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Aug 27, 2019

कैसे मैं आऊँ पिया-दुर्गेश नंदिनी १९५६

मैं आऊँ हिट्स के अंतर्गत अगला गीत सुनते हैं फिल्म दुर्गेश नंदिनी
से. दो सुन्दर अभिनेत्रियां इस फिल्म में हैं और वीडियो में आप दोनों
को देख पाएंगे. पुराने ज़माने का लव ट्रेंगल.

आशा भोंसले ने इस गीत को गाया ई. परदे पर इसे बीना रॉय गा रही
हैं. राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं और हेमंत कुमार का संगीत.






गीत के बोल:

कैसे मैं आऊँ पिया पास तुम्हारे
कैसे मैं आऊँ पिया पास तुम्हारे
चाँद भी है bairi मेरा
पता ना बताये तेरा राह ना दिखाए
ये सितारे
कैसे मैं आऊँ पिया पास तुम्हारे पास तुम्हारे

अंखियों में अंसुवन दीप जलाऊँ मैं
अंखियों में ansuwan दीप जलाऊँ मैं
फिर bhi बलम तेरी raah ना paaoon
जाएँ कहाँ बता दे दर्द के मारे
दर्द के मारे

कैसे main आऊँ piya.....

कौन घडी ओ सैयां लागे तोसे नैन रे
kaun घडी ओ सैयां लागे तोसे नैन रे
भूल के ना पाया meri प्रीत ने चैन रे
दो दिन हंस के ना saath गुजारे  साथ गुजारे

kaise मैं aaoon पिया......

याद सताए तेरी दिल घबराए रे
याद sataye तेरी दिल घबराए re
देख akeli मोहे raat डराए रे
तड़प तड़प जिया तुझको पुकारे
तुझको पुकारे

कैसे main आऊँ piya.....
……………………………………………………………..
Kaise main aaoon piya-Durgesh Nandini 1956

Artist: Nalini Jaywant, Pradeep Kumar, Ajit, Beena Rai,

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Jul 21, 2016

चाँद निकलेगा जिधर-दुर्गेश नंदिनी १९५६

राजेंद्र कृष्ण ने एक ही विषय के गीतों में अलग अलग रंग
भरे हैं. इस गीत में नायिका जिद किये बैठी है कि वो चाँद
की दिशा में नहीं देखेगी.

दुर्गेश नंदिनी के नाम से एक प्रसिद्ध गीत याद आ जाता है
लता मंगेशकर का गाया हुआ. उसके अलावा केवल लता के
भक्तों को ही बाकी गीत याद आते हैं या फिर उन्हें जो संगीत
निर्देशक हेमंत कुमार के मुरीद हैं.

राजेंद्र कृष्ण के फैन भी हैं संगीत प्रेमियों में वे इस गीत को
ज़रूर सुन लेते हैं कभी कभी. फिल्म में संगीत हेमंत कुमार
ने दिया है.

गीत नलिनी जयवंत पर फिल्माया गया है. गौर करें गीत में
नलिनी की पलकें बहुत देर बाद झपकती हैं.




गीत के बोल:

चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे


इश्क़ तो होँठों पे फ़रियाद न लायेगा कभी
इश्क़ तो होँठों पे फ़रियाद न लायेगा कभी
देखने वाले मुहब्बत का जिगर देखेंगे

चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे


ज़िंदगी अपनी गुज़र जायेगी शाम-ए-ग़म में
ज़िंदगी अपनी गुज़र जायेगी शाम-ए-ग़म में
वो कोई और ही होंगे जो सहर देखेंगे

चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे

फूल महकेंगे चमन झूम के लहरायेगा
फूल महकेंगे चमन झूम के लहरायेगा
वो बहारों का समा हम न मगर देखेंगे

चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
जागते सोते तेरी राहगुज़र देखेंगे
चाँद निकलेगा जिधर हम न उधर देखेंगे
........................................................................
Chand niklega jidhar-Durgesh Nandini  1956

Artist-Nalini Jaywant

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Aug 26, 2011

कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर -दुर्गेश नंदिनी १९५६

जैसी कि हम चर्चा करते रहे हैं अब तक, हेमंत कुमार
ने बतौर संगीतकार भी बहुत कामयाबी हासिल की और
उनके संगीत निर्देशन से कई अविस्मरणीय और अमर
रचनाएँ हिंदी फिल्म संगीत जगत को मिलीं. अधिकतर
दूसरे संगीतकारों की भांति उन्होंने भी लता मंगेशकर के
लिए कुछ विशेष और अलौकिक सी धुनें बनाईं.

प्रस्तुत गीत भी ऐसा ही एक गीत है फिल्म ‘दुर्गेश नंदिनी’
से जो कि नाम से ही स्पष्ट है कि एक पौराणिक फिल्म है.
फिल्म में प्रदीप कुमार और बीना राय प्रमुख कलाकार हैं.
यह गीत एक स्वप्न की तरह सा फिल्माया गया है. गीत
लिखा है राजेंद्र कृष्ण ने. गीत का प्रभाव आज इस युग में
भी महसूस किया जा सकता है. इसकी एक झलक भी कोई
एक बार सुने तो पूरा सुने बिना नहीं रह सकता. गीत का
शुरूआती कोरस गान केवल फिल्म वाले वर्जन में ही उपलब्ध
है.



गीत के बोल:

आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर
सितारों से आगे ये कैसा जहाँ है

कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर
सितारों से आगे ये कैसा जहाँ है
ख्यालों की मंजिल ये ख्वाबों की महफ़िल
समझ में न आये ये दुनिया कहाँ है

कहाँ रह गए काफिले बादलों के
कहाँ रह गए काफिले बादलों के
ज़मीन छुप गयी है तले बादलों के
है मुझको यकीन के है जन्नत यहीं
अजब सी फिजां है अजब ये समां है
कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर
सितारों से आगे ये कैसा जहाँ है

नज़र की दुआ का जवाब आ रहा है
नज़र की दुआ का जवाब आ रहा है
मेरी आरजू पे शबाब आ रहा है
ये खामोशियाँ भी हैं एक दास्तान
कोई कहता है मुझसे मोहब्बत जवान है

कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर
सितारों से आगे ये कैसा जहाँ है

मोहब्बत भरी इस जहाँ की हैं राहें
मोहब्बत भरी इस जहाँ की हैं राहें
जिन्हें देख कर खो गयी है निगाहें
ये हलकी हवा लायी कैसा नशा
ना रहा होश इतना मेरा दिल कहाँ है

कहाँ ले चले हो बता दो मुसाफिर
सितारों से आगे ये कैसा जहाँ है
ख्यालों की मंजिल ये ख्वाबों की महफ़िल
समझ में न आये ये दुनिया कहाँ है
........................................
Kahan le chale ho-Durgesh Nandini 1956

Artists: Pradeep Kumar, Beena Rai

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