श्यामल श्यामल बरन-नवरंग १९५९
हैं इसके. फिल्म नवरंग के सारे गाने हिट हुए थे. ये
गीत प्रशंसा में गाया जा रहा है. अलंकारों का सुन्दर
प्रयोग हुआ है इस गीत में. फिल्म में विरोधाभास है
वो ये कि नायक की जो प्रेरणा है वो पूरी हैरान करने
वाली है. नायक की कल्पनाशीलता की चरम सीमा का
प्रदर्शन है फिल्म में. प्रेरणा कहा से और कैसे ली जा
सकती है ये उसका अनूठा उदाहरण है. अगर आपने
फिल्म देखी है तो आप हास्य से भरपूर उन स्तिथियों
की कल्पना करके ही आनंदित हो उठे होंगे.
महेंद्र कपूर का गाया गीत है जिसे भरत व्यास ने लिखा
है और सी रामचंद्र का संगीत है इसमें.
गीत के बोल:
श्यामल श्यामल बरन
कोमल कोमल चरण
तेरे मुखड़े पे चंदा गगन का जड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
तेरे बालों में सिमटी सावन की घटा
तेरे गालों पे छिटकी पूनम की छटा
तीखे तीखे नयन
मीठे मीठे बयन
तेरे अंगों पे चम्पा का रंग चढ़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
ये उमर, ये कमर, सौ सौ बल खा रही
तेरी तिरछी नज़र तीर बरसा रही
नाज़ुक नाज़ुक बदन
धीमे धीमे चलन
तेरी बाँकी लटक में है जादू बड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
किस पारस से सोना ये टकरा गया
तुझे रचकर चितेरा भी चकरा गया
न इधर जा सका
न उधर जा सका
रह गया देखता वो खड़ा ही खड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
श्यामल श्यामल बरन
कोमल कोमल चरण
तेरे मुखड़े पे चंदा गगन का जड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
.......................................................................
Shyamal shyamal baran-Navrang 1959
0 comments:
Post a Comment