फूल की पत्ती सा तन इसका-मुस्कराहट १९९२
बनती हैं तो कुछ कलाकार अलग हट के होते हैं. ये ‘अलग
हट के’ के चक्कर में कई बार अलग हटना पड़ता है या फिर
समय अलग हटा देता है. कभी कभी जनता ऐसे ‘अलग हट
के’ बने मसलों को सर-आँखों पे लेती है मगर ऐसा कम होता
है.
आज आपको एक अलग हट के बनी फिल्म से अलग हट के
बना गीत सुनवाते हैं. नायिका काफी तंदुरुस्त है फिल्म की
और उसकी शान में उसकी तुलना फूल की पत्ती से की जा
रही है. जाहिर है कि उसकी सेहत की तुलना नहीं हो रही है
इधर. कोई ज़ीरो फिगर की नायिका होती तो उसपर ये लाइनें
सटीक बैठतीं.
उदित नारायण और अलका याग्निक गा रहे हैं सूरज सनीम के
लिखे गीत को जिसकी तर्ज़ बनायीं है विजय पाटिल ने जिनको
हम राम-लक्ष्मण के नाम से जानते हैं.
गीत के बोल:
लड़की बड़ी लडाकी है दारा सिंह की आंटी है
छः चक्कू को दिया भगा करेगी हम सब का भला
मैंने ऐसा तो नहीं किया
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
बरखा बन कर बरस गई
हे लड़की हर दिल लूट गई
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
बरखा बन कर बरस गई
हे लड़की हर दिल लूट गई
तुझ पर नज़र पड़ी काम गया उस दिन
जान भी जायेगी लगता है एक दिन
तुझ पर नज़र पड़ी काम गया उस दिन
जान भी जायेगी लगता है एक दिन
तू ई तो जीना एक तूफ़ान हो गया
तू आई तो मारना आसान हो गया
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
बरखा बन कर बरस गई
हां लड़की हर दिल लूट गई
फूल नहीं कांटे का है इसका बदन
सुई से भी तीखी है इसकी चुभन
फूल नहीं कांटे का है इसका बदन
सुई से भी तीखी है इसकी चुभन
धीरे धीरे दिल मेरा वीरान हो गया
घर से बेघर होने का सामान हो गया
हे फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
बरखा बन कर बरस गई
हां लड़की हर दिल लूट गई
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
फूल सी पत्ती सा तन इसका
शीशे से उजला है मन इसका
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Phool ki patti sa tan iska-Muskurahat 1992
Artists:Jay Mehta, Revti

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