आज मौसम बड़ा बेईमान-लोफर १९७३
जाता है, उछलने लगता है, कूदने लगता है. जैसे आज की पीढ़ी
का नायक ऊंची पहाड़ी पे चढ के, जोर लगा के, नाक के सुर से
गाता है वैसे ही कल्पना करें ७० के दशक में क्या होता होगा?
उस समय के संगीतकार को अगर पहाड पर चढाना होता तो वो
रफ़ी से गाना गवा लेता, ज्यादा ऊंची छोटी पे चढाना होता तो
महेंद्र कपूर से. बस उस समय का गाने वाला गले से गाता था.
एक रफ़ी का गाया ऊंचे स्केल वाला गीत जिसे गुनुगुनाने में अच्छे
अच्छों को पसीना आ जाता है. फिल्म का नाम है लोफर जिससे
एक गीत आप पहले सुन चुके हैं इधर.
गीत के बोल:
आज मौसम बड़ा बेईमान है
बड़ा बेईमान है, आज मौसम
आने वाला कोई तूफान है
कोई तूफान है, आज मौसम
क्या हुआ है, हुआ कुछ नहीं है
बात क्या है, पता कुछ नहीं है
मुझसे कोई खता हो गयी तो
इसमें मेरी खता कुछ नहीं है
खूबसूरत है तू, रुत जवान है
आज मौसम बड़ा बेईमान है
बड़ा बेईमान है, आज मौसम
काली काली घटा डर रही है
ठंडी आहें हवा भर रही है
सबको क्या क्या गुमा हो रहे हैं
हर कली हमपे शक कर रही है
फूलों का दिल भी कुछ बदगुमान है
आज मौसम बड़ा बेईमान है
बड़ा बेईमान है, आज मौसम
ऐ मेरे यार, ऐ हुस्नवाले
दिल किया मैंने तेरे हवाले
तेरी मर्ज़ी पे अब बात ठहरी
जीने दे चाहे, तू मार डाले
तेरे हाथों में अब मेरी जान है
आज मौसम बड़ा बेईमान है
बड़ा बेईमान है, आज मौसम
आने वाला कोई तूफान है
कोई तूफान है, आज मौसम
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Aaj mausam bada beimaan hai-Loafer 1973

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