नफ़रत करने वालों के सीने में-जॉनी मेरा नाम १९७०
देखने में भी रोचक है ये गीत. देव आनंद और राजेश खन्ना ने
अपने गीत अपनी अदाओं से कुछ विशेष बना दिए हैं. शम्मी के
गीत भी लुभावने लगते हैं. तीनों कलाकारों के गीतों में गर्दन हिलना
एक प्रमुख और आवश्यक तत्व है. गर्दन तो और कलाकारों की भी
हिलती थी मगर इसे कैसे, कब और कितना हिलाना है ये केवल
ऊपर वर्णित कलाकारों को बखूबी आता था.
गीत इन्दीवर ने लिखा है और निस्संदेह उनके लिखे बढ़िया रोमांटिक
नगमों में शुमार है. एक जगह मैंने पढ़ा था कि किशोर कुमार ने
लीना चंदावरकर के पिताजी को यही गीत सुना के रिझाया था और
उसके बाद शायद चौथी शादी का रास्ता आसान हो गया था किशोर
का.
गीत के बोल:
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
अरे मैं वो परवाना हूँ पत्थर को मोम कर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
फिर आप क्या हैं? हैं
आखिर तो फूल हैं फ़ौलाद नहीं हैं
अरे, बुलबुल हैं किसी बाग़ के, सैयाद नहीं हैं
बुलबुल के तड़पने से सैयाद पिघलता है
बुलबुल के तड़पने से सैयाद पिघलता है
आहों में असर हो तो फ़ौलाद पिघलता है
फ़ौलाद के भी दिल में उलफ़त की आग भर दूँ
अरे मैं वो परवाना हूँ पत्थर को मोम कर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
शर्म-ओ-हया का पर्दा दुश्वार नहीं है
अजी हलका सा इक परदा है दीवार नहीं है
आँचल की ये दीवार तो दीवार नहीं है
आँचल की ये दीवार तो दीवार नहीं है
फिर आप के भी दिल में इन्कार नहीं है
इन्कार जिन लबों में इक़रार उनमें भर दूँ
अरे मैं वो परवाना हूँ पत्थर को मोम कर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
हम वो हैं ज़िन्दगी में कभी साथ ना छोड़ेंगे
थामेंगे अगर हाथ तो फिर हाथ ना छोड़ेंगे
हम हाथ ना छोड़ेंगे तूफ़ां से किनारों तक
हम हाथ ना छोड़ेंगे तूफ़ां से किनारों तक
हम साथ ना छोड़ेंगे धरती से सितारों तक
चाहत के सितारों से धरती की माँग भर दूँ
अरे मैं वो परवाना हूँ पत्थर को सैंड कर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
अरे मैं वो परवाना हूँ पत्थर को मोम कर दूँ
नफ़रत करने वालों के सीने में प्यार भर दूँ
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Nafrat karne waalon ke seene mein-Johny mera naam 1970
Artists: Dev Anand, Hema Malini

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