तेरे मेरे मिलन की ये रैना-अभिमान १९७३
इन्टरनेट पर दोस्त मिलना कठिन है. हवा-हवाई
दोस्त तो बहुत से मिल जाते हैं मगर सच्चा मित्र
मिलना वैसा ही है जैसा वास्तविक जीवन में है.
अनुभव कर लीजिए इसका. इस ब्लॉग के निर्माण के
दौरान कई मित्रों से(वही इन्टरनेट वाले) से इसके
कंटेंट, भाषा और प्रस्तुतीकरण पर विचार जाने चाहे,
मगर नतीजा कुछ और निकला.
दो मित्रों ने तो इसे पढ़-पढ़ कर अपने अंग्रेजी लेखों
में इधर का माल चिपकाना शुरू कर दिया. दूसरे जो
थोड़े ज्यादा स्मार्ट थे, उन्होंने काम्पीटिशन समझ कर
कुछ न बोलना ही सही समझा. काम वही आये-पुराने
मित्र जो नेट के ज़माने के पहले से मित्र हैं. उन्होंने
ज़रूर कुछ सुझाव दिए.
हिंदी के ब्लॉग आज भी हाशिए पर ही हैं. अधिकाँश
वेब साईट अंग्रेजी में हैं, हिंदी ब्लॉग जगत अपने ही
भाई भतीजा-वाद से बाहर नहीं निकल पाता है. उसके
अलावा समर्थ साइटों द्वारा हिंदी के ब्लॉगर को क्यूतिया
और भिखारी समझ कर चलने के ट्रेंड. इतने साल हो
गए नेट पर विभिन्न जानकारी साझा करते हुए और
उन समर्थ साइटों के चलन को बढ़ावा देने में, फिर
भी स्तिथि वहीँ की वहीँ है.
आइये सुनें फिल्म अभिमान से एक और गीत जो फिल्म
में २-३ बार बजा है. फिल्म का मुख्य गीत कह सकते
हैं इसे. यह युगल गीत फिल्म के अंत में गाया जाता है,
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
नया कोई गुल खिलाएगी
नया कोई गुल खिलाएगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
नन्हा सा गुल खिलेगा अंगना
सूनी बैयाँ सजेगी सजना
नन्हा सा गुल खिलेगा अंगना
सूनी बैयाँ सजेगी सजना
जैसे खेले चंदा बादल में
खेलेगा वो तेरे आँचल में
चंदनिया गुनगुनायेगी
चंदनिया गुनगुनायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
तुझे थामे कई हाथों से
मिलूँगा मदभरी रातों से
तुझे थामे कई हाथों से
मिलूँगा मदभरी रातों से
जगा के अनसुनी सी धड़कन
बलमवा भर दूंगी तेरा मन
नई अदा से सतायेगी
नई अदा से सतायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना, देखो ना
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
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Tere mere Milan ki-Abhimaan 1973
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