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Nov 15, 2025

तेरी कठपुतली हूँ-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

जिसे आना है उसे जाना है. नश्वर संसार का यही नियम है. पिछले दिनों
बॉलीवुड के एक शानदार कलाकार असरानी अगली दुनिया को कूच कर
गए. अपने हास्य द्वारा लोगों कामनोरंजन करते करते उन्होंने कुछ गंभीर
किस्म की फ़िल्में बनाने कीकोशिश भी करी मगर जनता को उनका ये 
अंदाज़ शायद पसंद नहीं आया.

उनकी बनायीं १९७७ के फिल्म चला मुरारी हीरो बनने का एक गीत
सुनते हैं. इस फिल्म में हेमा मालिनी की भी भूमिका है. ये गीत उनीं पर
फिल्माया गया है जिसमें असरानी भी नाचते दिखलाई डे रहे हैं.

 

 गीत के बोल:
 
तेरी कह्पुटली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
तेरी कह्पुटली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
 
अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बांध ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
अब काहे का डरना जग से अब काहे की चोरी
बांध ली तेरे संग बलमवा जब ये प्रीत की डोरी
 
के बांके बावरिया बजा के पयलिया
रोज़ करती हूँ तुम्हारी गलियो का फेरा
 
तेरी कठपुतली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा

राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाया न जो डोली
राम कसम मैं सच कहती हूँ सुन ले ओ हमजोली
दो दिन में तू मेरे घर पे लाया न जो डोली

तो मायके से चल के मैं खुद मेहँदी मल के
द्वार पे तेरे ओ जुल्मी लगा दूंगी डेरा
 
तेरी कठपुतली हूँ नाचने निकली हूँ
नचा ले जैसा भी दिल चाहे अब तेरा
मैं कुछ न बोलूंगी तेरे संग डोलूँगी
हाय रे मैं हूँ तुम्हारी तू साजन है मेरा
.................................................................................
Teri kahputli hoon-Chala MUrari Hero Banne 1977

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Jul 12, 2020

मैं पीतल की पायलिया भी-कसम खून की १९७७

आज हिंदी फिल्म जगत की कई हस्तियों के जन्मदिन हैं जिनमें
से प्रमुख है निर्देशक बिमल रॉय और अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

बिमल रॉय को तो लगभग सभी गंभीर सिने प्रेमियों ने याद किया
ही होगा आज अपने अपने तरीके से अतः हम सुलक्षणा पंडित को
याद कर लेते हैं. आज वो काफी कष्ट में हैं और ईश्वर से यही
प्रार्थना है कि उन्हें स्वस्थ और चलने फिरने लायक रखे.

७० और ८० के दशक की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक सुलक्षणा
का फ़िल्मी कैरियर बतौर अभिनेत्री उलझन से शुरू हुआ. १९७१ की
फिल्म दूर का रही के लिए उन्होंने एक गीत गाया था. डबिंग
आर्टिस्ट के तौर पर उन्होंने संगीतकारों के साथ काम किया प्लेबैक
में पदार्पण के पहले. सन १९६७ की फिल्म तकदीर के गाने में भी
उनकी आवाज़ है-पप्पा जल्दी आ जाना.

एकमात्र फिल्मफेयर उन्हें अभिनय के लिए बल्कि गायकी के लिए
दिया गया-१९७५ की फिल्म संकल्प के एक गाने के लिए.

आज सुनते हैं सन १९७७ की फिल्म कसम खून की से अपने समय
में खूब बजा हुआ गाना जिसे लता मंगेशकर ने गाया है. इस गीत
को लिखा है अनजान ने और इसकी धुन तैयार की है संगीतकार
जोड़ी कल्याणजी आनंदजी ने.



गीत के बोल:

मैं पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
मेरा सिंगार यही सूरत है मेरी
सूरत भी क्या ख़ूबसूरत है मेरी
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों की मुझको ज़रूरत नहीं है
गहनों को शायद ज़रूरत हो मेरी
मैं अंग अपने जिसको सजा लूं
उसका नसीब खिल जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में

ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
ये प्यार मेरा तूझे महँगा पड़ेगा
तू मोल क्या मेरे दिल का चुकाये
वो हार मेरे गले का बनेगा
वो हार मेरे गले का बनेगा
जो प्यार में जान पर खेल जाये
मेरी नज़र से गिर जाये जो दिल
शोलों में वो ही घिर जाये

पीतल की पायलिया
मैं पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
सोने का भाव सोने का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
शीशे का भी नग जो चढ़ा लूँ नथनिया में
हीरे का भाव हीरे का भाव गिर जाये
पीतल की पायलिया भी पहनूँ जो पाँव में
………………………………………………
Main peetal ki payaliya bhi-Kasam khoon ki 1977

Artists: Sulakshana Pandit, Amjad Khan

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Apr 13, 2020

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी-चांदी सोना १९७७

यकीनन, मोती बहुमूल्य और नायाब रत्न है. सीपियों के
गर्भ में नवजात शिशु की तरह पले मोती की चमक के
आगे सब रत्न फ़ीके हैं. इसमें कुदरती चमक होती है.
मोती को चमकाने के लिये किसी ग्राइंडर पर घिसने की
ज़रूरत नहीं होती.

कवियों और शायरों ने इसे ऊंचा दर्ज़ा दिया है उसकी
एक वजह है जो ऊपर हमने बतलाई और दूसरी ये है
कि गहरे पानी में से इसे निकालना टेढ़ी खीर है.

अब तो तकनीकि और संसाधन बहुतेरे हो गए हैं जिनकी
मदद से नदी और समुद्र की गहराई की थाह ली जा
सकती है मगर कई ऐसे हिस्से बाकी हैं अभी भी इस
पृथ्वी के जहाँ तक मानव की पहुँच नहीं है. ये ना हो
तो ही अच्छा है. ना जाने क्या प्राकृतिक विपदा निकल
आये उसके दुस्साहस के कारण.

किशोर कुमार और आशा भोंसले का गाया हुआ युगल
गीत सुनते हैं फिल्म चांदी सोना से. आशिक़ अफ़सोस
जता रहा है अपनी मुफलिसी का. मुफलिसी पैसों की
ही नहीं, वरन संसाधनों और दिमाग की भी हुआ करती
है. वो इसमें तरह तरह की चीज़ें गिना रहा है जो वो
ला सकता है या कर सकता था. गीत में आशा भोंसले
की केवल एक पंक्ति है.

नायक की भावनाओं को मजरूह सुल्तानपुरी ने अपने गीत
की मदद दी है.  नायिका जो काफी देर से सेमी-कंफ्यूज्ड
से स्टेट में है अन्तरा शुरू होते ही उसकी चेतना लौटती
है और वो ये देख के खुश होती है-अले ये तो मेले फेव्लेट
राजेश खन्ना वाले अंदाज़ में अपना सर हिला रहा है.



गीत के बोल:

सोचा था मैंने तो ए जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी
पर कुछ ना तुझे दे सका
इक मजबूर दिल के सिवा ओ

तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
तड़पे दिल पलकों के पीछे कितने महल ख़्वाबों के लिये
खिलते कभी तो महलों के दर जलते कभी अरमां के दिये
तू हंसती इक गुल की तरह मैं गाता बुलबुल की तरह

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
कब चाहा पर्बत बन जाना देता है जो सदियों का पता
चाहूं बस इक पल का तराना बन के किसी ग़ुन्चे की सदा
खिल जाता इक पल ही सही धूल का फिर आँचल ही सही

सोचा था मैंने तो ऐ जान मेरी
मोतियों से भर दूँगा माँग तेरी ओ

फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
फिर भी इस जलते सीने में अब तो यही अरमान पले
चाँदी के सोने के ख़ज़ाने रख दूँ तेरे क़दमों के तले
उठता है तूफ़ान उठे लुटती है तो जान लुटे

आ ओ जानेमन ............... नहीं
मैं तेरे साथ हूँ तो फिर....
……………………………………………….
Socha tha maine to ae jaan meri-Chandi Sona 1977

Artusts: Sanjay Khan, Parveen Babi

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Feb 4, 2020

प्यार है इक निशान क़दमों का-मुक्ति १९७७

दर्शन पर कोई गीत सुने काफ़ी दिन हो गए हैं. ऐसे
गीत अवश्य सुनना चाहिए जिससे हीलियम गैस थोड़ी
नियंत्रण में रहे और मन का गुब्बारा ज्यादा ऊपर ना
उड़ के ज़मीन के नज़दीक रहे.

संगीत भक्त इतने सारे gem गिनवा देते हैं कि उसके
बाद तरह तरह के जैम और मुरब्बे याद आने लगते हैं
और मुंह में पानी आने लगता है.

सुनते हैं एक उम्दा बोलों वाला गीत फिल्म मुक्ति से
जिसे आनंद बक्षी ने लिखा है. इसकी धुन आर डी बर्मन
ने बनाई है और इसे रफ़ी ने गाया है. इसे फिल्म के
टाईटल्स पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

मिल जाती है संसार में संसार से मुक्ति
मिलती नहीं मर के भी मगर प्यार से मुक्ति

प्यार है इक निशान क़दमों का
प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
भूल जाते हैं लोग सब लेकिन
कुछ ना कुछ फिर भी याद रहता है
प्यार है इक निशान क़दमों का

रोक लेती हैं राह में यादें
जब भी राहों से हम गुज़रते हैं
रोक लेती हैं राह में यादें
जब भी राहों से हम गुज़रते हैं
खो गये क़हक़हों में जो उनको
आँसुओं में तलाश करते हैं
दिल पे हल्की सी चोट लगती है
दर्द आँखों से टूट बहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का

कुछ भी तो कम नहीं हुआ देखो
ज़ख्म हैं फूल हैं बहारें हैं
कुछ भी तो कम नहीं हुआ देखो
ज़ख्म हैं फूल हैं बहारें हैं
तुम नहीं हो मगर तुम ही तुम हो
सब तुम्हारी ही यादगारें हैं
टूट जाने से टूट जाते हैं
दिल के रिश्ते ये कौन कहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का

ये ग़लत है के मरने वालों को
ज़िंदगी से निजात मिलती है
ये ग़लत है के मरने वालों को
ज़िंदगी से निजात मिलती है
इस बहाने से ग़म के मारों को
और लम्बी हयात मिलती है
माना ज़ंजीरें टूट जाती हैं
आदमी फिर भी क़ैद रहता है
भूल जाते हैं लोग सब लेकिन
कुछ ना कुछ फिर भी याद रहता है

प्यार है इक निशान क़दमों का
जो मुसाफ़िर के बाद रहता है
…………………………………………………
Pyar hai ek nishan-Mukti 1977

Artists: Pehchano kaun ?

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Dec 20, 2019

ओ तेरी दुनिया कैसी-चांदी सोना १९७७

जीवन दर्शन वाले गीत तो बहुत बने हैं फिल्म जगत में
और ये समय समय पर किसी दैवीय प्रेरणा से बनते हैं.
इनका उद्देश्य होता है जो आम जनता को सन्देश देता है
अपने अपने तरीके से. इंसान समझना ही नहीं चाहता कि
जीवन का सार क्या है. बड़ी से बड़ी एल ई डी टी वी
लेने में तो कतई नहीं है.

समय चक्र चलता रहता है, शब्द बदलते रहते हैं मगर
मजमून वही रहता है, गौर फरमाएं. जीवन वो जो किसी
के काम आये, चाहे वो पर्यावरण के ही लिए क्यूँ ना हो.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ मधुर गीत
मुकेश की आवाज़ में जिसका संगीत राहुल देव बर्मन ने
तैयार किया है. राज कपूर इसे परदे पर गा रहे हैं.



गीत के बोल:

तुझे भूल के माटी की पुतली पर
कोई मन की खिड़की खोल रहा
जिसमें तेरा नाम तुले उसमें
जग सोना चाँदी तोल रहा

अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
यारा दुनिया कैसी तू जाने

तूने जब दुनिया ये बनाई
धरती की चादर फैलाई
चन्दा सूरज की जोत जलाई
तूने जब दुनिया ये बनाई
धरती की चादर फैलाई
चन्दा सूरज की जोत जलाई
ओ यारा ओ यारा
पर जिसके लिए जग तूने रचा
वो कर के इसे वीरान रहा
धरती की चादर छीन चुका
अब चाँद और सूरज माँग रहा
ये तेरे बन्दों के अफ़साने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने

उल्टी गंगा जो बहे जोगी चुप कैसे रहे
अब देवता कुछ भी नहीं
मानवता कुछ भी नहीं
यारों से यारी गई वो दिलदारी गई
ऐसी छाया तले हम दीवाने भले
कैसा प्यार कहाँ की दोस्ती कैसा रिश्ता नाता
तेरे होते इंसान तेरा शैतान हुआ ओ दाता
पर ये क्यूँ कह रहे हम दीवाने
तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने

जब दिल में पराया दर्द उठे
दूजे के तू काम आये यारा
सब जान मिला जीवन तुझको
चाँदी सोने से भी प्यारा
वरना धन दौलत चीज़ ही क्या है
कहे मियाँ नज़ीर का इकतारा
सब ठाठ पड़ा रह जायेगा
जब लाद चलेगा बंजारा
काम आयेंगे यही प्यार के नज़राने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
जीवन पथ पे निकले दो पल को
हम तो अपने जी को बहलाने
अपना क्या है हम तो अनजाने
ओ तेरी दुनिया कैसी तू जाने
…………………………………………………..
O teri duniya kaisi-Chandi Sona 1977

Artists: Raj Kapoor, Pran

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Dec 13, 2019

उलझन हज़ार कोई डाले-चांदी सोना १९७७

कोई सोना खोजने जाए और उसे प्लेटिनम मिल जाये
तो वो कैसे बावला हो के खुशी से उछलेगा इस गीत से
समझिए. नायिका तो इतनी खुश है मानो २४ केरेट की
जूलरी छत फाड के टपकना शुरू होने वाली हो.

गीत शुरू होने पर लगता है जैसे कोई रॉक शो की प्रेक्टिस
हो रही है गुफा में. पेंटल चट्टान पर कांगो बजा रहे हैं.
नायिका नाच रही है.

गीतकार को या फिर संगीतकार को गाना बनाते समय
नीना की याद बहुत आई. गीत में कई बार नीना शब्द
आया है. अल-नीनो की बहन हो सकती है क्या ये. अब
१९७७ में अल-नईनो शब्द हमने नहीं सुना था इसलिए
अनुमान लगाना कठिन है.





गीत के बोल:

ऐसा हा आ जलवा हा आ अल्ला
उलझन हज़ार कोई डाले
उलझन हज़ार कोई डाले
हाय रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना
ऐसा हा जलवा हा अल्ला हा हा
ऊई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो ओ देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

जादू भरे ख़्वाबों का रंगीं नगर
दीवानों दीवानों देखो ना देखो ना
जैसे कोई खोई हुई जन्नत का दर
मस्तानों मस्तानों देखो ना
अहा रंग बदलते पर्बत के दिल में
झूमर भी जलते मंज़र कहाँ ऐसा ओ मतवाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

ऐसा ह जलवा ह अल्ला
उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
हो ओ देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

जैसे बहार लिये खड़ी हाथों के हार
दीवानों दीवानों देखो ना देखो ना
सदियों से तेरा मेरा था इन्तज़ार
मस्तानों मस्तानों देखो ना
अहा हिम्मत के आगे पत्थर के दिल की
धड़कन भी जागे धड़कन जगाता चल ओ मतवाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना

उलझन हज़ार कोई डाले
हो रुकते कहाँ हैं दिल वाले
देखो ना आ गये
मस्ताने छा गये
बाहों में बाहें डाले
उई नीना नीना नीना नीना नीना नीना
…………………………………………………….
Uljhan hazaar koi daale-Chandi Sona 1977

Artists: Parveen Babi, Sanjay Khan, Paintal, Pran

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Dec 10, 2019

आप सा कोई हसीं-चांदी सोना १९७७

आर डी बर्मन के संगीत खजाने में आपको कुछ ऐसी धुनें
मिलेंगी जो किसी और के खजाने में नहीं मिलेंगी. जी हाँ
ये बात सच है. सृजनशीलता के साथ सर्जनशीलता भी थी
उनके पास जो किसी सर्जन के माफ़िक गाने के मीटर, उसके
परकशन इत्यादि सभी पर एक्सपेरिमेंट कर लिया करते थे.
तबला भी उनके गानों में कुछ अलग तरह से बजता मिलता
है.

सुनते हैं कुछ अलग सा युगल गीत फिल्म चांदी सोना से
जिसमें कुछ विलायती खुशबू है. ये अंग्रेजी वाला विलायत
नहीं है. गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं और इसे
गाया है किशोर कुमार संग आशा भोंसले ने.




गीत के बोल:

हू  हू हू ऊ ऊ ऊ
आप सा कोई हसीं दिलरुबा-ओ-दिलनशीं
आप से पहले कहीं हमने देखा ही नहीं
आप सा कोई हसीं दिलरुबा-ओ-दिलनशीं
आप से पहले कहीं हमने देखा ही नहीं
मेरी भी ज़िंदगी काँटे से फूल हो
दिल जो ग़रीब का तुमको क़ुबूल हो

आप सा कोई हसीं दिलरुबा-ओ-दिलनशीं
आप से पहले कहीं हमने देखा ही नहीं
आप सा कोई हसीं

इन हसीं आँखों से दिल का पयाम लो
एक दीवाने का पहला सलाम लो
दिल दुआएं देगा गिरते को थाम लो
इन हसीं आँखों से दिल का पयाम लो
एक दीवाने का पहला सलाम लो
दिल दुआएं देगा गिरते को थाम लो
क़रीब-ए-आशना इतने क़रीब हो
लगता है मुद्दत से मेरे हबीब हो

आप सा कोई हसीं दिलरुबा-ओ-दिलनशीं
आप से पहले कहीं हमने देखा ही नहीं
आप सा कोई हसीं

मलका-ए-दिल मानो मेरा नाम आज है
हुस्न की सूरत है गुलों का मिज़ाज है
आप के सर पे भी उल्फ़त का ताज है
मलका-ए-दिल मानो मेरा नाम आज है
हुस्न की सूरत है गुलों का मिज़ाज है
आप के सर पे भी उल्फ़त का ताज है
मिट्टी को आपने पहुंचा दिया कहाँ
जैसे उड़े कोई तारों के दरमियां

आप सा कोई हसीं दिलरुबा-ओ-दिलनशीं
आप से पहले कहीं हमने देखा ही नहीं
आप सा कोई हसीं
……………………………………………..
Aap sa koi haseen-Chandi Sona

Artists: Sanjay Khan, Parveen Babi

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Dec 3, 2019

दिल सजन जलता है-मुक्ति १९७७

आशा भोंसले के स्पेशल गीतों में से आज एक सुन लेते
हैं. सन १९७७ की फिल्म मुक्ति की कहानी समझने के लिए
आपको फिल्म ढंग से देखना पड़ेगी. सिर्फ शीर्षक से आपको
कुछ समझ नहीं आने वाला.

प्रस्तुत गीत को देख के भी अगर आप कथानक का अनुमान
लगाएं तो नहीं मालूम कर पाएंगे फिल्म के बारे में. विषय
थोडा गंभीर है फिल्म का.

आनंद बक्षी की रचना है और आर डी बर्मन का संगीत. इसे
बिंदिया गोस्वामी पर फिल्माया गया है. जिस तकनीक का
इस्तेमाल गाने में किया गया है उसे वॉइस ओवर कहते हैं.
झाग नहाने के साबुन से इतने प्रकट नहीं होते. ये तो कोई
कपडे धोने वाला डिटर्जेंट है जी, खुशबूदार, झागवाला !

गीत में नायिका का नाम भी आता है.



गीत के बोल:

ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला हा ला ला ला ला ला हा ला ला ला

दिल सजन जलता है ये बदन जलता है
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने

दिल सजन जलता है ये बदन जलता है
दिल सजन जलता है ये बदन जलता है

ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
चली हवा ये कैसी फूलों की गलियों में
शबनम के गिरने से आग लगे कलियों में
हो चली हवा ये कैसी फूलों की गलियों में
शबनम के गिरने से आग लगे कलियों में
ये चमन जलता है ये बदन जलता है
ये चमन जलता है ये बदन जलता है

प्यार का रंग लगा है जब से मेरी बिंदिया में
ये धरती जलती है सपनों में निंदिया में
हो प्यार का रंग लगा है जब से मेरी बिंदिया में
ये धरती जलती है सपनों में निंदिया में
ये गगन जलता है ये बदन जलता है
ये गगन जलता है ये बदन जलता है
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
ला ला ला
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
लगी दिल की लगी हुई कब से है जाने
ला ला ला
जब से लगा कहीं पे दिल तब से है जाने
या या या या या या या या या
या या या या या या या या या
…………………………………………….
Dil sajan jalta hai-Mukti 1977

Artists: Bindiya Goswami, Vikram

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Nov 24, 2019

भूल गए तुम हमको-डार्लिंग डार्लिंग १९७७

फिल्म इतिहास और सम्बंधित साहित्य में कहीं भी इस बात
का जिक्र नहीं है कि फिल्म का कथानक और उसके गीत आम
दर्शक के समझ में आना ज़रूरी है. अभिव्यक्ति की आजादी देश
के हर व्यक्ति को है चाहे वो दर्शक हो या फिल्म का निर्देशक.
देव आनंद की फिल्मों को कई फिल्म समीक्षक क्लासिक
कहते हैं. समीक्षकों का क्या है-उन्हें जो फिल्म समझ नहीं
आती उसे भी क्लासिक कह लेते हैं. न्यूटन ने बतलाया था
सेब ऊपर से गिरेगा तो नीचे ज़मीन पर गिरेगा मगर ये नहीं
बतलाया था गिरने के बाद उछलेगा कि नहीं, ये आपको कुछ
हिंदी फिल्मों में देखने को मिल सकता है.

सिनेमा इतिहास के कई गीत ऐसे हैं जिहें आप केवल देख के
ही आनंद उठा सकते हैं. फिल्म डार्लिंग डार्लिंग के गीत-ऐसे
ना मुझे तुम देखो को आप गुनगुना सकते हैं मगर प्रस्तुत
युगल गीत को नहीं. इसे गुनगुनाने के लिए दिमाग खपाना
पड़ेगा और उस दिमाग खपाने में जो ऊर्जा खर्च होगी उसमें
१० पन्ने का निबंध तैयार हो जायेगा. इसके बोल लिखने में
ही हमारी काफी ऊर्जा का व्यय हुआ है.




गीत के बोल:

हा हा हा हा हा हा हा
ए भूल गए तुम हमको
क्या याद नहीं तुमको
अरे रे रे रे कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
अरे एक मुलाकात की रात की बात
रात गई बात गई
हा हा हा हा हा हा हा हा
भूल गए तुम हमको
याद नहीं क्या तुमको
कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
हे एक मुलाकात की रात की बात
रात गई बात गई
हो हो हो हो हो हो हो हो
भूल गए तुम हमको
याद नहीं क्या तुमको
कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
हे एक मुलाकात की रात की बात
रात गई बात गई समझे

रोज़ शुरू करते हैं हम ये कहानी नई
प् प् प् प्
माफ करना माफ करना

दोस्त नए प्यार नया और ज़िन्दगानी नई
प् प् प् प्
माफ करना माफ करना
बेकदर तुम निकले बेवफ़ा हरजाई
कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
अरे सब जज़्बात की रात की रात
रात गई बात गई समझे
हो ओ

पर प पर प पर प पर प
आज हमारा भी प्यार पुराना हुआ
माफ़ करना माफ़ करना
एक ही सूरत देखते ज़माना हुआ
माफ़ करना
बेवफ़ाई तुमसे सीख ली हमने भी
कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
प्यार की बारात की रात की बात
रात गई बात गई
हा हा हा हा हा हा हा हा

भूल गए तुम हमको
याद नहीं क्या तुमको
कल मिले थे हम तुम
आज फिर मिलना था
…………………………………………………….
Bhool gaye tum hamko-Darling darling 1977

Artists: Helen, Dev Anand, Zeenat Aman

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Nov 3, 2018

एक बात बताने आई हूँ-आखिरी गोली १९७७

७० के दशक में ऐसी फ़िल्में बहुत आयीं जिनके नाम में
आखिरी शब्द आता है. आखिरी गोली, आखिरी डाकू, आखिरी
मुजरा इत्यादि. आखिरी फिल्म जैसी कोई चीज़ नहीं आई
इसलिए फ़िल्में लगातार बन रही हैं अभी तक. वो तो गोलियाँ
भी बन रही हैं और चल रही हैं आज तक. नाम से कुछ फर्क
पढता तो गुलाब जामुन में से जामुन की सुगंध आने लगती
और वो गुलाब जैसा दिखलाई देता.

एक बात समझ नहीं आई कि आखिरी गीत नाम की फिल्म
सन १९७५ में आई थी उस नाम का असर नहीं हुआ और
गीत आज भी बन रहे हैं निरंतर बिना किसी लाग लपेट के.

सुनते हैं फिल्म आखिरी गोली से एक गीत आशा भोंसले का
गाया हुआ. वर्मा मलिक गीतकार हैं और कल्याणजी आनंदजी
संगीतकार.




गीत के बोल:

एक बात बताने आई हूँ एक बात बताने आई हूँ
तुझे दिल की सुनाने आई हूँ
एक छोरा देखा ऐसा जिसका सीना पर्वत जैसा
सच सच कह दूं लगता है वो बिलकुल तेरे जैसा
मेरे जैसा नाम तो बता
अरे नहीं बताती जा
एक बात बताने आई हूँ तुझे दिल की सुनाने आई हूँ

देखेगा तू जब उसको जल जल के मर जायेगा ओ
जल जल के मर जायेगा नींद तेरी उड़ जायेगी और
चैन तेरा लुट जायेगा ओ चैन तेरा लुट जायेगा
बातें करता है वो बढ़िया बातें करता है वो बढ़िया
जैसे चलती हैं फुलझडियां मीठा मीठा दर्द है जगा
जब से अँखियाँ लड़ियाँ
अच्छा तो ये बात है मुझसे भी मिलवा
अरे नहीं नहीं मिलवाती जा जा जा
एक बात बताने आई हूँ हाँ तुझे दिल की सुनाने आई हूँ

कल जब मिलने आएगा सज धज के मैं जाऊंगी ओ
सज धज के मैं जाऊंगी अपने अरमानों की माला
मैं उसे पहनाऊंगी मैं उसे पहनाऊंगी
हम टी मिलेंगे दोनों ऐसे भंवरा कली से मिलता जैसे
मिल के कभी ना बिछडेंगे हम दोनों मिलेंगे ऐसे
…………………………………………………..
Ek baat batane aayi hoon-Akhiri Goli 1977

Artists:

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May 3, 2018

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से-आलाप १९७७

सन १९७७ की आलाप फिल्म से एक गीत सुनते हैं जिसे
असरानी ने गाया है. अमिताब बच्चन को असरानी ट्रेनिंग
दे रहे हैं और इस गीत में डर के प्रकार भी बतलाते हैं.
इस गंभीर किस्म की फिल्म में जो हास्य वाले दुर्लभ दृश्य
हैं उनमें से ये एक है.

गीत राही मासूम रज़ा ने लिखा है और इसका संगीत तैयार
किया है जयदेव ने.



गीत के बोल:

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे

फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
अरे फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
सैयां जी के घर का कोई खड़ा मेरे दरवाजे
खड़ा मेरे दरवाजे

चले जवानी पीछे पीछे चले जवानी
अरे चले जवानी पीछे पीछे बचपन आगे आगे
रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे

अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
अरे अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
चाहे जैसी हवा चले पर मोहे लगे पुरवाई
ओ श्यामा मोहे लगे पुरवाई
नैना दिन भर सपना देखें
नैना अरे नैना अरे नैना
अजी नैना दिन भर सपना देखें काजल रात को डाले
रामा डर लागे

ओ लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे

डर किरने प्रकार के होते हैं उनको ख्वाबों में देखिये
लज्जा ईर्ष्या क्रोध वीभत्स हा हा हा
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
……………………………………………….
Ho rama dar laage apni umariya se-Alaap 1977

Artists: Asrani, Amitabh Bachchan, Rekha

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Apr 22, 2018

पास आओ ना-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

सन १९७७ की असरानी निर्देशित फिल्म से अगला गीत सुनते हैं
जो असरानी और सिमी ग्रेवाल पर फिल्माया गया है. योगेश के
लिखे गीत को आशा भोंसले ने गाया है. संगीत है पंचम का.

गीत में जो बहुत सारा कुछ दिखलाई दे रहा है उसमें एक बड़ी सी
कार और फिल्म की हीरोईन बिंदिया गोस्वामी भी नज़र आती हैं.





गीत के बोल:

क्या सोच रहे हो प्यार करते हो और सोचते हो
नौटी
सोचो मत खो जाओ सब भूल जाओ
देखो मेरी तरफ क्या मैं सोचती हूँ ऊं हूँ
जो दिल में आता है वही करती हूँ
जितनी दुनिया की परवाह करोगे
आपने आप से दूर होते जाओगे
सो लेट्स गो कहीं दूर चलें
……………………………………………………….
Paas aao na-Chala murari hero banne 1977

Artists: Simi Garewal, Asrani

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खोये हो आखिर किस बेखुदी में-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

आज आपको सन १९७७ की एक फिल्म से आशा भोंसले का गाया
एक गीत सुनवाते हैं. गीत का वीडियो उपलब्ध नहीं है अतः इसका
विवरण देने की इच्छा नहीं हो रही है. फिर भी हम आपको इसके
गीतकार और संगीतकार का नाम बतलाये देते हैं. आँख मूँद कर
कॉपी पेस्ट करने वालों का ध्यान रखना भी तो ज़रूरी है आखिर.

गायिका: आशा भोंसले
गीतकार: योगेश
संगीत: आर डी बर्मन




गीत के बोल:

खोये हो आखिर किस बेखुदी में
कुछ और भी है हो इस जिंदगी में
नज़ारे सुहाने खुशी के तराने
जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया
जुबी जुबी ज़ुबिया


दिल में तेरे ही नहीं मेरे भी कहीं ना कहीं
कोई तो अरमान है
कल के भरोसे पर होता है जो बेखबर
आज से नादान है
कोई गम है अगर करने की तू फिकर
हम भी तो साथी हैं तेरे हमसफ़र

हो खोये हो आखिर किस बेखुदी में
कुछ और भी है हो इस जिंदगी में
नज़ारे सुहाने खुशी के तराने
राही मंजिलों के रास्तों की मुश्किलों से कभी
हारते थकते नहीं
जिसमें है दम कभी उसके कदम कहीं राहों में
रुकते नहीं
छोडो भी मायूसी तोडो भी ख़ामोशी
आने दो होंठों पे थोड़ी तो हंसी

हो खोये हो आखिर किस बेखुदी में
कुछ और भी है हो इस जिंदगी में
नज़ारे सुहाने खुशी के तराने
जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया
जुबी जुबी ज़ुबिया
जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया
जुबी जुबी ज़ुबिया
जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया जुबी ज़ुबिया
जुबी जुबी ज़ुबिया
..........................................................
Khoye ho aakhir kis bekhudi mein-Chala murari hero banne 1977

Artist: Asrani, Bindiya Goswami

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Apr 19, 2018

दो पल की है ये जिंदगानी-चला मुरारी हीरो बनने १९७७

फिल्म चला मुरारी हीरो बनने फिल्म से हमने आपको तीन
गीत सुनवा दिए हैं अभी तक. हमें समझ नहीं आया कि आप
बाकी के गीत सुनना चाहते हैं या नहीं इसलिए सुनवाए नहीं.

फिर भी हम आपको चौथा गीत सुनवा ही देते हैं इस फिल्म
से. योगेश के लिखे गीत को आशा भोंसले ने गाया है और
इसका संगीत आर डी बर्मन ने तैयार किया है. जिस अभिनेत्री
पर इसे फिल्माया गया है उसका नाम जैसे ही पता चलेगा
हम आपको तुरंत बतलायेंगे.

गीत कि धुन एक पुरानी फिल्म के गीत से मिलती है. वो
गीत भी आशा भोंसले ने ही गाया है. उस गीत के संगीतकार
एस डी बर्मन हैं.




गीत के बोल:

आसान हैं, सुन कर लिख लें.

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Do pal ki hai ye zindagani-Chala murari hero banne 1977

Artist: Maloom nahin

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हम न कभी होंगे जुदा-फिर जनम लेंगे हम १९७७

गीतों में पुनर्जन्म की कथा भी फ़िल्मी गीत निर्माण के शुरू
के दौर से चली आ रही है. शब्दों का हेर फेर होता है मगर
मजमून वही होता है. फ़िल्मी गीत सिचुएशन के हिसाब से
बनाये जाते हैं/थे इसलिए कहानी से उनका ज्यादा सम्बन्ध
होता है/था. आजकल के दौर में कहानी से गीत का कनेक्शन
होना ज़रूरी नहीं है. किसी भी कहानी में आप कैसा भी गीत
डाल दो बस धम-धम भरपूर होनी चाहिए.

गीत गौहर कानपुरी का है और संगीत बप्पी लहरी का. इसे
लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने गाया है. गीत फिल्माया
गया है आदिल अमन और भावना भट्ट पर. भावना भट्ट
को आपने फिल्म दो जासूस में शैलेन्द्र सिंह के साथ समुद्र
में नौका पर गीत गाते देखा होगा. आदिल अमन के बारे
में ज्यादा जानकारी नहीं है. जिस भी ज़माने की कहानी इस
फिल्म के लोग बतलाना चाहते हों, एक बात तो तय है कि
फिल्म के गाँव काफी आगे पहुंचे हुए लगते हैं समय से. इस
गीत में नायक मेटल की बांसुरी जो बजा रहा है.





गीत के बोल:

हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
हो ओ ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम

हो हो हो हो हो हो हो हो ओ ओ ओ ओ
एक है जान दो बदन एक महक दो सुमन
हो एक है जान दो बदन एक महक दो सुमन
सीता हूँ मैं राम तुम राधा हूँ मैं श्याम तुम
हो ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम

पहले भी थे साथी हम आज भी तेरा साथ है
हो पहले भी थे साथी हम आज भी तेरा साथ है
एक दो जनम कुछ नहीं सदियों की ये बात है

हो ओ ओ हम न कभी होंगे जुदा मौत हमें आये तो क्या
फिर जनम लेंगे हम फिर जनम लेंगे हम
…………………………………………………….
Ham naa kabhi honge juda-Phir janam lenge ham 1977

Artists: Adil Aman, Bhavna Bhatt

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Feb 17, 2018

चाहे आज मुझे ना पसन्द करो-दरिंदा १९७७

एक प्यानो सॉंग सुनते हैं. प्यानो गीत वे होते हैं जिन्हें
प्यानो गाता है. मगर जो गीत आप सुनेंगे आज उसमें
नायक प्यानो बजा रहा है और खुद गा रहा है. गीत
उम्दा है और इसमें एक दर्द की पतली सी मगर कुछ
स्पष्ट सी लकीर भी है. 

बड़ी बड़ी मुच्छी वाला हीरो जिसने गले में शर्ट के कॉलर
में विलायती फूल-फुंदा लगा रहा हो आपने नहीं देखा होगा.
ये एक अलग फैशन है. फिल्मों से हमने तरह तरह की
चीज़ें सीखी हैं, है ना !

फिल्म दरिंदा से है ये गीत. इन्दीवर के बोल हैं और इसके
संगीतकार हैं कल्याणजी आनंदजी.




गीत के बोल:

चाहे आज मुझे ना पसन्द करो
चाहे द्वार हृदय के बन्द करो
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा
चाहे आज मुझे ना पसन्द करो
चाहे द्वार हृदय के बन्द करो
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा

बचपन के प्यार की मिटती नहीं निशानी
बचपन के प्यार की मिटती नहीं निशानी
कितना भी मिटाना चाहे इसे जवानी
जहाँ याद मेरी सोई हो
जहाँ याद मेरी सोई हो दूजा न और कोई हो
कोई दिल का तुम्हारे ऐसा भी कोना होगा
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा

मैं क्या से क्या बन गया तुम्हारे कारण
मैं क्या से क्या बन गया तुम्हारे कारण
ना समझो इसे दिखावा
ना समझो इसे दिखावा है ये मेरे प्यार का दावा
मेरे हँसने पे हँसना रोने पे रोना होगा
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा

चाहे आज मुझे ना पसन्द करो
चाहे द्वार हृदय के बन्द करो
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा
आख़िर में तुम्हें मेरी ही होना होगा
……………………………………………………….
Chahe aaj mujhe na pasand-Darinda 1977

Artists: Sunil Dutt, Shahsi Kapoor, Parveen Babi

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Jan 22, 2018

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की-शंकर हुसैन १९७७

इस गीत में एक जगह पर जिक्र है-दांतों तले ऊँगली दबाने का.
इस गीत को सुन कर ही दांतों तले उँगलियाँ दबाने की इच्छा
होती है. ये कमाल अमरोही का लिखा हुआ गीत है. संगीत
खय्याम का है और इसे रफ़ी ने गाया है.

कमाल अमरोही के नाम ज्यादा गीत नहीं हैं फिल्म संगीत के
खजाने में अतः उनका ये गीत किसी प्रोफेशनल गीतकार की
स्टाइल में लिखा होना सोचने पर मजबूर अवश्य करता है कि
ये क्या वाकई उन्होंने लिखा है या फिर उन्होंने ज्यादा गीत
क्यूँ नहीं लिखे फिल्मों के लिए.



गीत के बोल:

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की
बहुत खूबसूरत
बहुत खूबसूरत मगर सांवली सी
बहुत खूबसूरत

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

मुझे अपने ख़्वाबों की बाहों में पा कर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा कसमसा कर
सरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख़्वाब दिन की मुंडेरों पे आ के
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साज़ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेसाख्ता धीमे-धीमे सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की


चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियां कँपकँपाती तो होंगी
कलम हाथ से छूट जाता तो होगा
उमंगें कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिख कर
वो दांतों में उँगली दबाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

ज़बान से अगर उफ़ निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पांव पड़ते तो होंगे
 ज़मीन पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लुड़की


हर  एक चीज हाथों से गिरती तो होगी
तबियत पे हर काम खलता तो होगा
…………………………………………………………..
Kahin ek masoom nazuk si ladki-Shankar Hussain 1977

Artist: Kanwaljeet

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Jan 17, 2018

तेरे लिये मैंने सबको छोड़ा-आनंद आश्रम १९७७

एक दर्द भरा गीत सुनते हैं किशोर कुमार की आवाज़ में.
फिल्म का नाम है आनंद आश्रम जिसमें इसे उत्तम कुमार
पर फिल्माया गया है. फिल्म का नायक जीवन में अकेला
हो गया है इसलिए वो अपनी भावनाएं इस गीत के ज़रिये
व्यक्त कर रहा है.

गीत इन्दीवर का है और संगीत श्यामल मित्रा का. फिल्म से
आप एक गीत पूर्व में सुन चुके हैं.




गीत के बोल:

तेरे लिये मैंने सबको छोड़ा
तू ही छोड़ के चल दी
जनम मरण के साथ का वादा
कैसे तोड़ के चल दी

कितने सपने देखे हमने
इसी पेड़ के नीचे
ऐसे तूफ़ान आये के उजड़ेदे
ख्वाबों के बग़ीचे
क्या खबर थी लुट जायेगी
मेरी दुनिया इतनी जल्दी
जनम मरण के साथ का वादा
कैसे तोड़ के चल दी

छीन लिया क्यूँ हाथों से मेरे
वक़्त ने दामन तेरा
जीवन में जब तू ही नहीं
किस काम का जीवन मेरा
मीत बिछड़ते नहीं राहों में
क्यूँ तूने रीत बदल दी
जनम मरण के साथ का वादा
कैसे तोड़ के चल दी
...........................................................
Tere liye maine sabko chhoda-Anand Ashram 1977

Artist: Utta,m Kumar, Sharmila Tagore

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Jan 14, 2018

पागल पागल हाय ये मौसम-हैवान १९७७

आज आपको एक रेयर गीत सुनवाते हैं. हेमंत कुमार की आवाज़
६० के दशक में तो नियमित रूप से फिल्मों के गीतों में सुनाई
दी मगर ७० के दशक में उनके गिने चुने गाने ही आये. इस लिहाज
से ये गीत दुर्लभ है. फिल्म भी जानी पहचानी नहीं है ये गीत के
दुर्लभ होने का दूसरा कारण है.

गीत प्रदीप रॉयचौधरी का लिखा हुआ है और इस गीत का संगीत
बप्पी लहरी ने तैयार किया है. अब इसके दुर्लभ होने की तीसरी
वजह भी आपको बतला देते हैं-एक संगीतकार दूसरे संगीतकार के
संगीत निर्देशन में गा रहा है.




गीत के बोल:

पागल पागल हाय ये मौसम
छेड़े जा शरमाये जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा
पागल पागल हाय ये मौसम
छेड़े जा शरमाये जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा

दिल में प्यार के अरमान मचले मेरी जान
अब तो बात छुपे ना नज़ारे कहे हाँ
दिल में प्यार के अरमान मचले मेरी जान
अब तो बात छुपे ना नज़ारे कहे हाँ
पम बम पम
रंगीन रंगीन तूफानों में
झूमे जा लहराए जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा

आ जा मस्त हवाओं में उड़ते चलें हम
जब तू साथ हमारे फिर क्या हमें गम
आ जा मस्त हवाओं में उड़ते चलें हम
जब तू साथ हमारे फिर क्या हमें गम
पम फम पम
काली काली जुल्फों में तू
उलझे जा घबराए जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा
पागल पागल हाय ये मौसम
छेड़े जा शरमाये जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा

हमसे जान के टकरा बच के नहीं चल
कहती देख जवानी आता नहीं कल
हमसे जान के टकरा बच के नहीं चल
कहती देख जवानी आता नहीं कल
पम पम पम
दुनिया दुनिया कैसी दुनिया
दुनिया को ठुकराए जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा

पागल पागल हाय ये मौसम
छेड़े जा शरमाये जा
मस्त हवा मस्त फिज़ा
तड़पे जा तड़पाये जा
...................................................................
Pagal pagal haye ye mausam-Haiwan 1977

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Jan 12, 2018

नई री लगन-आलाप १९७७

हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय और अशोक कुमार की जुगलबंदी आपको
अगर याद हो फिल्म आशीर्वाद में, उसके बाद आपको हृषिकेश मुखर्जी
की ही एक और फिल्म याद दिलवाते हैं जिसमें अलग अलग धारा के
ढेर सारे लोग एक छत के नीचे जमा थे-बावर्ची. अब आते हैं फिल्म
नमक हराम की ओर जिसमें दो दोस्त हैं एक अमीर एक गरीब साथ
एक मुफलिसी का शिकार शायर है.

इन तीन फिल्मों के कुछ घटक ले लीजिए और कुछ क्लासिकल संगीत
की मात्रा ज्यादा कर दीजिए, हो गया फिल्म आलाप का मसाला तैयार.
फिल्म की कहानी. इसके अलावा लेकिन और भी बहुत है इस फिल्म में
जो थोडा आम आदमी के दायें बायें से निकल जाता है. गरीबी, संघर्ष,
स्वाभिमान, संगीत और सुबह का भूला शाम को घर ये की वर्ड्स हैं इस
फिल्म को समझने के लिए. फिल्म में ओमप्रकाश और अमिताभ बच्चन
दोनों ही रूटीन से हट कर भूमिकाओं में हैं. 



गीत के बोल:

नई री लगन और मीठी बतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे
किस किस बात पे
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

बाल भी उलझे हैं सपने भी
बाल भी उलझे हैं सपने भी
दूजे लागे हैं अपने भी
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने

पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

ऐसो चित नगर करे बरजोरी
ऐसो चित नगर करे बरजोरी
और करो जी ??????????

कागा जा जा जा जा
जा रे कागा जा
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा रे कागा जा
ना दे मोरे पिया को संदेसवा
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
मोरे आली कैसे करे मन कब जाऊँ
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
...............................................................
Nayi ri lagan-Alaap 1977

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