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Apr 23, 2020

ये उम्र ये मिज़ाज-ज़ुल्म का बदला १९८५

संगीतकार सोनिक ओमी के संगीत में सारे एलेमेंट्स मिल
जाते हैं. भक्ति गीत उन्होंने काफी सारे बनाये हैं साथ ही
फ़िल्मी कव्वालियां भी खूब बनाई. संगीत समीक्षकों के
पास समय नहीं रहा कि उनके संगीत पर ज्यादा कुछ
लिखें.

८० के दशक में लोकप्रियता के मामले में सोनिक ओमी
थोडा पिछड़ गये. एक वजह ये भी है फ़िल्मी/अफिल्मी
दोनों प्रकार की जनता का ध्यान उधर नहीं जा पाने की.

प्रस्तुत कव्वाली में महेंद्र कपूर के साथ हैं ख्यात कव्वाली
गायिका परवीन सबा. कुलवंत जानी की रचना है और
संगीतकार का नाम आप ऊपर पढ़ चुके हैं.

फिल्म में राकेश रोशन, अनिता राज, डैनी, शक्ति कपूर,
जगदीप और जगदीश राज जैसे कलाकार हैं.

गीत कुछ रेयर किस्म का है क्यूंकि इसमें शक्ति कपूर
को ढंग से गाने का मौका मिला है परदे पर. उनके
हिस्से ज्यादा कॉमेडी वाले गाने ही आये हैं वो भी कुछ
एक पंक्तियाँ. इसी साल की एक फिल्म मेरा जवाब
में एक युगल गीत उन्होंने गाया है. फिल्म के नायक
जैकी श्रॉफ़ हैं.



गीत के बोल:

ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करे
ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करे
ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करे
किसका है क़त्ल आज खुदा खैर करे
किसका है क़त्ल आज खुदा खैर करे
ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करे

तूने इस दिल पे ऐसा वार किया
तेरी चाहत ने बेक़रार किया
ढूंढते ढूंढते ठिकाने पर
आ गये हम सही निशाने पर
वक़्त का आज तू सिकंदर है
एक तूफ़ान मेरे अंदर हैं
मौज को मौज से टकराना है
आग को आग से बुझाना है

हां आ आ आ आ आ आ आ
तेरे लिए हमने मेरे बांके सितमगर
छोड़ी है शर्म लाज खुदा खैर करे
छोड़ी हैं शर्म लाज खुदा खैर करे
छोड़ी है शर्म लाज खुदा खैर करे

किसका है क़त्ल आज खुदा खैर करे
किसका है क़त्ल आज खुदा खैर करे
खैर करे खैर करे खैर करे खैर करे
ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करें

आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
अभी तक हसीनों जवां हैं वो गलियाँ
जहाँ हमने अपनी जवानी लुटा दी
मोहब्बत में लुट जाते हैं दीं-ए-इमां
बड़ा तीर मारा जवानी लुटा दी
ये नज़र ये मिज़ाज खुदा खैर करे
ये नज़र ये मिज़ाज खुदा खैर करे
हम पे ही चोट आज खुदा खैर करे

हम पे ही चोट आजखुदा खैर करे

ये नहीं चोट ये हकीकत हैं
हमको सच बोलने की आदत हैं
नाम बदला है देश बदला है
तेरी खातिर ये भेष बदला है
आ गये आज तेरी महफ़िल  में
ले के जज़्बात ये अपने दिल में
सर तेरा आज तो झुकाना हैं
ये तमाशा तुझे दिखाना हैं

कौन किसको झुकाये देखेंगे
तेरी जुल्फों के साये देखेंगे
ये बदन कांच का बिल्लौरी हैं
एक रेशम की कच्ची डोरी हैं
इसको एक बार जब भी पकड़ेंगे
अपनी बाहों में कस के जकडेंगे
ये चलन तेरा छूट जायेगा
हर भरम तेरा तूट जाएगा
हो हो हो हो हो हो
हमको झुकाने वाले तुझे ये खबर भी है
काँटों का है ये ताज खुदा खैर करे
काँटों का है ये ताज खुदा खैर करे
काँटों का है ये ताज खुदा खैर करे

किसका हैं क़त्ल आज खुदा खैर करे
किसका हैं क़त्ल आज खुदा खैर करे
ये उम्र ये मिज़ाज खुदा खैर करे

कैसे मैदान में तू आयेगी
बोल किस तरह आजमायेगी
फ़ैज़ इजहार में क्या रखा हैं
छोड़ तकरार में क्या रखा हैं
फिर बता आगे क्या इरादा हैं
पूरा होगा ये अपना वादा हैं

प्यार की दिल में प्यास रखता है
यूं उससे मिलने की आस रखता है
तूने इस दिल की बात कह दी हैं
अपने होठों के साथ कह दी है
रात को आँख खुली फिजाओं में
चाँद की ठंडी ठंडी छाँव में
उन फिजाओ में बोल क्या होगा
उन हवाओं में बोल क्या होगा
अपनी बाहों का सहारा दूंगी
तुझको जन्नत का नज़ारा दूंगी

आ आ आ आ आ आ आ
हम हैं वो मसीहा तेरे हर एक रोग का
कर देंगे अब इलाज खुदा खैर करे
कर देंगे अब इलाज खुदा खैर करे
कर देंगे अब इलाज खुदा खैर करे
………………………………………………..
Ye umar ye mizaaj-Zulm ka badla 1985

Artists: Anita Raj, Shakti Kapoor

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Mar 25, 2020

मांगी थी एक दुआ-शक्ति १९८२

हिंदी सिनेमा वो सब दिखता है जिसकी हम कल्पना
भी नहीं कर सकते. असंभव को संभव कर दिखाना
इसके लिए बाएं हाथ का खेल है. दक्षिण भारत का
सिनेमा तो आज कल हैरत अंगेज स्टंट दिखाता है
जो भौतिकी की किताब को ठेंगा दिखाते नज़र आते
हैं. सुपरमैन के ये दोयम संस्करण २-३ कथानकों
के बीच कूद-फांद करते रहते हैं. बा हीरोईन बदलती
रहती है, कम कोल्ड क्रीम वाली या ज्यादा कोल्ड क्रीम
वाली.

खैर हम ऑफ टॉपिक हो गये थोड़े से. सन १९८२ में
अमिताभ की एक फिल्म आई थी बेमिसाल जिसमें
राखी ने नायिका का रोल किया था. उसी वर्ष शक्ति
फिल्म में उन्हें अमिताभ की माँ का रोल करने का
मौका मिल गया. भेड़ चाल वाली इंडस्ट्री में किसी को
नहीं सूझा कि उनको किसी फिल्म में दादी या नानी
का रोल भी ऑफर कर दे.

सुनते हैं फिल्म शक्ति का गीत महेंद्र कपूर की आवाज़
में जिसे दिलीप कुमार और राखी पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई
उम्मीद की कली खिल के फूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई

हम सोचते थे ये दिल मुफ्त में दिया
हम सोचते थे ये दिल मुफ्त में दिया

कितना हसीन मगर तोहफ़ा हमें मिला
कीमत हमारे प्यार की वसूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई

अब के बहार में दिल मेरा खिल गया
ओ ओ ओ ओ अब के बहार में दिल मेरा खिल गया
जिसकी थी आरज़ू वो मुझको मिल गया
जन्नत मेरे लिए अब फ़ज़ूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई
उम्मीद की कली खिल के फूल हो गई
मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई

धीमा संस्करण:

ए आसमान बता क्या तुझको है खबर
ए आसमान बता क्या तुझको है खबर
ये मेरे चाँद को किसकी लगी नज़र
मुझसे कहाँ न जाने कोई भूल हो गई
……………………………………………
Mangi thi ek dua-Shakti 1982

Artists: Dilip Kumar, Rakhi

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हुस्न की जुल्फें-गोल्डन आईज़ सीक्रेट एजेंट ०७७ १९६८

जैसा कि एक गीत में वर्णन है-तू हुस्न है मैं इश्क हूँ,
उसके अनुसार हुस्न का अभिप्राय यहाँ नायिका से ही
होना चाहिए. गीत में बतलाया गया है –हुस्न की जुल्फें
काली पड़ गईं. अब वो बिना डाई के और बिना खिजाब
के कैसे पड़ीं, गीत के माध्यम से समझते हैं.

शेवान रिज़वी का गीत है जिसे बी एन बाली ने संगीत
में ढाला है. महेंद्र कपूर संग इसे उषा बलसावर ने गाया
है.

शेवान रिज़वी की कल्पनाशीलता इस गीत में फूट फूट
के बाहर आई है. कवियों और शायरों की ह्यूमन एनाटॉमी
की जानकारी और पैरेलल ड्रा करने की कला कभी कभी
दांतों तले उँगलियाँ दबाने पे मजबूर कर देती हैं.

   


गीत के बोल:

हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
आहों ने तकदीर बना दी काले काले बालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की

इश्क ने तुमको आहें दी हैं आह में दिल का साज़ दिया है
इश्क ने तुमको आहें दी हैं आह में दिल का साज़ दिया है
इश्क ने तुमको आहें दी हैं आह में दिल का साज़ दिया है
हो हमको बनाने वाले ने देखो
नाज़ दिया अंदाज़ दिया है
हमको बनाने वाले ने देखो
नाज़ दिया अंदाज़ दिया है
हमको बनाने वाले ने देखो
नाज़ दिया अंदाज़ दिया है
हो अंदाज़ दिया है अंदाज़ दिया है
ठोकर में हम रखते हैं
ठोकर में हम रखते हैं तकदीर ज़माने वालों की
ठोकर में हम रखते हैं तकदीर ज़माने वालों की
ठोकर में हम रखते हैं तकदीर ज़माने वालों की
ठोकर में हम रखते हैं तकदीर ज़माने वालों की
आहों ने तकदीर बना दी काले काले बालों की
आहों ने तकदीर बना दी काले काले बालों की

तेरे सा अंदाज़ न देखा हुस्न न देखा नाज़ न देखा
तेरे सा अंदाज़ न देखा हुस्न न देखा नाज़ न देखा
तेरे सा अंदाज़ न देखा हुस्न न देखा नाज़ न देखा
कलियाँ खिलती लाखों देखी लेकिन ये आगाज़ ना देखा
कलियाँ खिलती लाखों देखी लेकिन ये आगाज़ ना देखा
हुस्न को तेरे दुआ लगी है
हुस्न को तेरे दुआ लगी है शायद हम दिलवालों की
हुस्न को तेरे दुआ लगी है शायद हम दिलवालों की
अजी हुस्न को तेरे दुआ लगी है शायद हम दिलवालों की
हुस्न को तेरे दुआ लगी है शायद हम दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की

होश से हम मदहोश हुए हैं अरे मरने पे तैयार हुए हैं
होश से हम मदहोश हुए हैं अरे मरने पे तैयार हुए हैं
होश से हम मदहोश हुए हैं अरे मरने पे तैयार हुए हैं
आँखों में कुर्बान गए हैं क़त्ल बिना तलवार हुए हैं
आँखों में कुर्बान गए हैं क़त्ल बिना तलवार हुए हैं
आँखों में कुर्बान गए हैं क़त्ल बिना तलवार हुए हैं
हो कुर्बान गये हैं कुर्बान गये हैं
खून बन के किस्मत दी है
अरे खून बन के किस्मत दी है लाल गुलाबी गालों की
खून बन के किस्मत दी है लाल गुलाबी गालों की
खून बन के किस्मत दी है लाल गुलाबी गालों की
खून बन के किस्मत दी है लाल गुलाबी गालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
आहों ने तकदीर बना दी काले काले बालों की
हुस्न की जुल्फें काली पड़ गईं आहों से दिलवालों की
…………………………………………………..
Husn ki zulfen-Golden eyes secret agent 077 1968

Artists: Shailesh Kumar, Mumtaz

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Dec 23, 2019

या हुस्न रहे या-बेरहम १९८०

फ़िल्मी कव्वाली सुने बहुत दिन हो गए. अधिकांश
में हुस्न और इश्क मसला होता है. एक और सुन
लेते हैं आज.

परदे पर इसे कादर खान और मौसमी चटर्जी गा रहे
हैं. शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय और कष्टों मुखर्जी भी
नज़र आयेंगे.

बोल वर्मा मलिक के हैं और संगीत लक्ष्मी-प्यारे का.
आशा भोंसले और महेंद्र कपूर ने इसे गाया है.

टी वी चैनलों पर चर्चा के साथ गाजे बाजे वाले भी
होना चाहिए तो मनोरंजन भरपूर होगा. वाद कब पाद
में तब्दील हो जाता है पता ही नहीं चलता.





गीत के बोल:

हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ
हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ ओ
आ आ आ आ आ हो हो हो हो हो

हुस्न एक उलटी राह है
हुस्न एक झूठी चाह है
हुस्न तो एक गुनाह है
हुस्न करता कबाब है

इस हुस्न के नखरे नाज़-ओ-नज़ाकत
हुस्न के नखरे नाज़-ओ-नज़ाकत
इस हुस्न के नखरे ओ नखरे
हुस्न के नख़रे नाजो नजाकत
रोज रोज अब कौन सहे
हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा खत्म करें
या हुस्न रहे या इश्क़ रहे
हम आज ये किस्सा ख़तम करें

खुद धोखा दग़ा फ़रेब करें
खुद धोखा दग़ा फ़रेब करें
खुद धोखा दग़ा फ़रेब करें
इलज़ाम ये हुस्न पे देता रहे
हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा खत्म करें
या हुस्न रहे या इश्क़ रहे
हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा ख़तम करें

एक दिन देखा
हो एक दिन देखा दर्द का मारा
इक आशिक मस्ताना
जंगल जंगल मारा मारा
फिरता था दीवाना
फिरता था दीवाना

मुझको देख के कहने लगा
हो मुझको देख के कहने लगा
अरे सुन ले मेरा अफ़साना
हर आशिक़ के घर घर में
पैगाम मेरा पहुंचाना
के हुस्न को इतना लूटो मारो
के हुस्न को इतना लूटो मारो
सारी उम्र ही रोता रहे

हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा खत्म करें

हमारी भी सुनो
हमारी भी सुनो
लैला की जब कब्र पे चल कर
इक हसीना आई
रो के लिपट के कहने लगी
आहे रो के लिपट के कहने लगी
आहे रो के लिपट के कहने लगी
ए लैला तेरी दुहाई
कैसे बदला लूं इनसे
आहे कैसे बदला लूं इनसे
हर आशिक़ है हरजाई
तो कब्र से लैला की रूह ने
यही आवाज़ लगाईं
निकल पड़ो अब तान के सीना
दोनों में से एक रहे

हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा खत्म करें
या हुस्न रहे या इश्क़ रहे
हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा ख़तम करें

इनका हर दौर देखा इनका हर तौर देखा
आहे इनका हर दौर देखा इनका हर तौर देखा
हो सलमा या सुलेखा है सब धोखा ही धोखा
इनका हर दौर देखा इनका हर तौर देखा
यहाँ से और वहां से पूछ लो तुम जहां से
वफ़ा के देते झांसे ख़ासे पलट देते है पासे
तरन्नुम इनके झूठे तबस्सुम इनके झूठे
तकल्लुम इनके झूठे मरासिम इनके झूठे
आहे छलावा है छलवा भुलावा है भुलवा
इनकी उल्फ़त का दावा दिखावा है दिखावा

तुम बन ठन के न निकलो
तो ये दिल न फिसले
एक बार मरम्मत होगी
तो फिर दिल न मचले

इश्क़ हुस्न का दुश्मन है
इश्क़ हुस्न का दुश्मन है
कोई इसके भरोसे न रहे

हम आज ये किस्सा खत्म करें
अरे क्या बात है
हम आज ये किस्सा खत्म करें
या हुस्न रहे या इश्क़ रहे
हम आज ये किस्सा खत्म करें
हम आज ये किस्सा खत्म करें
…………………………………………….
Ya husn rahe ya-Beraham 1980

Artists: Kadar Khan, Mausmi Chatterji

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Nov 3, 2019

पतला पतला रेशमी कुरता-बेईमान १९७२

मनोज कुमार की फिल्मों मों आपको लड़कियों के प्रकार
और उनके ऊपर इतर जानकारी वाले गीत ज़रूर मिलेंगे.
एक गीत है फिल्म पहचान में जिसे वर्मा मलिक ने लिखा
है और एक ये गीत है फिल्म बेईमान में संयोग से इसे
भी वर्मा मलिक ने लिखा है. दोनों गीतों के संगीतकार भी
वही हैं-शंकर जयकिशन.

बेईमान के दो गीतों में कपड़ों की काफी सारी वेराइटी की
जानकारी हो जाती है. एक आप सुन चुके हैं दूसरा पेश
है जो रेशम को समर्पित है. इसमें पजामा, मामा और
पनामा सिगरेट का हंगामा है.

इसे गाया है आशा भोंसले संग महेंद्र कपूर ने. इस गीत
में हास्य की थोड़ी मात्रा है बोरियत के साथ. हो सकता है
ये गीत उस समय की जनता को लवली, स्वीट और जो
भी आप सोच सकते हैं लगता रहा होगा.



गीत के बोल:

पतला पतला रेशमी कुरता चूड़ीदार पजामा
पतला पतला रेशमी कुरता चूड़ीदार पजामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा
लंबे कलमी बाल आवारा पैंट का बना पजामा
लंबे कलमी बाल आवारा पैंट का बना पजामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

पीली बिंदी पीले बुँदे नाक में पीली नथनी
पीली बिंदी पीले बुँदे नाक में पीली नथनी
टोकरी जैसा जूडा और जूडे से चोटी निकली
जूडे से चोटी निकली
टोकरी भी अब फैशन बन गयी मर गए गंगा रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

खुली सड़क पर सीटी मारे जाते देख हसीना
खुली सड़क पर सीटी मारे जाते देख हसीना
बेशर्मों का लीडर बन के चले तान के सीना
चले तान के सीना
ये भी हमारा फैन बना है देखो हीर का मामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामामामा लुट गए मामा

आओ कमिटी वालों लगाओ इनपे टैक्स और चुंगी
आओ कमिटी वालों लगाओ इनपे टैक्स और चुंगी
साड़ी पेटीकोट के ऊपर कब्ज़ा कर गयी लुंगी
अरे कब्ज़ा कर गयी लुंगी
तौबा तौबा आज की छोरी बन गयी एक ड्रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

बापू करे कमाई बेटा करता सत्यानास
बापू करे कमाई बेटा करता सत्यानास
चार साल में पास है करता बच्चा एक क्लास
देखो करता एक क्लास
कॉलेज की कॉपी में देखो लिखे मोहब्बतनामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

कमर है हलवे कद्दू जैसी आओ दुवायें मांगें
कमर है हलवे कद्दू जैसी आओ दुवायें मांगें
ऐसी लगती जैसे लगीं हो डबल रोटी को टांगें
अरे डबल रोटी को टांगें
ढूंढ के लाओ इसके लिए जो पहलवान हो गामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचे हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

सन्यासी ने फेर उस्तरा पहन लिया है कच्छा
सन्यासी ने फेर उस्तरा पहन लिया है कच्छा
लगता कुर्सी पे बैठा है ये गेंडे का बच्चा
ये गेंडे का बच्चा
ये भी प्यार के पेंच लड़ाये वाह रे भक्त सुदामा
पान तम्बाखू वाला खा कर सिगरेट पिए पनामा
लुट गए मामा लुट गए मामा

मैं हूँ तेरा आशिक ये सारी दुनिया पहचाने
क्यूँ ठीक है जवाब तो दे
अरे मैं हूँ तेरा आशिक ये सारी दुनिया पहचाने
पर अंदर वाली बात जो है वो मैं जानूं तू जाने
सच हैं ना बोलती क्यूँ नहीं वो मैं जानूं तू जाने
अरे दुनिया वाले क्या जाने ये तेरा मेरा ड्रामा
एक ज़ुल्फ़ के छः टुकड़े ये देख के मचा हंगामा
लुट गए मामा लुट गए मामा
ओ लुट गए मामा लुट गए मामा
लुट गए मामा हाँ लुट गए मामा
हो लुट गए मामा लुट गए मामा
……………………………………………..
Patla patla rehmi kurta-Beimaan 1972

Artists: Manoj Kumar, Rakhi

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Sep 18, 2019

आज मधुवातास डोले-स्त्री १९६१

साहित्यिक गीतों की शृंखला में आज प्रस्तुत है गीत फिल्म
स्त्री से जो सन १९६१ की फिल्म है. ये एक युगल गीत है
लता मंगेशकर और महेंद्र कपूर का गाया हुआ. भरत व्यास
इस गीत के रचयिता हैं और चितलकर रामचंद्र संगीतकार.
इस गीत को काफी आदर और सम्मान दिया जाता है, वजह
इसके बोल और संगीत दोनों ही हैं.


मधुवातास का संधि विच्छेद है-मधु + वातास. मधु का अर्थ
आप जानते हैं. वातास का अर्थ है वायु, पवन. आशा है आप
शब्द का अर्थ समझ गए होंगे. ये शब्द मुझे किसी और गीत
में देखने को नहीं मिला. भरत व्यास द्वारा प्रयुक्त कई शब्द
दूसरे गीतकारों ने प्रयोग नहीं किये. मधुरिमा का अर्थ है मधुर
होने की अवस्था या भाव. माधुर्य इसका एक और अर्थ है.
सौंदर्य के लिए भी कभी कभी इस शब्द का प्रयोग होता है.
सरल शब्दों में अगर कोई कहे- आप मीठी हैं, आप सुन्दर हैं.

भारत व्यास प्रगतिशील गीतकार थे और उन्होंने उर्दू शब्दों के
प्रयोग से परहेज़ नहीं किया. ‘इच्छा’ के लिए उन्होंने गीत की
एक पंक्ति में ‘अरमान’ शब्द प्रयोग किया है.



गीत के बोल:

आज मधुवातास डोले
मधुरिमा से प्राण भर लो
चाँद को चुपचाप निरखो
चाँदनी में स्नान कर लो
…………………………………………………..
Aaj madhuvatas dole-Stree 1961

Artists:

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Sep 16, 2019

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली-डोली १९६९

संगीतकार रवि के बहुत से गाने शादी-ब्याह के अवसर
पर बजाये जाते हैं: उदाहरण के लिए-

बाबुल की दुआएं लेती जा-नीलकमल
मेरा यार बना है दूल्हा-चौदहवीं का चाँद
आज मेरे यार की शादी है-आदमी सड़क का

आपको १९६९ की फिल्म डोली से एक गीत सुनवाते
हैं जिसे महेंद्र कपूर ने गाया है. ये गाना फिल्म का
टाईटल सॉंग भी है. राजेंद्र कृष्ण के बोल है और
इसे अभिनेत्री बबीता पर फिल्माया गया है. गीत
की एक पंक्ति सुहाग रात को भी समर्पित है और
बड़े सोबर तरीके से इस बात को कहा गया है.


   

गीत के बोल:

डोली चढ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
दिल ना माने मगर आज जाना भी है
अपने साजन से वादा निभाना भी है
सामने एक नई जिंदगी है मगर
सामने एक नई जिंदगी है मगर
पीछे गुज़रा हुआ इक ज़माना भी है

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
डोलियाँ खुशनसीबों की सजती रहें
मेंहदियाँ सबके हाथों में रचती रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
फूल चेहरों के भी मुस्कुराते रहें
चूडियाँ दुल्हनों की खनकती रहे

डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
ओ कैसी हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के

कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
कोई घूंघट हटा देगा जब रात को
भूल जायेगी मैके की हर बात को
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
अपने राजा की बाहों में सो जायेगी
ले के पलकों में खुशियों की बारात को
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
कैसे हसरत से बाबुल की देखे गली
डोली चढ़ के दुल्हन ससुराल चली डोली चढ़ के
…………………………………………….
Doli chadh ke dulhan sasural chali-Doli 1969

Artists:

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Sep 14, 2019

आपने अपना बनाया-दुल्हन एक रात की १९६७

हिंदी फिल्म की परिभाषा जाने किसने रची जिसके
अनुसार फिल्म में ६-७ गाने होना ज़रूरी हैं. कहानी
में थोड़ी थोड़ी देर में एक गाना.

सन १९६७ की फिल्म दुल्हन एक रात की में ढेर सारे
गाने हैं जिनमें से ३ हमने आपको सुनवा दिए हैं. ये
है इसी फिल्म से चौथा गाना जो युगल गीत है लता
और महेंद्र कपूर का गाया हुआ.

इसे भी राजा मेहँदी अली खान ने लिखा है और धुन
है एक बार फिर से मदन मोहन की.




गीत के बोल:

आपने अपना बनाया
मेहरबानी आपकी
मेहरबानी आपकी
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
हम तो इस काबिल न थे
है कदरदानी आप की
मेहरबानी आपकी
आपने अपना बनाया
………………………………………………………
Aapne apna banaya-Dulhan ek raat ki 1967

Artist:

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Sep 13, 2019

कमर पतली नज़र बिजली-कहीं दिन कहीं रात १९६८

जब हमने ब्लॉग लिखना शुरू किया था तब ऐसे ब्लॉग नेट
पर २-३ ही थे. धीरे धीरे संख्या बढ़ी और रंग बिरंगी साइटें
उगना शुरू हुयीं और उन लिरिक्स की अंग्रेजी वाली साइटों
की चकाचौंध में हमारा ब्लॉग कहीं दब सा गया.

सारी मक्खियाँ एक ही जगह जा के चिपकें तो आश्चर्य होता
है. जब इन्डियन क्रिकेट टीम में २-३ विकेट जल्दी जल्दी
गिर जायें तो बाकियों को भी दस्तें लग जाती हैं तब उतना
अचरज नहीं होता.

सुनते हैं फिल्म कहीं दिन कही रात से एक गीत महेंद्र कपूर
की आवाज़ में. एस एच बिहारी के बोल हैं और ओ पी नैयर
का संगीत.



गीत के बोल:

कमर पतली नज़र बिजली
सुराहीदार गर्दन
क़यामत से में जन कम नहीं हो
कमर पतली नज़र बिजली
सुराहीदार गर्दन
……………………………………………..
Kamar patli-Kahin din kahin raat 1968

Artist:

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Sep 12, 2019

तुम्हारा चाहने वाला-कहीं दिन कहीं रात १९६८

फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है इसलिए हमने कभी क्वश्चन
नहीं किया कि कौन सी दुनिया की बात कर रहे हों. ज़मीन
वाली या आसमान वाली.

एस एच बिहारी की रचना है और ओ पी नैयर का संगीत.
गायक कलाकार हैं महेंद्र कपूर. नैयर के संगीत में सन १९६५
और उसके बाद महेंद्र कपूर के गीत काफी हैं.



गीत के बोल:

तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न कर
तुम्हारा चाहने वल

ये बात कैसे गवारा करेगा दिल मेरा
तुम्हारा ज़िक्र किसी और की ज़ुबान पे हो
तुम्हारे हुस्न की तारीफ आइना भी करे
तो मैं तुम्हारी क़सम है के तोड़ दूँ उसको
तुम्हारे प्यार तुम्हारी अदा का दीवाना
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला

वो दिन नआये के मुझसे कभी जुदा हो कर
किसी का प्यार दोबारा कहीं तलाश करो
झुका के सर को किसी अजनबी के शानो पर
तुम अपने गम का सहारा कहीं तलाश करो
करीब दिल के तुम्हारे किसी भी हालत में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला

तुम्हारे दिल को कहीं मुझसे कभी ठेस लगे
मुझे यकीं है ऐसा कभी नहीं होगा
मुझे वफाओ पे अपनी बड़ा भरोसा है
तुम्हारा प्यार ही दे जाये ना कहीं धोखा
दुआ ये है के तुम्हारा खुदा की दुनिया में
मेरे सिवा भी कोई और हो खुदा न करे
तुम्हारा चाहने वाला
………………………………………..
Tumhara chahne wala-Kahin din kahin raat 1968

Artist: Biswajeet

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Sep 9, 2019

आज पिला दे साकी-डोली १९६९

फिल्मों के शराबी गीतों में भी अलग अलग फ्लेवर होता है.
कोई देसी ठर्रे वाली किक देता है तो कोई बीयर वाला हल्का
सुरूर. अब हर गाना तो वाईन और शेम्पेन वाला मज़ा नहीं
दे पायेगा. वैसे अधिकांश में आपको व्हिस्की या राम वाला
आनंद मिलेगा.

अब ब्रांड मत पूछने लग जाईयेगा मुझसे. और भी किस्में
पायी जाती है असव की मगर वो सब जानकारी अंग्रेजी वाले
महंगे ब्लॉग पर ढूँढें.

सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा गीत जिसे महेंद्र कपूर और
आशा भोंसले ने गाया है संगीतकार रवि की धुन पर.

प्रेम चोपड़ा पर फिल्माए गए कुछ रेयर गानों में से एक
है ये.




गीत के बोल:

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की
आज है रात मुरादों की कुछ रंगीन इरादों की
कर भी दे तस्वीर मुकम्मिल चंद अधूरे वादों की

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ
सर्द है मौसम जोश में आ लहरा कर आगोश में आ
छेड़ के नगमा बेशोशी का ये मत कहना होश में आ

आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से
आज पिला दे साकी अपनी आँखों के मयखाने से
होंठों के पैमाने से

गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
गेसू खुले खुले से हैं मगर रंगत उड़ी उड़ी सी है
ए मेरी हमराज़ बता ये शोख शरारत किसकी है
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
टकराई है आँखें तेरी रात किसी बेगाने से
या अपने परवाने से
……………………………………………
Aaj pila de saaki-Doli 1969

Artists: Prem Chopda, Nazima, Babita

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Aug 28, 2019

न मुँह छुपा के जियो-हमराज़ १९६७

प्रेरणादायी गीत जीवन में बहुत काम आते हैं. ये चाहे भजन हों, फ़िल्मी
गीत हों या गैर फ़िल्मी गीत, अपना प्रभाव छोड़ते ज़रूर हैं. ध्यान से सुनने
कीऔर समझने की आवश्यकता भर होती है.

सुनील दत्त वाली फिल्म हमराज़ से एक गाना सुनते हैं जिसके बोल साहिर
के हैं और संगीत रवि का.


गीत  का सन्देश अच्छा है विशेषकर उनके लिए जो महत्वाकांक्षी हैं और
जिन्हें अपने जीवन में बहुत ऊंचे पर जाने की तमन्ना है. पब्लिक फिगर
जो बनना चाहते हैं उन्हें तो सार्वजनिक होना ही पड़ता है.

इसका मतलब ये नहीं कि हर आदमी अपने पोस्टर ले के सड़क पर दौड़
लगाते फिरे. समाज में कई लोग ऐसे भी हैं जो चुप चाप अपना काम करते
हैं और ड्रामेबाज जनता के लिए सन्देश देते रहते हैं. ऐसे लोग ना हों तो
आम जनता के समझ ही नहीं पड़े कि सही क्या है और गलत क्या.

हर जगह और हर ट्रीवियल बात के लिए अपने ट्रंप कार्ड नहीं खोले जाते,
हैं ना लुटियन मीडिया के गुप्त और सुप्त पाठकों. फोटो देखने का शौक हो
तो महात्माओं की फोटो देखो असली फायदा तभी होगा. फ़ना का एक
अर्थ पूर्ण विनाश अथवा बर्बादी भी होता है.





गीत के बोल:

न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
ग़मों का दौर भी आये तो मुस्कुरा के जियो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

घटा में छुप के सितारे फ़ना नहीं होते
अँधेरी रात में दिये जला के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो

ये ज़िंदगी किसी मंज़िल पे रुक नहीं सकती
हर इक मुक़ाम पे क़दम बढ़ा के चलो
न मुँह छुपा के जियो और न सर झुका के जियो
……………………………………………………….
Na moonh chhipa ke jiiyo-Hamraaz 1967

Artist: Sunil Dutt

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Aug 21, 2019

लड़की साइकल वाली-पति पत्नी और वो १९८०

अभिनेत्री विद्या सिन्हा ने कई अविस्मरणीय भूमिकाएं निभाई हैं
फिल्मों में. फिल्म ‘तुम्हारे लिए’ में उनका अभिनय और उन पर
फिल्माए गए गीत विशेषकर-तुम्हें देखती हूँ एक्स्ट्रा डायमेंशन
वाले गीतों में एक है.

गीत आनंद बक्षी ने लिखा है और इसका संगीत रवींद्र जैन ने
तैयार किया है. महेंद्र कपूर और आशा भोंसले ने इसे गाया है.
इस गीत से जुड़े लोग-महेंद्र कपूर, आनंद बक्षी, रवींद्र जैन,
संजीव कुमार और विद्या सिन्हा अब हमारे बीच नहीं हैं. फिल्म
के निर्देशक बी. आर. चोपड़ा भी अब इस दुनिया में नहीं हैं.




गीत के बोल:

लड़की साइकल वाली
लड़की साइकल वाली दे गयी रस्ते में
होये दे गयी रस्ते में एक प्यार भरी गाली
होये लड़की साइकल वाली

गाली पे छोड़ दिया ओए गाली पे छोड़ दिया
ऐसे दीवाने का
तुम जैसे दीवाने का सर क्यूँ नहीं फोड दिया
हो ओ ओ आली पे छोड़ दिया

एक चाँद सा मुखडा है होये एक चाँद सा मुखडा है होये
जिसके दुपट्टे का ये जिसके दुपट्टे का एक रेशमी टुकड़ा है
टुकड़ा है जी एक चाँद सा मुखडा है
बदनाम तो करते हो
हो बदनाम तो करते हो नाम नहीं लेते
क्यूँ नाम नहीं लेते क्या मार से डरते हो
हो बदनाम तो करते हो

कोठे पर कां बोले बोले कोठे पर कां बोले
उस दिन को देखूं
मैं उस दिन को देखूं जिस दिन तू हाँ बोले
कोठे पर कां बोले
मुमकिन ये मेल नहीं
मुमकिन ये मेल नहीं बी. ए. पास हूँ मैं
हो ओ ओ बी. ए. पास हूँ मैं कोई दसवीं फेल नहीं
जा जा मुमकिन ये मेल नहीं

शाबा शाबा कुडिये शाबा शाबा
ओ मुंडये शाबा शाबा

क्या नाम तुम्हारा है हो ओ ओ क्या नाम तुम्हारा है
उम्र तो खासी है हो ओ ओ उम्र तो खासी है
अब तक तू कुंवारा है
हो क्या नाम तुम्हारा है
तू जल्दी जवान हाय नी
तू जल्दी जवान होती ओए देख जल्दी जवान होती
तू शायद तू ही होये
तू शायद तू ही मेरे बच्चों की माँ होती
ओ तू जल्दी जवान होती
.........................................................................
Ladki cycle wali-Pati Patni aur woh 1980

Artists: Sanjeev Kumar, Vidya Sinha, Asrani

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May 23, 2019

ये कली जब तलक-आये दिन बहार के १९६६

कैची सॉंग्स क्या होते हैं- ये वो गाने होते हैं जिनकी धुन दिमाग
में बस जाती है और आप जिन्हें अनायास गुनगुना उठते हैं.

कभी कभी कोई गाना दिमाग में स्वतः बजने लगता है आपने ऐसा
कई बार महसूस किया होगा. इसके अलावा इन्हें एक बार सुन लो तो
थोड़ी देर आपका मन इन्हें गुनगुनाने को करेगा.

आह सुनते हैं फिल्म आप आये बहार आई से एक ऐसा ही गाना जिसे
लता मंगेशकर और महेंद्र कपूर ने गाया है.




गीत के बोल:

ये कली जब तलक फूल बन के खिले
इंतज़ार इंतज़ार इंतज़ार करो इंतज़ार करो
ये कली जब तलक फूल बन के खिले
इंतज़ार इंतज़ार इंतज़ार करो इंतज़ार करो
इंतज़ार वो भला क्या करे तुम जिसे
बेक़रार बेक़रार बेक़रार करो इंतज़ार करो 
     
प्यार में प्यार की भी इजाज़त नहीं
प्यार में प्यार की भी इजाज़त नहीं
बेरुखी है अजी ये मोहब्बत नहीं
आ रहा है मजा तुम शिकायत यही
बार बार बार बार बार बार करो इंतज़ार करो
इंतज़ार वो भला क्या करे तुम जिसे
बेक़रार बेक़रार बेक़रार करो बेक़रार करो
     
हुस्न पे तो असर होने वाला नहीं
हुस्न पे तो असर होने वाला नहीं
इश्क तुको ना कर दे दीवाना कहीं
है ये दीवानगी भी कबूल तुम अगर
हमसे प्यार हमसे प्यार हमसे प्यार करो इंतज़ार करो
ये कली जब तलक फूल बन के खिले
इंतज़ार इंतज़ार इंतज़ार करो इंतज़ार करो
   
रोज हमने बयां ये फ़साना किया
रोज हमने बयां ये फ़साना किया
रोज तुमने नया एक बहाना किया
ये बहाना मगर आखिरी है सनम
ऐतबार ऐतबार ऐतबार करो इंतज़ार करो
इंतज़ार वो भला क्या करे तुम जिसे
बेक़रार बेक़रार बेक़रार करो बेक़रार करो
इंतज़ार इंतज़ार इंतज़ार करो इंतज़ार करो
हमें प्यार हमसे प्यार हमसे प्याज करो इंतज़ार करो.
.............................................................................
Ye kali jab talak phool-Aap aaye bahar aayi 1966

Artists: Dhharmendra, Asha Parekh

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Jan 4, 2019

ये आँखें तेरी हैं कातिल-गोल्डन आईज़ सीक्रेट एजेंट ०७७ १९६८

सुनहरी आँखें और गुप्त प्रतिनिधि फिल्म से अगला गीत
सुनते हैं. जो कि एक युगल गीत है आशा भोंसले और
महेंद्र कपूर का गाया हुआ.

हेलन और शैलेश कुमार पर ये गीत फिल्माया गया है.
जेम्स बाँड की फिल्मों में और देसी फिल्मों में अंतर सिर्फ
इतना है कि बाँड फिल्मों में नायिका अकेले नाचती है,
बल खाती है, समुद्र में डुबकी लगा के मिसाईल की तरह
आसमान को कूच कर जाती है मतलब वो जल थल और
पाताल कहीं भी जा सकती है, वहीँ हिंदी फिल्म में नायिका
केवल थल तक सीमित मिलेगी और उसके साथ नायक
का नाच भी अवश्य होगा. हम ७ ७ हैं वाला फंडा इधर
सभी जगह लागू होगा.

इसी चक्कर में ऐसी फ़िल्में पिट जाती हैं जो निर्माता और
निर्देशक की समझ में नहीं आता. एक और बात ये है बाँड
की फिल्मों का बाजार शहरी दर्शक ज्यादा है और विशेष रूप
से वो जो अंग्रेजी भाषा का जानकार है. ये बात कुछ हद तक
आज भी लागू है. अब तो सब तरफ इन्टरनेट की उपलब्धता
है और गांव का दर्शक भी जेम्स बाँड की फिल्मों को हिंदी
संवादों के साथ देख सकता है.



गीत के बोल:

ये आँखें तेरी हैं कातिल कहीं आ ना जाए तुझपे दिल
झूम झूम के कदम मिला के आओ डांस करें
ये आँखें तेरी हैं कातिल कहीं आ ना जाए तुझपे दिल
झूम झूम के कदम मिला के आओ डांस करें

ये तंग तेरा पजामा उफ़ चाल तेरी हंगामा
और तेरी तीर नज़र का दिल बोला सा रे गा मा
ये तंग तेरा पजामा उफ़ चाल तेरी हंगामा
और तेरी तीर नज़र का दिल बोला सा रे गा मा

बेचैन निगाहें तौबा बलखाती बाहें तौबा
ये इश्क बेचारा तौबा ये लंबी आहें तौबा
बेचैन निगाहें तौबा बलखाती बाहें तौबा
ये इश्क बेचारा तौबा ये लंबी आहें तौबा
ये आँखें तेरी हैं कातिल कहीं आ ना जाए तुझपे दिल
झूम झूम के कदम हिला के आओ डांस करें

तुम पानी की हो मछली या बादल की हो बिजली
अरे कुछ तो होगा हम में जो हो गई दुनिया पगली
तुम पानी की हो मछली या बादल की हो बिजली
अरे कुछ तो होगा हम में जो हो गई दुनिया पगली
ये आँखें तेरी हैं कातिल कहीं आ ना जाए तुझपे दिल
झूम झूम के कदम मिला के आओ डांस करें
………………………………………………………….
Ye aankhen teri hain katil- Golden eyes secret agent 077

Artists: Helen, Shailesh Kumar

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Dec 24, 2018

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार-कन्यादान १९६८

संडे मंडे हिट्स के अंतर्गत एक गीत सुनते हैं फिल्म कन्यादान
से. महेंद्र कपूर की आवाज़ वाला ये गीत नीरज ने लिखा है.

कभी कभी शंकर जयकिशन के ६० के दशक के उत्तरार्ध और
७० के दशक के पूर्वार्ध के कई गीतों को सुन कर ऐसा लगता
है कि शोरगुल बढ़ता गया उनके संगीत में. वो क्लेरिटी जिसके
लिए वो जाने जाते थे वो कुछ गीतों में नदारद लगी. या तो
पहले जैसी रिकॉर्डिंग वाली सुविधाओं का अभाव रहा या दूसरे
नई पीढ़ी के संगीतकारों के देखा देखी वे भी नॉइज़ लेवल
को बढ़ाने लग गए. इस चक्कर में मेलोडी कंटेंट दबना शुरू
हो गया.





गीत के बोल:

रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु रु
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ हो मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
हो वन डे न जाने अब क्या होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा

दिल की किताब होगी
होगी होगी होगी होगी
हो लफ़्ज़ा अफ़साना होगा
होगा होगा होगा होगा
छिप छिप कर मिलना होगा
होगा होगा होगा होगा
कॉलेज बहाना होगा
होगा होगा होगा होगा
कॉलेज बहाना होगा
होगा होगा होगा होगा होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ हो मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
हो वन डे न जाने अब क्या होगा

जन्मदिन व्ही व्ही ओ ओ ओ ओ ओ
जन्मदिन व्ही व्ही ओ ओ ओ ओ ओ

ए मेरी जाने वफ़ा
जाने वफा जाने वफ़ा
नज़रें चुरा के न जा
न जा न जा
हम हैं दीवाने तेरे
दामन बचा के न जा
न जा न जा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
सनन रिन व्ही व्ही
हो ओ ओ ओ ओ ओ
सनन रिन व्ही व्ही
हो ओ ओ ओ ओ ओ

ऐसे न देखो सनम
मौसम आवारा है
चाहे जब ये ले लो
दिल ये तुम्हारा है

संडे को प्यार हुआ हो ओ मंडे इक़रार हुआ हो ओ
हो संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
………………………………………….
Sunday ko pyar hua-kanyadan 1968

Artists:

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Dec 15, 2018

फूलों की महक लहरों की लचक-कन्यादान १९६८

नारी को समर्पित है ये गीत फिल्म कन्यादान का
जो फिल्म को सार्थकता प्रदान करता है. फिल्म का
कथानक थोड़ा कन्फ्यूज कराने वाला है. रहस्य पर
से पर्दा काफी देर बाद उठता है.

आदमी की गैर ज़िम्मेदाराना क्रियाकलापों के ऊपर
इसमें रौशनी डाली गसी है और समस्यापूर्ति भी है
नारी के लिए गीत की अंतिम पंक्तियों में. आखिर कब
तक सहे और चुप रहे वो. उसे जीवन के अंधियारों
से बाहर निकलना ही होगा.

पुरुष प्रधान समाज नारी की प्रगतिशीलता को स्वीकार
नहीं कर पाता. पीढ़ी दर पीढ़ी जो सोच चली आई है
वो उसे नारी को अपने से आगे बढ़ते नहीं देख पाती.

कविवर नीरज का लिखा गीत है जिसे महेंद्र कपूर
ने गाया है शंकर जयकिशन की धुन पर.



गीत के बोल:

फूलों की महक लहरों की लचक
बिजली की चुरा कर अंगडाई
जो शकल बनाई कुदरत ने
औरत वो यहाँ बन कर आई
बन कर आई
बेटी वो बनी पत्नी वो बनी
माता वो बनी साथी वो बनी
परमेश्वर
परमेश्वर मान पति को और
मंदिर में दिया बाती वो बनी
यूं इंतज़ार स्वामी का किया
खिड़की पे शमा सी जलती रही
वो बाहर रास रचता रहा
ये घर में हाय सिसकती रही
सिसकती रही

हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
और अब होगा नहीं इंतज़ार बोलो ना
हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
पहलू में आ जा साँसों में घुल जा
बाहों में सो जा जाम में ढल जा
ओ पहलू में आ जा साँसों में घुल जा
बाहों में सो जा जाम में ढल जा
रात आयेगी ना ये बार बार बोलो ना
हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
और अब होगा नहीं इंतज़ार बोलो ना

और फिर आ ही गया दिन भी वो मनहूस कि जब
मर्द की प्यास ने ये रंग नया दिखलाया
आशियां अपना जो था हाय पराया वो हुआ
भंवरा और एक और नई तितली लिये घर आया

मौत के सिवा गरीब के ज़ख्म का नहीं कोई इलाज
वाह री ओ दुनिया बेशरम वाह रे ओ बेहया समाज
कितनी कलियाँ तेरी राह में
खिल के भी न मुस्कुरा सकीं
कोई जा की कोठे पे चढ़ी
कोई हाय डूब कर मरी

हाय औरत है चीज़ क्या तू भी
खा के ठोकर भी प्यार करती है
जिसके हाथों तू लूटी जाती है
उसपे ही जान निसार करती है
तू नहीं जानती है इतना भी
खुदकुशी खुद नरक की राह है एक
ज़ुल्म करना ही बस गुनाह नहीं
ज़ुल्म सहना भी तो गुनाह है एक
भूल कर अपना फ़र्ज़ जब मांझी
खुद ही कश्ती डुबा दे पानी में
तब किसी और नाव पर जाना
है नहीं पाप ज़िंदगानी में
उठ कोई और हमसफ़र चुन ले
जोड़ रिश्ता नई कहानी से
है अँधेरे में जो तेरी बहनें
मौत को उनकी ज़िंदगानी दे
………………………………………………..
Phoolon ki mahak-Kanyadan 1968

Artist:

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Sep 23, 2018

आधा है चंद्रमा रात आधी-नवरंग १९५९

सन १९५९ की फिल्म नवरंग का कथानक अनूठा है.
इससे एक सबक तो लिया जा सकता है वो ये है-प्रेरणा
कभी भी किसी भी चीज़ से ली जा सकती है.

असंभव सी और इमप्रेक्टिकल से लगने वाली कल्पना
भी कभी कभी आश्चर्यजनक परिणाम देती है. जैसे आप
तेल और पानी को एक बर्तन में डालें तो वो एकसार
नहीं होंगे, मगर उन दोनों को फेंटा जाए तो उससे
कोलोडल सस्पेंशन अवश्य तैयार हो जाता है जो कि
सारी क्रीम और मलहम का आधार है. वास्तव में तो
वो मिलते नहीं मगर अंश इतने छोटे हो जाते हैं कि
चोली-दामन का साथ दिखाई देने लगता है.

भरत व्यास की रचना है और सी रामचन्द्र का संगीत.
आशा भोंसले संग महेंद्र कपूर ने इसे गाया है.



गीत के बोल:

आधा है चंद्रमा रात आधी
आधा है चंद्रमा रात आधी
रह न जाए तेरी मेरी बात आधी
मुलाक़ात आधी
आधा है चंद्रमा

आस कब तक रहेगी अधूरी
प्यास होगी नहीं क्या ये पूरी
प्यासा प्यासा गगन प्यासा प्यासा चमन
प्यासे तारों की भी है बारात आधी
आधा है चंद्रमा

सुर आधा है श्याम ने बाँधा
रहा राधा का प्यार भी आधा
नैन आधे खिले होंठ आधे हिले
रही पल में मिलन की वो बात आधी
आधा है चंद्रमा

पिया आधी है प्यार की भाषा
आधी रहने दो मन की अभिलाषा
आधे छलके नयन आधे ढलके नयन
आधी पलकों की भी है बरसात आधी
आधा है चंद्रमा
…………………………………………………
Aadha hai chandrama-Navrang 1959

Artists: Mahipal, Sandhya

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Aug 21, 2018

प्यार ज़िन्दगी है-मुक़द्दर का सिकंदर १९७८

सिनेमा जनता का आइना है तो वो समाज के किस वर्ग
का प्रतिनिधित्व करता है इसे समझने के लिए आपको उस
समय के समाज और रहन सहन के स्तर को फिल्म से
कम्पेयर कर के देखना होगा.

सिनेमा अगर गरीब तबके को दिखाता है तो उस समय के
गरीब इतने समर्थ नहीं थे के महँगी जैकेट पहन सकें. वो तो
रईसों के पहुँच के भी बाहर थीं. उसके अलावा मोटर साइकिल
तो क्या अधिकाँश गरीबों की पहुँच में साइकिल भी नहीं हुआ
करती थी.

फ़िल्मी रईस भी जो दिखाई देते हैं वे महानगर की लाइफ
स्टाइल को फ़ॉलो करने वाले धनाढ्य हैं. इस बम्बई दिल्ली
के बीच ही देश का सारा दर्शन हो जाता है. फ़िल्में बम्बैया
दुनिया दिखलाती है और मीडिया नेशनल केपिटल रीज़न
का हाल. इसके अलावा देश में दूसरे हिस्से हैं ही नहीं, या
हैं भी तो उल्लेखनीय नहीं हैं.

सुनते हैं फिल्म से अगला गीत महेंद्र कपूर, लता मंगेशकर
और आशा भोंसले की आवाजों में.

गीत संगीत अनजान और कल्याणजी आनंदजी का है.




गीत के बोल:

प्यार ज़िन्दगी है प्यार बंदगी है बंदगी है
यहल्ला यहल्ला ऊ या अल्लाह
प्यार से प्यार करो ये उम्र प्यार की है
प्यार बिना क्या जीना ये भी कोई ज़िन्दगी है
प्यार से प्यार करो ये उम्र प्यार की है

प्यार करम प्यार दुआ प्यार सितम प्यार वफ़ा
प्यार से जुदा तो यहाँ कोई नहीं कोई नहीं
प्यार खुशी प्यार नशा क्या वो नजर क्या वो अदा
हो किसी के प्यार में जो कोई नहीं कोई नहीं
दिल को लगा के देखो प्यार में क्या खुशी है
प्यार बिना क्या जीना ये भी कोई ज़िन्दगी है
प्यार से प्यार करो ये उम्र प्यार की है

दूर रहे पास रहे दिल में तेरे प्यास रहे
तेरे लिये मैं हूँ तू है मेरे लिये मेरे लिये
प्यार सनम प्यार खुदा यार कभी हो ना जुदा
यार बिना कोई यहाँ कैसे जिये कैसे जिये
बाहों में यार के ही दुनिया बहार की है
प्यार से प्यार करो ये उम्र प्यार की है

देख हमें कोई जले कोई जले हाथ मले
तू जो मेरे साथ चले लोगों से क्या डरना यहाँ
प्यार यहाँ जो ना करे ख़ाक जिये ख़ाक मरे
यार मेरे तेरे लिये जीना यहाँ मरना यहाँ
मर के भी ना मिटे जो ये वो दीवानगी है
प्यार से प्यार करो ये उम्र प्यार की है
……………………………………………..
Pyar zindagi hai-Muqaddar ka sikandar 1978

Artists: Vinod Khanna, Rakhi, Amitabh Bachchan

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Jul 26, 2018

हाय मैं मर जाऊं-गोल्डन आईज़ सीक्रेट एजेंट ०७७ १९६८

मुमताज़ और शैलेश कुमार अभिनीत इस फिल्म से आप
कुछ गीत सुन चुके हैं. अगला क्लासिक गीत सुनते हैं
आशा और महेंद्र कपूर की आवाजों में.

शेवान रिज़वी के बोल हैं और बलदेव नाथ बाली की धुन.





गीत के बोल:

हाय हाय हाय हाय हाय
हाय हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं
हाय हाय हाय हाय हाय
हाय मैं मर जाऊं

तेरे हुस्न का ये नज़ारा
तेरे हुस्न का ये नज़ारा
जैसे पानी पे अंगारा
कहता है दिल आवारा
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं
क्या मौसम है मस्ताना
हुआ देख के दिल दीवाना
और दिल से दिल का टकराना
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं

ये तेरी तेज निगाहें तलवारें हैं के बाहें
दिल भूल गया है मंजिल
दिल भूल गया है मंजिल हम भूल गए हैं राहें
तेरे इश्क ने मुझको मारा
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं

क्या मौसम है मस्ताना
हुआ देख के दिल दीवाना
और दिल से दिल का टकराना
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं

हर बात तेरी मस्तानी जज़्बात तेरे तूफानी
जब प्यार से तूने देखा
जब प्यार से तूने देखा मैं शर्म से हो गई पानी
ज़रा देख ना फिर दुबारा
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं

क्या मौसम है मस्ताना
हुआ देख के दिल दीवाना
और दिल से दिल का टकराना
हाय मैं मर जाऊं
ओये होये होये मैं मर जाऊं

दुनिया में कभी ना देखा दिलदार कोई तुम जैसा
हमने भी कहीं ना देखा
हमने भी कहीं ना देखा दिल फ़ेंक कोई तुम जैसा
तेरा मुखडा प्यार प्यारा
हाय मैं मर जाऊं
ज़रा कह दे फिर दोबारा
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं

क्या मौसम है मस्ताना
हुआ देख के दिल दीवाना
और दिल से दिल का टकराना
हाय मैं मर जाऊं
हाय मैं मर जाऊं
……………………………………..
Haye main mar jaoon- Golden eyes secret agent 077 1968

Artists: Mumtaz, Shailesh Kumar

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