छोड़ो ये निगाहों का इशारा–इंकार १९७७
रोमांटिक गीत क्यूँ सुनती है. इसका जवाब भी एक सवाल है-
रोमांटिक गीत बनाये क्यूँ जाते हैं. अरे भाई ये भी कोई बात हुई
रोमांस हुआ तो भावनाएं निकली शब्द निकले, गीत बने फिर
गाये जाने लगे. हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओँ में भी रोमांटिक
गीत बनाये जाते हैं, जाते रहे हैं और आगे भी बनाये जायेंगे.
ये बात और है कि किसी किसी फिल्म में गीत ऐसे लगते हैं
जैसे सूटकेस में जबरन कपडे ठूंस दिए गए हों.
अर्नेस्ट हेमिंग्वे के प्रख्यात उपन्यास पर बनी आंग्ल भाषा की
फिल्म “ओल्ड मेन एंड द सी का ‘हिंदी तर्जुमा बनता तो उसमें
बुज़ुर्ग मछली पकड़ते पकड़ते ४-५ गीत ज़रूर गा लेते साथ में
मछलियाँ भी १-२ गीत गा लेतीं.
मशीन और इंसान के बीच का फर्क यही है-इंसान पप्पी और
झप्पी दोनों लेने में सक्षम है, मशीन नहीं. यहाँ हम रजनीकांत
वाली फिल्म के रोबोट की बात बिलकुल भी नहीं करेंगे. ये तो
वो फर्क है जो हमें सयानों ने बतलाया है. ये बात बिकुल तय
है कि गीतकारों ने प्रेमियों को नए शब्द और नए आयाम दिए
हैं इससे प्रेम में वैरायटी बढ़ जाती है. अपनी भावनाएं व्यक्त
करने के लिए नए शब्द और आइडियाज़ मिल जाते हैं. हर
किसी की शब्द सामर्थ्य और ज्ञान विकसित नहीं होता कि वो
कवी-कल्पना से सोच सके. अब इश्क कमीना-टीन कनस्तर क्या
आप और मैं सोच सकते थे, कतई नहीं. ये तो भला हो फिल्म
संगीत का जिसकी वजह से हमारी सोच और लोच में आमूल
चूल बदलाव ला दिया है. पहले पानी टपकता था अब भावनाएं.
आज आपको मजरूह का लिखा हुआ एक उम्दा रोमांटिक युगल
गीत सुनवाते हैं. ये है फिल्म इनकार से. इनकार एक सस्पेंस
फिल्म है और इसमें गीत नहीं भी होते तो चलता, मगर मुझे
या आपको. अगर गीत नहीं होते तो जनता भी फिल्म बिना देखे
चलते बनती. विशेषकर वो जनता जो परदे के पास बैठा करती थी.
इस फिल्म में उनके लिए विशेषकर एक गीत रखा गया था-मूंगड़ा
कभी हमने भी उस क्लास में बैठ के ढेरों फ़िल्में देखी हैं. पूरी
फिल्म देखने के बाद गर्दन अकड जाया करती. सर उठा के चलना
पढता और देखने वालों को लगता –वाह क्या आत्मविश्वास है बन्दे
में. सीट से पर्दा ज़्यादातर सिनेमा हॉल में ऊंचा हुआ करता इसलिए
सर उठा के फ़िल्में देखनी पढ़ती थीं.
आशा भोंसले और किशोर कुमार के गाये इस गीत की तर्ज़ बनाई है
राजेश रोशन ने. विनोद खन्ना और विद्या सिन्हा पर इसे फिल्माया
गया है.
गीत के बोल:
छोड़ो ये निगाहों का इशारा
सौदा है ये ज़िन्दगी का यारा
सुनना है तुम्हारी जुबां से
के तुमको हमसे प्यार है
दिल से हो जब दिल की बातें यारा
दिलवाले को काफी है इशारा
जब कोई निगाहें झुका ले
तो समझो इकारार है
देखो जी अदाओं की पहेली ना बुझाओ
दीवाने को और भी दिवाना ना बनाओ
अरे इतना भी ना समझे हो के आशिक हमारे
वहीँ मेरे होंठों पे जो दिल में तुम्हारे
क्या है मेरे दिल में अभी से
ये कह देना दुश्वार है
धडकन भी हमारी क्या सुनाई नहीं देती
चेहरे की ये लाली क्या गवाही नहीं देती
अरे चेहरे की ये लाली, धड़कन के फसाने
मैं तो मानूं यार मेरा दिल नहींमाने
सुन लो फिर हमारी जुबां से
हमको तुमसे प्यार है
दिल से हो जब दिल की...
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Chhodo ye nigahon ka ishara-Inkaar 1977
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