ऐ बाद-ए-सबा आहिस्ता चल-अनारकली १९५३
दबंग आवाज में. फिल्म का नाम है अनारकली जिससे आप
कुछ गीत इधर सुन चुके हैं पहले. फिल्म को रिलीज़ हुए
६३ साल हो चुके हैं. इसके गीतों का जादू आज भी सर चढ
कर बोलता है. सी रामचंद्र के संगीतमय जीवन की शायद
या आखिरी बड़ी हित फिल्म थी. इसके बाद ५९ की नवरंग
इसके सामने कुछ कमतर है मगर कमज़ोर नहीं.
गीत के बोल:
ऐ बाद-ए-सबा आहिस्ता चल
यहाँ सोयी हुई है अनारकली
आँखों मे जलवे सलीम के लिये
खोयी हुई है अनारकली
है शहीद-ए-इश्क़ का मकबरा
ज़रा चल अदब से यहाँ हवा
तुझे याद हो के न याद हो
मुझे याद है उस का माजरा
अभी याद है मुझे वो घड़ी
जब किसी की उसपे नज़र पड़ी
यहाँ हुस्न था वहाँ ताज था
यहाँ इश्क़ था वहाँ राज था
ये कहा सलीम ने प्यार से
हँस-हँस के अपनी अनार से
तू कहे तो तारों को तोड़ लूँ
तू कहे तो ताज भी छोड़ दूँ
ज़रा देख ये क्या हवा चली
न रहा सलीम न वो कली
ये मज़ार निशानी है प्यार की
किसी दर्द भरी इकरार की
किस भँवरे के इंतज़ार मे
यहाँ सोयी है कली अनार की
ऐ बाद-ए-सबा आहिस्ता चल
यहाँ सोयी हुई है अनारकली
आँखों मे जलवे सलीम के लिये
खोयी हुई है अनारकली
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Ae baad-e-saba aahista-Anarkali 1953
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