चाँद निकलेगा जिधर-दुर्गेश नंदिनी १९५६
भरे हैं. इस गीत में नायिका जिद किये बैठी है कि वो चाँद
की दिशा में नहीं देखेगी.
दुर्गेश नंदिनी के नाम से एक प्रसिद्ध गीत याद आ जाता है
लता मंगेशकर का गाया हुआ. उसके अलावा केवल लता के
भक्तों को ही बाकी गीत याद आते हैं या फिर उन्हें जो संगीत
निर्देशक हेमंत कुमार के मुरीद हैं.
राजेंद्र कृष्ण के फैन भी हैं संगीत प्रेमियों में वे इस गीत को
ज़रूर सुन लेते हैं कभी कभी. फिल्म में संगीत हेमंत कुमार
ने दिया है.
गीत नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है. गौर करें गीत में
नलिनी की पलकें बहुत देर बाद झपकती हैं.
गीत के बोल:
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे
इश्क़ तो होँठों पे फ़रियाद न लायेगा कभी
इश्क़ तो होँठों पे फ़रियाद न लायेगा कभी
देखने वाले मुहब्बत का जिगर देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
ज़िंदगी अपनी गुज़र जायेगी शाम-ए-ग़म में
ज़िंदगी अपनी गुज़र जायेगी शाम-ए-ग़म में
वो कोई और ही होंगे जो सहर देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
फूल महकेंगे चमन झूम के लहरायेगा
फूल महकेंगे चमन झूम के लहरायेगा
वो बहारों का समा हम न मगर देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
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Chand niklega jidhar-Durgesh Nandini 1956
Artist-Nalini Jaywant

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