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Jun 9, 2020

बड़े भोले हो-अर्धांगिनी १९५९

सिनेमा संसार एक सिद्धांत पर चलता है-चमक दमक. इस बात के
चलते जो परदे के पीछे के सृजनकर्ता होते हैं वो सामने नहीं आ पाते
या आते भी हैं तो उन्हें वो प्रसिद्धि और सम्मान नहीं मिलता जिसके
वे अधिकारी होते हैं.

फिल्म निर्माण में असंख्य लोगों को योगदान होता है और इनमें से
निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के अलावा गायक कलाकारों को
लोकप्रियता मिल जाती है. तकनीकि से संबद्ध लोग भी लाईमलाईट
में आ जाते हैं जैसे कैमरामैन, साउंड रिकॉर्डिंस्ट वगैरह. आज के युग
में काफी जानकारी उपलब्ध है किसी भी फिल्म निर्माण से सम्बंधित.

ये चलन कुछ सालों से ही देखने में आया है जब से इस इंटरनेट नाम
की दुनिया पे सोशल मीडिया ने अपने पैर पूरी तरह से पसारे. उसके
पहले तक काफी लोग इन सब बातों को जैसे बंदरिया मरे बच्चे को
चिपटाए रखती है, वैसे ही चिपकाये रखते थे. इनमें से कई जानकार
तो ज्ञान को अपने साथ ही ले गए. कुछ जो वानप्रस्थ तक पहुँच चुके
हैं उन्होंने किताबें छपा के इस ज्ञान को अपने अधिकार क्षेत्र में ले
लिया जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी भी शामिल है.

आज जून महीने की ९ तारीख है. आज के दिन ढेर सारे सेलिब्रिटीज़
और बॉलीवुड कलाकार पैदा हुए थे. आज के दिन पैदा होने वाले प्रसिद्ध
लोगों में पुद्दुचेरी की राज्यपाल किरण बेदी, संगीतज्ञ अनुष्का शंकर,
संगीतज्ञ देबाशीष चक्रवर्ती, टेलीविज़न एक्टर करण वाही, तमिल सिनेमा
की नायिका मोहिनी, तेलंगाना शकुंतला, निर्माता निर्देशक रजत रवैल,
संगीतकार वसंत देसाई, गायिका-नायिका बी जयश्री, सुंदरी मनप्रीत ब्रार,
और महिला क्रिकेटर नेहा शर्मा हैं.

बॉलीवुड की बात करें तो नायिकाओं में अमीषा पटेल, सोनम कपूर,
मराठी भाषी अभिनेत्री पल्लवी सुभाष शामिल हैं. फिल्मकारों की बात
करें तो डूंडी उर्फ डूंडेश्वर राव पोथिना आज ही के दिन १९३२ में पैदा
हुए थे. जीतेन्द्र की फिल्म फ़र्ज़ और मिथुन की फिल्म साहस के
सह निर्माता वही थे सुन्दरलाल नाहटा के साथ.
आज हम आपको वसन्त देसाई के संगीत निर्देशन में तैयार एक
गीत सुनवायेंगे. इस गीत को लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और
इसे गाया है लता मंगेशकर ने. वसंत देसाई शुद्धतावादी परंपरा
के संगीतकार थे जिहोने भारतीयता को बनाये रखा अपने संगीत
में.

कृष्ण कन्हाई की मनोहारी सूरत से ये गीत शुरू होता है. नायिका
कन्हाई से वार्तालाप कर रही है और अपनी व्यथा उड़ेल रही है.
बंसी होंठ से लगा के अब कान्हा बोले भी तो क्या बोलें-इस बात
का सुन्दर वर्णन है दूसरे अंतरे में.





गीत के बोल:

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
भागे हैं जग मेरी छाया से दूर
तन मन मेरा सबकी ठोकर से चूर
फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई
हो ओ ओ फिर फिर के फिर तुमरे दर पे आई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो

जलते आँसू जलते आँसू
जलते आँसू भीगे नयनों का हार
देखा तो है सब कुछ तुमने गोपाल
फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुस्काई
हो ओ ओ फिर तुमरी अखियाँ हैं क्यूँ मुसकाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो

कित जाऊँ हो ओ ओ
कित जाऊँ मैं मुख तो खोलो ज़रा
चोर बन के चुप क्यूँ हो बोलो ज़रा
अच्छी ये बंसी की ओट लगाई
हो ओ ओ अच्छी ये बंसी की ओट लगाई

बड़े भोले हो ओ ओ
बड़े भोले हो हँसते हो
सुन के दुहाई कन्हाई
कन्हाई कन्हाई
बड़े भोले हो
………………………………….
Bade bhole ho-Ardhangini 1959

Artists: Meena Kumari,

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Apr 24, 2020

बेताब है दिल बेचैन नज़र-बेरहम डाकू १९५९

वाह साहब क्या गीत है तलत महमूद का. मखमल हो
आवाज़ में तो तलत महमूद की क्वालिटी का.

उस पर सबा अफगानी के बोल कातिलाना हैं. ऐसा कुछ
हम सुनते थे एक ज़माने में तलत महमूद के बड़े फैन्स
के मुखारविंद से.

काफ़ी हद तक हम भी सहमत हैं उनके विचारों से. कोई
गीत आहिस्ता वाला, धैर्य वाला सुनना हो तो सिर्फ और
सिर्फ तलत महमूद के गाने सुनो.

बेरहम डाकू फिल्म के पोस्टर पर एक युवती अंगडाईयां
लेती हुई दिखती है. क्या इस फिल्म को चलने के लिए
ऐसा करना मजबूरी थी, सवाल खड़ा होता है.



गीत के बोल:

बेताब है दिल बेचैन नज़र
अंजाम हो क्या मालूम नहीं
अपनी भी नहीं कुछ हमको ख़बर
उनका भी पता मालूम नहीं
बेताब है दिल बेचैन नज़र

क़िस्मत ये कहाँ ले आई है
महफ़िल भी जहाँ तन्हाई है
क़िस्मत ये कहाँ ले आई है
महफ़िल भी जहाँ तन्हाई है
फूलों से निकलते हैं शोले
ये राज़ है क्या मालूम नहीं
बेताब है दिल बेचैन नज़र

हम भूल गए मंज़िल का निशां
अब याद नहीं जाना है कहां
हम भूल गए मंज़िल का निशां
अब याद नहीं जाना है कहां
बस उनकी तमन्ना है दिल में
कुछ इसके सिवा मालूम नहीं

बेताब है दिल बेचैन नज़र
अंजाम हो क्या मालूम नहीं
बेताब है दिल बेचैन नज़र
……………………………………………….
Betaab hai dil bechain nazar-Beraham Daku 1959

Artist:

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Apr 20, 2020

कहो आ के बहार-फोर्टी डेज़ १९५९

आप खुश होते हैं तब गीतों के संगीत का आनंद लेते है
और जब आप दुःख के बादलों में घिरे होते हैं तब बोलों
का अर्थ समझते हैं. ये बात जिसने भी कहीं है सटीक है.

एक गीत है मुकेश आशा का गाया युगल गीत १९५९ का
जिसमें पहली पंक्ति को कुछ यूँ समझते थे हम-कहो आ
के बाहर, करे मेरा सिंगार. वो शब्द बहार है जिसके कारण
गफ़लत कई गानों में हो चुकी है.

सरसरी तौर पर गान सुनने में अर्थ का अनर्थ होने की
सम्भावना प्रबल होती है. मगर, जिन गानों के बोल ही
समझ ना आयें उनका क्या? साय सुकू साय सुकू साय
साय !

कैफी आज़मी की रचना है और बाबुल का संगीत. गीत
में एक शोख नज़र से सौ भेद समझने की बात कही
गयी है. सदियों से कवि, गीतकार और प्रेमी रिसर्च कर
के थक-मर गए मगर स्त्री मन का भेद कोई ना जान
पाया. अंगड़ाई मच्छर भगाने के लिए है या अलसाने की
अदा.

गाने की हो ओ ओ ओ से आपको नैयर के संगीत वाला
‘रोका कई बार मैंने’ गीत याद आना चाहिए.




गीत के बोल:

हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

आँखों में खुशी नाचे होंठों पे हंसी गाये
कह दो गम-ए-दुनिया से छुपे से गुज़र जाये
सुनो दिल की पुकार कहे दिल बार बार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

चुनूँ फूल हज़ार ओ करूँ तुझपे निसार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला

ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
ये मस्त फ़ज़ा दिल को दीवाना बनाती है
एक शोख नज़र तेरी सौ भेद बताती है
तुम्हीं मेरा क़रार तुम्हीं मेरा निखार
मुझे प्यार मिला ओ दिलदार मिला
हा आ आ आ आ

कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हाय

बेदर्द ज़माने को हम प्यार सिखा देंगे
दिल खो ही चुके पहले अब जां भी गंवा देंगे
ये है ऐसा खुमार नहीं जिसका उतार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
कहो आ के बहार करे मेरा सिंगार
मुझे प्यार मिला हो दिलदार मिला
हो ओ ओ ओ ओ
…………………………………………………
Kaho aa ke bahaar-40 Days 1959

Artists: Premnath, Nishi

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Apr 12, 2020

मैं क्या जानूं काहे लागे-चंद्रसेना १९५९

सन १९५९ में रिलीज़ हुई फिल्मों में जो लता मंगेशकर के
उल्लेखनीय गीत हैं उनमें कुछ और भी हैं जैसे फिल्म
अनाड़ी के दो गीत-तेरा जाना और वो चाँद खिला जिसमें
से बाद वाला दत्ताराम ठेके के लिए जाना जाता है. ठेका
ढोलक का, वो दूसरा वाला नहीं जी.

गीत हम आपको और भी बतलाते रहेंगे जब जब १९५९
की फिल्मों का उल्लेख होगा.

भीषण गर्मी दस्तक दे रही है ऐसे में लिम्का शिमका पीने
के बजाये ये गाना सुन लेते हैं. सावन का नाम सुनते ही
कलेजे में ठंडक पड़ जाती है.

इस गीत के गीतकार और संगीतकार क्रमशः गुलशन बावरा
और कल्याणजी-आनंदजी हैं. इसे सुन के ऐसा आभास होता
है मानो ये धुन किसी और गीत में भी इस्तेमाल की गई
हो-जहाँ तक मेरा अंदाजा है किसी धार्मिक गीत में.



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
मैं क्या जानूं
मैं क्या जानूं काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे
मैं क्या जानूं  हे
मैं क्या जानूं काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे
हो जादू तुझ पर डाला

सर पे आँजन ठहरे आँचल फार फार उड़ता जाये
रह रह के गोरे मुखड़े पे लट आ के लहराये
सर पे आँजन ठहरे आँचल फर फर उड़ता जाये
रह रह के गोरे मुखड़े पे लट आ के लहराये
कौन है गोरी
कौन है गोरी तेरी उलझी लट सुलझाने वाला
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे

मैं क्या जानूं 
मैं क्या जानूं  काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला हो ओ
जादू तुझ पर डाला

आज मोहे यूँ लागे जैसे बजे कोई शहनाई
चन्दा की बारात गगन से तारों के संग आई
आज मोहे यूँ लागे जैसे बजे कोई शहनाई
चन्दा की बारात गगन से तारों के संग आई
आ जाओ कि
आ जाओ कि दुनिया में अब होने लगा उजाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला रे

मैं क्या जानूं 
मैं क्या जानूं  काहे लागे ये सावन मतवाला रे
रूप जवानी मस्ती ने ये जादू तुझ पर डाला हो ओ
जादू तुझ पर डाला
……………………………………………..
Main kay janoon-Chandrasena 1959

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Mar 30, 2020

दिल झूम झूम लहराये-चंद्रसेना १९५९

भूले बिसरे गीतों में अगला आपके लिए पेश है १९५९ की फिल्म चंद्रसेना
से. उल्लास वाला गीत है और कल्याणजी आनंदजी के शुरूआती धमाकों
में से एक है. गौरतलब है इसके गीतकार इन्दीवर हैं.

एक बार फिर हम कहेंगे इस साल जो उल्लेखनीयगीत आये लता के उनमें
-इंतज़ार और अभी फिल्म चार दिल चार राहें से, खोई खोई अँखियाँ नींद
बिना, चाँद फिल्म से, दिल को लाख संभाला-गेस्ट हाउस, दगा दगा वई वई
-काली टोपी लाल रुमाल, लव मैरिज का कहे झूम झूम रात ये सुहानी, 
चाचा जिंदाबाद का बैरन नींद ना आये, दिल का खिलौना-गूँज उठी शहनाई,
उन आँखों में नींद कहाँ-मिनिस्टर, नैन द्वार से मन में वो आ कर-सावन,
मैं तुम्ही से पूछती हूँ-ब्लैक कैट, भैया मेरे राखी के बंधन को-छोटी बहन,
मैं नशे में हूँ का गीत-सजन संग काहे नेहा लगाये, तुम हो साथ रात भी हसीं
है-मोहर, मैं तो जनम जनम की प्यासी फिल्म कवि कालिदास से, धानी
चुनर मोरी हाय रे फिल्म मधु का, तेरा जलवा जिसने देखा-उजाला, आ जा
भंवर सूनी डगर-रानी रूपमती, तेरा तीर ओ बेपीर-शरारत, ऐ दिल जुबां न
खोल-नाच घर, इसके अलावा चाँद फिल्म से एक और गीत-आ जा चांदनी.
अगर तेरे सुर और मेरे गीत-गूँज उठी शहनाई को शामिल नहीं किया तो
अन्याय होगा.

इन गीतों के साथ ब्ला-ब्ला अगड़म बगड़म लिख डालें और बन गई वो
महंगे वाले अंग्रेजी ब्लॉग की पोस्ट. Exquisite, elegant, magnificent, superb,
awesome, awful, subtle, intricate, fine, well executed,  la crème laga crème
जैसे शब्द घुसेडिये और ब्रिटिश पार्लियामेंट वाला भाषाई स्ट्रक्चर इस्तेमाल
कर के गुड़ बनाइये फिर देखिये सारी मक्खियाँ वहीँ बेहोश हो हो के गिरेंगी.




गीत के बोल:

दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये

ऐ मेरे दिल मुझको थामना
ऐ मेरे दिल मुझको थामना
होगा उनसे आज सामना
होगा उनसे आज सामना
पहला प्यार पहली ही बार
संहार हो ना जाये

दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये

मेरी प्रीत उनको पुकारती
मेरी प्रीत उनको पुकारती
लिए खड़ी आँखों में आरती
लिए खड़ी आँखों में आरती
लागे लाज क्यूँ ना जाने
जिया डोल डोल जाये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
मिली उनकी खबर झुक गई नज़र
नैनों में प्यार मुस्काये
दिल झूम झूम लहराये
दिल झूम झूम लहराये
…………………………………………..
Dil jhoom jhoom lehraye-Chandrasena 1959

Artist: Girijia

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Dec 11, 2019

तार तार बज रहा-स्कूल मास्टर १९५९

सुरबहार एक वाद्य है जिसकी ध्वनि सितार से मिलती
जुलती है. आपने फिल्म के गीतों में वीणा शब्द सबसे
ज्यादा सुना होगा. उसके बाद सितार का नाम आता है.
तबला तो अक्सर हास्य गीतों में ही बजता है.

१९५९ की फिल्म स्कूल मास्टर में एक युगल गीत है
मन्ना डे और लता मंगेशकर का गाया हुआ जिसमें इस
वाद्ययंत्र का नाम आया है. कवि प्रदीप की रचना है और
वसंत देसाई का संगीत. एक अच्छा रोमांटिक गीत है ये.





गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ आ
तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

तार तार बज रहा दिल के सुरबहार का
गुनगुना ले आ पिया गीत आज प्यार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
आ के हाथ थाम ले मुझपे नशा छा गया
ओ जब किसी का दिल लुटे आज वो दिन आ गया
लूट लें आ जा मजा इस बहार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

समझ ले साजन ये जवानी का इशारा
जवानी का इशारा हो हो हा हा
ये वो उमर है जो नहीं आये दोबारा
नहीं आये दोबारा
हो ओ ओ यूँ ही गुजार जाए न ये समा ख़ुमार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ

ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
ये रंगीला वक्त है दूर दूर क्यूँ रहें
हो दिल से मिला दिल है जब फिर जुदाई क्यूँ सहें
आज के मौसम में क्या काम इंतज़ार का
आ पिया आ सजनिया आ
आ पिया सजनिया आ
………………………………………………
Tara taar baj raha-School Master 1959

Artists: Kamini Kadam, BR Panthulu

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Nov 27, 2019

सजना लगन तेरी सोने-दुनिया न माने १९५९

कभी किसी की लगन किसी को सोने नहीं देती तो कभी कोई
फिल्म की कहानी दर्शक को सोने नहीं देती. खटमल बैठने नहीं
देते और मच्छर उठने नहीं देते. क्या ज़ालिम ज़माना आ गया
है. पहले पहले लगता था कि मल्टीप्लेक्स में खटमल नहीं होते
मगर अब वहाँ भी मौजूद हैं.

जो दर्शक इमानदारी से केवल सोने के लिए टिकट खरीद कर
सिनेमा हॉल में घुसता है उसके साथ अन्याय है ये सब.

खैर छोड़े ये सब, आज के गीत पर चर्चा कर लेते हैं थोड़ी सी.
हमने आपको इस फिल्म से चलने वाले दो गीत सुनवाए थे.
अब उन गीतों में चलना शब्द था इसलिए चले. बाकियों का
पता नहीं.

प्रस्तुत गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने और मदन मोहन इसकी
धुनें के जिम्मेवार हैं. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. थ्योरी के
अनुसार, मदन मोहन के संगीत वाले लता मंगेशकर के गीत
सभी मधुर हैं और बढ़िया हैं. थ्योरी को हम भी ७० प्रतिशत
तक मानते हैं जी.





गीत के बोल:

सजना सजना सजना
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

समझे तो समझे ये दिल हार के
समझे तो समझे ये दिल हार के
दर्द अनोखे बड़े होते हैं प्यार के
हाय बैरी प्यार के
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

अपने पराये मेरी समझें न बतियां
अपने पराये मेरी समझें न बतियां
किस संग बोल के बिताऊं काली रतियां
काली काली रतियां
सजना लगन तेरी सोने न दे

सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे

कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
कितनी कठिन हैं प्यार की रस्में
अपनी ही निंदिया वो भी न बस में
हाय मेरे बस में
सजना लगन तेरी सोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
रोना भी चाहूं तो रोने न दे
सजना लगन तेरी सोने न दे
...............................................................
Sajna teri lagan sone na de-Duniya na mane 1959

Artist: Mala Sinha

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Nov 17, 2019

उन आँखों में नींद कहाँ-मिनिस्टर १९५९

सरलता और जटिलता किसी भी कार्य को करने के
दो तरीके हैं. वैसे आजकल मक्कारी का तरीका ज्यादा
पॉपुलर है. किसी बात को गहराई तक समझाने के
लिए गहरा गड्ढा खोदने की ज़रूरत तो नहीं होती.

संगीत जगत में राग रागिनियों वाले घुमावदार और
लच्छेदार गीत बहुतेरे हैं. आम आदमी को लच्छे
कुल्फी फ़ालूदा में ज्यादा भाते हैं बनिस्बत संगीत के.
पान में डालने वाली लच्छेदार सुपारी भी आम आदमी
खा लेता है आराम से.

जो जीवन के लच्छों में पहले से ही उलझा हुआ हो उसे
और क्या उलझाना. सिनेमा एक माध्यम है मनोरंजन
का, सन्देश देने का तो व्यक्ति विशेष या समूह की
भड़ास निकालने का माध्यम भी है. आर्ट से फार्ट तक
सब मिल जायेगा आपको.

छोड़ें ये सब और बात करें आज के गीत की. सन १९५९
की फिल्म मिनिस्टर से लता मंगेशकर का गाया एक
गीत सुनते हैं जो सरल और सहज है. सुनने में सहज
लगता अवश्य है मगर इसे परफेक्टली गुनगुनाने के
लिए आपको थोडा बहुत संगीत का ज्ञान आवश्यक है.

राजेंद्र कृष्ण की रचना है और मदन मोहन का संगीत.
इसे रूप्माला नामक अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
चैन कहाँ से पाये वो दिल
जिसका बसिया पास न हो
हार सिंगार भी ज़हर लगे उसे
जिसका रसिया पास न हो
बहते आंसू उनके जुबां
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
लाख बहारें झूम के आयें
डाली डाली फूल खिलें
मेरे मन की कलि खिले जब
मुझसे प्रीतम आन मिले
वो क्या देखें मस्त समा
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे

उन आँखों में नींद कहाँ
जिन आँखों से प्रीतम दूर बसे
....................................................................
Un aankhon mein neend kahan-Minister 1959

Artist: Roopmala

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Nov 15, 2019

दिल उनको उठा के दे दिया-बाप बेटे १९५९

आज सुनते हैं लता मंगेशकर का गाया एक गीत फिल्म
बाप बेटे से. राजेंद्र कृष्ण की लिखी रचना को संगीत में
जकडा है मदन मोहन ने.

सालों से ये गाना सुनते आ रहे हैं फिल्म बाप बेटे का
मगर एक बात अभी भी खटकती है-उठा के दे दिया.
दिल ना हुआ कुर्सी हो गयी जो कोने में पड़ी थी उठा
के दे दी.

शकीला ने तो हॉरर और सस्पेंस फिल्मों में काम किया है
मेरे ख्याल से श्यामा को भी कुछ फ़िल्में करना चाहिए
थीं. इस गीत में उनके चेहरे पर जिस प्रकार के भाव
आये हैं और जिस गति से वो बदलते हैं, डरावनी फिल्मों
के लिए उपयुक्त हैं. मैं एक किलो मुस्कुराहट के अलावा
वाले भावों की बात कर रहा हूँ. 




गीत के बोल:

दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
ये किससे हुआ सामना
दिल पुकारा मुझे थामना
मिल चुकी थी नज़र हो चुका था असर
नाम उनका ज़ुबाँ ने ले लिया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया

ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
ज़िंदगी में कोई आ गया
प्यार का राग समझा गया
उनके हो ही गये हम तो खो ही गये
जाने जादू ये कैसा किया
दिल उनको उठा के दे दिया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
अब सोचती हूँ ये क्या किया
कुछ घबरा के कुछ शरमा के
दिल उनको उठा के दे दिया
………………………………………….
Dil uno utha ke de diya-Baap bete 1959

Artist: Shyama

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Nov 12, 2019

मैं हूँ मस्त मदारी-मदारी १९५९

श्वेत श्याम युग से एक मधुर युगल गीत सुनते हैं जो
सन १९५९ की फिल्म मदारी का शीर्षक गीत है. इस
गीत का मदारी मस्त है जैसा कि हमने इस गीत से
समझा.

पंडित मधुर का लिखा गीत है जिसे मुकेश ने गाया है
कल्याणजी आनंदजी की धुन पर.




गीत के बोल:

मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी

खेल-खेल में मेल हो दिल का ऐसा खेल दिखाऊँ
नज़रों की मैं डोर फेंक कर तेरा दिल उलझाऊँ
खेल-खेल में मेल हो दिल का ऐसा खेल दिखाऊँ
नज़रों की मैं डोर फेंक कर तेरा दिल उलझाऊँ
पागल को पागल पहचाने जाने नहीं अनाड़ी

हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
हो मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी

छुपने वाले छुप कर आते छुप कर करें इशारा
लेकिन दर्द छुपाएँ कैसे तीर-ए-नज़र का मारा
छुपने वाले छुप कर आते छुप कर करें इशारा
लेकिन दर्द छुपाएँ कैसे तीर-ए-नज़र का मारा
एक अदा पे हम करते क़र्बान ये दुनिया सारी

मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
बिना तीर दिल घायल कर दूँ ऐसा मैं हूँ शिकारी
मैं हूँ मस्त मदारी मैं हूँ मस्त मदारी
.......................................................
Main hoon mast madari-Madari 1959

Artist: Ranjan

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Aug 18, 2019

अपने सैयां से नैना लड़ईबे-अर्धांगिनी १९५९

वसंत देसाई एक प्रतिभाशाली संगीतकार थे. पहलवान जैसी
कद काठी वाले वसंत देसाई की धुनें बेहद कोमल होतीं. एक
मधुर गीत सुनते हैं राजकुमार और मीना कुमारी अभिनीत
फिल्मअर्धांगिनी से. फील गुड गीत है जिसके अंत में नायक
नायिका का मिलन होता है. गीत में एक बच्चा भी नायिका
के साथ नाचने की कोशिश कर रहा है. घरेलु किस्म का माहौल
है. सास के रोल में हैं दुर्गा खोटे जिनकी एक झलक गीत में
मिलती है.

गीत की टैग लाइन है- सजना के कंगना में खड़ी मुस्काई के
वाह जी वाह क्या खूब कही है. गीत मजरूह का है और इसे
गाया है लता मंगेशकर ने.




गीत के बोल:

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

झुमका पहनूंगी दर्पण देखूँगी
झुमका पहनूंगी दर्पण देखूँगी
बिंदिया माथे की तन तन देखूंगी
बिंदिया माथे की तन तन देखूंगी
अँखियाँ की अँखियाँ में कजरा दईबे
हमार कोई
हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

नहीं रुकने की मैं दुनिया के डर से
नहीं रुकने की मैं दुनिया के डर से
कोई बोली बोले न टलूंगी डर से
कोई बोली बोले न टलूंगी डर से
सजना के कंगना में खड़ी मुस्काई के
हमार कोई हमार कोई का करिहे

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे

सब मेरे उनकी ही नज़र देखेंगे
सब मेरे उनकी ही नज़र देखेंगे
मैं उधर देखूँगी वो इधर देखेंगे
मैं उधर देखूँगी वो इधर देखेंगे
कभी घूँघटा कभी अचरा सरकाई के
हमार कोई हमार कोई का करिहे

अपने सैयां से नैना लड़ईबे हमार कोई का करिहे
अपने सैयां से अपने रसिया से
अपने बलमा से नैना लड़ईबे
.............................................................................
Apne saiyan se naina-Ardhangini 1959

Artists: Meena Kumari, Durga Khote

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Aug 14, 2019

तड़पाओगे तड़पा लो-बरखा १९५९

संगीतकार चित्रगुप्त उन संगीतकारों में से हैं जो चुपचाप
अपना काम करते रहे और जनता को आनंदित करते रहे
अपने संगीत द्वारा. सन १९५९ की फिल्म बरखा से एक
गीत आपको सुनवाया था पहले जिसमें दो-दो चादं खिले
थे. अब सुनते हैं इसी फिल्म से एक और मधुर गीत जिसे
लाता मंगेशकर ने गाया है. गीत एक बार फिर राजेंद्र कृष्ण
का लिखा हुआ है. गीत फिल्माया गया है शुभा खोटे और
अनंत कुमार पर.

फिल्म बरखा का निर्माण ए वी एम प्रोडक्शंस ने किया था
और इसके निर्देशक कृष्णन और पंजू थे.



गीत के बोल:


तड़पाओगे तड़पा लो
हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गाएँगे
ठुकराओगे ठुकरा लो
हम ठोकर खा कर भी तुम्हारे दर पे आएँगे
तड़पाओगे तड़पा लो

कब तक जानेगा ना चन्दा दर्द चकोरी का
कब तक जानेगा ना चन्दा दर्द चकोरी का
एक दिन तो ये फूल सुनेगा बुलबुल का शिकवा
बेवफ़ा प्यार में कब तलक ये परदा

तड़पाओगे तड़पा लो
हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गाएँगे
तड़पाओगे तड़पा लो

जिनकी ख़ातिर हम फिरते हैं दीवाने बन के
जिनकी ख़ातिर हम फिरते हैं दीवाने बन के
वो हमसे जब मिलते हैं तो बेगाने बन के
इश्क़ में रह गये हम फ़साने बन के

तड़पाओगे तड़पा लो
हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गाएँगे
तड़पाओगे तड़पा लो

देख निशाने पर रखा है कब से मैने दिल
देख निशाने पर रखा है कब से मैने दिल
तीर चला क्या सोच रहा है ओ भोले क़ातिल
क्या पता मौत ही प्यार की हो मंज़िल

तड़पाओगे तड़पा लो
हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गाएँगे
ठुकराओगे ठुकरा लो
हम ठोकर खा कर भी तुम्हारे दर पे आएँगे
तड़पाओगे तड़पा लो
……………………………………………………..
Tadpaoge tadpa lo-Barkha 1959

Artists: Shubha Khote, Anant Kumar

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Jul 10, 2019

तुम चल रहे हो-दुनिया ना माने १९५९

फिल्म दुनिया ना माने के गीत का दूसरा संस्करण सुनते
हैं आज. गीत पिछले गीत से ज्यादा गति वाला है और
ज्यादा लिवली/लाइवली है. इसकी केटेगरी है बोट सोंग.

इसके बोल भी राजेन्द्र कृष्ण ने लिखे हैं और संगीतकार
भी वही हैं-मदन मोहन. मुकेश के अलावा इस गीत में
लता मंगेशकर की आवाज़ है. कई फिल्मों में राजसी
भूमिकाएं करने वाले प्रदीप कुमार और लोचदार गर्दन की
स्वामिनी माला सिन्हा इस गीत में आपको जल और थल
पर अपनी भावनाएं उडेलते नज़र आयेंगे. नाव की सीट
पर शायद कील लगी है जिस वजह से नायक बार बार
उठने का उपक्रम करता है और इस वजह से नाव का बेलेंस
बिगड जाता है.





गीत के बोल:

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

ये बहकी फिजाएं ये झूलती हवाएं
जो छेड़ छेड़ जाएँ तो दिल मचले
यही तो हैं ज़माने दिलों के अफ़साने
जो तूने ना सुनाये तो दिल मचले
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

अपनी खुशी से किसी ने जो किसी से
किया है कोई वादा तो डर किसका
दिल ही दिया है किसी का क्या लिया है
काहे को कोई लूटा है घर किसका
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो

प्यार की अदायें ज़माने को ना भाये
वो देख देख जले तो जलने दो
हमें ना कोई रोके किसी के हम हो के
चले हैं मस्ती में तो चलने दो

तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो हम चल रहे हैं
मगर दुनिया वालों के दिल जल रहे हैं
तुम चल रहे हो
................................................................
Tum chal rahe ho-Duniya na mane 1959

Artists: Pradeep Kumar, Mala Sinha

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Apr 14, 2019

तेरा राम तेरे मन में है-चंद्रसेना १९५९

फिल्म चंद्रसेना का निर्देशन बाबूभाई मिस्त्री ने किया
था. इसमें महिपाल, कृष्ण कुमारी,  बी एम व्यास,
कंचनमाला और सुन्दर जैसे कलाकार हैं.

सन १९५९ में बाबूभाई मिस्त्री के निर्देशन वाली तीन
फ़िल्में रिलीज़ हुईं इन तीनों में कल्याणजी आनंदजी
का संगीत है, बाकी की दो हैं-बेदर्द ज़माना क्या जाने
और मदारी.

प्रस्तुत गीत एक संदेशात्मक गीत है और इसे भजन
की तरह भी सुना जा सकता है. पंडित मधुर की रचना
को स्वर दिया है हेमंत कुमार ने.




गीत के बोल:

क्यूँ ढूंढें धरती के ऊपर
क्यूँ ढूंढें आकाश
देख ज़रा मन की आँखों से
तेरा राम है तेरे पास

तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
राम जन्म में राम मरण में
राम बसा कण कण में है
राम जन्म में राम मरण में
राम बसा कण कण में है

तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है

आ आ आ आ आ आ आ
अग्नि बन कर राम सूरज के
दिल की प्रेम जलन में है
दिल की प्रेम जलन में है
राम चाँद का रूप बना कर
रजनी के आँगन में है
रजनी के आँगन में है

जल कर कहे दीवाना दीपक
राम तेरे तन मन में है
राम जन्म में राम मरण में
राम बसा कण कण में है

तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है

राम नाग के फन में नाचे
राम बीन की धुन में है
राम बीन की धुन में है
राम छुपा फूलों के अंदर
कलियों के उपवन में है
राम हाथ की रेखा में है
किस्मत के दामन में है
राम जन्म में राम मरण में
राम बसा कण कण में है

तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
तेरा राम तेरे मन में है
…………………………………………………
Tera Ram Tere Man Mein Hai-Chandrasena 1959

Artist:

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Jan 10, 2019

मैं रिक्शावाला-छोटी बहन १९५९

महमूद ने १९७४ में एक फिल्म बनाई थी जिसमें
स्वयं एक रिक्शा वाले की भूमिका निभाई थी और
खूब रिक्शा चलाया था. १५ साल पहले की फिल्म
छोटी बहन में भी उन्होंने रिक्शा चलाया था और
एक गीत भी उन पर फिल्माया गया जिसे रफ़ी
ने गाया.

हल्का फुल्का गीत है और इसमें थोड़े कटाक्ष भी
हैं. गीत की शुरुआत ही कटाक्ष से होती है जब
नायक घोड़े की टाप वाले अंदाज़ में अपने पैर
चलाता है. गीत की पंक्ति ‘है चार के बराबर’ उसकी
पुष्टि करती है या उनका अभिनय गीत की पंक्तियों
की पुष्टि करता है, जैसा चाहें समझ लें.

सवारी को स्टेशन छोड़ने के बाद अगली सवारी
के लिए गुहार लगाता है. एक सवारी जेबें झाडती
हुई निकल जाती है. स्टेशन के बाहर रिक्शे वाले
सवारियों के दिमाग पर इतना जोर डालते हैं कि
कई सवारियां तो उनकी बक-बक को बंद करने के
लिए ही उनके रिक्शे में बैठ जाते हैं. ये सिलसिला
आज भी जारी है बस रिक्शे में इंजिन लग गया है.
कोई तीन टांग वाला है तो कोई चार टांग वाला.

जहाँ घोडा होना चाहिए वहाँ आदमी है.धूल उड़ाती
कार जब बाजू से गुज़रती है तो नायक सोचता है-
कहाँ थे कहाँ आ गये. समय किसे कहाँ ला पटके
और किसे कौन से आसमान पर बिठला दे, ये
प्रारब्ध के लेखे के सिवा कौन बतला सकता है.

संसाधन और उदारता के बीच व्युत्क्रमानुपाती
सम्बन्ध है. जैसे जैसे पैसे बढते जाते हैं, दिमाग
का एक कोना जो उदारता को प्रेरित करता है
सिकुड़ता जाता है. दुनिया का अधिकांश धन कुछ
प्रतिशत लोगों के पास ही है. इस विसंगति पर भी

प्रश्न है इस गीत में जिसका जवाब तो हम भी
खोज रहे हैं आज तक. गीतकार हैं शैलेन्द्र और
संगीतकार शंकर जयकिशन.



गीत के बोल:

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

दूर दूर दूर कोई मुझको बुलाये
मुझको बुलाये
क्या करूँ दिल उसे भूल न पाये
भूल न पाये
मैं रिश्ते जोडूं दिल के मुझे ही मंज़िल पे
कोई न पहुँचाये कोई न पहुँचाये

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

थी कभी चाँद तक अपनी उड़ान
अपनी उड़ान
अब ये धूल ये सड़क अपना जहान
अपना जहान
जो कोई देखे चौँकें ऊपर वाला भी सोचे
ये कैसा इंसान ये कैसा इंसान

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला

रात दिन हर घड़ी एक सवाल
एक सवाल
रोटियां कम हैं क्यूँ क्यूँ है अकाल
क्यूँ है अकाल
क्यूँ दुनिया मे कमी हैं ये चोरी किसने की है
कहाँ है सारा माल कहाँ है सारा माल

मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
है चार के बराबर ये दो टाँग वाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
कहाँ चलोगे बाबू कहाँ चलोगे लाला
मैं रिक्शावाला मैं रिक्शावाला
…………………………………….
Main riksha wala-Chhoti Behan 1959

Artist: Mehmood

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Nov 29, 2018

टीन कनस्तर पीट-पीट कर-लव मैरिज १९५९

बेसुरों को बेसुरा क्यूँ कहा जाता है इसका जवाब आप
आसानी से खोज सकते हैं अगर आपको संगीत का ज्ञान
नहीं है तो भी. जब सृष्टि ने श्रेष्ठ की रचना की तो निकृष्ट
भी तैयार हुआ. निर्गुण से आप अच्छा निकालने की चेष्टा
करेंगे तो उसी प्रमाण में बुरा भी तो निकलेगा. दुनिया का
हर पहलू इन दो सीमाओं के बीच ही है.

बाकी का गाना सेल्फ एक्सप्लेनेट्री है. जो गाने बजाने के
नाम पर बुरी आवाजों का शोर करते हैं उनको समर्पित है
फिल्म लव मैरिज का ये गीत.

कविवर शैलेन्द्र इसके रचयिता हैं और शंकर जयकिशन
ने इसकी धुन तैयार की है.



गीत के बोल:   

टीन कनस्तर पीट पीट कर गला फाड़ कर चिल्लाना
यार मेरे मत बुरा मान ये गाना है न बजाना है
टीन कनस्तर पीट पीट कर गला फाड़ कर चिल्लाना
यार मेरे मत बुरा मान ये गाना है न बजाना है
.......................................................................
Teen kanastar peet peet kar-Love Marriage 1959

Artist: Dev Anand

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Nov 26, 2018

तुमसे लगन लागी-मधु १९५९

गीतकार नक्श लायलपुरी के ऊपर काले पीले ज़माने के लोग
ज़्यादा मेहरबान नहीं रहे. रोशन के सिवा उनके गीत शायद
हि किसी और गीतकार ने कम्पोज किये हों.

खय्याम को रंगीन युग में उनकी बहुत याद आई और एक
से बढ़ कर एक गाने बने साहब ८० के दशक में.

सुनते हैं लता और रफ़ी का गाया युगल गीत मधु फिल्म से.





गीत के बोल:

तुमसे लगन लागी हाय ऐसी अगन जागी
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये
तुम जो दिल में आए आँखों में मेरी छाए
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

जबसे नज़र मिली खोया मेरा जहाँ
तुम हो पास मेरे मैं हूँ जाने कहाँ
जबसे नज़र मिली खोया मेरा जहाँ
तुम हो पास मेरे मैं हूँ जाने कहाँ
दिल की लगन मेरे सजन झूमे तेरी क़सम
जब से देखा तुझे नाचे मेरा मन
महकी पवन झूमे होंठों को हँसी चूमे
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये

तुम जो दिल में आए आँखों में मेरी छाए
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

तुमसे मेरी वफ़ा कहती है ये पिया
दिल से मेरे कभी तुम न होना जुदा
तुमसे मेरी वफ़ा कहती है ये पिया
दिल से मेरे कभी तुम न होना जुदा
दिल है सनम तेरे लिए तू है जान-ए-वफ़ा
दिल से प्यार तेरा होगा न जुदा
जब से तुझे पाया जीने का मज़ा आया
इस दिल की आरज़ू का चमन खिला-खिला जाये

तुमसे लगन लागी हाय ऐसी अगन जागी
ये दिल हुआ दीवाना नज़र झुकी-झुकी जाये
………………………………………..
Tumse lagan laagi-Madhu 1959

Artists:

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Nov 18, 2018

धीरे धीरे चल चाँद गगन में-लव मैरिज १९५९

दृष्टिकोण दृष्टि से विशेष कोण पर देखने का नाम तो कतई नहीं
है मगर इसका अर्थ है कुछ कुछ वैसा ही. फिल्म गैम्बलर के
गीत पर चर्चा के समय हमने दृष्टिकोण पर थोड़ी टॉर्च घुमाई
थी. शब्द हमारे जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं. अक्सर हम
बिना सोचे समझे और बिना अर्थ समझे उनका प्रयोग करते
रहते हैं. जैसे एक शब्द है पेटीकोट जिसमें ना तो पेटी है और
ना ही कोट. गुलाब जामुन में ना ही गुलाब है और ना ही जामुन.
वैसे एक बार हमें किसी बेवडे ज्ञानी ने बतलाया था कि इस
मिठाई का नाम देसी दारु के ठेके पर रखा गया था. वहाँ पर
गुलाबी और नारंगी जैसी कुछ चीज़ें मिला करती हैं.

फिल्मों से हमने एक शब्द सीखा है. हमने क्या बहुतों ने सीखा
है और प्रयोग भी किया है. फ़िल्मी हीरो ना होते तो हम बहुत
कुछ सीखने से वंचित रह जाते. ये शब्द है-लाईन मारना. जो
थोड़े सीधे किस्म के और लकीर पर फ़कीर की तरह चलने वाले
हुआ करते थे उनके दिमाग में ये ज़रूर ही कौंधता था-ये लाईन
किस चीज़ का नाम है. बिजली की तारों वाली लाइन या फिर
मट्टी के तेल को प्राप्त करने के लिए लगने वाली लंबी लाईन.
लाईन तो फिल्म के टिकट को प्राप्त करने के लिए भी लगती
थी किस ज़माने में जिसमें काफी धींगामुश्ती होती थी और जो
पहला शो पहली टिकट प्राप्त कर लेता था उसे लगता था मानो
उसने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर ली हो.


गीत सुनते हैं फिल्म लव मैरिज से देव आनंद और माला सिन्हा
पर फिल्माया गया जिसे रफ़ी और लता ने गाया है.




गीत के बोल:

धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

तू झूम के चले तो दिल पे चले कटारी
हो है मीठी छुरी ये ज़ालिम नज़र तुम्हारी
तू झूम के चले तो दिल पे चले कटारी
हो है मीठी छुरी ये ज़ालिम नज़र तुम्हारी
गुनगुन गूंजे राग आज पवन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

वो क्या चीज़ थी मिला के नज़र पिला दी
हो हुआ वो असर के हमने नज़र झुका दी
वो क्या चीज़ थी मिला के नज़र पिला दी
हो हुआ वो असर के हमने नज़र झुका दी
अरे होंगी दो दो बात आज मिलन में
धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में

दो दिल मिल गए दिए जल गए हजारों
हो अजी तुम मिल गए तो गुल खिल गए हजारों
दो दिल मिल गए दिए जल गए हजारों
हो अजी तुम मिल गए तो गुल खिल गए हजारों
रिमझिम बरसे प्यार आज चमन में
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
कहीं ढल ना जाए रात टूट ना जाए सपने
अरे धीरे धीरे चल चाँद गगन में
धीरे धीरे चल
........................................................................
Dheere dheere chal chand gagan mein-Love marriage 1959

Artists: Dev Anand, Mala Sinha

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Oct 30, 2018

आ जा री चाँदनी-चाँद १९५९

कोरस वाले गीतों में क्या आपने अतिरिक्त ऊर्जा महसूस
की है. ऐसा होना भी चाहिए क्यूंकि इतनी सारी आवाजों
का प्रभाव थोडा अलग पढता है, वजन आ जाता है गीत
में. अब ये बात और है अगर कोरस को प्रभावी ढंग से
ना प्रयोग किया जाए तो वजन दूसरे किस्म का बन
जाता है.

सुनते हैं फिल्म चाँद से लता मंगेशकर का गाया हुआ एक
गीत जिसे मीना कुमारी पर फिल्माया गया है. शैलेन्द्र के
लिखे गीत के लिए संगीत दिया है हेमंत कुमार ने.

इसे सुन के ना जाने क्यूँ दो गाने और याद आते हैं मगर
उनके बोल ध्यान में नहीं आ पा रहे. इस बार पिस्ता थोडा
महंगा हो गया है और हमने खाना बंद कर दिया है. पाठक
थोड़ी ठक ठक कर के बतलायें वो कौन से गीत हैं.




गीत के बोल:

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

जब जब मौसम ले अंगड़ाई
जब जब मौसम ले अंगड़ाई
बिजली चमकी बदली छाई
बिजली चमकी बदली छाई
राम ही जाने क्या है बात
नींद न आये सारी रात

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

हमको पलछिन साँझ सकारे
हमको पलछिन साँझ सकारे
छुप छुप जाने कौन पुकारे
छुप छुप जाने कौन पुकारे
कर के सपनों में पहचान
ऐसे न आया बेईमान

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा

इक रुत आए इक रुत जाये
इक रुत आए इक रुत जाये
बाली उमर बड़ा दुख पाये
बाली उमर बड़ा दुख पाये
न हमको नींद न उनको चैन
नागिन बन गई काली रैन

आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
हमने नैन बिछाये
आ जा
बैठे लगन लगाए
आ जा
अब तो रहा न जाये
आ जा
आ जा री चाँदनी
आ जा री चाँदनी हमारी गली
चाँद ले के आ जा
........................................................
Aa ja ri chandni-Chand 1959

Artist: Meena Kumari

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Sep 23, 2018

आधा है चंद्रमा रात आधी-नवरंग १९५९

सन १९५९ की फिल्म नवरंग का कथानक अनूठा है.
इससे एक सबक तो लिया जा सकता है वो ये है-प्रेरणा
कभी भी किसी भी चीज़ से ली जा सकती है.

असंभव सी और इमप्रेक्टिकल से लगने वाली कल्पना
भी कभी कभी आश्चर्यजनक परिणाम देती है. जैसे आप
तेल और पानी को एक बर्तन में डालें तो वो एकसार
नहीं होंगे, मगर उन दोनों को फेंटा जाए तो उससे
कोलोडल सस्पेंशन अवश्य तैयार हो जाता है जो कि
सारी क्रीम और मलहम का आधार है. वास्तव में तो
वो मिलते नहीं मगर अंश इतने छोटे हो जाते हैं कि
चोली-दामन का साथ दिखाई देने लगता है.

भरत व्यास की रचना है और सी रामचन्द्र का संगीत.
आशा भोंसले संग महेंद्र कपूर ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

आधा है चंद्रमा रात आधी
आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी
मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा

आस कब तक रहेगी अधूरी
प्यास होगी नहीं क्या ये पूरी
प्यासा प्यासा गगन प्यासा प्यासा चमन
प्यासे तारों की भी है बारात आधी
आधा है चंद्रमा

सुर आधा है श्याम ने बाँधा
रहा राधा का प्यार भी आधा
नैन आधे खिले होंठ आधे हिले
रही पल में मिलन की वो बात आधी
आधा है चंद्रमा

पिया आधी है प्यार की भाषा
आधी रहने दो मन की अभिलाषा
आधे छलके नयन आधे ढलके नयन
आधी पलकों की भी है बरसात आधी
आधा है चंद्रमा
…………………………………………………
Aadha hai chandrama-Navrang 1959

Artists: Mahipal, Sandhya

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