रात का समा- जिद्दी १९६४
किरदार है एक और वो हैं फिल्म की नायिका.
नायिका हैं आशा पारेख जिन्होंने बखूबी इस रोल
को निभाया है. सबसे नज़रें बचा कर नायिका
एक कार्यक्रम में पहुँचती है और वहां ये गीत
गाने लगती है. ऐसा प्रतीत होता है मानो नायिका
गीत गाने को आतुर हो और अवसर की तलाश
में हो. कार्यक्रम रात के समय गांव में हो रहा है.
लता के गाये लोकप्रिय गीतों में एक है प्रस्तुत
गीत. बढ़िया गीत बनाने के लिए हम गीतकार
और संगीतकार दोनों को धन्यवाद देते हैं. ये इस
फिल्म से तीसरा गीत सुनवा रहे हैं आपको. दो
गीत आप पहले सुन चुके हैं.
आज चीन, यूक्रेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड,
रूस के पाठकों को धन्यवाद. आते रहें, पढते रहें ये
ब्लॉग.
गीत के बोल:
रात का समा, झूमे चंद्रमा
तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ
देखो, देखो, देखो, हूँ नदी प्यार की
सुनो, सुनो, सुनो, बाँधे मैं ना बँधी
मैं अलबेली, मान लो बड़ी जिद्दी,
माने मुझ को जहाँ
रात का समा, झूमे चंद्रमा
तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ
रात का समा
नाचू, नाचू, नाचू, मोरनी बाग की
डोलू, डोलू, डोलू, हिरनियाँ मदभरी
घूँघर बाजे, छमा छम घूँघर बाजे,
आरजू है जवान
रात का समा, झूमे चंद्रमा
तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ
रात का समा
धीरे, धीरे, धीरे, जीत मेरी हुई
हौले, हौले, हौले, हार तेरी हुई
तेरी तरह, जा रे जा बहुत देखे,
मुझ सा कोई कहा
रात का समा, झूमे चंद्रमा
तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ
रात का समा
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Raat ka sama-Ziddi 1964
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