तदबीर से बिगड़ी हुई-बाज़ी १९५१
पाता है. रिस्क उठाने से मतलब केवल किसी खाई या पहाड़ों
पर कूद फांद करने जैसी बातों से नहीं है वरन जो काम आम
आदमी किसी आशंका और अनजाने भय की वजह से उन्हें
करने से झिझकता है
गीत में सलाह मशविरे से केलकुलेटेड रिस्क उठाने की बात
की जा रही है. जब दिमाग काम ना करे तो किसी सयाने से
सलाह लो. मेरे ख्याल से जिस रिस्क का मशवरा किसी सयाने
की तरफ से आता है केलकुलेटेड की श्रेणी में आता है. सयाने
को तो अनुमान होता ही है कि जोखिम कितना है और उसका
परिणाम क्या होगा.
इस फलसफे पर सबसे बढ़िया गीत है फिल्म बाज़ी का जिसे
गीता दत्त ने गाया है. गीत साहिर का लिखा हुआ है जिसकी धुन
बनाई है एस डी बर्मन ने. देव आनंद और गीता बाली पर इसे
फिल्माया गया है.
गीत के बोल:
हे हे हे हे हे हे
हे हे हे हे हे हे
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले
तकदीर बना ले
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले
तकदीर बना ले
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
डरता है जमाने की निगाहों से भला क्यों
निगाहों से भला क्यों
डरता है जमाने की निगाहों से भला क्यों
निगाहों से भला क्यों
इन्साफ तेरे साथ है इल्ज़ाम उठा ले
इल्ज़ाम उठा ले
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो
जो अपने ही लिए हो
क्या ख़ाक वो जीना है जो अपने ही लिए हो
जो अपने ही लिए हो
खुद मिट के किसी और को मिटने से बचा ले
मिटने से बचा ले
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
हे टूटे हुए पतवार है कश्ती के तो हम क्या
हारी हुई बाहों को ही पतवार बना दे
पतवार बना दे
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले
तकदीर बना ले
अपने पे भरोसा है तो एक दाँव लगा ले
लगा ले दाँव लगा ले
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Tadbeer se bigdi hui taqdeer-Baazi 1951
Artists: Dev Anand, Geeta Bali
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