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Jul 7, 2019

पा लागूं कर जोरी रे-आपकी सेवा में १९४७

सुनते हैं सन १९४७ की फिल्म आपकी सेवा में से वह गीत
जिसके लिए फिल्म ज्यादा प्रसिद्द है और चर्चित भी. फिल्म
आपकी सेवा में से इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय की
शुरुआत हुई और वो है लता मंगेशकर का फिल्म पार्श्व्गायन
में पदार्पण.

गीत का पहला शब्द है-पा जो कि इधर पांव शब्द का संक्षिप्त
रूप है. लता मंगेशकर ने सदा स्टेज और कार्यस्थल का सम्मान
किया है. वो गानों की रिकॉर्डिंग के समय में पैर में जूते चप्पल
नहीं पहना करतीं.

प्रथम फ़िल्मी गीत कृष्ण के उल्लेख वाला है. क्या इसे आशीर्वाद
माना जाए एक शानदार शुरुआत के लिए. या इसे महज संयोग
मान के ख़ारिज कर दिया जाए.

सयाने कहते हैं ये गीत राग पीलू ठुमरी स्टाइल का है.




गीत के बोल:

पा लागूं कर जोरी रे
श्याम मोसे ना खेलो होरी
हो श्याम मोसे ना खेलो होरी
पा लागूं कर जोरी
श्याम मोसे ना खेलो होरी
मेरे श्याम
श्याम मोसे ना खेलो होरी

करत बरजोरी जोरी
हो श्याम मोसे
मोसे ना खेलो होरी
छीन झपट मोरे हाथ से गागर
हाँ आ आ आ आ आ आ
छीन झपट मोरे हाथ से गागर
तोड़ के बैयाँ मरोड़ी
हाँ हाँ हाँ हाँ बैयाँ मरोड़ी
दिल धडकत है सांस चढत है
दिल धडकत है सांस चढत है
देख कांपत गोरी गोरी
हाँ हाँ हाँ हाँ देख कांपत गोरी गोरी
ओ श्याम मोसे ना खेलो होरी
हो श्याम मोसे ना खेलो होरी
मोसे ना खेलो होरी रे श्याम
मोसे ना खेलो होरी श्याम
मोसे ना खेलो होरी श्याम
मोसे खेलो ना श्याम
मोसे खेलो ना श्याम
मोसे ना खेलो
मोसे ना खेलो
मोसे ना खेलो होरी
ना खेलो होरी
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Paa lagoon kar jori-Aapki sewa mein 1947

Artist:

Lata Mangeshkar's first playback song

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Jul 6, 2019

मैं तेरी तू मेरा-आपकी सेवा में १९४७

पाठकों आपकी सेवा में पेश है सन १९४७ की एक फिल्म
आपकी सेवा में से एक गीत. फिल्म में ७-८ गीत हैं मगर
ये फिल्म लता मंगेशकर के प्रथम फ़िल्मी गीत के लिए ही
जानती है.

फिल्म में कुछ कर्णप्रिय गीत हैं उनमे से एक सुनते हैं आज.
ये मोहनतारा तलपड़े और रफ़ी का गाया युगल गीत है जिसे
लिखा है महिपाल ने. संगीत दत्ता दावजेकर का है.





गीत के बोल:

हा हा हा हा हो हो हो हो
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

छोड़ के मुझको ओ किधर चले
ओ किधर चले
बिछड़े दूर हुए
बिछड़े दूर हुए
मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

आओ आओ झूलते चलें किनारे
आओ आओ झूलते चलें किनारे
पानी में हों महल हमारे
पानी में हों महल हमारे
लहर लहर में डोल डोल कर
नाचे पवन चकोरा
लहर लहर में डोल डोल कर
नाचे पवन चकोरा

मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा

मन की रानी मन पे छाओ
मन की रानी मन पे छाओ
प्रेम हिलोरी लाओ
प्रेम हिलोरी लाओ
घिर घिर काले बादल आये
आओ मैंने हाथ बढ़ाये
घिर घिर काले बादल आये
आओ मैंने हाथ बढ़ाये
सजन डाल दें आज यहाँ
मीठे सपनों का घेरा
सजन डाल दें आज यहाँ
मीठे सपनों का घेरा

मैं तेरी तू मेरा
मैं तेरी तू मेरा
दोनों का संग संग हो बसेरा
..................................................................
Main teri too mera-Aapki sewa mein 1947

Artists:

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Apr 17, 2017

किस्मत तो देखो-अदालत १९४८

एक निर्देशक थे वसंत जोगलेकर. श्वेत श्याम युग से शुरू कर के वे
रंगीन फिल्मों के दौर तक पहुंचे. सन १९४२ की फिल्म किती हासिल
से लेकर उन्होंने १९७६ की फिल्म जानकी तक अपना निर्देशन कैरियर
चलाया. सन १९६८ की फिल्म एक कली मुस्काई उनकी निर्देशित शायद
आखिरी हिंदी फिल्म थी. उसके बाद उन्होंने २-३ मराठी फिल्मों का
निर्देशन किया. ‘आपकी सेवा में’ फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने किया
जिसमें लता मंगेशकर को पहला गीत गाने का अवसर मिला.

प्रकाश झा की फिल्म अभिशप्त(१९८८) में उन्हें परदे पर भी देखा गया
और संभवतः ये उनका आखिरी फ़िल्मी कनेक्शन रहा. उन्हें सन १९६३
की फिल्म आज और कल के लिए अधिक जाना जाता है.

आज आपको सन १९४८ की फिल्म अदालत से एक गीत सुनवा रहे हैं
रफ़ी की आवाज़ में. गीत लिखा है महिपाल ने और इसकी धुन बनाई है
दत्ता दावजेकर ने. इस फिल्म में बाबूराव पेंढारकर और शालिनी प्रमुख
कलाकार हैं.

गीत उस समय का है जब रफ़ी ज्यादा लोकप्रिय गायक नहीं थे. फिल्म
भी ज्यादा चली नहीं थी तो उसके गीत भी समय के साथ हाशिए पर
चले गए.



गीत के बोल:

किस्मत तो देखो हमसफ़र
किस्मत तो देखो हमसफ़र
चार कदम चले नहीं
चार कदम चले नहीं
इस तरह जुदा हुए
के आज तक मिले नहीं
आज तक मिले नहीं
किस्मत तो देखो

दिल ने तो की दुआ बहुत
लेकिन ना आ सकी बहार
फूल उम्मीदों के मेरे
खिलाये भी खिले नहीं
खिलाये भी खिले नहीं
किस्मत तो देखो

दिल ने तो चाहा था के अब
कह दें अपना माजरा
उल्फत ने सी दिए ऐसे लब
हिलाए भी हिले नहीं
हिलाए भी हिले नहीं
किस्मत तो देखो

रौशन थी जिनसे ये ज़मीन
रौशन थी जिनसे ये ज़मीन
यूँ गुल हुए मेरे चिराग
जलाये भी जले नहीं
जलाये भी जले नहीं

किस्मत तो देखो हमसफ़र
चार कदम चले नहीं
इस तरह जुदा हुए
के आज तक मिले नहीं
किस्मत तो देखो
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Kismat to dekho-Adalat 1948

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Dec 10, 2015

श्यामल श्यामल बरन-नवरंग १९५९

तबियत से बनाया गया गीत. बोल और धुन लाजवाब
हैं इसके. फिल्म नवरंग के सारे गाने हिट हुए थे. ये
गीत प्रशंसा में गाया जा रहा है. अलंकारों का सुन्दर
प्रयोग हुआ है इस गीत में. फिल्म में विरोधाभास है
वो ये कि नायक की जो प्रेरणा है वो पूरी हैरान करने
वाली है. नायक की कल्पनाशीलता की चरम सीमा का
प्रदर्शन है फिल्म में.  प्रेरणा कहा से और कैसे ली जा
सकती है ये उसका अनूठा उदाहरण है. अगर आपने
फिल्म देखी है तो आप हास्य से भरपूर उन स्तिथियों
की कल्पना करके ही आनंदित हो उठे होंगे.

महेंद्र कपूर का गाया गीत है जिसे भरत व्यास ने लिखा
है और सी रामचंद्र का संगीत है इसमें.



गीत के बोल:

श्यामल श्यामल बरन
कोमल कोमल चरण
तेरे मुखड़े पे चंदा गगन का जड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा

तेरे बालों में सिमटी सावन की घटा
तेरे गालों पे छिटकी पूनम की छटा
तीखे तीखे नयन
मीठे मीठे बयन
तेरे अंगों पे चम्पा का रंग चढ़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा

ये उमर, ये कमर, सौ सौ बल खा रही
तेरी तिरछी नज़र तीर बरसा रही
नाज़ुक नाज़ुक बदन
धीमे धीमे चलन
तेरी बाँकी लटक में है जादू बड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा

किस पारस से सोना ये टकरा गया
तुझे रचकर चितेरा भी चकरा गया
न इधर जा सका
न उधर जा सका
रह गया देखता वो खड़ा ही खड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा

श्यामल श्यामल बरन
कोमल कोमल चरण
तेरे मुखड़े पे चंदा गगन का जड़ा
बड़े मन से विधाता ने तुझको गढ़ा
.......................................................................
Shyamal shyamal baran-Navrang 1959

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Sep 11, 2011

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का-ज़बक १९६१

फिल्म ज़बक और फिल्म काली टोपी ला रुमाल का संगीत एक जैसा सुनाई
पढता है, क्यूँ ना हो, दोनों फिल्मों में चित्रगुप्त का संगीत जो है। सन ६१ से
रंगीन फिल्मों का दौर शुरू हुआ, ऐसा कहा जाता । कुछ फ़िल्में आधी रंगीन
बनीं तो कुछ पूरी रंगीन। ज़बक का किस्सा भी कुछ ऐसा ही है। फिल्म के
निर्देशक हैं होमी वाडिया। वाडिया पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए
जाने जाते हैं। गीत प्रेम धवन ने लिखा है और गा रही हैं लता मंगेशकर।





गीत के बोल:


जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
दिल जो मिले, गुल से खिले, जान गए हमराज़ नए
तुझसे सनम, तेरी कसम, सीख किए अंदाज़ नए
गई दिलको उड़ा, तेरी शोख़ अदा, मेरा बस न चला

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार का
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का

दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
दिल थे जवां, रात हसीं ऐसे में तुमसे आँख लड़ी
कैसे बुझे दिलके लगी अब तो ये मुश्किल आन पड़ी
ऐसा दर्द मिला, नहीं जिसकी दवा, तेरे प्यार के सिवा

जाने कैसा छाने लगा नशा ये प्यार ने
थोड़ा थोड़ा आने लगा मज़ा बहार का
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Jaane kaisa chhane laga-Zabak 1961

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Jun 2, 2011

वो जब याद आए, बहुत याद आए-पारसमणि १९६३

मधुर गीतों की श्रृंखला में अगला युगल गीत पेश है फिल्म
पारसमणि से। १९६३ की फिल्म पारसमणि संगीतकार
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की पदार्पण फिल्म है। इस फिल्म के
संगीत ने ज़बरदस्त खलबली मचाई और इससे ऐलान
हुआ कि आगे आने वाले कई सालों तक ये संगीतकार जोड़ी
हिंदी फिल्म संगीत क्षेत्र में अपने झंडे गाड़ने वाली है।
असद भोपाली के बोलों पर आवाज़ दी है लता और रफ़ी ने।
सन १९६३ में लता और रफ़ी के कई अविस्मरणीय युगल गीत
बने जो आगे प्रस्तुत करेंगे हम इस ब्लॉग पर। फिलहाल इस
गीत का आनंद उठाते हैं। उस दौर में बहुत कम ही रंगीन
फ़िल्में बनी थीं, या बनती तो आधी श्वेत-श्याम, आधी रंगीन
होतीं। प्रस्तुत गीत रंगीन है। परदे पर महिपाल और
गीतांजलि नामक कलाकार हैं जो ज़्यादातर पौराणिक और
धार्मिक फिल्मों में ही देखे गये।




गीत के बोल:


वो जब याद आए, बहुत याद आए
वो जब याद आए, बहुत याद आए
गम-ए-जिन्दगी के अँधेरे में हमने,
चिराग-ए-मुहब्बत के जलाए बुझाए

वो जब याद आए, बहुत याद आए

आहटे जाग उठीं, रास्ते हँस दिए,
थाम कर दिल उठे, हम किसी के लिए
कई बार ऐसा भी धोखा हुआ है,
चले आ रहे हैं वो नजरें झुकाए

वो जब याद आए, बहुत याद आए

वो जब याद आए, बहुत याद आए
गम-ए-जिन्दगी के अँधेरे में हमने,
चिराग-ए-मुहब्बत के जलाए बुझाए

वो जब याद आए, बहुत याद आए

दिल सुलगने लगा, अश्क बहने लगे
जाने क्या क्या हमें लोग कहने लगे
मगर रोते रोते हँसी आ गई है
ख्यालों में आ के वो जब मुस्कुराये

वो जुदा क्या हुए, जिन्दगी खो गई
शम्मा जलती रही रोशनी खो गई
बहुत कोशिशें कीं मगर दिल ना बहला
कई साज छेड़े, कई गीत गाए

वो जब याद आए, बहुत याद आए
वो जब याद आए, बहुत याद आए
....................................
Wo jab aad aaye-Parasmani 1963

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Nov 2, 2009

अपने पिया की मैं तो-कण कण में भगवान १९६३

पंडित शिवराम कृष्ण नाम है एक संगीतकार का, जिन्होंने
श्वेत श्याम के ज़माने में काफ़ी फिल्मों में संगीत दिया। उनका बनाया
एक गीत शादी ब्याह के अवसर पर अवसर गाया जाता था। महिला
संगीत के कार्यक्रमों में ये सुनाई दे जाता था। इसके बोल लिखे हैं
भरत व्यास ने और इसे फिल्माया गया है अनिता गुहा पर।

'कण कण में भगवान' एक पौराणिक एवम धार्मिक फ़िल्म है।
धार्मिक फ़िल्म होने की वजह से ये एक बार परदे पर दिखने
के बाद सिनेमा-गृहों में नहीं दिखाई थी। बहुत साल के बाद इसके
गीत देखने का मौका मिला है। विडियो अपलोड करने वाले को धन्यवाद्।
गीत सुमन कल्यानपुर ने गाया है। अनिता गुहा के साथ में धार्मिक फ़िल्म
विशेषज्ञ हीरो-महिपाल हैं।



गाने के बोल:

पिया चरण की भभूत रमाई, प्रीत की पहनी माला
अब काहे का डरना जग से, मन में हुआ उजाला

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

सांवरिया के रंग में चुनरिया रंगाउंगी
सांवरिया के रंग में चुनरिया रंगाउंगी
चंद्रमा का झुमका पहन पिया आउंगी
झन झन बाजे मोरी, हो, ओ
झन झन बाजे मोरी झांझरिया
मैं तो बनी रे जोगनिया

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

तेरे लिए मैंने तो शर्म-लाज छोड़ी रे
तेरे लिए मैंने तो शर्म-लाज छोड़ी रे
तेरे संग जोड़ी तो जगत संग तोडी रे
तू है मोहन मेरा, हो, ओ, ओ ,ओ
तू है मोहन मैं तेरी मोहनिया,
मैं तो बनी रे जोगनिया
अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
हँसी उड़ाये चाहे सारी दुनिया
मैं तो बनी रे जोगनिया

अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया

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