं और चर्चित हुए हैं –कसम क्या होती है, कसम वो
होती है जो तोड़ी न जाए-कसम, कसम न लो कोई हमसे-
बॉम्बे ४०५ माइल्स, कसम से कसम से हम आयेंगे-दुल्हन
हम ले जायेंगे वगैरह. इनमें से एक गीत आपको हाल ही
में सुनवाया है अनिल कपूर की फिल्म वाला.

गौर फरमाएं हम उन गीतों की बात कर रहे हैं जो इस शब्द
से शुरू होते हैं, आपके दिमाग में कई ऐसे गीत होंगे जिनके
मुखड़ों में ‘कसम’ शब्द आता है, उनपर चर्चा फिर कभी.

आइये सुनें अनुराधा पौडवाल और मोहम्मद अज़ीज़ का गाया
हुआ यह युगल गीत. आपको फिल्म आई मिलन की रात से
चार गीत पहले सुनवा चुके हैं और ये है इस ब्लॉग पर फिल्म
का पांचवा गीत. क्या किया जाए इस फिल्म के गाने सुपर
डुपर हिट जो हुए थे, अब हमारा फ़र्ज़ बनता है आपको ऐसे
हिट गीत सुनवाते रहा करें.





गीत के बोल:

कसम से कसम से ओ रब्बा कसम से
अब न जुदाई सही जाये हमसे
कसम से कसम से ओ रब्बा कसम से
अब न जुदाई सही जाये हमसे
कसम से कसम से

घुंघरू बनती है रुत ये सुहानी
काली घटा से बरसता है पानी
हम जल रहे हैं बिरहा के ग़म से
कसम से कसम से ओ रब्बा कसम से
अब न जुदाई सही जाये हमसे

चाँद सितारे हैं दूर कितने
हम पास रह के हैं दूर उतने
टूट गया है दिल ज़ुल्म-ओ-सितम से
कसम से कसम से ओ रब्बा कसम से
अब न जुदाई सही जाये हमसे

माथे की बिंदिया चमकती नहीं है
हाथों की चूड़ी खनकती नहीं है
मेंहदी निगोड़ी भी क्या रंग लाई
रात मिलन की बनी रे जुदाई
हम मिल न पाये अपने बलम से
कसम से कसम से ओ रब्बा कसम से
अब न जुदाई सही जाये हमसे
.......................................................
Kasam se kasam se-Aayi milan ki raat 1991

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Aug 16, 2015

देखें अपनी किस्मत में-आई मिलन की रात १९९१

प्यार की बीन वाली फिल्म से अगला गीत पेश है जो
अनुराधा पौडवाल ने गाया है. किस्मत को टटोलता ही
रह जाता है मनुष्य अपने जीवन में. वे शायद सबसे
ज्यादा सुखी हैं जो किस्मत में विश्वास नहीं करते. एक
न एक समय ऐसा मगर हर एक के जीवन में आता है
जब वो सोचता है-ये किस्मत किस चिड़िया का नाम
है? उसे ऐसे अनुभव होते हैं जो उसके विश्वास को हिला
कर रख देते हैं. कुछ अटपटा या अजीब सा घटित होता
है तब वो सोच में पड़ जाता है कि ऐसा होना उसके
नियंत्रण के बाहर है और उसे कुछ कुछ नियति और 
उसके किये पर यकीन होने लगता है. ये कुछ दुविधा
की स्तिथि होती है.

अगला गीत शुरू तो होता है किस्मत वाले मसले से
लेकिन भटक के कहीं और पहुँच जाता है.  हाँ, कुछ
अच्छी बातें आगे पेश हैं-जैसे-आशिक हो कर दुनिया से
डरना फ़िज़ूल है. कुछ पंक्तियों का मतलब समझने के
लिए आपको उच्च स्तरीय साहित्यकार की सेवाएं लेना
पड़ सकती हैं.




गीत के बोल:

देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
तेरी राह में
तेरी राह में काँटा भी चुभ जाए तो कबूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
तेरी राह में काँटा भी चुभ जाए तो कबूल है

देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है

यही रंग तेरा सतावे हमको किसी की नज़र लग न जावे
यही रंग तेरा सतावे हमको किसी की नज़र लग न जावे
दुश्मन हो कोई ऐसा भी क्या है
हमने सनम प्यार ही तो किया है
हमने सनम प्यार ही तो किया है
प्यार की कसमें कहते हैं पत्थर हैं और भूल हैं
प्यार की कसमें कहते हैं पत्थर हैं और भूल हैं
तेरी राह में काँटा भी चुभ जाए तो कबूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है

खाएं कसम चाँद के आगे हम
होंगे न जुदा हम में जब तक है जान
खाएं कसम चाँद के आगे हम
होंगे न जुदा हम में जब तक है जान
माना कि तुमको कुछ न पता हो
दुनिया मुझे छीन ले तो क्या हो
दुनिया मुझे छीन ले तो क्या हो
आशिक हो कर दुनिया से डरना ही फ़िज़ूल है
आशिक हो कर दुनिया से डरना ही फ़िज़ूल है

तेरी राह में
तेरी राह में काँटा भी चुभ जाए तो कबूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
देखें अपनी किस्मत में काँटा है कि फूल है
.......................................................................................
Dekhen apni kismet mein-Aayi Milan ki raat 1991

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May 31, 2015

काला शाह काला-आई मिलन की रात १९९१

“काला शाह काला” ये शब्द आपने कहीं न कहीं ज़रूर सुने
होंगे. सुनाई ऐसे देता है जैसे ‘काला शा काला’ गाया जा रहा
हो. सुनने में ऐसा भ्रम होता है कभी कभी, जैसे एक गीत है
‘धीरे धीरे बोल कोई सुन ना ले’, ये सुनाई देता है-धीरे धीरे
बोल कोई सुन्नाले.

फिल्म आई मिलन की रात का ये गीत भी लोकप्रिय रहा है. ९०
के दशक में पंजाबी गीतों का चलन थोडा बढ़ गया था और ये
उन चुनिन्दा फ़िल्मी पंजाबी गीतों में से एक है.

गाना सुनते हैं जो अनुराधा पौडवाल के लोकप्रिय गीतों में गिना
जाता है. समीर ने इसे लिखा है और संगीत एक बार फिर से
चित्रगुप्त पुत्रों आनंद मिलिंद का है.



गीत के बोल:


हो काला शाह काला
हाय काले हैं दिल वाले गोरिया नु दफा करो
गोरे दिल के काले गोरिया नु दफा करो

गोरी राधा का साजन है काला कृष्ण कन्हैया
मेरे लिए गोरा साजन मत ढूंढियो मेरी मैया
काले को जो दे दे मेरे शगुन का एक रुपैया
मैं सदके काले रे दिलवाले वे ओ मतवाले वे
ये काले हैं दिलवाले

काली रात के आँचल से जो चमके चाँद सितारे
काली कोयलिया जब गाये झूमे मन मतवाले
गोरे गाल पे काला तिल मोरा रूप सवारे
मैं सदके काले पे किस्मत पे ओ दिलवाले के
ऐ दिल काले के हवाले
गोरिया नु दफा करो
.......................................................
Kaala shah kaala-Aayi milan ki raat 1991

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Apr 20, 2015

इशक दा रोग लगा-आई मिलन की रात १९९१

ओए होए हिट्स-वे गाने जिनमें ओए-होए होता है और जो
थोड़े सुने गए हों वे हिट्स. श्रेणियों पर बहुत दिन से हमने
गौर नहीं किया. लगभग सभी फ़िल्मी गीतों का वर्गीकरण
किया जा सकता है. ये ओए होए कल्चर ९० के दशक में
शुरू हुआ हिंदी फिल्मों में, साथ साथ ही इंडी-पॉप के क्षेत्र
में भी ये शब्द धूम मचने लगे. ओए होए के साथ होए होए
भी सुनाई देना शुरू हुआ. त्रिदेव का गीत ही केवल ऐसा गीत
था जिसमें शुद्ध ओए-ओए था. ये दशक की शुरुआत थी और
त्रिदेव का गीत बिगुल जैसा था.




गीत के बोल:

इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा इशक दा रोग लगा
कभी हो दर्द यहाँ कभी हो दर्द वहाँ ओए होए
कभी हो दर्द यहाँ कभी हो दर्द वहाँ ओए होए
जगा दी पीर बेदर्दी कैसी दर्द हो यहाँ वहाँ

कभी ऐसा भी हो जायेगा
कोई इतना मुझे तडपायेगा
नहीं था मुझको पता
करून क्या तू ही बता ओए होए
नहीं था मुझको पता
करूं क्या तू ही बता ओए होए
मैं बन गयी प्रेम दीवानी
करूं क्या तू ही बता ओए होए
इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा
इशक दा रोग लगा

मुझे कुछ न किसी से कहना है
सच कहती हूँ चुप रहना है
ये कंगना बोल गया
भेद सब खोल गया
ये कंगना बोल गया
भेद सब खोल गया
छुपाया लाख मगर हरजाई
कंगना भेद वो खोल गया
इशक दा रोग लगा ओए होए
जीवन को जोग लगा ओए होए
तू इसकी जान बचा इशक दा रोग लगा

सखी पूछ ज़रा क्या बात हुई
कब कैसे कहूँ क्या बात हुई
मैं अंगना बीच खड़ी उसी से आँख लड़ी
शर्म से हो गयी पानी पानी
मैं अंगना बीच खड़ी ओए होए
मैं अंगना बीच खड़ी
इशक दा रोग लगा
..........................................................
Ishaq da rog laga-Aayi Milan ki raat 1991

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Apr 16, 2015

फ़िल्मी बरसात-सावन का महीना-आई मिलन की रात १९९१

फिल्म आई मिलन की रात(१९९१) का संगीत इतना
बजा कि कई संगीत प्रेमियों को फिल्म के सारे गीत
मुंह जबानी याद हो गए. आपको एक गीत सुनवाया है
पहले-तूने प्यार की बीन बजायी जो इस ब्लॉग का
सबसे चर्चित गीत है !

आइये सुनें इस फिल्म का एक और हिट गीत जिसे
मोहम्मद अज़ीज़ और अनुराधा पौडवाल ने गाया है.
“सावन का महीना” ठीक इन शब्दों से फिल्म मिलन
(१९६७) का गीत शुरू होता है-जो लता मुकेश का गाया
हुआ है. फिल्म मिलन का संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
द्वारा दिया हुआ है. मिलन के भी सारे गीत ज़बरदस्त
हिट गीत हैं. आज भी सुनाई देते हैं. आनंद मिलिंद के
संगीत पर लक्ष्मी-प्यारे का प्रभाव भी पढ़ा है. इस बात
का एहसास वे ही कर सकते हैं जिन्होंने लक्ष्मी प्यारे
और आनंद मिलिंद दोनों का संगीत अच्छे से सुना हो.

प्रस्तुत गीत के बोल समीर ने लिखा हैं और यह गीत
फिल्माया गया है अविनाश वाधवान एवं शाहीन पर.
गीत में बांसुरी का भरपूर और खूबसूरत प्रयोग हुआ है.



गीत के बोल:

सावन का महीना आया है, घटा से बरसा है पानी
वे माहिया बुझा दे प्यास जिया दी हो
सावन का महीना आया है, घटा से बरसा है पानी
वे माहिया बुझा दे प्यास जिया दी हो

ऐसे में जो तूने मुझको छुआ मेरी भी बहकी जवानी
वे माहिया बुझा दे आग जिया दी हो

तेरे हुस्न-ओ-शबाब की बात हुई
या मदिरा की बरसात हुई
या मदिरा कि बरसात हुई
मौसम भी शराबी लगता है
मुझे भी चढ्या नशा वे
ओए माहिया बुझा दे प्यास जिया दी हो
ऐसे में जो तूने मुझको छुआ मेरी भी बहकी जवानी
वे माहिया बुझा दे आग जिया दी हो

कोई जोर न दिल पे चलता है
बारिश में बदन मेरा जलता है
बारिश में बदन मेरा जलता है
बूंदों में छुपी है चिंगारी हवा भी सुइयां चुभाये
वे माहिया बुझा दे आग जिया दी हो

सावन का महीना आया है, घटा से बरसा है पानी
वे माहिया बुझा दे प्यास जिया दी हो

हम मिलते रहे हैं जनम जनम
न होंगे जुदा हम मिल के सनम
न होंगे जुदा हम मिल के सनम
आ एक दूजे में खो जाएँ रहे न कोई भी दूरी
वे माहिया बुझा दे आग जिया दी हो

सावन का महीना आया है, घटा से बरसा है पानी
वे माहिया बुझा दे प्यास जिया दी हो
............................................................
Sawan ka mahina aaya-Aayi Milan ki raat 1991

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Feb 24, 2015

सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली प्रविष्टियाँ

गूगल ने ब्लॉगर को जितनी सुविधाएँ दी हुई हैं शायद किसी और साईट
के लिए संभव नहीं. यहाँ ब्लॉगर का तात्पर्य ब्लॉग लिखने वाले से है. इन
सुविधाओं में एक है- एनालिटिक्स. वैसे तो सामान्य सुविधाओं में ही
आपको इतने आंकड़े प्राप्त हो जाते हैं कि आपको अपने ब्लॉग की दिशा
तय करने में मदद मिलती है. गूगल में सपोर्ट भी बढ़िया है. बाकायदा
फोरम बने हुए हैं हर सर्विस के लिए.

आज आपको इस ब्लॉग पर अभी तक के सफर के बारे में बतलाते हैं.
२००८ से शुरू हुए इस ब्लॉग को ७ वर्ष पूरे हो गए हैं. इस सफर में आपने
तरह तरह की प्रविष्टियाँ पढ़ीं और सराहीं. सब पाठकों का एक बार फिर
से हार्दिक धन्यवाद. सबसे ज्यादा बार पढ़ी जाने वाली प्रविष्टियों की सूची
नीचे दे रहा हूँ  अंकों के साथ.

१.हिंदी फिल्मों में बरसात वाले गाने-नमक हलाल  संख्या १०९३९


२.तूने प्यार की बीन बजायी-आई मिलन की रात १९९१ संख्या ९७९७


३.दिल दिया है जान भी देंगे-कर्मा १९८६ संख्या ५०५३


४.तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी-बोडी गार्ड २०११ संख्या ४६५०


५.ओढनी ओढ़ के नाचूं-तेरे नाम संख्या ४३३१


६.मेरे दिल पे लगा दे डार्लिंग-बसंत १९६०  संख्या ३४९०


७.दाता एक राम-भजन-हरिओम शरण संख्या ३३९६


८.समय तू जल्दी जल्दी चल-कर्म संख्या ३०२७


९.प्यार के कागज़ पे-जिगर संख्या २४७५


१०.दिलवाले दिलवाले-नाटक १९४७ संख्या २२१९



११.अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो-कृष्ण भजन-लक्खा संख्या १८७०




१२.फ़िल्मी बरसात-देखो ज़रा देखो बरसात-ये दिल्लगी १९९४ संख्या १७३१


१३.किसने चिलमन से मारा-बात एक रात की १९६२ संख्या १४४६


ऊपर प्रविष्टियों के विश्लेषण करने के आद कुछ रोचक आंकड़े मिलते हैं.
प्रसिद्धि में  महानायक सबसे ऊपर हैं. बप्पी लहरी के संगीत वाले गीत
के साथ फिल्म शराबी के गीत के साथ. उसके बाद जो गाना दूसरे नंबर
पर है वो चौंका देने वाला है. प्यार की बीन इतनी बार बजेगी उम्मीद नहीं
थी. फिल्म आई मिलन की रात के गीत आज भी सुने जाते हैं. संगीत
समीक्षक सुन रहे हैं ?

उसके बाद काफी अंतर से फिल्म कर्मा का देशभक्ति गीत है.  ये गीत भी
अपने समय का एक लोकप्रिय गीत रहा है और आज भी चुनाव और
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बजता मिलेगा.

चौथे और पांचवे स्थान की पोस्ट और गाने से ये तो स्पष्ट है सलमान खान
लोकप्रियता में बहुत आगे हैं. दोनों गीत उनकी फिल्मों से हैं.

छठे नंबर पर चौंकाने वाली प्रविष्टि है. ओ पी नय्यर के सभी लोकप्रिय
गीतों को पीछे छोड़ ये कम सुना गया गीत जो कि निहायत मधुर गीत
है, फिल्म बसंतसे, सबसे आगे आया.

हरिओम शरण भजन गायकी में बहुत उच्च स्थान रखते हैं. उनका
भजन जोउनके सबसे पॉपुलर भजन में से एक है सातवें नंबर पर है.

आठवें स्थान पर है-आर डी बर्मन के संगीत वाला गीत फिल्म कर्म से.
समयतू जल्दी जल्दी चल. इसने अपने ही भाई-समय तू धीरे धीरे चल
को पीछेछोड़ दिया.शायद आज के समय में ज़ल्दी चलना मांग बन चुकी
है.

आनंद मिलिंद का संगीत -९० में पैदा हुई युवा पीढ़ी को बहुत भाता है.
नवेनंबर पर फिल्म जिगर का गीत है. इस सूची में आनंद मिलिंद का
ये दूसरागीत है.

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की लोकप्रियता का अंदाज़ा आप दसवे नंबर पर
गीत से लगा सकते हैं-ये फिल्म नाटक से कम सुना गया गीत है, मगर
सुनने के मामले में सबसे आगे है. ये मेरी भी समझ के परे है. उनके इतने
सारे लोकप्रिय गीत यहाँ हैं मगर कम चर्चित रहे इस ब्लॉग के पाठकों के
बीच. शायद ब्लॉग की पहुँच या वर्गीकरण में कुछ ऐसा है जो समीक्षा
करने लायक है.

ग्यारहवे नंबर पर है लखबीर सिंह लक्खा का कृष्ण भजन-अरे द्वारपालों.
निस्संदेह ये पिछले कुछ वर्षों से काफी सुना गया है और लोकप्रिय है
भजन भक्तों के बीच.

फ़िल्मी बरसातों में दूसरा गीत जो संख्या में बारहवे नंबर पर है सैफ,
अक्षय और काजोल अभिनीत ये दिल्लगी से.

सचिन देव बर्मन का संगीत फिल्म बात एक रात की से. गौरतलब है
मन्ना डे का गाया गीत तेरहवे नंबर पर है पाठक संख्या के मामले में.
उन्होंने सारे नामचीन गायकों को इधर पीछे छोड़ दिया है. धन्यवाद
पाठकों मन्ना डे को इतना याद करने के लिए. उन्हें वो सराहना नहीं
मिली जिसके वे हक़दार थे.

इन आंकड़ों से पता चलता है कि ब्लॉग किस दिशा में सफर कर रहा
है. ज़रूर ही अलग हट के ट्रेंड बन रहा है इसका. पाठक वर्ग क्या चाहता
है उसका भी अंदाजा सहज लगता है आंकड़ों के विश्लेषण से.

उजागर, अप्रकट, गुप्त एवं सुप्त सभी प्रकार के पाठकों का धन्यवाद.

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May 29, 2011

तूने प्यार की बीन बजाई-आई मिलन की रात १९९१

आइये के. पप्पू के निर्देशन में बनी फिल्म 'आई मिलन की रात' से
एक बीन वाला गीत सुनें। फिल्म सन १९९१ में आई थी। चित्रगुप्त
संगीत विद्यालय की बीन छाप इस गीत में आप महसूस करेंगे ।
चित्रगुप्त पुत्रों आनंद और मिलिंद ने हालाँकि अपने अंदाज़ में
इस गीत को ढाला है मगर उनके संगीत में वाद्य यंत्रों की जमावट
पर उनके पिता का असर थोड़ा बहुत दिखलाई पढ़ ही जाता है।
अविनाश वाधवान के साथ नई नायिका शाहीन आपको इस गीत
में लहराते, उचकते, कूदते और बल खाते दिखाई देंगे। गीत बढ़िया
गति वाला है और नृत्य भी बांधे रखने वाला है। उल्लेखनीय है कि
इस फिल्म के गाने सुपर हिट की श्रेणी में आते हैं। बीन का ये सफ़र
जारी रहेगा, पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।

नायिका  शाहीन दो फिल्मों के लिए जानी जाती हैं-महासंग्राम जो
सन १९९० की फिल्म है और दूसरी-आई मिलन की रात. शाहीन
सायरा बानो के भाई सुल्तान अहमद की सुपुत्री हैं. फिल्म के
स्क्रीनप्ले और संवाद लेखक एम्. परवेज़ फिल्म दीवाना मुझसा नहीं
के सह-निर्देशक भी थे. के पप्पू ने फिल्म निर्देशन एक पंजाबी
फिल्म से सन १९८२ में शुरू किया था. उनके निर्देशन वाली आखिरी
फिल्म रघुवीर (१९९५) थी.

नायक नायिका को बीन के साथ सुरों पे दौडाया है समीर के बोलों ने.
संगीतकार  के बारे में आपको पहले ही बतला चुके हैं.





गीत के बोल:

तूने प्यार की
तूने प्यार की बीन बजायी
मैं दौड़ी चली आई
मैं भागी चली आई हो

तूने प्यार की बीन बजायी
मैं दौड़ी चली आई
मैं भागी चली आई हो

तूने दिल से जो मुझको बुलाया
तूने दिल से जो मुझको बुलाया
मैं दौड़ा चला आया
मैं भागा चला आया हो

सारा सारा दिन तेरी याद सताए
रात को नींद ना आये
सारा सारा दिन तेरी याद सताए
रात को नींद ना आये
बावरी हो गई प्रीत ये तेरी
दिल कहीं चैन ना पाए

तूने ऐसी लगन लगायी
तूने ऐसी लगन लगायी
मैं दौड़ी चली आई
मैं भागी चली आई हो

आ जा तुझे बीन मैं अपनी बना लूं
अपने लबों से लगा लूं
आ जा तुझे बीन मैं अपनी बना लूं
अपने लबों से लगा लूं
मैं तुझे देखूं तू मुझे देखे
आँखों में ऐसे बसा लूं

तूने अपना मुझे बनाया
तूने अपना मुझे बनाया
मैं दौड़ा चला आया
मैं भागा चला आया हो

तेरा मेरा साथ है सदियों पुराना
जाने ना जाने ज़माना
तेरा मेरा साथ है सदियों पुराना
जाने ना जाने ज़माना
वादा किया है साथ रहेंगे
वादा भूल ना जाना
तेरे प्यार में दुनिया भुलाई
तेरे प्यार में दुनिया भुलाई
मैं दौड़ी चली आई
मैं भागी चली आई हो

तूने दिल से जो मुझको बुलाया
मैं दौड़ा चला आया
मैं भागा चला आया हो

तूने प्यार की बीन बजायी
मैं दौड़ी चली आई
मैं भागी चली आई हो
..................................
Toone pyar ki been bajayi-Aayi milan ki raat 1991

Artists-Avinash Wadhwan, Shaheen

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